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Updated: 10 hours 36 min ago

दूध आयुर्वेद में बहुत ही महत्वपूर्ण और कीमती भोजन है।

Thu, 05/31/2018 - 04:24

दूध आयुर्वेद में बहुत ही महत्वपूर्ण और कीमती भोजन है। यह हमारे शरीर और दिमाग को जरुरी पोषण प्रदान करता है।  ठंडा, वात और पित्‍त दोष को बैलेंस करने का काम करता है। आयुर्वेद के अनुसार गाय का दूध सबसे ज्‍यादा पौष्टिक होता है। दूध भूख को शांत करता है और मोटापे से भी छुटकारा दिलाने में मददगार है। गाय का दूध शिशुओं के लिये अच्‍छा है पर अगर आपको नींद नहीं आती तो आपके लिये भैंस का दूध अच्‍छा रहेगा। किसका दूध है सबसे सेहतमंद - गाय का या भैंस का? कई लोगों को दूध पीने के बाद हजम नहीं हो पाता। उन्‍हें पेट फूलने या फिर बार खराब होने की समस्‍या से जूझना पड़ता है। पहले ज़माने के मुकाबले आज कल दूध की क्‍वालिटी में गिरावट आने की वजह से ऐसा होता है। यदि आपका पाचन तंत्र मजबूत नहीं है तो भी आपको दूध ठीक से हजम नहीं हो पाएगा। आयुर्वेद के अनुसार दूध पीने के कुछ नियम हैं, जिन्‍हें पालन करने से आपको दूध अच्‍छी तरह हज़म हो जाएगा।
1. रात में बिना शक्‍कर के दूध पियें अगर हो सके तो उसमें गाय का घी १- २ चम्मच डाल कर लें। 2. ताजा, जैविक और बिना हार्मोन की मिलावट वाला दूध सबसे अच्‍छा होता है। पैकेट में मिलने वाला दूध नहीं पीना चाहिये। 3. दूधक को गरम या उबाल कर पियें। अगर दूध पीने में भारी लगे तो उसे उसमें थोड़ा पानी मिला कर उबालें। 4. दूध में एक चुटकी अदरक, लौंग, इलायची, केसर, दालचीनी और जायफल आदि की मिलाएं। इससे आपके पेट में अतिरिक्त गर्मी बढ़गी जिसकी मदद से दूध हजम होने में आसानी मिलेगी। 5. प्रयत्न करे की देशी गाय का दूध ले। औषधि के समान है गाय का घी 6. अगर आप को डिनर करने का मन नहीं है तो आप रात को एक चुटकी जायफल और केसर डाल कर दूध पियें। इससे नींद भी अच्‍छी आती है। 7. किसी भी नमकीन चीज़ के साथ दूध का सेवन ना करें। क्रीम सूप या फिर चीज़ को नमक के साथ ना खाएं। दूध के साथ खट्टे फल भी नहीं खाने चाहिये। 8. दूध और मछली एक एक साथ सेवन नहीं करना चाहिये, इससे त्‍वचा खराब हो जाती है।

पानी क्यों ना पीये खाना खाने के बाद।

Tue, 05/29/2018 - 04:24

सारे दिन में 8-10 गिलास पानी जरुर पियें 
पानी जब भी पियें बैठ कर और सिप केर केर के पियें ताकि उसमे लार मिल सके
भोजन करने से 30 मिनट पहले और भोजन करने के 1 घंटा 50 मिनट बाद पानी जरुर पीना चाहिये
ठन्डे पेय, चाय, कॉफ़ी जैसे पदार्थ बिल्कुल बंद कर देने चाहिये
अधिक मीठा या अधिक नमकीन नहीं खानी चाहिये
हो सकते तो गरम पानी पीना चाहिये ताकि कफ ढीला हो कर जल्दी बाहर निकल जाये
हमें उम्मीद हैं यदि आप इन सब बत्तों का ध्यान रखे तो आप ज़ुकाम से बचे रह सकते हैं और आपके शरीर में कफ इकठा नहीं हो पायेगा वरना ज़ुकाम में यदि आप कोई दवाई लेते हैं तो आप कफ को अंदर दबा रहे हैं ये बात ध्यान रखें वो अंदर संक्रमित हो कर किसी भी बीमारी के रूप में बाहर निकल सकता है

रोजाना एक इलायची खाने के फायदे

Mon, 05/28/2018 - 04:28

इलायची एक सुगंधित मसाला है। यह मीठे व्यंजन का स्वाद बढ़ाने के लिए उपयोग में लाई जाती है। इसकी गंध तीखी होती है। इसलिए इसका उपयोग माउथ फ्रेशनर के रूप में किया जाता है। इसमें आयरन और राइबोफ्लेविन, विटामिन सी के साथ ही नियासिन भी पाया जाता है। ये रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इलायची खाने के कई फायदे हैं चलिए आज हम जानते हैं इलायची खाने के ऐसे ही कुछ फायदों के बारे में...
1. पाचन को ठीक कर देती है
खाने के बाद कई लोग इलायची का उपयोग माउथ फ्रेशनर के रूप में करते हैं। जानते हैं क्यों? दरअसल इलायची प्राकृतिक रूप से गैस को खत्म करने का काम करती है। यह पाचन को बढ़ाने, पेट की सूजन को कम करने व दिल की जलन को खत्म करने का काम करती है। 
आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार यह खाने के पाचन में मदद करती है। यदि आपको बदहजमी की शिकायत है तो दो से तीन इलायची, अदरक का एक छोटा सा टुकड़ा, थोड़ी सी लौंग और सूखा धनिया पीस लें। इस पाउडर को गर्म पानी के साथ खाएं। पेट से जुड़ी प्रॉब्लम्स खत्म हो जाएंगी।

2. सांस की दुर्गंध दूर करती है
इलायची में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। साथ ही, इसका तेज स्वाद और भीनी-सी महक सांसों की दुर्गंध दूर करती है। यह डायजेस्टिव को मजबूत बनाती है। रोज खाने के बाद एक इलायची खाएं या रोज सुबह इलायची की चाय पी सकते हैं।
 

4. फेफड़ों से जुड़े रोगों का है प्राकृतिक इलाज
इलायची अस्थमा, खांसी, ज़ुकाम और फेफड़ों से जुड़ी दूसरी बीमारियों से राहत दिलाती है। आयुर्वेद में इलायची को एक गर्म मसाला माना गया है। यह शरीर को अंदर से गर्म रखती है।
इसके सेवन से कफ बाहर हो जाता है। सर्दी, खांसी या छाती में जमाव है, तो इन परेशानियों से राहत पाने के लिए इलायची सबसे बेहतर प्राकृतिक उपचार है। यदि आपको ज्यादा सर्दी हो रही हो तो भाप लेते समय गर्म पानी के बर्तन में इलायची के तेल की कुछ बूंदें डालें।
 

5. दिल की गति को नियमित करना
इलायची पोटैशियम, कैल्शियम जैसे खनिजों से भरपूर होती है। इसलिए यह शरीर की इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इलायची दिल की गति को नियमित करने में मदद करती है। साथ ही, यह ब्लडप्रेशर को नियंत्रित करती है। इसीलिए अगर आप अपने हार्ट को हमेशा हेल्दी बनाए रखना चाहते हैं, तो अपने रोजाना के खाने में इलायची को शामिल करें या केवल इलायची वाली चाय पिएं।
3. एसिडिटी से छुटकारा

इलायची में मौजूद तेल इसे एसिडिटी को खत्म करता है। इलायची चबाने पर इसमें से कई तरह के तेल निकलते हैं, जो आपकी लार ग्रंथियों को उत्तेजित करते हैं। इससे आपका पेट ठीक तरह से कार्य करता है। भूख तेज लगती है। इलायची खाने पर इसमें मौजूद तेल ठंडक का अहसास कराता है। इसलिए इसे चबाने से एसिडिटी से होने वाली जलन दूर हो जाती है।

6. एनीमिया से बचाती है
एक गिलास गर्म दूध में एक या दो चुटकी इलायची पाउडर और हल्दी मिलाएं। आप यदि चाहें तो स्वाद के लिए चीनी मिला सकते हैं।एनीमिया के लक्षणों और कमजोरी से राहत पाने के लिए इसे हर रात पिएं। 

7. शरीर को डिटॉक्सिफाई करना
इलायची मैंगनीज का एक प्रमुख स्रोत है। मैंगनीज एंजाइम के स्राव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह फ्री रेडिकल्स को ख्रत्म करता है। इसके अलावा, इलायची में शरीर से जहरीले तत्व बाहर करने का गुण पाया जाता है। यह कैंसररोधी का भी काम करती है।

दर्द की स्थिति में कितना मूवमेंट करें?

