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Updated: 9 hours 58 min ago

शहद : स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए शहद

Wed, 02/21/2018 - 20:07

शहद या मधु एक प्राकृतिक मधुर पदार्थ है जो मधुमक्खियों द्वारा फूलों के रस को चूसकर तथा उसमें अतिरिक्त पदार्थों को मिलाने के बाद छत्ते के कोषों में एकत्र करने के फलस्वरूप बनता है। शहद हर किसी के जीवन में महत्व रखता है। फिर चाहे वह खानपान, चिकित्सा से संबंधित हो या फिर सौंदर्य से। इसमें प्रचुर मात्रा में गुण हैं। आज से हजारों वर्ष पहले से ही दुनिया के सभी चिकित्सा शास्त्रों, धर्मशास्त्रों, पदार्थवेत्ता-विद्वानों, वैधों-हकीमों ने शहद की उपयोगिता व महत्व को बताया है। आयुर्वेद के ऋषियों ने भी माना है कि तुलसी व मधुमय पंचामृत का सेवन करने से संक्रमण नहीं होता और इसका विधिवत ढंग से सेवन कर अनेक रोगों पर विजय पाई जा सकती है। इसे पंजाबी भाषा मे माख्यों भी कहा जाता है। शहद तो देवताओं का भी आहार माना जाता रहा है। कहते हैं कि महापराक्रमी दैत्य महिषासुर के साथ युद्ध करते समय जगन्माता चंडिका ने बार-बार शहद का पान करके दैत्य का वध किया था।

स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए शहद के इतने सारे लाभ होने के कारण हर सौंदर्य प्रसाधन कंपनी इसे अपने सौंदर्य प्रसाधनों में प्रयोग करती है। इसे त्वचा पर लगाकर त्वचा की कई समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है।

बड़े काम का है शहद

एंटीएजिंग गुण
शहद में एन्टीबैक्टीरियल और एन्टीमाइक्रोबियल तत्व पाये जाते हैं। ये स्किन से डेड सेल्स निकाल कर झुर्रियों को आने से रोकता है। शहद ह्युमेंक्टेंट यौगिक से भरपूर होता है जो त्वचा में नमी बरकरार रखते हैं ताकि त्वचा की कोमलता बनी रहे। अगर इसे रोज त्वचा पर लगाया जाए तो आपकी त्वचा चमकदार और कोमल हो जाती है।

बेहतर सनस्क्रीन
शहद एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है और अल्ट्रावायलेट किरणों से होने वाले नुकसान से बचाता हैं। शहद में ऐसी खूबी है कि यह त्वचा को सूर्य की तेज किरणों से बचाता है और त्वचा को ताजगी प्रदान करता है। यह त्वचा को देर तक धूप में रखने पर भी उसमें पानी की कमी नहीं होने देता और त्वचा को सूखेपन से बचाता है। इसका उपयोग सनस्क्रीन के तौर पर भी किया जाता है।

गहराई से करे सफाई
ये त्वचा के ऊपरी परत में गहराई तक जाके पोर्स को बंद करता है और स्किन में गंदगी को आने से रोकता है, इसलिए ये मुहांसों से लडऩे में भी असरदार होता है। शहद त्वचा के लिए एक अच्छा क्लींजर और माइश्चराइजर भी है जो स्किन को टोन करता है और उसे टाइट भी बनाता है।

घाव करे ठीक
शहद में ग्लूकोज, एमिनो एसिड और विटामिन पाए जाते हैं जिससे हमें कई पौष्टिक तत्व मिलते हैं जो सभी तरह के घावों को ठीक करने में सहायक होते हैं। क्योंकि ये एन्टीबैक्टीरियल होता है इसलिए ये घाव से तरल पदार्थ निकाल कर शीघ्र ही इसे हील करना भी शुरू कर देता है। अगर आपका हाथ कोई घरेलू काम करते समय जल गया है तो आप जली हुई जगह पर शहद लगा सकते हैं।

त्वचा रोगों में उपयोगी

इसका उपयोग दर्द को कम करने और तेजी से उपचार के लिए भी किया जाता है। यह एग्जिमा, त्वचा की सूजन और अन्य त्वचा विकारों को सही करने में भी इस्तेमाल किया जाता है। शहद में मौजूद एंटी फंगल गुण के कारण इसका उपयोग एथलीट फुट और खुजली जैसे संक्रमणों में भी किया जाता है। 

 

  1.  एक चुटकी मोती के पाउडर को शहद में मिलाकर चेहरे पर लगाएं। इस पाउडर से सूजन कम होगी और धब्बे भी फीके पडऩे लगेंगे।
  2.  जिन महिलाओं की त्वचा तैलीय होती है, उन्हें शहद और दूध का घोल नियमित अपने चेहरे पर लगाने की सलाह दी जाती है।
  3.  तरोताजा स्नान के लिए एक कप गर्म पानी में दो चम्मच शहद मिलाएं, फिर 2-3 बूंद लेवेंडर तेल की मिलाकर इसे नहाने के पानी में डालें और स्नान करें।
  4. मुहांसों पर रात में सोते समय दालचीनी चूर्ण और शहद मिलाकर लगाएं और सुबह धो लें, मुहांसे ठीक होंगे और दाग भी नहीं रहेंगे। शहद न सिर्फ सेहत बल्कि आपकी सूरत के लिए भी बेहद उपयोगी है। शहद के उपयोग से त्वचा की कई तरह से देखभाल की जा सकती है। इसे सीधे त्वचा पर लगाकर त्वचा की कई समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है
Source: http://www.grehlakshmi.com/grehlakshmi/%...

लाख दुखों की एक दवा : नीम

Wed, 02/21/2018 - 20:06

नीम में इतने गुण हैं कि ये कई तरह के रोगों के इलाज में काम आता है। यहाँ तक कि इसको भारत में ‘गांव का दवाखाना’ कहा जाता है। यह अपने औषधीय गुणों की वजह से आयुर्वेदिक मेडिसिन में पिछले चार हजार सालों से भी ज्यादा समय से इस्तेमाल हो रहा है। नीम को संस्कृत में ‘अरिष्ट’ भी कहा जाता है, जिसका मतलब होता है, ‘श्रेष्ठ, पूर्ण और कभी खराब न होने वाला।’

नीम के अर्क में मधुमेह यानी डायबिटिज, बैक्टिरिया और वायरस से लड़ने के गुण पाए जाते हैं। नीम के तने, जड़, छाल और कच्चे फलों में शक्ति-वर्धक और मियादी रोगों से लड़ने का गुण भी पाया जाता है। इसकी छाल खासतौर पर मलेरिया और त्वचा संबंधी रोगों में बहुत उपयोगी होती है।

नीम के पत्ते भारत से बाहर 34 देशों को निर्यात किए जाते हैं। इसके पत्तों में मौजूद बैक्टीरिया से लड़ने वाले गुण मुंहासे, छाले, खाज-खुजली, एक्जिमा वगैरह को दूर करने में मदद करते हैं। इसका अर्क मधुमेह, कैंसर, हृदयरोग, हर्पीस, एलर्जी, अल्सर, हिपेटाइटिस (पीलिया) वगैरह के इलाज में भी मदद करता है।

नीम के बारे में उपलब्ध प्राचीन ग्रंथों में इसके फल, बीज, तेल, पत्तों, जड़ और छिलके में बीमारियों से लड़ने के कई फायदेमंद गुण बताए गए हैं। प्राकृतिक चिकित्सा की भारतीय प्रणाली ‘आयुर्वेद’ के आधार-स्तंभ माने जाने वाले दो प्राचीन ग्रंथों ‘चरक संहिता’ और ‘सुश्रुत संहिता’ में इसके लाभकारी गुणों की चर्चा की गई है। इस पेड़ का हर भाग इतना लाभकारी है कि संस्कृत में इसको एक यथायोग्य नाम दिया गया है – “सर्व-रोग-निवारिणी” यानी ‘सभी बीमारियों की दवा।’ लाख दुखों की एक दवा!

  सद्‌गुरु: “इस धरती की तमाम वनस्पतियों में से नीम ही ऐसी वनस्पति है, जो सूर्य के प्रतिबिम्ब की तरह है।”

इस पृथ्वी पर जीवन सूर्य की शक्ति से ही चलता है…..सूर्य की ऊर्जा से जन्मे तमाम जीवों में नीम ने ही उस ऊर्जा को सबसे ज्यादा ग्रहण किया है। इसीलिए इसे रोग-निवारक समझा जाता है – किसी भी बीमारी के लिए नीम रामबाण दवा है। नीम के एक पत्ते में 150 से ज्यादा रासयानिक रूप या प्रबंध होते हैं। इस धरती पर मिलने वाले पत्तों में सबसे जटिल नीम का पत्ता ही है। नीम की केमिस्ट्री सूर्य से उसके लगाव का ही नतीजा है।

इस धरती पर मिलने वाले पत्तों में सबसे जटिल नीम का पत्ता ही है। नीम की केमिस्ट्री सूर्य से उसके लगाव का ही नतीजा है।

नीम के पत्तों में जबरदस्त औषधीय गुण तो है ही, साथ ही इसमें प्राणिक शक्ति भी बहुत अधिक है। अमेरिका में आजकल नीम को चमत्कारी वृक्ष कहा जाता है। दुर्भाग्य से भारत में अभी लोग इसकी ओर ध्यान नहीं दे हैं। अब वे नीम उगाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि नीम को अनगिनत तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आपको  मानसिक बिमारी है, तो भारत में उसको दूर करने के लिए नीम के पत्तों से झाड़ा जाता है। अगर आपको दांत का दर्द है, तो इसकी दातून का इस्तेमाल किया जाता है। अगर आपको कोई छूत की बीमारी है, तो नीम के पत्तों पर लिटाया जाता है, क्योंकि यह आपके सिस्टम को साफ कर के उसको ऊर्जा से भर देता है। अगर आपके घर के पास, खास तौर पर आपकी बेडरूम की खिड़की के करीब अगर कोई नीम का पेड़ है, तो इसका आपके ऊपर कई तरह से अच्छा प्रभाव पड़ता है।

 

बैक्टीरिया से लड़ता है नीम

दुनिया बैक्टीरिया से भरी पड़ी है। हमारा शरीर बैक्टीरिया से भरा हुआ है। एक सामान्य आकार के शरीर में लगभग दस खरब कोशिकाएँ होती हैं और सौ खरब से भी ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं। आप एक हैं, तो वे दस हैं। आपके भीतर इतने सारे जीव हैं कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते। इनमें से ज्यादातर बैक्टीरिया हमारे लिए फायदेमंद होते हैं। इनके बिना हम जिंदा नहीं रह सकते, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जो हमारे लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। अगर आप नीम का सेवन करते हैं, तो वह हानिकारक बैक्टीरिया को आपकी आंतों में ही नष्ट कर देता है।

आपके शरीर के भीतर जरूरत से ज्यादा बैक्टीरिया नहीं होने चाहिए। अगर हानिकारक बैक्टीरिया की तादाद ज्यादा हो गई तो आप बुझे-बुझे से रहेंगे, क्योंकि आपकी बहुत-सी ऊर्जा उनसे निपटने में नष्ट हो जाएगी। नीम का तरह-तरह से इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया के साथ निपटने में आपके शरीर की ऊर्जा खर्च नहीं होती।

आप नहाने से पहले अपने बदन पर नीम का लेप लगा कर कुछ वक्त तक सूखने दें, फिर उसको पानी से धो डालें। सिर्फ इतने से ही आपका बदन अच्छी तरह से साफ हो सकता है – आपके बदन पर के सारे बैक्टीरिया नष्ट हो जाएंगे। या फिर नीम के कुछ पत्तों को पानी में डाल कर रात भर छोड़ दें और फिर सुबह उस पानी से नहा लें ।

                        एलर्जी के लिए नीम

नीम के पत्तों को पीस कर पेस्ट बना लें, उसकी छोटी-सी गोली बना कर सुबह-सुबह खाली पेट शहद में डुबा कर निगल लें। उसके एक घंटे बाद तक कुछ भी न खाएं, जिससे नीम ठीक तरह से आपके सिस्टम से गुजर सके। यह हर प्रकार की एलर्जी – त्वचा की, किसी भोजन से होनेवाली, या किसी और तरह की – में फायदा करता है। आप सारी जिंदगी यह ले सकते हैं, इससे कोई नुकसान नहीं होगा। नीम के छोटे-छोटे कोमल पत्ते थोड़े कम कड़वे होते हैं, वैसे किसी भी तरह के ताजा, हरे पत्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

नीम के बहुत-से अविश्वसनीय लाभ हैं, उनमें से सबसे खास है – यह कैंसर-कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। बीमारियों के लिए नीम

नीम के बहुत-से अविश्वसनीय लाभ हैं, उनमें से सबसे खास है – यह कैंसर-कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। हर किसी के शरीर में कैंसर वाली कोशिकाएं होती हैं, लेकिन वे एक जगह नहीं होतीं, हर जगह बिखरी होती हैं। किसी वजह से अगर आपके शरीर में कुछ खास हालात बन जाते हैं, तो ये कोशिकाएं एकजुट हो जाती हैं। छोटे-मोटे जुर्म की तुलना में संगठित अपराध गंभीर समस्या है, है कि नहीं? हर कस्बे-शहर में हर कहीं छोटे-मोटे मुजरिम होते ही हैं। यहां-वहां वे जेब काटने जैसे छोटे-मोटे जुर्म करते हैं, यह कोई बड़ी समस्या नहीं है। लेकिन किसी शहर में अगर ऐसे पचास जेबकतरे एकजुट हो कर जुर्म करने लगें, तो अचानक उस शहर का पूरा माहौल ही बदल जाएगा। फिर हालत ये हो जाएगी कि आपका बाहर सड़क पर निकलना खतरे से खाली नहीं होगा। शरीर में बस ऐसा ही हो रहा है। कैंसर वाली कोशिकाएं शरीर में इधर-उधर घूम रही हैं। अगर वे अकेले ही मस्ती में घूम रही हैं, तो कोई दिक्कत नहीं। पर वे सब एक जगह इकट्ठा हो कर उधम मचाने लगें, तो समस्या खड़ी हो जाएगी। हमें बस इनको तोड़ना होगा और इससे पहले कि वे एकजुट हो सकें, यहां-वहां इनमें से कुछ को मारना होगा। अगर आप हर दिन नीम का सेवन करें तो ऐसा हो सकता है; इससे कैंसर वाली कोशिकाओं की तादाद एक सीमा के अंदर रहती है, ताकि वे हमारी प्रणाली पर हल्ला बोलने के लिए एकजुट न हो सकें। इसलिए नीम का सेवन बहुत लाभदायक है।

नीम में ऐसी भी क्षमता है कि अगर आपकी रक्त धमनियों(आर्टरी) में कहीं कुछ जमना शुरु हो गया हो तो ये उसको साफ कर सकती है। मधुमेह(डायबिटीज) के रोगियों के लिए भी हर दिन नीम की एक छोटी-सी गोली खाना बहुत फायदेमंद होता है। यह उनके अंदर इंसुलिन पैदा होने की क्रिया में तेजी लाता है।

साधना के लिए नीम

नीम आपके सिस्टम को साफ रखने के साथ उसको खोलने में भी खास तौर से लाभकारी होता है। इन सबसे बढ़ कर यह शरीर में गर्मी पैदा करता है। शरीर में इस तरह की गर्मी हमारे अंदर साधना के द्वारा तीव्र और प्रचंड ऊर्जापैदा करने में बहुत मदद करती है।

    Source: http://www.ishafoundation.org/blog/hi/je...

एप्पल और हरे टमाटर से रहेंगी मांसपेशियां मजबूत

Wed, 02/21/2018 - 20:06

न्यूयॉर्क। बढ़ती उम्र के साथ मांसपेशियों में कमजोरी और क्षरण के कारक प्रोटीन का पता लगाने के दौरान यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा के वैज्ञानिकों ने दो ऐसे प्राकृतिक यौगिकों का भी पता लगाया है जो बूढ़ी होती मांसपेशियों में इस प्रोटीन की सक्रियता को कम कर देते हैं, जिसके कारण मांसपेशियों के क्षरण और कमजोरी को कम किया जा सकता है। एटीएफ4 नामक यह प्रोटीन मांसपेशियों के जीन की अभिव्यक्ति में बदलाव लाता है, जिसके कारण मांसपेशियों के प्रोटीन संश्लेषण, ताकत और घनत्व में कमी आ जाती है।

शोध दल ने सेब में पाए जाने वाले अर्सोलिक एसिड और हरे टमाटरों में पाए जाने वाले टोमेटिडाइन की ऐसे सूक्ष्म अणुओं के रूप में पहचान की है जो भूख और असक्रियता के कारण मांसपेशियों को होने वाले नुकसान को रोक सकता है।

इंटरनल मेडिसिन के प्रध्यापक और अध्ययन के वरिष्ठ लेखक क्रिस्टोफर एडम्स ने कहा कि हम अर्सोलिक एसिड और टोमेटिडाइन को बढ़ती उम्र के दौरान होने वाली मांसपेशियों की कमजोरी और क्षरण के उपचार के तौर पर इस्तेमाल कर पाएंगे। खोज के परिणामों की मदद से उम्र के कारण मांसपेशियों की कमजोरी और क्षरण के लिए नए उपचार खोजने में सहायता मिलेगी। नवीनतम अध्ययन में चूहों पर किए गए इस प्रयोग से उनकी मांसपेशियों में कमजोरी और क्षरण में कमी पाई गई है।

वैज्ञानिकों ने जांच में पाया कि दोनों यौगिकों ने मांसपेशी के घनत्व को 10 फीसदी बढ़ा दिया। खास बात यह भी सामने आई कि इनसे मांसपेशियों की गुणवत्ता और ताकत में 30 फीसदी का इजाफा हुआ। यह अध्ययन 'जर्नल ऑफ बायोलोजिकल केमिस्ट्री' में प्रकाशित हुआ है।

Source: http://sanjeevnitoday.com/newsdetail/App...

अब ऑनलाइन अंगदान करना हुआ आसान

Wed, 02/21/2018 - 20:06

अंगदान और अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम को व्यवस्थित करने के लिए सफदरजंग अस्पताल में बनाए जा रहे राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) की वेबसाइट की अधिकारिक रूप से शुरुआत कर दी गई। लोग नोटो की वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन अंगदान के लिए पंजीकरण करा सकते हैं। इसके जरिए अंगदान करना आसान हो जाएगा। अंगदान को बढ़ावा देने के लिए सफदरजंग अस्पताल में राष्ट्रीय अंगदान दिवस मनाया गया। सम्मेलन में छत्तीसगढ़, हरियाणा, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, असम, महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित कई राज्यों के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पहुंचकर अंगदान और अंग प्रत्यारोपण पर चर्चा की। इसका मकसद देशभर के अस्पतालों के बीच नेटवर्किंग विकसित करना है। नोटो के अधीन पांच क्षेत्रीय केंद्र और छह राज्यस्तरीय केंद्र विकसित किए जाने हैं। यह सभी केंद्र नोटो से जोड़े जाएंगे। इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव बीपी शर्मा ने अंगदान को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता पर जोर दिया। नोटो की वेबसाइट शुरू करने के बाद स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. जगदीश प्रसाद ने कहा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) जैसे संगठन अंगदान के लिए लोगों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऑनलाइन जारी होगा डोनर कार्ड अंगदान के लिए किसी अस्पताल या शिविर में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यदि अंगदान करने की इच्छा हो तो नोटो की वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण के लिए फार्म भरा जा सकता है। ऐसा करने पर ऑनलाइन ही डोनर कार्ड जारी हो जाता है। अंगदान के लिए दो गवाहों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में गवाही के लिए ऑनलाइन फार्म डाउनलोड कर उसे भरने के बाद दो गवाहों का हस्ताक्षर कराकर डाक के जरिए नोटो कार्यालय भेजा जा सकता है। कॉल सेंटर भी शुरू नोटो में कॉल सेंटर ने काम करना शुरू कर दिया है। कॉल सेंटर में फोन कर अंगदान की प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं। इसके अलवा लोग कॉल सेंटर के जरिए दिल्ली में अंग प्रत्यारोपण करने वाले केंद्रों की जानकारी भी हासिल कर सकते हैं। रोटो और सोटो के विकास पर चर्चा राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम के प्रोग्राम अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि सम्मेलन में दूसरे राज्यों से आए अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (रोटो) और अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोटो) के विकास पर चर्चा की गई। ताकि उनका विकास हो सके।

विटामिन सी के सेवन से खत्म होगी मार्निंग वॉक

Wed, 02/21/2018 - 20:06

न्यूयॉर्क। शोधकर्ताओं ने अपने इस नए शोध को अमेरिका में जार्जिया के सेवन्नाह में एंडोथलीन पर आयोजित 14वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया है। अगर आप सुबह की सैर के लिए उठ नहीं पाते हैं तो चिंता की बात नहीं। शोधकर्ताओं ने आपकी इस परेशानी का हल ढूंढ लिया है। एक शोध में यह पाया गया है कि रोजाना विटामिन सी के सेवन से मोटापे से ग्रस्त लोगों को वही फायदा प्राप्त हो सकता है जो आपको रोजाना सुबह की सैर और व्यायाम से प्राप्त होता है।

अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त वयस्कों की रक्त वाहिकाओं में सूक्ष्म वाहिकाएं प्रोटीन को संकुचित कर देती हैं जिसे एंडोथलीन (ईटी)-1 कहा जाता है। ईटी-1 के अधिक सक्रिय होने से वाहिकाओं में रक्त प्रवाह कम हो जाता है, जिसके कारण नाड़ी संबंधी रोग होने का खतरा बढ़ता है। रोजाना व्यायाम के कारण ईटी-1 की गतिविधि कम होती है लेकिन दिनचर्या में व्यायाम को शामिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

अमेरिका की कोलोराडो यूनिवर्सिटी में किए गए शोध में विटामिन सी की खुराक की जांच की गई। जिससे पता चला कि यह वाहिकाओं की प्रक्रिया में सुधार करता है और ईटी-1 के स्तर को कम करता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि विटामिन सी की खुराक से उसी तरह से ईटी-1 के स्तर में कमी आती है जितनी रोजाना के व्यायाम से होती है। शोधकर्ताओं ने लिखा, विटामिन सी मोटापे से ग्रस्त लोगों में ईटी-1 की मात्रा को कम करने में एक प्रभावी जीवनशैली रणनीति के रूप में काम करता है।

Tags: हेल्‍दी टिप्‍सSource: http://sanjeevnitoday.com/newsdetail/Vit...

जामुन के गुण

Wed, 02/21/2018 - 14:00

1)  जामुन की गुठली चिकित्सा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी मानी गई है। इसकी गुठली के अंदर की गिरी में 'जंबोलीन' नामक ग्लूकोसाइट पाया जाता है। यह स्टार्च को शर्करा में परिवर्तित होने से रोकता है। इसी से मधुमेह के नियंत्रण में सहायता मिलती है। 

२)जामुन के कच्चे फलों का सिरका बनाकर पीने से पेट के रोग ठीक होते हैं। अगर भूख कम लगती हो और कब्ज की शिकायत रहती हो तो इस सिरके को ताजे पानी के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर सुबह और रात्रि, सोते वक्त एक हफ्ते तक नियमित रूप से सेवन करने से कब्ज दूर होती है और भूख बढ़ती है।

३) इन दिनों कुछ देशों में जामुन के रस से विशेष औषधियों का निर्माण किया जा रहा है, जिनके माध्यम से सिर के सफेद बाल आना बंद हो जाएँगे। 

४) गले के रोगों में जामुन की छाल को बारीक पीसकर सत बना लें। इस सत को पानी में घोलकर 'माउथ वॉश' की तरह गरारा करना चाहिए। इससे गला तो साफ होगा ही, साँस की दुर्गंध भी बंद हो जाएगी और मसूढ़ों की बीमारी भी दूर हो जाएगी। 

५) विषैले जंतुओं के काटने पर जामुन की पत्तियों का रस पिलाना चाहिए। काटे गए स्थान पर इसकी ताजी पत्तियों का पुल्टिस बाँधने से घाव स्वच्छ होकर ठीक होने लगता है क्योंकि, जामुन के चिकने पत्तों में नमी सोखने की अद्भुत क्षमता होती है। 

६) जामुन यकृत को शक्ति प्रदान करता है और मूत्राशय में आई असामान्यता को सामान्य बनाने में सहायक होता है। 

७) जामुन का रस, शहद, आँवले या गुलाब के फूल का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक-दो माह तक प्रतिदिन सुबह के वक्त सेवन करने से रक्त की कमी एवं शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। यौन तथा स्मरण शक्ति भी बढ़ जाती है। 

८) जामुन के एक किलोग्राम ताजे फलों का रस निकालकर ढाई किलोग्राम चीनी मिलाकर शरबत जैसी चाशनी बना लें। इसे एक ढक्कनदार साफ बोतल में भरकर रख लें। जब कभी उल्टी-दस्त या हैजा जैसी बीमारी की शिकायत हो, तब दो चम्मच शरबत और एक चम्मच अमृतधारा मिलाकर पिलाने से तुरंत राहत मिल जाती है। 

९) जामुन और आम का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से मधुमेह के रोगियों को लाभ होता है। 

१०) गठिया के उपचार में भी जामुन बहुत उपयोगी है। इसकी छाल को खूब उबालकर बचे हुए घोल का लेप घुटनों पर लगाने से गठिया में आराम मिलता है।

        जामुन स्वाद में खट्टा-मीठा होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें उत्तम किस्म का शीघ्र अवशोषित होकर रक्त निर्माण में भाग लेने वाला तांबा पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह त्वचा का रंग बनाने वाली रंजक द्रव्य मेलानिन कोशिका को सक्रिय करता है, अतः यह रक्तहीनता तथा ल्यूकोडर्मा की उत्तम औषधि है। इतना ध्यान रहे कि अधिक मात्रा में जामुन खाने से शरीर में जकड़न एवं बुखार होने की सम्भावना भी रहती है। इसे कभी खाली पेट नहीं खाना चाहिए और न ही इसके खाने के बाद दूध पीना चाहिए।

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चमकती त्वचा चाहिए तो लीजिये सेहतमंद आहार

Wed, 02/21/2018 - 10:43

शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम करें, इसके लिए उन्हें भरपूर पोषण की जरूरत होती है। खूबसूरत त्वचा को भी पर्याप्त आहार चाहिए। आपकी त्वचा की क्या-क्या जरूरतें हैं, बता रही हैं पूनम महाजन

सेहतमंद रहने के लिए जैसे हमें अच्छे खानपान और पोषण की जरूरत होती है, ठीक वैसे ही त्वचा को भी खूबसूरत बने रहने के लिए भरपूर पोषण की जरूरत होती है।

मैक्स हॉस्पिटल में डाइटीशियन व न्यूट्रिशनिस्ट 
डॉ़  रीतिका समंदर बताती हैं कि त्वचा को खूबसूरत बनाए रखने के लिए जितने आपके ड्रेसिंग टेबल पर कॉस्मेटिक प्रोडक्ट की जरूरत है, उससे कहीं ज्यादा जरूरी है स्वस्थ व पोषण युक्त डाइट की। सदाबहार खूबसूरती का एक ही मूलमंत्र है, अच्छी डाइट व सकारात्मक सोच। आजकल की भागदौड़ भरी जीवनशैली में अक्सर हम अन्य जरूरी कामों की तरह खाने का भी शॉर्ट-कट ढूंढ़ते रहते हैं और शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों जैसे कि विटामिन, प्रोटीन व पोषण युक्त डाइट की तरफ ध्यान ही नहीं देते।