Sun, 05/27/2018 - 04:24

जब तक बुखार रहे, पूरी तरह बेड रेस्ट करें। बुखार के दौरान बेड पर ही जोड़ों का हल्का-फुल्का मूवमेंट शुरू करें।  मूवमेंट से ब्लड सप्लाई बढ़ती है और हीलिंग जल्दी होती है। चार-पांच दिन बाद रूटीन काम शुरू करें। हफ्ते भर बाद नॉर्मल लाइफ शुरू कर सकते हैं। बुखार ना हो, पर दर्द हो तो भी आराम ही करें। आराम न करने से दर्द बढ़ता है।

 

मुलेठी के औषधीय इस्तेमाल

Sat, 05/26/2018 - 06:00

 कफ :• अधिक कफ होने पर, ३ ग्राम मुलेठी चूर्ण को शहद के साथ लें। 
• मुलेठी १० ग्राम + काली मिर्च १० ग्राम + लौंग ५ ग्राम + हरीतकी ५ ग्राम + मिश्री २० ग्राम, को मिलकर पीस लें और शहद के साथ १ चम्मच की मात्रा में शहद के साथ चाट कर लेने से पुरानी खांसी, जुखाम, गले की खराश, सूजन आदि दूर होते हैं।
2. खांसी :
• मुलेठी चूर्ण २ ग्राम + आंवला चूर्ण २ ग्राम को मिला लें। इस चूर्ण को शहद के साथ चाट कर लेने से खासी दूर होती है।
• खांसी के साथ खून आने पर, मुलठी का चूर्ण १ टीस्पून की मात्रा में शहद या पानी के साथ लेना चाहिए।
3. गले के रोग :
• गले की सूजन, जुखाम, सांस नली में सूजन, मुंह में छाले, गला बैठना आदि में इसका टुकड़ा मुंह में रख कर चूसना चाहिए।
4. जुखाम :
• जुखाम के लिए, मुलेठी ३ ग्राम + दालचीनी १ ग्राम + छोटी इलाइची २-३, कूट कर १ कप पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए, छान कर, मिश्री मिला कर दो बार, सुबह-शाम २ चम्मच की मात्रा में लेना चाहिए।
5. हिचकी :
• हिचकी आने पर मुलेठी का एक टुकडा चूसें। नस्य लेने से भी लाभ होता है।
6. पेट रोग :
• पेट और आँतों में ऐठन होने पर मुलेठी का चूर्ण शहद के साथ दिन में २-३ बार लेना चाहिए।
• अल्सर में मुलेठी को ४ ग्राम को मात्रा में दूध के साथ लिया जाता है। या इसका क्वाथ दिन २-३ बार शहद में मिलकर लेना चाहिए।
7. पेशाब रोग :
• पेशाब की जलन में, २-४ ग्राम मुलेठी के चूर्ण को दूध के साथ लेना चाहिए।
8. रक्त प्रदर :
• रक्त प्रदर में, मुलेठी ३ ग्राम + मिश्री, को चावल के पानी के साथ लेना चाहिए।
9. धातु की कमी :
• धातु क्षय, में ३ ग्राम मुलेठी चूर्ण को ३ ग्राम घी और २ ग्राम शहद के साथ मिला कर लें।
• वीर्य बढाने, स्तम्भन शक्ति को मज़बूत करने के लिए, मुलेठी चूर्ण २-४ ग्राम की मात्रा में शहद और दूध के साथ, कुछ दिन तक सेवन करें
➡ मुलेठी का बाहरी प्रयोग :
1. बाह्य रूप से मुलेठी का प्रयोग, सूजन, एक्जिमा और त्वचा रोगों में लाभदायक है।
2. फोड़ों पर मुलेठी का लेप करना चाहिए।
3. घाव पर मुलेठी और घी का लेप लगाने से आराम मिलता है।
4. विसर्प में मुलेठी का काढ़ा प्रभावित स्थान पर स्प्रे करके लगाना चाहिए।
Note : मुलेठी की चूर्ण को निर्धारित मात्रा में निर्धारित समय तक ही लेना चाहिए। अधिक मात्रा में या लम्बे समय तक इसका सेवन हानिप्रद है। कई रोगों में इसका प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

यूरिक एसिड

Fri, 05/25/2018 - 04:23

सुबह एक पाव लौकी छोटे टुकड़े काटिये, कुकर या गंजी में  रखिये 1 कप पानी, 10 तुलसी पत्ते, 10 पुदीना पत्ते या 5 ग्राम पुदीना चूर्ण पंसारी के यहाँ से, 2 काली मिर्च पीसकर डालिये, कुकर में 1 सिटी लीजिये, उतारिये,पानी छान कर पीजिये गुनगुना। दोनों समय करिय। 

इसके बाद एलोवेरा गिलोय रस लीजिये 20 मिली।

रात को हल्का भोजन करिय।
भोजन के बाद आरोग्यवर्धनी वटि 2  लीजिये 3 माह।

भोजन के बाद सोना या या आराम करना नही।

भोजन के बाद सौफ मिश्री खाये। 

बिना भूख के भोजन ना करे। 

भूख लगने पर तुरंत थाली वाला भोजन करिय।

खट्टी चीजो से परहेज

दूध से सौंदर्य निखार

Thu, 05/24/2018 - 04:23

कच्चे दूध को गुलाबजल में मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा पर निखार आता है। गुलाब के 2 फूलों को पीसकर आधा ग्लास कच्चे दूध में 30 मिनट तक भिगोएं, फिर इस लेप को आहिस्ता-आहिस्ता त्वचा पर मलें, सूखने पर ठंडे पानी से धुल दें, त्वचा गुलाबी और नर्म हो जाएगी। दूध में थोडा सा नमक मिलाकर चेहरे पर सुबह-शाम लगाने से मुहांसे दूर होते हैं। आधा चम्मच काला तिल और आधा चम्मच सरसों को बारीक पीसकर दूध में मिलाकर मुहांसे पर लगाने से मुहांसे समाप्त हो जाते हैं। नीबूं का रस, आलू का रस, आटे का चोकर दूध में मिलाकर उबटन बनाकर मुंहासे के समय लगाएं, मुहांसे समाप्त हो जाएंगे। होंठ अगर काले हो गए हों तो दूध को होठों पर लगाने से कालापन दूर होता है। अगर आपके होंठ फट गए हैं तो रात को सोने से पहले एक बूंद गुलाबजल और एक बूंद नींबू का रस दूध की मलाई में मिलाकर लगा लें, इससे राहत मिलती है।

बादाम, बेसन, गाजर का रस दूध में मिलाकर उबटन की तरह लगाने से त्वचा में निखार आता है।

दूध को पूरे शरीर में रगडने से त्वचा मुलायम होती और निखार आता है। नाखूनों को सुंदर बनाने के लिए कुछ देर तक दूध में भिगोकर रखें। बरतन साफ करने से हाथ खुरदुरा हो जाता है, इन पर दूध में नींबू का रस मिलाकर लगाने से हाथ की त्वचा मुलायम हो जाती है। बादाम और लौंग को बराबर भाग में लेकर पावडर बना लें, आधा चम्मच दूध में चुटकी भर हल्दी मिलाकर चेहरे पर लगाएं, थोडी देर बाद धुल लें, इससे चेहरे पर निखार आता है। दूध की मलाई और हल्दी पावडर मिलाकर चेहरे पर मलें, दो हफ्ते बाद चेहरे पर निखार आ जाएगा। काजू को रातभर दूध में भिगोकर सुबह उसे महीन पीसकर उसमें मुलतानी मिट्टी और नींबू का रस मिलाकर तैलीय और शुष्क दोनों प्रकार की त्वचा पर लगाया जा सकता है 2 चम्मच दूध की मलाई में एक चम्मच शहद मिलाकर अपनी त्वचा पर लगाएं, इससे त्वचा की खुश्की समाप्त होगी। दूध की मलाई में थोडा सा पानी मिलाकर चेहरे का फेशियल किया जा सकता है