एक सामान्य धारणा है कि महीने में एक या दो बार पार्लर में अच्छा फेशियल व अन्य उपचार करवाने से त्वचा जवां रहेगी। पर सच्चाई यह है कि आप तभी खूबसूरत दिख सकती हैं, जब आपकी त्वचा में निखार व चमक होगी। त्वचा में निखार व दमक तभी आएगी, जब त्वचा को जरूरी पोषक तत्व प्राप्त होंगे। खास बात यह है कि त्वचा के लिए जरूरी भोजन किसी क्रीम से नहीं बल्कि फल, सब्जियों व डेयरी प्रोडक्ट से मिलते हैं।

सलाद देंगे एंटी ऑक्सिडेंट्स
महिलाओं को सलाद जरूर खाना चाहिए। हरे सलाद में विटामिन ई व कैरोटिन आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा को तंदुरुस्त बनाने के लिए बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट्स हैं। सलाद में खासतौर पर टमाटर जरूर होना चाहिए। टमाटर में मौजूद लाइकोपीन व करॉटिनाइड में सूर्य की पराबैगनी किरणों से होने वाले नुकसान से लड़ने की शक्ति होती है। टमाटर के अलावा गाजर में भी करॉटिनाइड की भरपूर मात्रा होती है। इसलिए सलाद में गाजर व टमाटर शामिल करने से त्वचा पर प्रदूषण व सनबर्न का कोई असर नहीं होता।

दाल से होगी कोशिकाओं की मरम्मत 
दालों में सभी प्रकार के प्रोटीन होते हैं। प्रोटीन में क्षतिग्रस्त हो चुकी कोशिकाओं को भी दुरुस्त करने की क्षमता होती है। इसलिए दिन में एक बार दाल अवश्य खाएं। दालें न सिर्फ त्वचा, बल्कि हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं।

मछली बचाएगी अल्ट्रावायलेट किरणों से
अगर आप मांसाहारी खाना खाती हैं तो अपनी त्वचा की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए अपनी डाइट में मछली को शामिल करना न भूलें। मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो त्वचा को अल्ट्रावायलेट किरणों के दुष्प्रभाव से बचाता है और त्वचा को तंदुरुस्त बनाता है।

अंडा देगा त्वचा को चमक
अंडा विटामिन का सबसे अच्छा स्रेत है। साथ ही इसमें बायोटीन भी होता है, जो त्वचा की नमी व चमक को बनाए रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण विटामिन है। अगर आप खूबसूरत त्वचा चाहती हैं तो अंडे जरूर खाएं। उबले अंडे सबसे अधिक फायदेमंद होते हैं।

मेवों से त्वचा बनेगी जवां
प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मेवा जरूर खाएं। मेवों में भरपूर मात्रा में विटामिन, वसा व अन्य आवश्यक पोषक तत्व होते हैं। मेवा खाने से त्वचा युवा व कांतिमय बनी रहती है।

दूध-दही से आएगा निखार
खूबसूरत त्वचा चाहती हैं तो नियमित रूप से दूध-दही का सेवन करें। दूध में त्वचा के लिए आवश्यक सभी विटामिन और प्रोटीन होते हैं, वहीं दही में विटामिन ए भरपूर मात्रा में होता है, जो त्वचा में कॉलेजन के स्तर को बढमता है। दूध-दही के नियमित सेवन से त्वचा हमेशा निखरी रहती है।

फलों से मिलेगा कॉलेजन
फलों में विटामिन सी सबसे अधिक मात्रा में होता है। खासकर, जो फल स्वाद में खट्टे होते हैं, जैसे आम, अनार, स्ट्रॉबेरी, संतरा, पपीता मौसमी, अनन्नास, अमरूद व अन्य फल, उनमें विटामिन सी की भरपूर मात्रा होती है। इन फलों को खाने से त्वचा के लिए आवश्यक विटामिन सी की पूर्ति होती है। विटामिन सी से त्वचा को कॉलेजन मिलता है। कॉलेजन से ही त्वचा तंदुरुस्त रहती है, इसलिए अगर आप फल खाती रहती हैं तो त्वचा को कॉलेजन मिलता रहता है। कॉलेजन त्वचा की खराब कोशिकाओं का फिर से निर्माण करके त्वचा के रूखेपन को दूर करता है और उसकी चमक बनाए रखता है। फल खाने से त्वचा में भीतर से निखार आता है। विटामिन सी झुर्रियों को रोकने में भी काफी फायदेमंद साबित होता है। इसलिए मौसम के अनुसार आने वाले सभी फलों का सेवन करें। इनसे न सिर्फ शरीर को पोषण मिलेगा, बल्कि त्वचा भी नष्ट होने से बचेगी और त्वचा की खूबसूरती भी बरकरार रहेगी।

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लंच करने के बाद ना करें ये गलतियां

Wed, 02/21/2018 - 10:43

क्या आप एक भारी लंच करने के बाद तुरंत टहलने के लिये निकल जाते हैं? हो सकता है आप ना जाते हों लेकिन आप जैसे बहुत से लोग ऐसा रोज करते हैं। यह एक बहुत ही हानिकारक आदत है जिसे तुरंत रोक देनी चाहिये। एक्सपर्ट के मुताबिक हमारा पाचन तंत्र इतना मजबूत है कि आप लंच में चाहे जो कुछ भी उल्टा सीधा क्यूं ना खा लें, वह सब कुछ हजम कर लेगा।

हमारा पेट खाने को अच्छी तरह से हजम कर के सारे जरुरी पोषण हमें एनर्जी के तौर पर देता है। पर उसी समय हमारे पेट का सिस्टम थोड़ा संवेदनशील भी है और वह उस वक्त ठीक से कार्य नहीं कर पाता जब आप उसे तकलीफ देते हैं। इसलिये दुपहर में लंच करने के बाद 15-20 मिनट तक आराम करना जरुरी बताया गया है। 

आइये जानते हैं कि लंच के बाद कई लोग क्या क्या गलतियां करते हैं , जिससे उनके हाजमें पर बुरा असर पड़ता है।

दांतों को ब्रश करना - लंच करने के बाद ब्रश बिल्कुल नहीं करना चाहिये। अगर आपने कोई सिट्रस वाला आहार खाया है तो दांतों को ब्रश करने से दांतों की परत तुरंत उतर जाएगी, जिसे हम इनेमल कहते हैं।

बहुत ज्यादा पानी पीना - अगर आप खाना खाने के बाद बहुत ज्यादा पानी पीते हैं तो इससे आपका पाचन तंत्र प्रभावित होता है। इससे पेट की कई बीमारियां भी हो सकती हैं।

धूम्रपान करना - लंच करने के बाद शरीर का ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है। पर जब उसके बाद आप धूम्रपान करते हैं उसका धूंआ आराम से आपके शरीर में घुस कर फेफड़ों और किडनियों को नुकसान पहुंचाता है।

वॉक पर जाना - लंच करने के सीधे बाद वॉक पर जाने से खाने का पोषण शरीर में अच्छी तहर से नहीं समा पाता।

ड्राइविंग - खाने को पचाने के लिये बहुत सारे खून की आवश्यकता पड़ती है, जिसमें दिमाग सहायता करता है। पर अगर आप खाने के बाद ड्राइविंग करने पर अपना पूरा ध्यान लगा देगें तो आपके भोजन को पचाने के लिये दिमाग वो काम नहीं कर पाएगा।

सोना - खाने के बाद सोने से कई पाचन संबन्?धित बीमारियां हो सकती हैं। इससे आपको गैस की भी समस्या हो सकती है।

Source: http://sanjeevnitoday.com/detail/10-04-2...

इडली को क्‍यूं माना जाता है वर्ल्‍ड का बेस्‍ट ब्रेकफास्‍ट

Wed, 02/21/2018 - 10:43

साउथ इंडिया का सबसे पॉपुलर ब्रेकफास्‍ट अगर किसी को माना जाता है तो वह है इडली। इडली, सांभर और नारियल की चटनी ना केवल खाने में ही टेस्‍टी होते हैं बल्‍कि नाश्ते के लिए संतुलित पोषण से भी भरी हुई है।

क्‍या आप जानते हैं कि इडली को विश्‍व का बेस्‍ट ब्रेकफास्‍ट माना गया है क्‍योंकि इसमें ढेर सारा प्रोटीन, विटामिन और मिनरल होता है। इडली को उड़द की दाल और उसने चावल से तैयार किया जाता है जो कि अन्‍य चावल के मुकाबले ज्‍यादा अच्‍छा होता है। इसी के साथ उड़द दाल में भी उच्‍च मात्रा में फाइबर, 26% प्रोटीन, विटामिन B1/B2/B6 और कुछ मात्रा में मिनरल्‍स होते हैं।

इडली का घोल तैयार करते वक्‍त बिना छिलके वाली दाल ही प्रयोग करनी चाहिये। इसके अलावा इडली के घोल को खमीर उठा कर बनाया जाता है जिससे कि इसमें विटामिन की मात्रा और अधिक बढ़ जाती है।

इडली का दक्षिण भारतीय खानपान में लंबा इतिहास है। अगर इडली के साथ परोसे जाने वाली नारियल की चटनी की बात करें तो उसमें भारी मात्रा में फाइबर और प्रोटीन होता है।

साथ ही इसमें हरी मिर्च भी पड़ती है जिसमें विटामिन सी, प्रोटीन और मिनरल होते हैं। फिर उपर से कडी पत्‍ते की गार्निशिंग की जाती है जिसमें विटामिन ए की भी कमी पूरी हो जाती है।

अब चलिये बात करते हैं सांभर की, जिसमें ढेर सारी दालों और सब्‍जियों का मिश्रण होता है, जिससे इसको खा कर शरीर को अच्‍छी खासी मात्रा में प्रोटीन मिलता है। तो फिर इतनी सारी जानकारी के बाद क्‍या अब आप इडली को अपनी प्‍लेट में शामिल नहीं करना चाहेंगे?

Source: hindi.boldsky.com

 

 

बाल झड़ने की समस्या से बचने के लिए कुछ टिप्स

Wed, 02/21/2018 - 10:43

बालों का झड़ना और गंजापन आजकल एक आम समस्या है। पहले 40-45 साल की उम्र के बाद ही बालों के झड़ने की समस्या सामने आती थी, लेकिन अब कम उम्र में ही बाल झड़ने लगते हैं।
बालों को पकड़े हुए आदमी
 
बाल झड़ने की एक बड़ी वजह अनियमित जीवनशैली और प्रदूषण है। हालांकि कई बार इसके पीछे अनुवांशिक कारण भी होते हैं। लेकिन समय रहते अगर बालों की सही देखभाल की जाए तो काफी हद तक गंजेपन की समस्या से बचा जा सकता है। अगर आपके बाल बहुत तेजी से झड़ रहे हैं तो आप निम्न कुछ टिप्स आजमा कर देख सकते हैं।
 
 
गंजेपन के कारण
लम्बे रोग जैसे- टायफाइड, जुकाम, साइनस तथा खून की कमी आदि।
बालों के प्रति लापरवाह
तनाव
कब्ज रहना, नींद न आने के कारण
हार्मोंस बदलने के कारण
 
 
गंजेपन की समस्या को दूर करने के टिप्स
 
1. अपने भोजन में सब्जियां, सलाद, मौसमी फल, अंकुरित अन्न का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए। जंक फूड के बजाय घर का पौष्टिक भोजन करें। पानी भरपूर मात्रा में पिएं।
 
2. बालों को जब भी शैंपू करें, उंगलियों के पोरों से हल्के-हल्के मसाज करें। ऐसा करने से आपके सिर का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगा।
 
3. एंटी डैंड्रफ शैंपू का ज्यादा प्रयोग न करें, क्योंकि इससे सिर की नेचुरल नमी खत्म हो जाती है।
 
4. गंदे बालों पर जैल या कोई हेयर स्प्रे न करें। इससे बालों को नुकसान हो सकता है। अगर बाल कमजोर हैं तो उन्हें स्ट्रेट, कर्ली नहीं करवाना चाहिए। उन पर जैल या हेयर कलर भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इन उत्पादों में रसायन मिले होते हैं। ये बालों को धीरे-धीरे खराब कर देते हैं।
 
5. हर समय कैप न पहनें। इससे पसीना, कीटाणु और गंदगी सिर के किनारों पर जम जाती है। बालों की जड़ों को नुकसान होता है और बाल गिरने शुरू हो जाते हैं।
 
6. गीले बालों में कंघा न करें, दिन में तीन-चार बार कंघा करें। ऐसा करने से बालों में जमीं तेल की चिपचिपाहट दूर होंगी और नए बाल उगने में मदद मिलेगी।
 
7. सिर पर तेल से मसाज करें। आप सरसों और जैतून के तेल को बराबर मात्रा में मिला कर बालों में हल्के-हल्के उंगलियों के पोरों से मसाज करें। मसाज करने के बाद तौलिये को गर्म पानी में भिगोएं फिर उसे निचोड़कर सिर को भाप दें। इससे सिर की त्वचा के रोमछिद्र खुल जाते है और तेल बालों की जड़ों के अंदर तक समा जाता है। इससे आपके बाल मजबूत होंगे।
 
8. आपको लगे कि गंजेपन की शुरुआत होने लगी है तो बालों को छोटा करवा लें।
 
 
इसके अलावा बालों के लिए कुछ घरेलू उबटन भी बना कर लगा सकते है। 
1 अंडे की जर्दी को बालों में लगाएं और आधे घंटे बाद शैंपू से बालों को धो लें। ऐसा सप्ताह में एक बार करें, आपके बाल मजबूत होंगे।
अपने सिर को दही से धोएं और थोड़ी देर बाद बथुए के पानी से दोबारा सिर धोएं। ऐसा करने से गंजेपन की समस्या दूर होगी।
रात में मेथी के बीजों को पानी में भिगो दें और सुबह इन्ह पीसकर लेप बनाकर बालों पर लगा लें। ऐसा कुछ दिनों में नए बाल उगने लगेंगे।
 

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गर्मियों में हृदय को दे सुरक्षा