मेथी दाना के लाभ

Wed, 05/23/2018 - 04:23

मेथी दाना -२५० ग्राम ,अजवाइन-१०० ग्राम ,काली जीरी-५० ग्राम । 
उपरोक्त तीनो चीज़ों को साफ़ करके हल्का सा सेंक लें ,फिर तीनों को मिलाकर मिक्सर मेंइसका पॉवडरबना लें और कांच की किसी शीशी में भर कर रख लें । रात को सोते समय १/२चम्मच पॉवडरएक गिलास गुनगुने पानी के साथ नित्य लें ,इसके बाद कुछ भी खाना यापीना नहीं है ।इसे सभी उम्र के लोग लेसकते हैं । फायदा पूर्ण रूप से ८०-९० दिन में हो जायेगा ।
लाभ :-इस चूर्ण को नित्य लेने से शरीर के कोने -कोने में जमा पड़ी सभी गंदगी (कचरा )मल और पेशाब द्वारा निकलजाता है ,फ़ालतू चर्बी गल जाती है ,चमड़ी की झुर्रियां अपने आप दूर हो जाती है ,और शरीर तेजस्वी और फुर्तीला होजाता है ।अन्य लाभ इस प्रकार हैं ----------
१. गठिया जैसा ज़िद्दी रोग दूर हो जाताहै ।
२. शरीर की रोग प्रतिकारक शक्ति को बढ़ाता है ।
३. पुरानी कब्ज़ से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है ।
४. रक्त -संचार शरीर में ठीक से होने लगता है ,शरीर की रक्त -नलिकाएं शुद्ध हो जाती हैं ,रक्त में सफाई और शुद्धता की वृद्धि होती है ।
५. ह्रदय की कार्य क्षमता में वृद्धिहोती है ,कोलेस्ट्रोलकम होता है ,जिस से हार्ट अटैक का खतरा नहीं रहता |
६. हड्डियां मजबूत होती हैं ,कार्य करने की शक्तिबढ़ती हैं ,स्मरण शक्ति में भी वृद्धि होतीहै ।थकान नहीं होती है ।
७. आँखों का तेज़ बढ़ता है ,बहरापन दूर होता है ,बालों का भी विकास होता है,दांत मजबूत होते हैं ।
८. भूतकाल में सेवन की गयी एलोपैथिकदवाओं के साइड -इफेक्ट्स से मुक्ति मिलतीहै ।
९. खाना भारी मात्रा में या ज्यादाखाने के बाद भी पच जाता है (इसका मतलब येनहीं है कि आप जानबूझ कर ज्यादा खा ले) ।
१०. स्त्रियों का शरीर शादी के बादबेडौल नहीं होता ,शेप में रहता है ,,शादी के बाद होने वालीतकलीफें दूर होती हैं ।
११. चमड़ी के रंग में निखार आता है ,चमड़ी सूख जाना ,झुर्रियां पड़ना आदि चमड़ी के रोगों से शरीर मुक्त रहता है ।
१२. शरीर पानी ,हवा ,धूपऔर तापमान द्वारा होने वाले रोगों से मुक्त रहता है ।
१३. डाइबिटीज़ काबू में रहती है ,चाहें तोइसकी दवा ज़ारी रख सकते हैं।
१४. कफ से मुक्ति मिलती है ,,व्यक्ति का तेज़ इस से बढ़ता है ,जल्दी बुढ़ापा नहीं आता ,। उम्र बढ़ जाती है |
१५. कोई भी व्यक्ति ,किसी भी उम्र का हो ,इस चूर्ण का सेवन कर सकता है ,मात्रा का ध्यान रखे !

शहद के फायदे एवम उपयोग

Wed, 05/23/2018 - 04:22

वजन कम करे – शक्कर के मुकाबले शहद में ज्यादा कैलोरी होती है, लेकिन ये शक्कर से कही ज्यादा फायदे पहुंचाती है|  अगर आप वजन कम करना चाहते है, खासतौर पर पेट कम करना चाहते है, तो 1 गिलास गुनगुने पानी में आधा निम्बू, ½ चम्मच दालचीनी पाउडर व 1 चम्मच शहद मिलाकर पियें| रोजाना सुबह खली पेट पीने से आपको जल्दी फर्क समझ आएगा|

वजन बढ़ाने में मददगार – शहद वजन कम करने व उसे बढ़ाने, दोनों के लिए मदद करती है| शहद को दूध में मिलाकर पीने से ये ताकत देता है, तो जो लोग बलवंत होना चाहते है वजह बढ़ाना चाहते है उन्हें ये रोज पीना चाहिए| कसरत के बाद 1 चम्मच शहद 1 गिलास दूध में डाल कर पियें|
एसिडिटी मिटाए – पेट में होने वाली गैस, एसिडिटी, अल्सर जैसे रोग को भी शहद द्वारा रोकथाम की जा सकती है| ज्यादा मिर्च मसाला तला हुआ खाना खाने से पेट में जलन होने लगती है, इसे दूर करने के लिए शहद की मदद लें|
प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाये – शहद में antioxident तत्व अधिक होते है, जिससे ये कैंसर व दिल की बीमारी से हमारी रक्षा करने में सहायक है| रोज सुबह 1 चम्मच शहद खाने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढती है, जिससे रोग लगने का खतरा बहुत कम हो जाता है|
सर्दी खांसी दूर करे – सर्दी खांसी का तो शहद रामवाण इलाज है| गले में खराश , कफ की परेशानी में शहद खाने से बहुत आराम मिलता है, ठण्ड के दिनों में इसे रोज खाना चाहिए| न्यू बोर्न व थोड़े बड़े बच्चों को दिन में एक बार शहद जरुर चटायें, इससे कफ की परेशानी से आराम मिलेगा व नींद भी अच्छी आएगी|
संक्रमण मिटाए – एक शोध से सिद्ध हुआ है कि शहद एक antibactiriya व antifungal होता है, जिससे सारे संक्रमण के कीटाणु दूर रहते है|
त्वचा की रंगत निखारे – जवान दिखना व गोरा होना हर लड़की का सपना होता है| शहद आपकी ये ख्वाइश पूरी कर सकता है| रोज शहद लगाने से धुप से होने वाली टैनिंग दूर होती है, रंग साफ़ होता है व चेहरे की झुरियां मिटती है| शहद एक बहुत अच्छा moisturizer भी होता है, ठण्ड के दिनों में त्वचा रुखी बेजान हो जाती है इसे ठीक करने के लिए शहद सबसे अच्छा उपाय है|
डायबटीज वालों के लिए अच्छा – डायबटीज वालों को मीठा खाने की मनाही रहती है, लेकिन डॉक्टर के अनुसार वे लोग शहद का सेवन कर सकते है| इसमें गुलुकोस होता है जो ब्लडशुगर को कण्ट्रोल रखता है|

चूने से लगाएं रोगों को चूना !