Tue, 02/20/2018 - 12:43

र्मी के मौसम  मे बुुजुर्ग और अस्वस्थ व्यक्ति  और खासतौर से हृदय रोग से पीडि़त व्यक्ति को  खास ध्यान देने की जरूरत होती है। वे जिन्हें पहले से ही हृदय की समस्या है उन्हें ब्लड प्रेशर और हृदय गति को नियंत्रित रखने के लिए कुछ प्रकार की दवाओं का प्रयोग करना चाहिए। अत्यधिक गर्मी और उमस शरीर के संतुलन को बिगाडऩे का काम करती है। 

खासतौर पर लो ब्लड प्रेशर और हार्ट फेलियर वालों के लिए पानी की कमी और पसीने के कारण इलेक्ट्रोलेट असंतुलन के कारण ब्लड प्रेशर को मेंटेन रखना कठिन होता है साथ ही जो डाइयुरेटिक्स (मूत्र बनाने वाली दवा) लेते हैं उन्हें डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) और सॉल्ट डिप्लेशन (नमक की कमी) हो जाता है। हमारा शरीर 98.40 फा. (370से)  तक के सामान्य बॉडी टेम्प्रेचर कोबनाए  रखने के  लिये  सेट होता है जिससे यह अत्यधिक गर्मी में हार्ड वर्क (कूलिंग इफेक्ट) कर सकता है। जैसा कि हम सभी गर्मियों में सन स्ट्रोक या हीट स्ट्रोक के प्रभाव के बारे में जानते हैं,  लेकिन कुछ मामलों में इसके सामान्य लक्षणों में गर्मी से थकान, (हीट एग्जर्शन), सिर दर्द, बेचैनी, चिढ़चिड़ापन और प्यास का बढऩा नजर  आता है।

    दिल शरीर का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जो असंतुलन को ठीक करने के लिए कड़ी मेहनत करता है। जैसे-जैसे टेम्प्रेचर बढ़ता है शरीर वासोडिलेटेशन (त्वचा के ब्लड वेसेल्स को ठंडक पहुंचाने वाला) के द्वारा गर्मी को नष्ट करता है जिसकी वजह से पसीना त्वचा के तापमान को ठंडा करता है लेकिन इस वासोडिलेटेशन का असर ब्लड प्रेशर पर पड़ता है जिससे ब्लड प्रेशर को बनाए रखने के लिए हृदय के पम्प करने की गति (हार्ट रेट) बढ़ जाती है। ऐसे रोगी जो हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त हैं उन्हें ब्लड प्रेशर कम करने और हार्ट रेट को नियंत्रित रखने की दवाएं दी जाती हैं। इसलिए इस तरह के परिवर्तन कभी-कभी मुश्किल से दिखते हैं।

   इसके लिए सामान्य तौर पर बीटा ब्लॉकस, कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, एसीई इनहैबिटर्स आदि दवाएं हैं।
समस्त गंभीर बीमारियों से संबंधित हार्ट स्ट्रोक तब होता है जब टेम्प्रेचर 1050 फा. से ऊपर चला जाता है यह प्राणघातक भी होता है। नीचे दी गई परिस्थिति में फिजिशियन को दिखाना जरूरी है--शरीर का तापमान अत्यधिक (1030फा.) बढ़ जाना, गर्म और रुखी त्वचा (बिना पसीने के),धमक के साथ सिरदर्द,चक्कर आना व भ्रम/बेचैनी।

       इस तरह की परिस्थिति में तरल चीजें पर्याप्त नहीं होती, सबसे पहले बॉडी टेम्प्रेचर को ठंडा इलेक्ट्रोलेट के असंतुलन को ठीक करना जरूरी होता है। इससे भी ज्यादा प्रत्येक हृदय रोगी को बदलते मौसम के दौरान अपने दवा को रिएडजेस्ट कराने के लिए नियमित रूप से डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

 गर्मियों में हृदय को स्वस्थ रखने के लिए खास उपाय-

      दोपहर में 2 से 3 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें, क्योंकि इस दौरान गर्मी चरम पर होती है।
बुजुर्ग अपने दोस्तों, रिश्तेदारों या किसी जानकार के साथ अपना नियमित व्यायाम जरूर करें, जिससे किसी इमरर्जेंसी में वे आपकी सहायता कर सकें।

      व्यायाम के दौरान कई बार ब्रेक लें या फिर किसी शेड या ठंडी जगह पर सुस्ता लें।

व्यायाम के दौरान अच्छी तरह के  हवादार जूते और मोजे पहनें जिससे पसीना कम निकलेगा।

     अगर आप हेल्दी भोजन करेंगे तो गर्मी का सामना भी आसानी से कर सकेंगे और आपका हृदय भी स्वस्थ रहेगा। बॉडी टेम्प्रेचर, भूख और प्यास  को संतुलित रखने में मस्तिष्क का एक भाग हाइपोथैल्मस मदद करता है। इसलिए हीट स्ट्रोक से बचे रहने के लिए सबसे जरूरी है हाइपोथैल्मस जो एंड्रोसाइन का हिस्सा होता है उसकी कार्य प्रणाली ठीक प्रकार से होती रहे। पत्तेदार हरी सब्जियां, ऑलिव आईल , बादाम और काजू आदि फैटी एसिड्स और मिनरल से भरपूर खाद्य पदार्थ लें, ये खतरनाक गर्मी से बचने में सहायता करेंगे।
तरबूज, नाशपाती और पाईनेपल  पानी से भरपूर होते हैं। इन्हें खाने से  खेलते वक्त, व्यायाम करते वक्त या गर्मियों के प्रतिदिन के काम करते वक्त डिहाइड्रेशन से बच सकते हैं।

    ब्रॉथ, सूप और नट मिल्क के साथ अनाज आदि लेने से शरीर की नमी बनी रहती है। इस तरह के खाद्य पदार्थ आपके जलीयांश  के स्तर को बढ़ाते हैं जिससे आपके शरीर को पोषण मिलता है और हाइड्रेट भी रहता है। 

    कॉफी से बचने का प्रयास करें क्योंकि यह मूत्र वर्धक का काम करता है, जिससे आपको बार-बार पेशाब  की आवश्यकता हो सकती है जिससे शरीर का मूल्यवान पानी निकल जाता है।
अगर आप इन सावधानियों का अनुसरण करें तो हीट स्ट्रोक से बच सकते हैं। 

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डाइट में छुपा है राज वजन घटानें का

Tue, 02/20/2018 - 12:42

कामकाजी हो या गृहिणी, घर-बार के अलावा उन्हें खुद को संभालने का वक्त बहुत कम मिल पाता है। कम वक्त और सही जानकारी के अभाव में, सैकड़ों बार कोशिश करने के बावजूद हमारा वजन कभी कम नहीं हो पाता। लेकिन इस बार होगा, कैसे? आइए जानते हैं वजन कम करने के सही तरीके, बता रही हैं रुचि गुप्ता

आमतौर पर हम लोग अपने वजन को लेकर कुछ ज्यादा ही परेशान रहते हैं और साल में दो-चार बार अपने वजन को कम करने की कोशिश भी करते हैं, खासतौर पर महिलाएं। लेकिन हमारी यह कोशिश अकसर नाकामयाब रहती है। वजह, सिर्फ एक। मेहनत तो बहुत की, खाना भी कुछ खास नहीं खाया, पर... पर इन दोनों के बीच तालमेल सही नहीं बिठाया। अगर आपको वजन सच में कम करना है तो एक्सरसाइज और खानपान के बीच सही तालमेल के साथ ही अपने शब्दकोश से न, नहीं कर सकती, नहीं होगा, जैसे शब्दों को भी मिटा देना होगा। हर सुबह उठिए और खुद से कहिए कि मैं अपना वजन कम कर सकती हूं। मैं आज 30 मिनट सैर कर सकती हूं। आइए जानें ऐसी बातें, जिन्हें अपनाकर आप सेहतमंद रहेंगी और वजन भी कंट्रोल में रहेगा:

डाइट में छुपा है राज
अकसर महिलाओं को जैसे ही वजन बढ़ने का कमेंट मिलता है, उनका सबसे पहला हथियार होता है, भोजन। सबसे पहले वे अपने खाने पर रोक लगाने लगती हैं, वह भी बिना किसी प्रोफेशनल सलाह के। न्यूट्रीशनिस्ट एवं न्यूट्रीहेल्थ की संस्थापक डॉं. शिखा शर्मा का कहना है, ‘हमें वजन घटाने के लिए कभी क्रैश डाइट या खाने की मात्रा को कम नहीं करना चाहिए। आपको जितना वजन घटाना है उसे ध्यान में रखते हुए अपने भोजन को सही मात्रा में लेना चाहिए। हमारा पेट खुद ही हमारे भोजन की मात्रा के लिए संकेत देता है। वैसे भी कहा जाता है कि सुबह का नाश्ता राजा की तरह, दोपहर का भोजन राजकुमार की तरह और रात का भोजन भिखारी की तरह करना चाहिए।’

कब करें भोजन
माना जाता है कि एक सेहतमंद महिला को हर रोज 1800 से 2000 कैलोरी की जरूरत होती है। इस कैलोरी सेवन को अगर आप सही प्रकार से बांट लें तो, इन्हें खर्च करने में आपको अधिक श्रम भी नहीं करना पड़ेगा। वजन घटाने को ध्यान में रखते हुए अगर आप हर दो घंटे में कम मात्रा में भोजन करें, तो इससे आपको खाना पचाने में मुश्किल भी नहीं होगी। आप दिन की शुरुआत नाश्ते से कर सकती हैं। उसके दो घंटे के बाद फिलर के तौर पर दोपहर के खाने से पहले फल खा सकती हैं। दोपहर के भोजन के बाद शाम को चाय के समय पर आप प्रोटीन स्नैक का सेवन करें। फिर रात को सोने से लगभग तीन घंटे पहले भोजन करें। ध्यान रहे, यह भोजन काफी हल्का हो।

व्यायाम से हल होगी समस्या
खाने में हम भले कितनी भी कटौती कर लें, लेकिन अगर हमने उसके साथ शारीरिक व्यायाम पर ध्यान नहीं दिया तो वजन घटाना एक मुश्किल चुनौती साबित हो सकती है। विशेषज्ञों की मानें तो हमें सप्ताह में कम से कम 6 दिन और दिन में कम से कम 1 से 1-1/2 घंटे तो व्यायाम करना ही चाहिए। जरूरी नहीं है कि आप एक साथ समय निकालें। आप चाहें तो कुछ समय सुबह तो बाकी शाम को भी एक्सरसाइज कर सकती हैं। अपने लिए ऐसा एक्सरसाइज चुनें, जिसे आप आसानी से और लंबे समय तक कर सकें। कुछ दिन एक्सरसाइज करना और उसके बाद एक्सरसाइज करने की इच्छाशक्ति का खत्म हो जाना आम बात है। अगर वजन घटाना है तो ऐसी गलती करने से बचें और अपने एक्ससाइज के वक्त को भी रोचक बनाने की कोशिश करें।

व्यायाम आप चाहें घर पर करें या किसी प्रोफेशनल की देख-रेख में जिम में, उसकी शुरुआत वॉर्म-अप सेशन से ही होती है। आमतौर पर वॉर्म-अप सेशन में हम हल्के-फुल्के बॉडी स्ट्रेच और जंप के साथ शुरुआत करते हैं। साथ ही सैर भी एक अच्छा वॉर्म-अप एक्सरसाइज है।

दिल का ख्याल रखेगा कार्डियो 
दिल्ली के गोल्ड जिम, पूसा रोड के महा प्रबंधक और मास्टर ट्रेनर अभिषेक चटर्जी का कहना है, ‘आपको एक सप्ताह में 6 दिन और हर रोज कम से कम 20 मिनट कार्डियो सेशन जरूर करना चाहिए। दिल तंदरुस्त रहेगा तो शरीर भी तंदरुस्त रहेगा। कार्डियो सेशन की शुरुआत ट्रेडमिल, साइकलिंग, स्ट्रेर्प्स और क्रॉस ट्रेनर से कर सकती हैं। आम तौर पर कार्डियो सेशन को वेट ट्रेनिंग के पहले और बाद में दो भागों में बांट के किया जाता है।’

वेट ट्रेनिंग से घटाएं वजन
अभिषेक का कहना है, ‘वजन घटाने के लिए वेट ट्रेनिंग के दौरान किए गए स्ट्रेचिंग, लेग प्रेस, डेड लिफ्ट, लेग एक्सटेंशन और पुश-अप जैसे एक्सरसाइज और पावर योगा बेहद कारगर हैं। जहां पाइलेट्स एक्सरसाइज में योगा मैट या जिम बॉल पर लेट कर अपने पेट, जांघों और टांगों की मांसपेशियों की कसरत की जाती है, वहीं वेट ट्रेनिंग के बाद स्ट्रेचिंग खुली मांसपेशियों को सुंदर और सुडौल बनाने में मददगार साबित होती है। इसी के साथ आपको कम्पाउंड एक्सरसाइज, जिसमें एक से अधिक जोडमें पर ध्यान दिया जाता है, करनी चाहिए। इसके अलावा आप पावर योगा के सेशन भी ले सकती हैं। एक बार में 20 मिनट तक आप वेट ट्रेनिंग कर सकती हैं। आप एक्सरसाइज के अपने पूरे टाइम को तीन-तीन के दो सेटों में बांट सकती हैं। ताकि किसी एक एक्सरसाइज से आपको बोरियत भी न होने लगे। इस दौरान आप बीच में दो-दो मिनट का ब्रेक भी लें।

क्या खाएं, क्या न खाएं
जो महिलाएं अपना वजन घटाना चाहती हैं, उनके लिए यह जानना जरूरी है कि उन्हें खाने में वसायुक्त भोजन कम करना चाहिए और फाइबरयुक्त भोजन अधिक खाना चाहिए। डॉं. शर्मा बताती हैं, ‘आप अपने भोजन में आम चावल की जगह ब्राउन राइस का इस्तेमाल करें, जिनमें फाइबर बहुत है। ठीक ऐसे ही आप सामान्य ब्रेड की जगह ब्राउन ब्रेड और अपने गेहूं के आटे को मल्टीग्रेन आटे से बदल दें। जहां तक मीठे की बात है तो उसके लिए जितना भी कृत्रिम मीठा या चीनी है, उसे आप प्राकृतिक मीठे से बदलें। यानी आप नीबू पानी में चीनी की जगह शहद और चाय में गुडम् का इस्तेमाल करें। इससे आपके शरीर की मीठे की आवश्यकता भी पूरी होगी और कैलोरीज में कटौती भी होगी।’

चलते-चलते
हर दो घंटे पर आप पांच मिनट की सैर करें। ध्यान रहे आप ब्रिस्क वॉक या तेज कदमों से चलें।
सैर को बनाए रखने के लिए आप लिफ्ट या एस्कलेटर की जगह सीढियों का इस्तेमाल करें। अपनी कार या स्कूटर को पार्किंग में थोड़ा दूर लगाएं ताकि आप अधिक से अधिक कदम चल सकें।
हर रोज आधे घंटे की सैर की जगह 45 मिनट की सैर करें। रोज आधे घंटे की सैर से जहां बढ़ते वजन पर नियंत्रण लगेगा, वहीं 45 मिनट की वॉक से आप रोज 300 कैलोरी तक अधिक खर्च कर पाएंगी। तो जाहिर है, कम कैलोरी यानी शरीर में कम वसा।
प्रसंस्कृत या ऐसे प्रोसेस्ड फूड का सेवन न करें, जिसमें शुगर, फ्रूक्टोस या कॉर्न सिरप का इस्तेमाल हो। सूखे मेवे खाएं, जिनसे आपको कैलोरीज के साथ-साथ  प्राकृतिक तेल और फाइबर भी मिले।
शाम को पांच बजे से पहले कैफीनयुक्त उत्पादों का सेवन कर लें ताकि रात को नींद में कोई बाधा न आए।
फेसबुक और ट्विटर पर रिश्तेदारों से मिलने की बजाए सप्ताह में एक बार दोस्त-रिश्तेदारों से मिलें। इसके लिए आप किसी पार्क में मिलने का कार्यक्रम रखें, जहां आप फास्ट फूड या तले और मसालेदार भोजन से भी दूर रहेंगी।
बाहर के खाने की जगह घर पर बने और पोषक तत्वों से भरपूर खाने को तरजीह दें। 
दोपहर तक अधिक कैलोरी वाला भोजन खाएं, उसके बाद कम से कम कैलोरीज लें, ताकि आप रात तक अपनी कैलोरीज का इस्तेमाल भी कर पाएं और वह शरीर में वसा का रूप न ले पाए।

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मेंटल स्ट्रैस से फ्री होने के पांच लेटेस्ट तरीके

Tue, 02/20/2018 - 12:42

अधिकांश लोगों में धर्म के अलावा लाइफ को लेकर भी कई गलत धारणाएं बनी रहती है। जरूरत से ज्यादा एबिशियस होना, हर पल बढ़ता कॉम्पिटिशन, एक्ट्रा वर्क लोड और पर्सनल रिलेशनशिप के प्रॉब्लंस ये सभी कारण है जिसकी वजह से आजकल मेंटल स्ट्रैस का लेवल बहुत बढ गया है।

यही सब कारण जन्म देते हैं मेंटल स्ट्रैस को। मेंटल स्ट्रैस दूर करने के लिए सबसे पहले अपने अंदर पॉजीटिविटी लाने की आवश्यकता है। आने वाले स्ट्रैस की चींता को छोड़ कर प्रेजेंट में जीना चाहिए।

साइकोलोजिस्ट की माने तो लाइफ मे किसी चीज की कमी के कारण मनुष्य मेंटल स्ट्रैस उत्पन्न हो सकता है। मनुष्य को चिंता कम, चिंतन अधिक करना चाहिए। रोज सुबह फैश एनवारयमेंट में योग व प्राणायाम करने से मेंटल स्ट्रैस से परी तरह से छुटकारा पाया जा सकता है।

वैसे तो मेंटल स्ट्रैस से फ्री होने का सबसे अच्छा उपाय है प्राणायाम। लेकिन कुछ घरेलू नस्खों की सहायता से भी आप मेंटल स्ट्रैस से छुटकारा पा सकते हैं। आज हम आपसे मेंटल स्ट्रैस दूर करने के कुछ आसान टिप्स शेयर कर रहे हैं, जिनकी मदद से आप रहेंगे हमेशा मेंटल स्ट्रैस फ्री।

1-दालचीनी को पानी के साथ पीसकर माथे पर लेप करने से सिरदर्द और मेंटल स्ट्रैस दूर होता है।
2-एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल डाल कर सोते समय पीने से मेंटल स्ट्रैस दूर होता है।
3-प्रतिदिन चुकंदर का रस पीने और सलाद खाने से मेटल वीकनैस दूर होती है और स्मरण शक्ति बढ़ती है।
4-लगभग 250 ग्राम गाजर का रस प्रतिदिन पीने से मेंटल स्ट्रैस दूर होता है।
5- प्रतिदिन आंवले का मुरब्बा खाने से मेंटल स्ट्रैस या उदासी दूर हो जाती है। 

 

ब्‍लड ग्रुप के अनुसार कैसा होना चाहिये आपका आहार

Tue, 02/20/2018 - 12:42

इस ब्लड ग्रुप वाले लोगों का इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा तंत्र) बहुत संवेदनशील होता है तथा उन्हें अपने प्रतिरक्षा तंत्र की अच्छी देखभाल करनी चाहिए। इस ब्लड समूह के लोगों में मांस को पचाने की क्षमता भी कम होती है। अत: उन्हें चिकन, मटन या मछली का सेवन कम करना चाहिए। उन्हें गाजर, आडू, हरी पत्तेदार सब्जियां, अंजीर, नाशपाती, लहसुन, ब्रोकोली और एवोकेडो का सेवन अवश्य करना चाहिए।

ए ब्लड ग्रुप वाले ना खाएं ये चीज़ें

ए ब्लड ग्रुप वाले लोगों को सभी प्रकार के दुग्ध उत्पाद, सफ़ेद चांवल और अण्डों का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके स्थान पर वे दही, बकरी के दूध से बने चीज़ या सोया मिल्क का सेवन कर सकते हैं बी ब्लड ग्रुप

 

आपको अनानास, केले, अंगूर और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन अधिक करना चाहिए। फिश (मछली) तथा मटन का सेवन अधिक मात्रा में करें। ।बी। ब्लड समूह के लोगों को चिकन के बजाय टर्की खाना चाहिए। बी ब्लड ग्रुप के लिए अंडे और दूध हैं अच्‍छे

बी ब्लड ग्रुप के लिए दुग्ध उत्पाद और अण्डों का सेवन करना सुरक्षित है, क्योंकि वे इसे आसानी से पचा सकते हैं तथा ये चीज़ें उनके शरीर में फैट के रूप में जमा नहीं होती।

ए बी ब्लड ग्रुप

यह बहुत कम लोगों में पाया जाने वाला ब्लड ग्रुप है क्योंकि लगभग 5% लोगों का ही ब्लड ग्रुप ।ए बी। होता है। दुर्भाग्य से ये लोग जो भी मांसाहारी पदार्थ खाते हैं वह इनके शरीर में फैट के रूप में जमा हो जाता है क्योंकि इनके पेट में एसिड की मात्रा कम होती है। अत: ।ए बी। ब्लड ग्रुप वाले लोगों को फल तथा सब्जियां अधिक मात्रा में खाने चाहिए। इस ब्लड ग्रुप वाले लोगों के लिए अंडे भी लाभदायक होते हैं ए बी ब्लड ग्रुप वाले क्‍या खाएं और क्‍या नहीं

 

ए बी ब्लड ग्रुप वाले लोगों को सभी प्रकार के मांसाहार का कम सेवन करना चाहिए विशेषकर मटन का क्योंकि उनके शरीर में यह सब फैट के रूप में जमा हो जाता है। हालाँकि उनका शरीर दुग्ध उत्पादों को अच्छी तरह पचा सकता है अत: वे चीज़, बटर तथा अन्य दुग्ध उत्पाद खा सकते हैं।

ओ ब्लड ग्रुप

इन ब्लड समूह के लोगों को उच्च प्रोटीन युक्त आहार लेना चाहिए। इसमें दाल, मटन, चिकन आदि शामिल हैं। इन्हें फल, सब्जियों और समुद्री खाद्य पदार्थों की आवश्यकता भी होती है।

 

हम सभी का एक निश्चित ब्लड ग्रुप होता है और ऐसा देखा गया है कि हमारे स्वास्थ्य की स्थिति और हमारे ब्लड ग्रुप में एक संबंध होता है।

ऐसा भी देखा गया है कि हमारे ब्लड ग्रुप के अनुसार ही हमारी विशिष्ट प्रकृति भी होती है। अब यदि स्वास्थ्य की बात करें तो एक अध्ययन से पता चला है कि ब्लड ग्रुप के अनुसार कुछ विशिष्ट बीमारियों का खतरा अधिक होता है।

उदाहरण के लिए 'ओ' ब्लड ग्रुप वाले लोगों को पेट का अल्सर होने का खतरा अधिक होता है परन्तु हृदय से संबंधित बीमारियों का खतरा कम होता है। उसी प्रकार 'ए' ब्लड ग्रुप वाले लोगों को बैक्टीरिया, वायरस या फंगस से होने वाले संक्रमणों का खतरा अधिक होता है।

'ए' ब्लड ग्रुप वाली महिलाओं में बांझपन की समस्या का खतरा अधिक होता है। 'ए बी' और ।बी। ब्लड ग्रुप वाले लोगों को अग्नाशय का कैंसर (पैन्क्रीऐटिक कैंसर) होने का खतरा अधिक होता है।

हालाँकि यदि आप अपने ब्लड ग्रुप के अनुसार उत्तम आहार लेकर उचित सावधानी बरतें तो कुछ बीमारियों के खतरे को टाला जा सकता है। अपने ब्लड ग्रुप के अनुसार कौन से खाद्य पदार्थ खाएं इसे जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
 

Source: hindi.boldsky.com

मेथी खाओ कैंसर दूर भगाओ!

Mon, 02/19/2018 - 23:19

कानपुर। आयुर्वेद में मेथी के कई गुणों का बखान किया गया है। मधुमेह में इसका प्रयोग बेहद लाभकारी है लेकिन एक शोध में मेथी त्वचा के कैंसर का इलाज करने में कारगर साबित हुई है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) कानपुर, दि आइआइएस यूनीवर्सिटी जयपुर एवं यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान के वैज्ञानिकों ने मिलकर मेथी पर शोध किया। इसकी सफलता का परिणाम अंतर्राष्ट्रीय जर्नल टॉक्सीकोलॉजी इंटरनेशनल में प्रकाशित हो चुका है।

शोध के अनुसार सामान्य तौर पर प्रतिरक्षा तंत्र कैंसर कोशिकाओं के खतरे को नहीं पहचानता इस कारण उनकी अनदेखी कर देता है लेकिन मेथी के अर्क का सेवन करने से प्रतिरक्षा तंत्र पहले से अधिक सक्रिय हो जाता है और कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने लगता है।

वैज्ञानिकों के दल के प्रमुख एवं सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. अशोक कुमार बताते हैं कि मेथी खाने से कैंसर से बचाव होता है। कैंसर के इलाज में सबसे बड़ी चुनौती प्रतिरक्षा तंत्र को इस प्रकार सक्रिय करना है कि वह शरीर के बाकी हिस्सों को बिना कोई नुकसान पहुंचाए कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करे। त्वचा कैंसर में मेथी का प्रयोग चूहों पर सफल रहा है।

ऐसे हुआ प्रयोग : सीएसजेएमयू के कुलपति बताते हैं कि मेथी का चूहों पर प्रयोग वर्ष 2010 में शुरू हुआ था जो कई परीक्षणों के उपरांत 2012 में पूरा हुआ। दिसंबर में अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में शोध के नतीजे प्रकाशित हुए हैं। प्रयोग के दौरान चूहों के दो समूह तैयार किए, एक समूह में केमिकल से त्वचा कैंसर विकसित किया गया तो दूसरे समूह के चूहों को सात दिन तक मेथी पाउडर से तैयार किया गया 800 मिलीग्राम अर्क दिया गया।

जो सामान्य चूहे थे उनमें चार से पांच सप्ताह के भीतर त्वचा का कैंसर हो गया था मगर जिन्होंने मेथी का अर्क पिया था उनमें नौ से दस सप्ताह गुजर जाने के बाद भी त्वचा कैंसर नहीं विकसित हुआ। 16 सप्ताह तक परीक्षण जारी रहा। कुलपति बताते हैं कि मेथी का प्रयोग अगले चरण में पेट, फेफड़े एवं आहार नाल के कैंसर पर किया जाएगा।

चूहों पर प्रयोग करने के बाद इसका प्रयोग मानव पर किया जाएगा फिर मानव के लिए मेथी की सही मात्रा भी घोषित की जाएगी कि कितनी मेथी किस प्रकार खाई जाए कि कैंसर से बचाव हो सके। उनका कहना है कि मेथी वैसे भी बहुत फायदेमंद है। इस शोध के बाद इसका जल्द ही पेटेंट कराने की भी कवायद शुरू है।

साभार: ओपी बाजपेयी, दैनिक जागरण

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कैसे तेजी से घटाएं अपना वज़न ?