Tue, 05/22/2018 - 06:00

चूना पत्थर एक अवसादी चट्टान है जो, मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3) के विभिन्न क्रिस्टलीय रूपों जैसे कि खनिज केल्साइट या एरेगोनाइट से मिलकर बनी होती है।  “चूना को यदि सही ढंग से उपयोग में लाया जाए तो इसके द्वारा कठिन से कठिन रोगों का इलाज सम्भव है। तो आइये जानते है क्या है चूना खाने के या चूने के फायदे और कैसे करना है इसका प्रयोग।

चूना के गुण

  • चूने के पानी में पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन सी होता है ! यह अनेक रोगों को दूर करने में उपयोगी है – जिनमें प्रदर रोग – यक्ष्मा – कील ~ मुंहासे – कान का दर्द – तिल्ली की वृद्धि – चुन्ने कीड़े – घाव – चेचक शामिल हैं !
  • 30 ग्राम चूने को 70 ग्राम मिश्री के साथ खरल करके आधा किलो पानी में मिलाकर कार्कदार शीशी में भरकर कार्क बंद कर दें ! जब पानी निथर निथर जाए तो 15 – 20 बूंद उस पानी में थोड़ा दूध मिलाकर बच्चे को पिलाने से उदर रोग नष्ट हो जाते हैं !
  • चूने को नींबू के रस में मिलाकर लगाएं – कुछ ही देर में मकड़ी का जहर उतर जाएगा !
  • कली के 10 – 12 ग्राम चूने में 30 एम.एल. गोमूत्र मिला – फिर उसमें पिघला मोम डालकर मलहम बनाएं, इसे खाज – खुजली और घावों पर लगाने से बहुत लाभ होता है !
  • जरा से चूने में थोड़ा सा शहद मिलाकर कील – मुंहासों पर लगाने से वे शीघ्र ही दूर हो जाते हैं !
  • अगर चाकू आदि से गहरा घाव पड़ गया हो तो चूने को मक्खन और सोंठ के साथ मिलाकर घाव में भरने से खून का बहना बंद हो जाता है और घाव ठीक हो जाता है !
  • कली के 2 रत्ती चूने में तुलसी का रस या शहद मिला चाटने से संग्रहणी रोग में लाभ होता है !
  • कली के 2 रत्ती चूने का सेवन तुलसी के पत्तों के रस – प्याज अथवा लहसुन के रस के साथ करने से अमाशय के विजातीय द्रव्य मल द्वारा बाहर निकल जाते हैं !
  • रुई के फाहे को चूने के पानी में भिगोकर चेचक के व्रण पर रखने से चेचक के गहरे घाव नहीं पड़ते !
  • अजीर्ण के कारण पेशाब रुक गया हो या पीला पड़ गया हो – खट्टी डकारें आती हों और वमन हो – तो दूध में चूने का पानी मिलाकर पिलाने से लाभ होता है !
  • चूने के निथरे हुए पानी में दूध मिलाकर कान में पिचकारी देने से कान का बहना तत्काल रुक जाता है !
  • नीम के पत्तों के रस में 1 रत्ती चूना मिलाकर उसकी 1-2 बूंदें कान में डालने और डंक पर बार – बार लगाने से बिच्छू का विष उतर जाता है !
  • यदि बच्चे की गुदा में चुन्ने कीड़े पड़ गए हों – तो उसके गुदा में चूने के पानी की पिचकारी देने से लाभ होता है !
  • चूने के निथरे हुए पानी में तिल का तेल और शक्कर मिलाकर पिलाने से मूत्र के समय होने वाला कष्ट दूर हो जाता है !
  • अम्लपित्त रोग में चूने के निथरे हुए पानी का 2 – 2 चम्मच की मात्रा में सेवन करें, काफी लाभ होगा !
  • चूने को शहद के साथ पीसकर तिल्ली पर लेप करके ऊपर से अंजीर के पत्ते बांधने से तिल्ली की वृद्धि नष्ट हो जाती है !
  • क्षय रोग में थोड़े से दूध में चूने का पानी मिलाकर सुबह – शाम कुछ दिनों तक पिएं, काफी लाभ होगा !
  • यदि किसी भी औषधि से वमन नहीं रुकता हो तो दूध में चूने का निथरा हुआ पानी मिलाकर पिलाने से रुक जाता है !
  • चूने के 20 ग्राम पानी में 100 ग्राम साफ पानी मिलाकर वेजीना को पिचकारी से वाश करने पर श्वेत प्रदर दूर हो जाता है !
  • चूने और शहद को कपड़े पर लगाकर पसली के दर्द वाले स्थान पर रखकर पट्टी बांधने से पसली का दर्द मिट जाता है !
  • जरा से चूने में अलसी का तेल मिलाकर आग से जले हुए स्थान पर लगाएं ! जलन और पीड़ा दूर हो जाएगी !
  • चूने के पानी में गुनगुना दूध और गोंद मिलाकर गुदा में पिचकारी देने से अतिसार का तत्काल निवारण होता है !
  • चूना – सज्जी – तूतिया और सुहागे को पानी में पीसकर शरीर के मस्से पर लगाएं, मस्से कुछ ही दिनों में दूर हो जाएंगे !
  • चूने और नौसादर को मिलाकर सुंघाने से कफ एवं वात का सिर दर्द और हर तरह की बेहोशी दूर हो जाती है !
  • हल्दी एवं खाने वाला चूना मिला लगाकर रात भर छोड़ दें – संभवत: तिल – मस्‍सेे अपने आप ही गिर जाएेगे !
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बालों की लम्बाई बढ़ाने और सदैव काले रखने के तरीके, जरूर अपनाएँ!!

Mon, 05/21/2018 - 06:00

काले, घने और लंबे बालों के लिए बालों को पोषण मिलना जरुरी है। बालों के पोषण से मतलब है बालों की जड़ों को प्रोटीन मिलते रहना। बाल की जड़ यानि स्कैल्प जितनी मजबूत होगी बाल उतनी तेजी से बढ़ेंगे। बालों की बढ़ने की गति आपकी सेहत, खान-पान की आदत, बालों की देखभाल और आनुवांशिक कारणों से प्रभावित होती है। 

हेयर ग्रोथ के टॉप टिप्स

1. हेल्दी डाइट

लंबे और घने बालों के लिए डाईट में प्रोटीन, विटामिन्स और मिनरल्स जरुरी है। अपनी डाईट में वैसे फूड को शामिल करें जिसमें विटामिन ए, बी, सी, ई के साथ-साथ आयरन, जिंक, मैग्नेशियम और सेलेनियम जैसे तत्वों की अच्छी मात्रा मौजूद हो।

2. अरंडी तेल से मसाज

अरंडी तेल (Castor Oil) में विटामिन ई के साथ बालों की ग्रोथ के लिए जरुरी औमेगा फैटी-9 एसिड रहता है। इस तेल से बालों के स्कैल्प की मसाज करने से बाल कुदरती तरीके से लंबे और घने होते हैं। वैसे अरंडी का तेल काफी गाढ़ा होता है, अगर इसके साथ बराबर मात्रा में नारियल तेल, जैतून का तेल और बादाम का तेल मिला लिया जाए तो यह और असरदार हो जाता है। सभी तेलों को मिलाकर 5 मिनट तक बालों के स्कैल्प की मसाज करें। चालीस मिनट बाद माइल्ड शैम्पू से बालों को धो लें। ऐसा नियमित करने से जल्द ही बालों की लंबाई में असर दिखने लगेगा।

3. स्कैल्प की मसाज

मसाज करने से बालों की जड़ स्कैल्प तक रक्त संचार तेज होता है और इससे बालों के बढ़ने की गति में तेजी आती है। इसके अलावा हफ्ते में एक दिन गुनगुने तेल और हेयर मास्क से बालों की डीप कंडीशनिंग करने से भी काफी असर होता है। बालों में गुनगना तेल या कंडीशनर लगाएं। ऊंगलियों से पांच मिनट तक स्कैल्प की मसाज करें।

4. बाल को नीचे की और झुकाएं

बालों को लंबा करने के लिए यह सबसे पॉपुलर ट्रिक है। आमतौर पर लड़कियां और बाल धोने के बाद बाल सुखाने के लिए बालों को नीचे करती है। दो से पांच मिनट तक सर झुका कर बालों को नीचे झुकाने से बालों के बढ़ने की गति तेज होती है। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से बालों के जड़ से रक्त संचरण बढ़ते हुए बालों की शिराओं तक पहुंचती है। नतीजा बालों की लंबाई बढ़ती है।

5. तनाव मुक्त रहें

बालों के झड़ने- गिरने और टूटने की बड़ी वजह तनाव है। यह माना जाता है कि तनाव की वजह से बालों के बढ़ने का जो सामान्य चक्र होता है वह रुक जाता है। तनाव बढ़ते ही बालों का चक्र टेलोजेन फेज में पहुंच जाता है़ जिसमें बाल झड़ने और गिरने की बीमारी शुरु हो जाती है। तनाव को कम करने का सबसे आसान उपाय है ध्यान। ध्यान लगाने और अच्छी नींद लेने से बालों के बढ़ने के लिए उत्तरदायी हार्मोन के स्राव की गति तेज हो जाती है।

6. बालों को हर्ब्स से धोएं

मेंहदी, नीम और ग्रीन टी समेत ऐसे कई हर्ब्स हैं जिसे बालों पर लगाने से बाल घने और लंबे होते हैं। मेंहदी इसमें सबसे ज्यादा असरदार है, क्योंकि यह बालों की जड़ों यानि स्कैल्प को पोषण देता है। इससे बालों में चमक आती है।

ग्रीन टी में पाए जाने वाले तत्व पॉलीफेनोल्स बालों के बढ़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। ध्यान रहे कि इन हर्ब्स का लेप बालों में शैंपू और कंडीशनिंग करने के बाद लगाएं। हर्बल टी पीने से भी बाल लंबे होते हैं।

7. विटामिन और हर्बल सप्लीमेंट अलग से लें

संतुलित डाइट लेने के बाद भी शरीर में कुछ जरुरी तत्वों की कमी रह जाती है। इन जरुरी तत्वों से शरीर ही नहीं त्वचा और बालों को भी पोषण मिलता है। बालों की ग्रोथ के लिए डाइट के अलावा आप विटामिन और हर्बल सप्लीमेंट ज़रूर ले।

8. एलोवेरा से बालों को पोषण दें

एलोवेरा बालों को बढ़ने में मदद करता है। एलोवेरा जेल लगाने से बालों का झड़ना और गिरना कम होता है। यह डैंड्रफ तो कम करता ही है, साथ ही बालों में शाइनिंग भी लाता है। एलोवेरा जेल में थोड़ा नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाएं। इसे 20 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें। बीस मिनट के बाद बालों में शैंपू कर लें। इसे हफ्ते में एक या दो बार आजमा सकते हैं। एलोवेरा जेल में नारियल तेल भी मिला सकते हैं। इसके अलावा एलोवेरा जूस पीना भी बालों के सेहत के लिए असरदार साबित होगा।

9. साइड इफेक्ट्स की संभावनाएं

अगर आपको कोई मेडिकल प्रॉब्लम यानि कोई बीमारी है तो आप बालों की लंबाई बढ़ाने के कितने भी प्रयास कर लें, बालों में ग्रोथ नहीं होगी। जिसे थाइरॉयड की शिकायत है, हार्मोनल असंतुलन हो, पुरानी कोई लाइलाज बीमारी हो या फिर कोई संक्रमण हो तो उसके बालों में ग्रोथ नहीं होता है। अगर आप गर्भ निरोधक या स्टेरॉइड की गोली ले रहे हैं तो आपको बाल के झड़ने और गिरने की शिकायत हो सकती है।

 

 

बैंगन में चौंकाने वाले फायदे

Sun, 05/20/2018 - 07:21
1. पोषक तत्वों से भरपूर है बैंगन 

बैंगन एक बहुत ही पौष्टिक सब्जी है लेकिन कुछ लोग इसे बिना गुण वाली सब्जी मानते हैं। अगर आप भी उन्हीं लोगों में से एक है और बैंगन की सब्जी नहीं खाते हैं तो आज हम आपको अवगत करवाते हैं बैंगन के ऐसे गुणों से जिन्हें जानने के बाद आपकी गलतफहमी दूर हो जाएगी। जानिए बैंगन के ऐसे सात फायदों के बारे में जो सेहत से जुड़ी आपकी कई समस्याओं को दूर करने में मददगार हो सकते हैं

2. कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करता है

बैंगन के सेवन से रक्त में बैंगन के सेवन से रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर गिरता है। इस तरह के प्रभाव का प्रमुख कारण है। बैंगन में पोटेशियम व मैंगनीशियम की अधिकता। बैंगन की पत्तियों के रस का सेवन करने से भी रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम किया जा सकता है।

3. संक्रमण से मुक्ती

बैंगन में विटामिन सी बहुत अच्छी मात्रा में है जो प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाता है और शरीर को संक्रमण से मुक्त रखने में मदद करता है।

4. सिगरेट छोड़ने में मददगार

प्राकृतिक तरीके से सिगरेट छोड़ना चाहते हैं तो डाइट में बैंगन का सेवन अधिक करें। निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी के तहत इसमें मौजूद निकोटिन की सीमित मात्रा सिगरेट छोड़ने वाले लोगों के लिए मददगार हो सकती है।

5. दांत का दर्द

बैंगन का रस दांत के दर्द में लाभदायक प्रभाव दिखलाता है। अस्थमा के उपचार के लिये बैंगन की जड़ें प्रयुक्त की जाती हैं।

6. रक्त की कमी

आदिवासी चुल्हे पर भुने हुए बैंगन में थोडी सी शक्कर डालकर सुबह खाली पेट खाने की सलाह देते हैं, उनका मानना है कि ऐसा करने से शरीर में रक्त की कमी दूर हो जाती है

7. पेट की बीमारी में

बैंगन का सूप तैयार किया जाए जिसमें हींग और लहसून भी स्वाद के अनुसार मिलाया जाए और सेवन किया जाए तो यह पेट फूलना, गैस, बदहज़मी और अपचन जैसी समस्याओं में काफी राहत देता है।

8. अच्छी त्‍वचा

बैंगन त्‍वचा को हाइड्रेट करता है और अंदर से नमी प्रदान करता है। तो अगर आपके बाल और त्‍वचा रूखे-सूखे हैं तो आप बैंगन खाना शुरु कर दीजिये।

  9. वेट लॉस

यह आहार चर्बी को जलाता है और कैलोरी कम करता है। इसमें फाइबर होता है जिसको खाने से पेट भर जाता है और जल्‍द भूख नहीं लगती, तो ऐसे में वजन भी कम होता है।

10. कैंसर से बचाए                

इसमें एक तत्‍व पाया जाता है जो कि शरीर में कैंसर की सेल से लड़ने में सहायक होता है। अगर आप हर रोज बैंगन खाएंगे तो आपका शरीर कैंसर से लड़ने के लिये मजबूत हो जाएगा। यह खासकर पेट के कैंसर से लड़ने में सहायक है।

11. दिमाग के लिये

इस पेड़ में जो न्‍यूट्रियन्‍ट्स पाए जाते हैं वह हमारे दिमाग के लिये बहुत ही अच्‍छे होते हैं। यह किसी भी प्रकार के नुक्‍सान से हमारी कोशिका की झिल्‍ली को बचाते हैं। यह दिमाग को फ्री रैडिक्‍ल से बचाता है और ब्रेन का विकास करता है।

धमनियों की दीवारों में कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल कम हो जाता है। यहां तक की खून की नसों में भी खून ठीक प्रकार से बहने लगता है।

13. मधुमेह से लड़े

हाई फाइबर और कम कार्बोहाइड्रेट के तत्‍व होने के कारण यह मधुमेह रोगियों के लिये बहुत अच्‍छा आहार है। इसको नियमित खाने से आपका शुगर लेवल कम होगा।

14. लीवर की रक्षा

लीवर की बीमारियां होने पर भी बैंगन का सेवन लाभदायक प्रभाव दिखलाता है। बैंगन की पत्तियों में हल्का निद्राकारी तत्व उपस्थित रहता है। अत: कई दवाईयां बनाने में इसकी पत्तियां आधारभूत तत्व की तरह कार्य करती हैं।

15. बैंगन के गुण

यह याद रखें कि सब्जी बनाते समय इसका डंठल व्यर्थ समझकर फेंकना नहीं चाहिए, क्योंकि इसमें पौष्टिक तत्वों की अधिकता होती है।

16. बैंगन के गुण

अधिक दिनों तक रखे या सूखे हुए बैंगन अच्छे नहीं होते इसलिए इन्हें दो तीन दिन से अधिक फ्रिज में नहीं रखना चाहिए।

17. बैंगन के गुण

आग पर भुने हुए बैंगन पचने में बिल्कुल हल्के और पाचन शक्ति बढ़ाने वाले होते हैं। यह अपच दूर करता है। मध्यम आकार के बैंगनों को सब्जी के उपयोग में लाना चाहिए