Mon, 02/19/2018 - 23:19

● Weight Lose या Reduce करना एक ऐसा topic है जिसपे जितने मुंह उतनी बातें सुनने को मिलती हैं. लोग एक से एक tips या diet-plan बताते हैं, जिसके हिसाब से Weight Reduce करना मानो बच्चों का खेल हो. पर हकीकत तो आप जानते ही हैं कि ये असल में कितना challenging काम है. इसीलिए मैं आज आपके साथ How to reduce weight, Hindi में share कर रहा हूँ. मेरी कोशिश होगी की यह लेख Hindi में इस विषय पर लिखे गए सबसे अच्छे लेखों में से एक हो.
● Weight बढ़ने का विज्ञान बड़ा सीदा-साधा है. यदि आप खाने-पीने के रूप में जितनी Calories ले रहे हैं उतनी burn नहीं करेंगे तो आपका weight बढ़ना तय है. दरअसल बची हुई Calorie ही हमारे शरीर में fat के रूप में इकठ्ठा हो जाती है और हमारा वज़न बढ़ जाता है.
● वज़न कम करने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले आपको ये जानना चाहिए कि आपका present weight सही है या नहीं. इसके लिए आप कृपया इस लेख को पढ़ें कैसे जानें आपका वज़न सही है या नहीं ? यहाँ से आप अपना Body Mass Index जान पायेंगे. BMI एक बहुत ही simple tool है जो आपके वज़न और लम्बाई के हिसाब से आपकी body में कितना fat है बताता है. आपका BMI ये बताता है कि आप किस weight category में आते हैं:
18.5 से कम – Underweight
18.5 से 25 – Normal Weight
25 से 29.9 – Overweight
30 से ज्यादा – Obese (अत्यधिक वज़नी)
अब यदि आप Overweight या Obese हैं तो ही आपको अपना वज़न कम करने की ज़रुरत है. और यदि आपको इसकी ज़रुरत है तो आपको ये भी जाना चाहिए कि जिस इस्थिति में आप पहुंचे हैं उसकी वज़ह क्या है. वैसे आम-तौर पर वज़न बढ़ने के दो कारण होते हैं:
● खान-पान :- 
Weight बढ़ने का सबसे प्रमुख कारण होता है हमारा खान-पान. यदि हमारे खाने में कैलोरी की मात्र अधिक होगी तो वज़न बढ़ने के chances ज्यादा हो जाते हैं. अधिक तला-भुना , fast-food, देशी घी, cold-drink आदि पीने से शरीर में ज़रुरत से ज्यादा calories इकठ्ठा हो जाती हैं जिसे हम बिना extra effort के burn नहीं कर पाते और नतीजा हमारे बढे हुए वज़न के रूप में दिखाई देता है. यदि आप इस बात की जानकारी रखें कि आपके शरीर को हर दिन कितने कैलोरी की आवश्यकता है और उतना ही consume करें तो आपका weight नहीं बढेगा.
● Inactive होना :- 
अगर आपकी दिनचर्या ऐसी है कि आपको ज्यादा हाथ-पाँव नहीं हिलाने पड़ते तो आपका weight बढ़ना लगभग तय है. ख़ास तौर पर जो लोग घर में ही रहते हैं या दिन भर कुर्सी पर बैठ कर ही काम करते हैं उन्हें जान-बूझ कर अपनी daily-life में कुछ physical activity involve करनी चाहिए. जैसे कि आप lift की जगह सीढ़ियों का प्रयोग करें, अपने interest का कोई खेल खेलें , जैसे कि badminton, table-tennis, इत्यादि. यदि आप एक treadmill या एक gym cycle afford कर सकें और उसे नियमित रूप से प्रयोग करें तो काफी लाभदायक होगा. वैसे सबसे सस्ता और सरल उपाय है कि आप रोज़ कुछ देर टहलने की आदत डाल लें.
पर इसके अलावा भी कई कारणों से आपका वज़न बढ़ सकता है .अन्य कारणों को आप यहाँ देख सकते हैं: वज़न बढ़ने के 10 प्रमुख कारण
अब जब आप weight बढ़ने का कारण जान गए हैं तो इसे lose या reduce करना आपकी इच्छाशक्ति और जानकारी पर निर्भर करता है. यहाँ मैं Weight Lose करने की ऐसी ही कुछ TIPS HINDI में share कर रहा हूँ.उम्मीद है ये जानकारी आपके काम आएगी.
TIPS TO LOSE WEIGHT IN HINDI
1) सब्र रखें :- 
याद रखिये की आज जो आपका weight है वो कोई दो -दिन या दो महीने की देन नहीं है . ये तो बहुत समय से चली आ रही आपकी life-style का नतीजा है. और यदि आपको weight loss करना है तो निश्चित रूप से आपको सब्र रखना होगा. बेंजामिन फ्रैंकलिन का ये कथन -” जिसके पास धैर्य है वह जो चाहे वो पा सकता है.” हमेशा मुझे प्रेरित करता है. तो आप भी तैयार रहिये कि इस काम में वक़्त लगेगा. हो सकता है शुरू के एक-दो हफ्ते आपको अपने वज़न में कोई अंतर ना नज़र आये पर येही वो वक़्त है जहाँ आपको मजबूत बने रहना है, धैर्य रखना है, हिम्मत रखना है.
2) अपने efforts में यकीन रखिये :- 
किसी भी और चीज से ज्यादा ज़रूरी है कि आप weight loss के लिए जो efforts कर रहे हैं उसमे आपका यकीन होना. यदि आप एक तरफ daily gym जा रहे हैं और दूसरी तरफ दोस्तों से ये कहते फिर रहे हैं कि जिम-विम जाने का कोई फायदा नहीं है तो आपका subconscious mind भी इसी बात को मानेगा, और सच-मुच आपको अपने एफ्फोर्ट्स का कोई रिजल्ट नहीं मिलेगा. खुद से positive-talk करना बहुत ज़रूरी है. आप खुद से कहिये कि, ” मैं फिट हो रहा हूँ”, ” मुझे results मिल रहे हैं” , आदि.
3) Visualize करिए :- 
आप जैसा दिखना चाहते हैं वैसे ही खुद के बारे में सोचिये. यकीन जानिये ये आपको weight lose करने में मदद करेगा.आप चाहें तो आप अपने कमरे की दीवार, या कंप्यूटर स्क्रीन पर कुछ वैसी ही फोटो लगा सकते हैं जैसा कि आप दिखना चाहते हैं. रोज़ खुद को वैसा देखना उस चीज को और भी संभव बनाएगा.
4) नाश्ते के बाद , पानी को अपना main drink बनाएं :- 
नाश्ते के वक़्त orange juice, चाय , दूध इत्यादि ज़रूर लें लेकिन उसके बाद पुरे दिन पानी को ही पीने के लिए इस्तेमाल करें. कोल्ड-ड्रिंक को तो छुए भी नहीं और चाय-कॉफ़ी पर भी पूरा control रखें .इस तरह आप हर रोज़ करीब 200-250 Calories कम consume करेंगे.
5) Pedometer का प्रयोग करें :- 
ये एक ऐसी device है जो आप के हर कदम को count करता है. इसे अपने बेल्ट में लगा लें और कोशिश करें की हर रोज़ 1000 Steps extra चला जाये. जिनका weight अधिक होता है वो आम तौर पर दिन भर में बस दो से तीन हज़ार कदम ही चलते हैं. यदि आप इसमें 2000 कदम और जोड़ दें तो आपका current weight बना रहेगा और उससे ज्यादा चलने पर वज़न कम होगा.एक standard pedometer की कीमत 1000 से 1500 रुपये तक होती है.
6) अपने साथ एक छोटी सी diary रखें :- 
आप जो कुछ भी खाएं उसे इसमें लिखें. Research में पाया गया है कि जो लोग ऐसा करते हैं वो औरों से 15% कम calories consume करते हैं.
7) जानें आप कितनी calories लेते हैं, और उसमे 10% add कर दें :- 
यदि आपको लगता है कि आप हर रोज़ 1800 कैलोरी लेते हैं और फिर भी आपका वज़न control नहीं हो रहा है तो शायद आप अपनी calorie intake का गलत अनुमान लगा रहे हैं. आम तौर पर यदि आप अपने अनुमान में 10% और जोड़ दें तो आपका अनुमान ज्यादा accurate हो जायेगा. For Example: 1800 की जगह 1800 + 180 = 1980 Calorie.
8) तीन time खाने की बजाये 5-6 बार थोडा-थोडा खाएं :- 
South Africa में हुई एक research में ये पाया गया की यदि व्यक्ति सुबह, दोपहर, शाम खाने की बजाये दिन भर में 5-6 बार थोड़ा-थोड़ा खाए तो वो 30% कम कैलोरी consume करता है. और यदि वह उतनी ही कैलोरी ले रहा है जितना की वो तीन बार खाने में लेता है तो भी ऐसा करने से body कम insulin release करती है , जो की आपके blood sugar को सही रखता है और आपको भूख भी कम लगती है.
9) रोज़ 45 मिनट टहलिए :- 
रोज़ 30 मिनट टहलना आपका weight बढ़ने नहीं देगा लेकिन यदि आप अपना weight घटाना चाहते हैं तो कम से कम 45 मिनट रोज़ टहलना चाहिए. अगर आप रोज़ ऐसा कर लेते हैं तो बिना अपना खान – पान बदले भी आप साल भर में 15Kg वज़न कम कर सकते हैं. और यदि आप ये काम सुबह सुबह ताज़ी हवा में करें तो बात ही कुछ और है. पर इसके लिए आपको डालनी होगी सुबह जल्दी उठने की आदत .
10) नीले रंग का अधिक प्रयोग करें :- 
नीला रंग भूख को कम करता है. यही वजह है कि अधिकतर restaurants इस रंग का प्रयोग कम करते हैं. तो आप खाने में blue plates use करें , नीले कपडे पहने, और टेबल पर नीला tablecloth डालें.इसके opposite red,yellow, और orange color खाते वक़्त avoid करें, ये भूख बढाते हैं.
11) अपने पुराने कपड़ों को दान कर दें :- 
एक बार जब आप सही weight पा चुके हैं तो अपने पुराने कपडे, जो अब आपको loose होंगे, उन्हें किसी को दान कर दें. ऐसा करने से दो फायदे होंगे. एक तो आपको कुछ दान कर के ख़ुशी होगी और दूसरा आपके दिमाग में एक बात रहेगी कि यदि आप फिर से मोटे हुए तो वापस इतने कपडे खरीदने होंगे. ये बात आपको अपना weight सही रखने के लिए encourage करेगी.
12) खाने के लिए छोटी plate का प्रयोग करें :-अद्ध्यनो से पता चला है कि चाहे आपको जितनी भी भूख लगी हो; यदि आपके सामने कम खाना होगा तो आप कम खायेंगे, और यदि ज्यादा खाना रखा है तो आप ज्यादा खायेंगे. तो अच्छा होगा कि आप थोड़ी छोटी थाली उसे करें जिसमे कम खाना आये. इसी तरह चाय -कॉफ़ी के लिए भी छोटे cups प्रयोग करें.बार बार खाना लेना आपका calorie intake बढाता है इसलिए आपको जितना खाना है उसी हिसाब से एक ही बार में उतना खाना ले लें.
13) जहां खाना खाते हों वहाँ सामने एक शीशा लगा लें :- 
एक study में ये पाया गया कि शीशे के सामने बैठ कर खाने वाले लोग कम खाते हैं. शायद खुद को out of shape देखकर उन्हें ये याद दिलाता हो कि weight कम करना उनके लिए बेहद ज़रूरी है.
14) Water-rich food खाएं :- Pennsylvania State University की एक research में पाया गया है कि water-rich food , जैसे कि टमाटर,लौकी, खीरा, आदि खाने से आपका overall calorie consumption कम होता है.इसलिए इनका अधिक से अधिक प्रयोग करें.
15) Low-fat milk का प्रयोग करें :-
चाय , कॉफ़ी बनाने में, या सिर्फ दूध पीने के लिए भी skim milk use करें, जिसमे calcium ज्यादा होता है और calories कम.
16.90% खाना घर पर ही खाएं: अधिक से अधिक घर पर ही खाना खाएं, और यदि आप बाहर भी घर का बना खाना ले जा सकते हों तो ले जायें. बाहर के खाने में ज्यादातर high-fat और high-calorie होती हैं.इनसे बचें.
17) धीरे-धीरे खाएं :- 
धीरे खाने से आपका ब्रेन पेट भर जाने का सिग्नल पहले ही दे देगा और आप कम खायेंगे.
18) तभी खायें जब सचमुच भूख लगी हो :- 
कई बार हम बस यूँहीं खाने लगते हैं. कई लोग आदत, boredom, या nervousness की वज़ह से भी खाने लगते हैं. अगली बार तभी खाएं जब आपको वाकई में भूख सहन ना हो. यदि आप कोई specific चीज खाने के लिए खोज रहे हैं तो ये भूख नही बस स्वाद बदलने की बात है, जब सच में भूख लगेगी तो आपको जो कुछ भी खाने को मिलेगा आप खाना पसंद करेंगे.
19) जूस पीने की बजाये फल खाएं :- 
जूस पीने की बजाये फल खाएं, उससे आपको वही लाभ होंगे, और जूस की अपेक्षा फल आपकी भूख को भी कम करेगा, जिससे overall आप कम खायेंगे.
20) ज्यादा से ज्यादा चलें :- 
आप जितना ज्यादा चलेंगे आपकी calories उतना ही अधिक burn होंगी. लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना, आस-पास पैदल जाना आपके लिए मददगार साबित होगा. घर में भी आप दिन भर में एक-दो बार अपनी छत का चक्कर लगाने की कोशिश करें. छोटे-छोटे efforts बड़ा result देंगे.
21) हफ्ते में एक दिन कोई भारी काम करें :- 
हर हफ्ते कोई एक भारी काम या activity करें. जैसे की आप अपनी bike या car धोने का सोच सकते हैं, बच्चों के साथ कहीं घूमने जाने का plan कर सकते हैं, या अपने spouse की हेल्प करने के लिए घर की सफाई कर सकते हैं.
22) ज्यादातर कैलोरीज़ दोपहर से पहले कंस्यूम कर लें :-
Studies से पता चला है कि जितना अधिक आप दिन के वक़्त खा लेंगे रात में आप उतना ही कम खायेंगे.और दिन में जो calories आपने consume की है उसके रात तक burn हो जाने के chances अधिक हैं .
23) डांस करें :- 
जब कभी आपको वक़्त मिले तो बढ़िया music लगा कर dance करें. ऐसा करने से आपका मनोरंजन भी होगा और अच्छी-खासी calories भी burn हो जाएँगी. यदि आप इसको routine में ला पाएं तो बात ही क्या है.
24) नींबू और शहद का प्रयोग करें :- 
रोज सुबह हल्के गुनगुने पानी के साथ नीबू और शहद का सेवन करें.ऐसा करने से आपका वज़न कम होगा. यह उपाय हमारे पाठक Mr. V D Sharma जी ने अपने अनुभव के मुताबिक बताया है. ऐसा करके उन्होंने अपना वज़न १० किलो तक कम किया है.उम्मीद है यह आपके लिए भी कारगर होगा.
25) दोपहर में खाने से पहले 3 ग्लास पानी पीयें :-
ऐसा करने से आपको भूख कुछ कम लगेगी, और यदि आप अपना वज़न कम करना चाहते हैं तो भूख से थोडा कम खाना आपके लिए लाभदायक रहेगा.
याद रखिये कि weight reduce करने के लिए आपको सब्र रखना होगा. छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर आप इस काम को तेजी से कर पायेंगे. और इस दौरान आप जो कर रहे हैं उस पर यकीन करना बहुत ज़रूरी है.
 