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शरीर को फौलाद बना देगा ये प्रयोग।

Sat, 05/19/2018 - 04:27

शरीर को फौलाद बना देगा ये प्रयोग।  कैल्शियम हड्डियों और दांतों की सरंचना में मुख्य भूमिका निभाता है। कैल्शियम की कमी से हड्डियों में अनेक रोग हो जाते हैं, मसल्स में अकड़ाव आने लगता है। जोड़ों में दर्द रहने लगता है। कैल्शियम की कमी के कारण शरीर में दर्द लगातार बना रहता है। ऐसे अनेक रोग कैल्शियम के कारण होने लगते हैं। महिलाओं में यह समस्या ज्यादा पायी जाती है।

आज हम आपको एक ऐसा नुस्खा बताने जा रहे हैं जिसके प्रयोग से आपकी कैल्शियम की कमी दूर होगी और आपकी हड्डिया फौलाद बन जाएँगी।

सामग्री—

(1) हल्दीगाँठ 1 किलोग्राम

(2) बिनाबुझा चूना 2 किलो

नोट : – बिना बुझा चुना वो होता है जिससे सफेदी की जाती है।

विधि –

सबसे पहले किसी मिट्टी के बर्तन में चूना डाल दें। अब इसमें इतना पानी डाले की चूना पूरा डूब जाये। पानी डालते ही इस चूने में उबाल सी उठेगी। जब चूना कुछ शांत हो जाए तो इसमें हल्दी डाल दें और किसी लकड़ी की सहायता से ठीक से मिक्स कर दे।

इस हल्दी को लगभग दो माह तक इसी चूने में पड़ी रहने दे। जब पानी सूखने लगे तो इतना पानी अवश्य मिला दिया करे की यह सूखने न पाए।

दो माह बाद हल्दी को निकाल कर ठीक से धो लें और सुखाकर पीस ले और किसी कांच के बर्तन में रख लें।

सेवन विधि

(1) वयस्क 3 ग्राम मात्रा गुनगुने दूध में मिलाकर दिन में दो बार नाश्ते या भोजन के बाद
(2) बच्चे – 1 से 2 ग्राम मात्रा गुनगुने दूध में मिलाकर दिन में दो बार नाश्ते या भोजन के बाद

लाभ

कुपोषण, बीमारी या खानपान की अनियमितता के कारण शरीर में आई कैल्शियम की कमी बहुत जल्दी दूर हो जाती है और शरीर में बना रहने वाला दर्द ठीक हो जाता है।
ये दवा बढ़ते बच्चों के लिए एक अच्छा bone टॉनिक का काम करती है और लम्बाई बढ़ाने में बहुत लाभदायक है टूटी हड्डी न जुड़ रही हो या घुटनों और कमर में दर्द तो अन्य दवाओं के साथ इस हल्दी का भी प्रयोग बहुत अच्छे परिणाम देगा।

गिलोय (Giloy)औषधीय एवं आयुर्वेदिक गुणों का खजाना

Fri, 05/18/2018 - 06:14

गिलोय (Giloy) गुणों का खजाना  गिलोय की बेल पूरे भारत में पाई जाती है। इसकी आयु कई वर्षों की होती है। गिलोय का वैज्ञानिक नाम है–तिनोस्पोरा कार्डीफोलिया । इसे अंग्रेजी में गुलंच कहते हैं। कन्नड़ में अमरदवल्ली, गुजराती में गालो, मराठी में गुलबेल, तेलगू में गोधुची ,तिप्प्तिगा , फारसी में गिलाई,तमिल में शिन्दिल्कोदी आदि नामों से जाना जाता है। गिलोय में ग्लुकोसाइन, गिलो इन, गिलोइनिन, गिलोस्तेराल तथा बर्बेरिन नामक एल्केलाइड पाये जाते हैं। अगर आपके घर के आस-पास नीम का पेड़ हो तो आप वहां गिलोय बो सकते हैं । नीम पर चढी हुई Giloy उसी का गुड अवशोषित कर लेती है ,इस कारण आयुर्वेद में वही गिलोय श्रेष्ठ मानी गई है जिसकी बेल नीम पर चढी हुई हो । मधुपर्णी, अमृता, तंत्रिका, कुण्डलिनी गुडूची आदि इसी के नाम हैं। गिलोय की बेल प्रायः कुण्डलाकार चढ़ती है। Giloy को अमृता भी कहा जाता है। यह स्वयं भी नहीं मरती है और उसे भी मरने से बचाती है, जो इसका प्रयोग करे। कहा जाता है की देव दानवों के युद्ध में अमृत कलश की बूँदें जहाँ जहाँ पडी, वहां वहां गिलोय उग गई।

यह एक झाडीदार लता है। इसकी बेल की मोटाई एक अंगुली के बराबर होती है इसी को सुखाकर चूर्ण के रूप में दवा के तौर पर प्रयोग करते हैं। बेल को हलके नाखूनों से छीलकर देखिये नीचे आपको हरा,मांसल भाग दिखाई देगा । इसका काढा बनाकर पीजिये । यह शरीर के त्रिदोषों को नष्ट कर देगा । आज के प्रदूषणयुक्त वातावरण में जीने वाले हम लोग हमेशा त्रिदोषों से ग्रसित रहते हैं। त्रिदोषों को अगर मैं सामान्य भाषा में बताने की कोशिश करूं तो यह कहना उचित होगा कि हमारा शरीर कफ ,वात और पित्त द्वारा संचालित होता है । पित्त का संतुलन गडबडाने पर। पीलिया, पेट के रोग जैसी कई परेशानियां सामने आती हैं । कफ का संतुलन बिगडे तो सीने में जकड़न, बुखार आदि दिक्कते पेश आती हैं । वात [वायु] अगर असंतुलित हो गई तो गैस ,जोडों में दर्द ,शरीर का टूटना ,असमय बुढापा जैसी चीजें झेलनी पड़ती हैं ।

अगर आप वातज विकारों से ग्रसित हैं तो Giloy का पाँच ग्राम चूर्ण घी के साथ लीजिये ।

पित्त की बिमारियों में Giloy का चार ग्राम  चूर्ण चीनी या गुड के साथ खालें तथा अगर आप कफ से संचालित किसी बीमारी से परेशान हो गए है तो इसे छः ग्राम कि मात्र में शहद के साथ खाएं ।

Giloy एक रसायन एवं शोधक के रूप में जानी जाती है जो बुढापे को कभी आपके नजदीक नहीं आने देती है । यह शरीर का कायाकल्प कर देने की क्षमता रखती है। किसी ही प्रकार के रोगाणुओं ,जीवाणुओं आदि से पैदा होने वाली बिमारियों, खून के प्रदूषित होने बहुत पुराने बुखार एवं यकृत की कमजोरी जैसी बिमारियों के लिए यह रामबाण की तरह काम करती है । मलेरिया बुखार से तो इसे जातीय दुश्मनी है। पुराने टायफाइड ,क्षय रोग, कालाजार ,पुराणी खांसी , मधुमेह [शुगर ] ,कुष्ठ रोग तथा पीलिया में इसके प्रयोग से तुंरत लाभ पहुंचता है ।

बाँझ नर या नारी को Giloy और अश्वगंधा को दूध में पकाकर खिलाने से वे बाँझपन से मुक्ति पा जाते हैं। इसे सोंठ के साथ खाने से आमवात-जनित बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं ।

Giloy तथा ब्राह्मी का मिश्रण सेवन करने से दिल की धड़कन को काबू में लाया जा सकता है।

इसका काण्ड छोटी अंगुली से लेकर अंगूठे जितना मोटा हो सकता है। इसके पत्ते पान के आकार के होते हैं इसमें ग्रीष्म ऋतु में छोटे−छोटे पीले रंग के गुच्छों में फूल आते हैं। इसके फल मटर के दाने के आकार के होते हैं जो पकने पर लाल हो जाते हैं। औषधि के रूप में इसके काण्ड तथा पत्तों का प्रयोग किया जाता है।