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बुढ़ापा दूर रखने वाला संजीवनी पेय

Mon, 02/19/2018 - 23:19

शरीरशास्त्री वैज्ञानिकों का मानना है कि जब तक शरीर के कोषाणुओं (Cells) का पुनर्निर्माण ठीक-ठाक होता रहेगा, तब तक बुढ़ापा दूर रहेगा और शरीर युवा बना रहेगा। जब इस प्रक्रिय में विघ्न पड़ता है और कोषाणुओं के पुनर्निर्माण की गति मंद होने लगती है, तब शरीर बूढ़ा होने लगता है।

इस वैज्ञानिक विश्लेषण से एक निष्कर्ष यह निकला कि यदि विटामिन ई, विटामिन सी और कोलीन ये तीन तत्व पर्याप्त मात्रा में प्रतिदिन शरीर को आहार के माध्यम से मिलते रहें तो शरीर के कोषाणुओं का पुनर्निर्माण बदस्तूर ठीक से होता रहेगा और जब तक यह प्रक्रिया ठीक-ठीक चलती रहेगी, तब तक बुढ़ापा दूर रहेगा। बुढ़ापा आयेगा जरूर पर देर से आयेगा। इस निष्कर्ष पर विचार करके पूना के श्री श्रीधर अमृत भालेराव ने यह निश्चिय किया कि इन तीनों तत्वों को दवाओं के माध्यम से प्राप्त करने की अपेक्षा प्राकृतिक ढंग से, आहार द्वारा प्राप्त करना अधिक उत्तम और गुणकारी रहेगा। लिहाजा काफी खोजबीन और परिश्रम करके व इस नतीजे पर पहुंचे कि विटामिन ई अंकुरित गेहूं से, विटामिन सी नींबू, शहद और आंवले से एवं कोलीन मेथी दाने से प्राप्त किया जा सकता है। इन तीनों पदार्थों का सेवन करने के लिये उन्होंने यह फार्मूला बनाया-

40 ग्राम यानी 4 चम्मच [बड़े] गेहू और 10 ग्राम मेथीदाना- दोनों को 4-5 बार साफ पानी से अच्छी तरह धो लें, ताकि इन पर यदि कीटनाशक दवाओं का छिड़काव का प्रभाव हो तो दूर हो जाये। धोने के बाद आधा गिलास पानी में डालकर चौबीस घंटे तक रखें। चौबीस घंटे बाद पानी से निकालकर एक गीले तथा मोटे कपड़े में रखकर बांध दें और चौबीस घंटे तक हवा में लटका कर रखें। गिलास का पानी फेंकें नहीं, इस पानी में आधा नींबू निचोड़कर दो ग्राम सोंठ का चूर्ण डाल दें। इसमें 2 चम्मच शहद घोलकर सुबह खाली पेट पी लें। यह पेय बहुत शक्तिवर्धन, पाचक और स्फूर्तिदायक है, इसीलिये इसका नाम श्रीभालेराव ने संजीवनी पेय रखा है। चौबीस घंटे पूरे होने पर हवा में लटके कपड़े को उतारकर खोलें और गेहूं तथा मेथीदाना एक प्लेट में रखकर इस पर पिसी काली मिर्च और सेंधा नमक बुरक दें। गेहूं और मेथीदाना अंकुरित हो चुका होगा। इसे खूब चबा-चबाकर प्रात: खायें। यदि इसे मीठा करना चाहें तो काली मिर्च और नमक न डालकर गुड़ मसलकर डाल दें, शक्कर न डालें। यह मात्रा एक व्यक्ति के लिये हैं।

इस फार्मूले का सेवन करने से तीन तत्व तो शरीर को प्राप्त होते ही हैं, साथ ही एनजाइम्स, लाइसिन, आइसोल्यूसिन, मेथोनाइन आदि स्वास्थ्यवर्धक पौष्टिक तत्व भी प्राप्त होते हैं। यह फार्मूला सस्ता भी है और बनाने में सरल भी इसमें गजब की शक्ति है, यह स्फूर्ति और पुष्टि देने वाला है। इस प्रयोग को प्रौढ़ ही नहीं, वृध्द स्त्री पुरुष भी कर सकते हैं। यदि दांत न हों या कमजोर हों तो वे अंकुरित अन्न चबा नहीं सकते, ऐसी स्थिति में निम्नलिखित फार्मूले का सेवन करना चाहिए-

प्रात:काल एक कटोरी गेहूं और तीन चम्मच मेथीदाना अच्छी तरह धो-साफ कर चार कप पानी में डालकर चौबीस घंटे रखें। दूसरे दिन सुबह इसका एक कप पानी लेकर नींबू तथा शहद डालकर पी लें। शेष तीन कप पानी निकाल कर फ्रिज में रख दें। यदि फ्रिज न हो तो पानी गिलास में डालकर गिलास पर गीला कपड़ा लपेट दें और गिलास ठंडे पानी में रख दें और ढंक दें, ताकि पानी शाम तक खराब न हो। इस पानी को शाम तक एक कप पीकर समाप्त कर दें। गेहूं और मेथीदाने को फेंकें नहीं बल्कि फिर से 4 कप पानी में डालकर रख दें। दूसरे दिन सुबह 1 कप पानी और शेष दिन भर में पी लें। अब नया गेहूं तथा मेथीदाना लें और सुबह पानी में डालकर रख दें। दो दिन तक भिगोये हुए गेहूं और मेथी दाने को सुखा लें और पिसाने के रखे गये गेहूं में मिला दें। इस तरह बिना दांत वाले भी इस नुस्खे का सेवन कर लाभ उठा सकते हैं।
 

Source: http://www.swasthya-sanjivani.in/2015/06...

क्या गर्म पानी से नहाना त्वचा के लिए अच्छा है ?

Mon, 02/19/2018 - 23:18

रोज़ नहाने से आप खुद को साफ़ सुथरा रख सकते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि गर्म पानी से नहाने से आपकी त्वचा को नुक्सान हो सकता है। सर्दियों में ज्यादातर लोग गर्म पानी से नहाते हैं। इसके कुछ फायदे भी हैं जैसे यह स्ट्रेस और टेंशन को दूर रखता हैं। 

मगर इसे अपनी आदत ना बनाये क्योंकि रोज़ गर्म पानी से नहाने से आपकी त्वचा का सारा तेल निकल जाता है जिससे आपकी त्वचा सूखी हो जाती है। जिससे आगे चल कर त्वचा में खुजली हो जाती है। 

तो क्या गर्म पानी से नहाना नुकसानदेह है? वैसे तो गर्म पानी आपको जितना आराम दे सकता है उतना कोई नहीं। लेकिन जरुरी है कि आप इसका तापमान कम रखें साथ ही ज्यादा देर तक गर्म पानी से ना नहाएं। इसी वजह से कुछ लोगों को गर्म पानी भी आपको नुक्सान पंहुचा सकता है। इसलिए आज हम आपको इसी से जुड़ी जानकारी देने जा रहें हैं। 

क्या आपको सचमुच इसकी जरूरत है?
यह जानना बहुत जरुरी है कि क्या आपको वाकई गर्म पानी से नहाने की जरुरत है। गर्म पानी से से इसलिए नहाया जाता है जब आपको कोई मस्क्यलर पेन हो। अगर आपको कोई स्वास्थ्य संबंधी परेशानी नहीं है तो आप ठंडे पानी से ही नहा सकते हैं। 

टेम्परेचर को मैनज करना 
ज्यादा गर्म पानी से मत नहाएं। इसे आपकी त्वचा में खुजली, स्केलिंग और त्वचा सूखने लग जायेगी। साथ ही त्वचा की प्राकृतिक नमी गायब होजाने से आपको त्वचा के रोग जल्दी पकड़ लेंगे। इसके आलावा आपको मुँहासों की परेशानी भी हो सकती है। 

कम समय के लिए नहाएं 
ज्यादा देर तक गर्म पानी में नहाने से आपकी त्वचा के लिए और हानिकारक हो सकता है। इससे शुष्क त्वचा से जुडी परेशानियां बढ़ जाएंगी। और अगर आप बाथ टब काप्रयोग करते हैं तो इसे जरूर याद रखें। 

कठोर साबुन ना लगाएं
अगर आप गर्म पानी से नहा रहें हैं तो ऐसे साबुन से बचे को आपकी त्वचा को और रुखा बना दें। ऐसे में कम खुशबू वाले साबुत का इस्तेमाल करें। अगर अब भी आपको कोई संदेह है तो आप मॉइस्चराइजिंग सोप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

अपनी त्वचा को मॉइस्चराइस करें 
मॉइचराइस त्वचा बेहद खूबसूरत लगाती है। इससे आपके झुर्रियां और दाग ढाबे नहीं दीखते हैं। इसलिए अगर आप गर्म पानी से नहा रहें हैं तो नहाने के बाद मॉइस्चराइजिंग क्रीम जरूर लगाएं।

अच्छे रिजल्ट के लिए मॉइचरीज़र तब लगाएं जब आपकी त्वचा गीली हो। अब आपको इस बात को ले कर कोई भी संदेह नहीं होगा कि गर्म पानी से नहाना आपके लिए बुरा है या अच्छा, क्योंकि अब आपको अपने सारे सवालों के जवाब मिल गएँ होंगे।

Source: hindi.boldsky.com

 

 

बाल झड़ते है तो यह तरीका अपनाये

Mon, 02/19/2018 - 23:18
  1. बालों में आमतौर पर कुछ समस्याएं जैसे- बालो का गिरना, सफेद बाल, डैण्ड्रफ, सिर की त्वचा के रोग इत्यादि शामिल हैं। 
  2. लेकिन बालों की समस्या को थोड़ी सावधानी बरतकर आसानी से दूर किया जा सकता है। मजबूत तथा स्वस्थ बालों के लिए तेल से मालिश आवश्यक है। 
  3. सर की मालिश करने से बालों की जड़ो को पोषण मिलता है और बालों के झड़ने में कमी आती है। 
  4. सरसो के तेल में मेहंदी की पत्ती गर्म करें। ठंडा कर के बालों में लगायें, इससे बालों का झड़ना रूक सकता हैं। 
  5. आँवला,शिकाकाई पावडर को दही में मिलाए। यह मिश्रण बालों में लगाने से बालों की डीप कंडीशनिंग होती है। बालों की देखभाल के साथ-साथ खाने-पीने का भी खास ध्यान रखें। फलों और सब्जि़यों का सेवन अधिक करें। 
  6. शहद में अंडा मिलाकर लगाना भी बालों की सेहत के लिए अच्छा रहता है। 
  7. नीम की और बेर की पत्तियों को पीसकर नींबू डालकर लगाने और इसके लगातार प्रयोग से बालों का झड़ना बंद हो जाता हैं। 
  8. बड़ के दूध में नींबू का रस मिलाकर निरंतर लगाने से बालों का झड़ना बंद हो जाता है। 
  9. ग्रीन टी से बालों के झड़ने को आसानी से रोका जा सकता है। 
  10. जड़ी बूटियों से बनी औषधी व तेल मालिश से बालों के झड़ने की समस्या को दूर किया जा सकता है। 
  11. बालों की समस्या को रोकने के लिए आयुर्वेद में बालों की मालिश को आवश्यक माना गया है। ऐसे में नारियल तेल या बादाम के तेल से सिर की अच्छी तरह से मालिश करनी चाहिए। 
  12. यदि आप तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों ध्रूमपान इत्यादि को त्याग देंगे तो आपके बालों का झड़ना अपने आप ही रूक जाएगा। 
Source: http://narendramodibjppm.blogspot.in/201...

हल्दी के प्रयोग से रहें निरोग

Mon, 02/19/2018 - 14:00

हमारे किचन में एक मसाले के रूप में व्यवहृत हल्दी  अपने भीतर सैंकडों  आरोग्यकारी गुण समाविष्ट किये हुए है | नीचे  पूरा वर्णन  दिया जा रहा है-- 
सौन्दर्यवर्धक

हल्दी केवल सब्जी या दाल को ही स्वादिष्ट नहीं बनाती, यह खाने वाले शरीर को भी सुन्दर बनाती है। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि व्यवसायी लोग, जो शरीर को सुन्दर बनाने की क्रीम बनाते हैं, उसमें हल्दी का प्रयोग करते हैं ताकि बिक्री अच्छी हो सके। लेकिन ये लोग हल्दी का सीधा प्रयोग नहीं करते, उसमें रंग और सुगंध का प्रयोग करते हैं। इसी कारण यह क्रीम इतनी असरदार नहीं होती, जितनी चने के आटे में हल्दी और सरसों का तेल मिलाकर बनी क्रीम जिसे ‘उबटन’ के नाम से जाना जाता है। मध्यकालीन युग में राजकुमारियां और रानियां इसी उबटन को लगाया करती थीं।
हल्दी में पौष्टिक तेल की भी मात्रा होती है जो दिखाई नहीं देती। यह हल्दी सूखी त्वचा को चिकनी और मुलायम बनाती है। इसमें तेल की मात्रा होने पर भी इसका तेल चेहरे अथवा शरीर पर दिखाई नहीं देता। इसका तेल त्वचा के अन्दर जाकर उसे प्राकृतिक रूप देता है।

कीटनाशक-

हल्दी का प्रयोग साफ, स्वच्छ तरीके से ही किया जाना चाहिए। क्योंकि यह कीटनाशक है और इसके प्रयोग से गलाव-सड़ाव नहीं होता इसलिए यह पवित्र है। पवित्र वस्तु का इस्तेमाल भी पूरी पवित्रता के साथ ही करना चाहिए। संस्कृत में हल्दी को कृमिघ्ना भी कहते हैं जिसका हिन्दी में अर्थ होता है कीटाणुनाशक। यदि शरीर के किसी भाग में पस हो जाए अथवा टी-बी. हो जाए तो हल्दी इन सभी रोगों के कीटाणुओं को नष्ट करने में समर्थ है।

रक्तशोधक

हल्दी की एक और विशेषता यह है कि यह रक्तशोधक है। यह रक्त के दोषों को मूत्र द्वारा अथवा दस्त द्वारा निकालकर दूर कर देती है। यह शरीर में चूने के पदार्थ के साथ मिलकर रक्त को शुद्ध लाल रंग का बनाती है। रक्त के रंग को लाल रंग का बनाने का प्रमाण यह है कि ‘‘यद्यपि हल्दी का रंग पीला होता है फिर भी पीलिया के रोगियों की चिकित्सा हकीम हल्दी द्वारा करते हैं।’’ इसलिए यह बाहर से पीले रंग की दिखाई देने वाली हल्दी अन्दर शरीर में जाकर रक्त को शुद्ध एवं लाल रंग का बनाती है। साथ ही हम जो खाना खाते हैं उसे हजम भी करती है। यूनानी चिकित्सकों का कहना है कि रक्त यदि बिगड़ जाए तो इसे शुद्ध करने के लिए हल्दी का प्रयोग करना चाहिए।

उबटन

विवाह जैसे मांगलिक अवसर पर महिलाएं विशेष रूप से हल्दी का उबटन तैयार करती हैं जो दुल्हन के तन-बदन को कंचन की तरह निखार देता है। यह उबटन त्वचा को और भी मोहक बनाता है और कंचन सी काया को कुन्दन की तरह चमका देता है। हल्दी के उबटन के बाद दुल्हन पर कैसा रूप चढ़ता है, यह हर गृहिणी जानती है।

 

हल्दी की प्रजातियां व उनके प्रयोग

रसोई में जिस हल्दी का प्रयोग किया जाता है, उसके अलावा भी इसकी कुछ अन्य विशिष्ट प्रजातियां हैं, जिनका औषधीय गुणों के कारण विभिन्न रोगों में प्रयोग किया जाता है। प्रस्तुत है उन्हीं की संक्षिप्त लेकिन सटीक जानकारी।

आमा हल्दी

आमा हल्दी का वानस्पतिक नाम क्यूरकुमा अमाडा है। इसमें कच्चे आम की सी गन्ध आती है। इसीलिए इसे आमा हल्दी या आम्रगन्धि हरिद्रा कहा जाता है। इस प्रकार की हल्दी भारत के प्रायः सभी प्रान्तों में विशेष रूप से बंगाल, कोंकण तथा तमिलनाडु में उत्पन्न होती है। इसकी गांठें बड़ी-बड़ी अदरक के समान, पीले रंग की तथा आम की सी गन्ध से युक्त होती हैं।

गुण—

आमा हल्दी शीतल, मधुर, पित्तशामक, आम की सी गन्ध वाली, पेट से वायु निकालने वाली, भोजन का पाचन कराने वाली, भूख बढ़ाने वाली एवं मल बांध कर लाने वाली होती है। सुगन्धित होने के कारण इसे चटनी आदि बनाने में उपयोग में लाते हैं। मिठाइयों आदि में भी आम की गन्ध लाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

दारु हल्दी

दारु हल्दी के वृक्ष जो हिमालय पर्वत पर तथा आसाम में पाए जाते हैं। जिनमें चार जातियों के वृक्ष मध्य भारत एवं दक्षिण भारत के नीलगिरी पर्वत पर पाए जाते हैं। इनका भूमिगत तना ही हल्दी होता है। बर्बेरिस अरिस्टेटा हल्दी का चिकित्सा में उपयोग किया जाता है। इस प्रकार की हल्दी पीले रंग की होती है, जिसमें हल्की-सी गंध आती है और स्वाद कड़ुवा होता है।
गुण—

दारु हल्दी उष्ण होती है। इसके गुण अन्य प्रकार की हल्दियों के गुणों के समान होते हैं। दारु हल्दी के सत्व को रसौत कहा जाता है।

त्वचा रोग

यह रोग अधिकतर खून की खराबी से उत्पन्न होते हैं। इसके बचाव के लिए स्वच्छ वातावरण में रहना चाहिए ! साथ ही खाद्य—पदार्थों में गरम मसालों, मिर्च-मसालों, खटाई, गुण, चीनी, शक्कर, मांस—मदिरा, धूम्रपान, तम्बाकू, विषम भोजन आदि से बचकर रहना चाहिए। पौष्टिक आहार नियमित व्यायाम, स्नान और स्वच्छ जल का सेवन और उचित उपचार इन रोगों को आपसे दूर भगाने में सहायक होते हैं।

चेहरे की झाइयां

चेहरे पर झाइयां पड़ जाने के अनेक कारण हैं। उम्र के साथ ही बाजारू क्रीम या लोशन चेहरे पर लगाते रहने से उस पर झाइयां पड़ जाती हैं या धब्बे हो जाते हैं। कारण यह है कि मुलायम त्वचा ऐसे लोशन से झुलस जाती है। उसे पुनः सुन्दर और आकर्षित बनाने के लिए प्रथम तो आवश्यक यह है कि लोशनों और क्रीमों का सेवन करना बन्द कर दिया जाए और हल्दी द्वारा तैयार किए गए उबटन का प्रयोग करना आरम्भ कर दें।

उपचार—

हल्दी का उबटन बनाने की विधि यह है कि दारु हल्दी दस ग्राम लेकर पीपल अथवा आक के दूध में डुबो दें और अच्छी तरह दूध को सोख लेने के बाद सायंकाल उसको घिसकर पेस्ट बना लें और किसी बर्तन में पेस्ट को रखकर ढक्कन बन्द कर दें तथा रात्रि को ओस में बाहर खुले में रख दें। अब उबटन पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। सुबह स्नान करने के आधा घण्टा पूर्व इस उबटन को चेहरे पर मलें और आधे घण्टे पश्चात् स्नान करें। एक सप्ताह तक नियमित इस उबटन का प्रयोग करके झाइयां मिट जाएंगी और त्वचा मुलायम होकर चेहरा आकर्षक हो जाएगा। बाद में सप्ताह में सिर्फ एक बार इस उबटन का सेवन करते रहें। किसी अन्य दवा का इस्तेमाल न करें।

गर्मी के दाने

जब तेज गर्मी पड़ती है और पसीना शरीर से निकलता है तो पसीने के साथ ही शरीर के अनेक खनिज भी बाहर निकल जाते हैं।
इन दिनों प्याज का सलाद बनाकर सैंधा नमक और काली मिर्च तथा नीबू डालकर खाना चाहिए। और इस प्रकार की व्यवस्था कीजिए कि पसीना शरीर पर ही सूख जाए, बहने न पाए। इसके लिए सिन्थेटिक्स अथवा सिल्क के कपड़ों को नहीं पहनना चाहिए, बल्कि सूती और मोटे कपड़े ही पहनने चाहिए जिससे कपड़े पसीना सोख लें।

उपचार—

एक किलो कच्ची हल्दी को पानी में डालकर उबाल लें। अच्छी तरह उबालकर पानी को आंच से उतार कर ठण्डा कर लें और छानकर किसी शीशे के ऐसे बर्तन में भरें जिसमें पहले से ही तीन सौ ग्राम शहद भरा हुआ हो। इस शहद युक्त पानी को दो सप्ताह तक रखा रहने दें। अब आपका ठण्डा पेय तैयार हो गया। इसमें चम्मच भर फालसे का जूस या अनार का रस मिला दें और इस शर्बत का सेवन गर्मी दूर करने और दानों को शरीर से हटाने के लिए सेवन करते रहें। शरीर पर गर्मियों में दाने नहीं निकलेंगे।
फोड़ा-फुंसी

शरीर पर छोटे-छोटे लाल दाने निकल आते हैं। कुछ समय बाद उनमें पीब पड़ जाती है और दर्द का अनुभव होता है।
खून की खराबी, दूषित वातावरण में रहन-सहन, दूषित जल व भोजन का प्रयोग। गरम मसाला व मांस-मदिरा, तम्बाकू, चाय—कॉफी, मीठी वस्तुओं का अत्यधिक सेवन।

उपचार

आधा किलो हल्दी पीसकर चार लीटर पानी में घोलकर उबालें और ठण्डा करके इसमें दो सौ ग्राम शहद मिला दें। इस मिश्रण को किसी शीशे के बर्तन में दो सप्ताह तक रखा रहने दें, अब इसको छानकर किसी साफ बोतल में भरकर रख दें। खाना खाने के बाद इस आसव को दस या पन्द्रह ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इस आसव को पीने से रक्त साफ हो जाता है।
•    तुरन्त आराम पाने के लिए हल्दी के तेल में कपड़ा भिगोकर फोड़े-फुंसी पर लगावें।

दाद का इलाज -

 

शरीर पर किसी भी अंग में एक ही स्थान पर खुजली होने और उसे खुजाते रहने से दाद बन जाता है और वह स्थान काला हो जाता है।

उपचार—

शरीर के जिस अंग में भी दाद हो उस धब्बे को अपने ही मूत्र से धोइए, यह बहुत असरदार और दाद के कीटाणुओं को फैलने से रोकने के लिए उपयोगी प्राथमिक चिकित्सा है।
•    शरीर के अन्दर इस रोग की जड़े नष्ट करने के लिए नई-ताजी हल्दी को पीस कर उसमें थोड़ा शहद मिलाकर शरीर के अन्दर के कीटाणुओं को नष्ट करने के लिए सेवन करें। इसी मिश्रण की छोटी-छोटी गोलियां बना लें और सुबह तथा शाम को उन्हें चूसें। नियम से इस चिकित्सा को करने से पन्द्रह दिन में ही दाद का निशान भी मिट जाएगा और स्वच्छ त्वचा आ जाएगी।

झाइयां
          जो लोग महंगी क्रीमों और तरह-तरह की सुगंधियों से मुखड़े को संवारने की कोशिश में रहते हैं, अधिकतर उन्हीं के चेहरे पर झाइयां देखने में आती हैं, क्योंकि सभी सुगन्धियों और क्रीमें तेजाबी (रासायनिक) प्रक्रिया से तैयार की जाती हैं। कुछ दिन उनसे चेहरों पर गौरापन भी आता है, मगर काले को गोरा करने के और गोरे को और निखार देने वाली क्रीमें त्वचा की ऊपरी परत झुलसा डालती हैं, बाद में खुरंट बन जाता है, बिल्कुल उसी तरह चेहरे पर झाइयां पैदा हो जाती हैं।

उपचार—

          अगर चेहरे  पर सच्चा और टिकाऊ निखार चाहते हैं तो हल्दी का उबटन ही सर्वोत्तम है जो राजघरानों और भिखारियों के झोपड़ों दोनों में सदा से ही इस्तेमाल होता रहा है। रूज और क्रीमों से पैदा हुई झाइयां दूर करने के लिए दस ग्राम पिसी हल्दी पीपल या बड़ के दूध से तर कर दें। आस-पास पीपल या बरगद न मिले तो आक का दूध ही टपका लें। शाम को यह उबटन तर करके ढंक दें और सोने से पहले झाइयों पर मल दें। अगर शाम को न कर सकें तो सुबह तैयार कर लें और नहाने से आधा घंटा पहले चेहरे पर मल लें। एक ही सप्ताह में झाइयां विलीन हो जाएंगी। उसके बाद हल्दी के उबटन से ही शरीर में निखार और सुकोमलता लाइए।

खुजली
         खुजली जिस किसी नर-नारी को पकड़ लेती है तो वह खारिश वाले कुत्ते की भांति खुजलाता ही रहता है, कुछ लोग इसके इलाज के बारे में लापरवाह हो जाते हैं, ऐसा तो उन्हें भूलकर भी सोचना नहीं चाहिए।

उपचार—

            हल्दी एक चम्मच, चीनी दो चम्मच, गर्म दूध एक कप, देशी घी चौथाई कप। इन सब चीजों को कूटपीस कर छान कर पी लें, कुछ ही दिनों में आराम आ जाएगा।
•    सरसों का तेल 250 ग्राम, हल्दी 100 ग्राम, पानी 250 ग्राम। इन सब चीजों को लोहे की कड़ाही में डालकर मिला लें। फिर गर्म करने के लिए हल्की आंच पर पकाएं, जब यह उबलने लगे तो नीचे उतारकर ठंडा करके छान लें, छान कर उसे किसी बोतल में भर लें। इसे हर रोज शरीर पर मलने से खुजली दूर हो जाती है।
•    त्वचा की खुश्की और छूत रोग का प्रभाव मिटाने के लिए आप हल्दी-तेल ही मलिए, लेकिन खून की खराबी दूर करने के लिए हल्दी-वटी खाइए। हल्दी पीसकर शहद मिलाकर और बेर (जंगली बेर) के बराबर गोलियां बना लीजिए। हल्दी और शहद मिलकर रक्त की बूंद-बूंद से सारे जहर निकाल देते हैं। एक गोली हल्दी के गुणों को याद करके और दूसरी गोली शहद के गुणों को याद करके सुबह चूस जाइए, इसी तरह दो गोलियां शाम या रात को सेवन कीजिए। अन्दर से रक्त का शोधन हो जाएगा और बाहर की त्वचा में न खाज उठेगी, न खुजली रहेगी।
•    महिलाओं को चाहिए कि सप्ताह में एक नहीं तो महीने में एक बार ही सही, हल्दी और बेसन को सरसों के तेल में गूंधकर उबटन बना लें और सारे बदन पर इसे अच्छी तरह मला करें। इसका प्रभाव महीने भर तक बना रहता है और खाज-खुजली से शरीर बचा रहता है।

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