Giloy के काण्ड में स्टार्च के अलावा अनेक जैव सक्रिय पदार्थ पाए जाते हैं। इसमें तीन प्रकार के एल्केलाइड पाए जाते हैं जिनमें बरबेरीन प्रमुख है। इसमें एक कड़वा ग्लूकोसाइड ‘गिलोइन’ भी पाया जाता है। इसके धनसत्व में जो स्टार्च होता है वह ताजे में 4 प्रतिशत से लेकर सूखे में 1.5 प्रतिशत होता है
इसका सेवन खाली पेट करने से aplastic anaemia भी ठीक होता है। इसकी डंडी का ही प्रयोग करते हैं पत्तों का नहीं, उसका लिसलिसा पदार्थ ही दवाई होता है।

डंडी को ऐसे भी चूस सकते है . चाहे तो डंडी कूटकर, उसमें पानी मिलाकर छान लें, हर प्रकार से गिलोय लाभ पहुंचाएगी।
इसे लेते रहने से रक्त संबंधी विकार नहीं होते . toxins खत्म हो जाते हैं , और बुखार तो बिलकुल नहीं आता। पुराने से पुराना बुखार खत्म हो जाता है।

इससे पेट की बीमारी, दस्त,पेचिश, आंव, त्वचा की बीमारी, liver की बीमारी, tumor, diabetes, बढ़ा हुआ E S R, टी बी, white discharge, डेंगू व हिचकी की बीमारी आदि ढेरों बीमारियाँ ठीक करती है।

क्या पेनकिलर ले सकते हैं? अगर हां, तो कब और कितनी मात्रा में?

Thu, 05/17/2018 - 07:15

ज्यादा दर्द होने पर पेनकिलर ले सकते हैं लेकिन डेंगू की आशंका पूरी तरह खत्म होने के बाद ही।  हार्ट, डायबिटिज और किडनी के मरीजों को खासतौर पर पेनकिलर से बचना चाहिए। जरूरत लगे तो पैरासिटामोल (Paracetamol) लें। 500-650 Mg की दिन में दो-तीन बार ले सकते हैं। यह मार्केट में क्रोसिन (Crocin), कालपोल (Calpol) आदि ब्रैंड नेम से मिलती है। बच्चों को हर चार घंटे में 1 मिली प्रति किलो वजन के अनुसार इसकी लिक्विड दवा दे सकते हैं। यह बुखार के अलावा पेनकिलर भी है। जिन्हें बुखार नहीं है, वे ट्रामाडोल (Tramadol) ले सकते हैं। यह मार्केट में अल्ट्रासेट (Ultracet), एक्युपेन (Acupain), डामोडोल (Domadol) आदि नाम से मिलती है। 50-100 Mg की दिन में 2-3 बार तक ले सकते हैं। ये दवाएं सेफ हैं और जब तक जरूरत लगें, ले सकते हैं। बाकी कोई दवा भी दवा डॉक्टर से पूछकर ही लें। वैसे, पेनकिलर कम-से-कम ही खाना चाहिए। कोई भी दवा खाली पेट न लें।

 

तेज पत्ता के फायदे

Thu, 05/17/2018 - 06:00

पाचन में सहायक  तेजपत्ता, पाचन में सहायक होता है और इसके सेवन से कई प्रकार के पाचन सम्बंधी विकार सही हो जाते हैं। अगर आपको कब्ज, एसिड और ऐंठन की शिकायत रहती है तो तेजपत्ता आपके लिए रामबाण साबित हो सकता है।

 

गठिया के रोग में आराम

तेजपत्ते में एंटीफंगल और एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, यह फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन को दूर करने में कारगर होता है। इसके प्रयोग से गठिया के रोग में आराम मिलता है।

 

रूसी दूर करें

तेजपत्ता की सूखी पत्तियों का पाउडर बना लें और इस पाउडर को दही में मिला लें। इस मिश्रण को सिर की त्वचा पर अच्छे से लगा लें और कुछ देर बार धो लें। इससे रूसी निकल जाएगी और खुजली की समस्या से भी आराम मिल जाएगा।

 

डायबटीज में लाभदायक

टाइप 2 प्रकार की डायबटीज होने पर तेजपत्ता आपके लिए अच्छा साबित हो सकता है। यह ब्लड सुगर को नियंत्रित रखता है और दिल को स्वस्थ बनाएं रखता है। इसलिए, अगर आप डायबटीज के शिकार हैं तो तेजपत्ता का इस्तेमाल खाने में करने लगे।

 

निमोनिया

निमोनिया होने पर तेजपत्ते से बना काढ़ा सुबह-शाम पीने से लाभ होता है। इसको बनाने के लिए तेजपत्ता, बड़ी इलाइची, कपूर, गुड़ तथा लौंग सभी को थोड़े से पानी में उबालकर काढ़ा बना लें।

 

दांतों की चमक को बनाएं रखें

दातों का पीला पड़ना एक प्रकार की समस्या है, जिसके निदान के लिए लोग बहुत प्रयास करते हैं। तेजपत्ते की एक पत्ती को लीजिए और इसे अपने दांतों पर रगड़ दीजिए, इससे दांतों का पीलापन दूर हो जाएगा।

 

नींद भगाएं

नींद ज्यादा आने पर तेजपत्ते को पानी में कम से कम 6 घंटे तक भिगों दें और उठने के बाद उस पानी को पी लें। इससे आपको काफी राहत मिलेगी और नींद वाला हैंगओवर उतर जाएगा।

 

खांसी में लाभकारी

अगर आप लगातार होने वाली खांसी से परेशान हैं, तो तेजपत्ता आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता हैं। इसके लिए तेजपत्ता और पीपल की छाल को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाकर उसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर चाटें। या तेजपत्ता का चूर्ण बनाकर उसमें थोड़ा सा शहद और अदरक मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें।

 

फ्रेश और दमकती त्वचा

हाल ही में एक शोध से यह बात सामने आई है कि तेजपत्ता में ऐसे गुण होते हैं जो त्वचा को बेहद दमकदार बनाते हैं। तेजपत्ता डालकर उबाले गए पानी से चेहरा धुलने पर चेहरे में शाइन आ जाती है। साथ ही तेज पत्ता आपके चेहरे पर हो रहे मुँहासे को दूर करने में मदद करता है। इसकी मदद से आपका चेहरा बिना दाग धब्बे का हो जाता है और चमकदार बनता है।

 

किडनी की समस्या दूर करें

तेजपत्ता, किडनी में होने वाली समस्या को दूर करने में सहायक होता है। इसके लिए, तेजपत्ता डालकर पानी उबालें और उस पानी को पिएं।

 

खून का बहना

शरीर के किसी भी अंग से खून निकलने पर तेजपत्ता के सेवन से बंद हो जाता है। नाक, मुंह, मल या यूरीन से खून निकलने पर एक गिलास ठंडे पानी में एक चम्मच तेजपत्ते का चूर्ण हर तीन घंटे के बाद सेवन करने से खून का बहना बंद हो जाता है।

बैक्टीरिया से लड़ता है नीम

Wed, 05/16/2018 - 04:27

दुनिया बैक्टीरिया से भरी पड़ी है। हमारा शरीर बैक्टीरिया से भरा हुआ है। एक सामान्य आकार के शरीर में लगभग दस खरब कोशिकाएँ होती हैं और सौ खरब से भी ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं। आप एक हैं, तो वे दस हैं। आपके भीतर इतने सारे जीव हैं कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते। इनमें से ज्यादातर बैक्टीरिया हमारे लिए फायदेमंद होते हैं। इनके बिना हम जिंदा नहीं रह सकते, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जो हमारे लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। अगर आप नीम का सेवन करते हैं, तो वह हानिकारक बैक्टीरिया को आपकी आंतों में ही नष्ट कर देता है।

आपके शरीर के भीतर जरूरत से ज्यादा बैक्टीरिया नहीं होने चाहिए। अगर हानिकारक बैक्टीरिया की तादाद ज्यादा हो गई तो आप बुझे-बुझे से रहेंगे, क्योंकि आपकी बहुत-सी ऊर्जा उनसे निपटने में नष्ट हो जाएगी। नीम का तरह-तरह से इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया के साथ निपटने में आपके शरीर की ऊर्जा खर्च नहीं होती।

आप नहाने से पहले अपने बदन पर नीम का लेप लगा कर कुछ वक्त तक सूखने दें, फिर उसको पानी से धो डालें। सिर्फ इतने से ही आपका बदन अच्छी तरह से साफ हो सकता है – आपके बदन पर के सारे बैक्टीरिया नष्ट हो जाएंगे। या फिर नीम के कुछ पत्तों को पानी में डाल कर रात भर छोड़ दें और फिर सुबह उस पानी से नहा लें ।

क्या आप भी पेट की समस्याओं से परेशांन हैं?

Tue, 05/15/2018 - 01:26

आजकल पेट की समस्याएं कब्ज, गैस, एसिडिटी, बहुत ही आम हो गईं हैं।  यह छोटी लगने वाली पेट की समस्याएं ही आगे चल कर गम्भीर बीमारियों में बदल जाती हैं। कब्ज अर्थात पेट का ठीक से साफ न होना हज़ार बीमारियों की जड़ माना जाता है।यदि अधिक समय तक कब्ज बनी रहे तो अल्सरेटिव कोलायटिस, कोलन कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होने की आशंका रहती है। एसिडिटी के कारण पेट व् छोटी आंत में अल्सर हो जाते जाते है। जिनका भी आगे चलकर कैंसर में बदलने का खतरा बना रहता है। इसके अतिरिक्त शरीर का अम्ल क्षार घनत्व भी बिगड़ जाता है। जिसके कारण भी शरीर में विभिन्न संमस्याएँ हो जाती हैं। पेट में एसिडिटी रोकने की दवाएं जैसे ओमेप्रजोल( जो ओसिड आदि अनेकों ब्रांड नामों से आती है )को खाना लोगों की दिनचर्या में शामिल हो गया है। कब्ज दूर करने के तमाम तरह के चूर्ण आज कल लोग ले रहे हैं। किंतु यह समस्या का तात्कालिक समाधान ही है। इससे समस्या पूरी तरह ख़त्म नही होती बल्कि दवा या चूर्ण छोड़ते ही पुनः शरू हो जाती है। लंबे समय तक इनके प्रयोग से इनके दुष्प्रभाव जनित संमस्याएँ और शुरू हो जाती है। यहाँ तक की अभी एक रिसर्च में पता चला है कि ओमेप्रजोल, लांसोप्रजोल जैसी दवाओं का प्रयोग पेट के कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ा देता है। ऐसे में समाधान क्या हो। इन समस्याओं का न्यूट्री वर्ल्ड अपने भोज्य पूरक उत्पादों व् भोजन की उचित सलाह द्वारा समाधान देते हैं। ये उत्पाद शरीर की प्राकृतिक क्रिया प्रणाली को सुचारू रूप से ठीक कर इन समस्याओं का हमेशा के लिए अंत कर देते हैं। हज़ारों लोग इन समस्याओं का समाधान न्यूट्री वर्ल्ड द्वारा करवा चुके हैं अब आप की बारी है। समाधान के लिये संपर्क करें।

जानिए: बाबा रामदेव जी कैसे बिताते हैं पूरा दिन.

Mon, 05/14/2018 - 04:14

सुबह 3:30 बजे: बाबा रामदेव अपने दिन की शुरुआत 1-2 गिलास गरम पानी पीने के बाद आंवला और एलोवेरा जूस पीकर करते हैं।   तकरीबन आधा घंटे में फ्रेश हो जाते हैं।

4:00 बजे: योग शिविर जाने से पहले वॉर्मअप में तकरीबन आधा घंटे बिताते हैं। खासतौर पर स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करते हैं। कुछ पर्सनल नोट्स लिखते हैं। इसमें दिन भर के काम और अपने आगे के अजेंडे के बारे में लिखते हैं।

4:30 बजे : योग शिविर से उनके निवास की दूरी तकरीबन 1 किमी है। वह यह दूरी दौड़ कर पूरी करते हैं। इसे वह अपना रोज का रुटीन बताते हैं।

5:00 बजे : रॉक स्टार के स्टाइल में स्टेज पर पहुंचते हैं। लोगों से बात करना शुरू करते हैं और जोक सुनाते हैं। लोगों की सुस्ती भगाने का यह टोटका है। योग चलता रहता है। वह लगातार आध्यात्मिक और योग से जुड़ी बातें बताते रहते हैं। योग करते करते किसी भी आसन में माइक पर बोलते रहने का उनका स्टाइल लाजवाब है। जैसे-जैसे आसन करते जाते हैं, माइक को अपनी ओर घुमाते जाते हैं।

8:00 बजे : मिलने वालों की भीड़ हॉल के बाहर जमा होने लगती है। लाइन में लोग उनसे मिलते हैं। तकरीबन 1 घंटे बाद निवास स्थान पर लौट आते हैं।

9:00 बजे : स्नान करने से पहले आधा लीटर पानी पीते हैं। उसके बाद स्नान करने जाते हैं।

10:00 बजे : नाश्ते में वह सिर्फ एक सेब लेते हैं। इसके बाद वह अपने लिए टाइम निकालते हैं। पढ़ने के शौकीन बाबा रामदेव योग से लेकर अखबारों तक, सब पर नजर रखते हैं। थोड़ी देर में पतंजलि योगपीठ से जुड़े लोग उनसे मिलने आने लगते हैं। वह उनके साथ कोई कागजी काम तो नहीं करते, लेकिन हालचाल लेते हैं और खास मामलों पर रायशुमारी करते हैं।

दोपहर

12 बजे : लंच में 1 मौसमी सब्जी, 2 रोटी और 1 छोटी कटोरी चावल। गौरतलब है कि तकरीबन 6 महीने पहले तक उन्होंने अन्न खाना छोड़ रखा था। इस नियम को उन्होंने एक्सपर्ट्स की सलाह पर 18 साल बाद इस साल ही तोड़ा है।

1 बजे : लंदन से आया एक डेलिगेशन उनसे मिलने का इंतजार कर रहा है। वह उनसे मिलते हैं। इस बीच वह कुछ और लोगों से मिलते हैं, जिनमें दूर-दूर से आए खास (पॉलिटिशन, बिजनसमैन) लोग हैं।

3 बजे : ऑर्गेनाइजेशन के लेवल पर ट्रेनिंग के लिए आध्यात्मिक शिविर का वक्त है। बाबा अपनी रेंज रोवर से फिर बड़े शिविर हॉल की तरफ निकल पड़ते हैं। यह वक्त योग का न होकर आध्यात्मिक प्रवचन का है। इस वक्त वह सुबह के मुकाबले कुछ शांत नजर आते हैं। यह सेशन तकरीबन 1 घंटा चलता है।

शाम

6 बजे : खाना खाए भले ही उन्हें तकरीबन 6 घंटे हो गए हैं, लेकिन उनका काम सिर्फ पानी से चल रहा है। वह तकरीबन हर आधा घंटे में पानी पीते हैं। शाम 7 बजे कुछ लोग मिलने आते हैं।

7:30 : डिनर का टाइम है। डिनर में वह सिर्फ सब्जी और 2 रोटी लेते हैं, चावल नहीं खाते।

रात

8 बजे : मिलने वाले अब भी आ रहे हैं। इनमें वे लोग शामिल हैं, जिन्हें पूरे दिन के इंतजार के बावजूद मिलने का वक्त नहीं मिला। आखिर में बाबा रामदेव की कोशिश रहती है कि सबसे मिल लें। इसके बाद वह कुछ पढ़ने-लिखने का काम करते हैं।

10 बजे : बिस्तर पर जाने का वक्त हो गया है। इससे पहले वह यह बताना नहीं भूलते कि उन्हें सोने के लिए बिस्तर पर लेट कर इंतजार नहीं करना पड़ता। नींद में जाने में सिर्फ 5-10 सेकंड का वक्त लगता है।

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए पीयें मुलेठी की चाय

Sun, 05/13/2018 - 04:13

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए पीयें मुलेठी की चाय------------------ यदि आप लिवर की समस्याओं से ग्रस्त हैं या अपने लिवर को हमेशा स्वस्थ बनाए रखना चाहते हैं तो आज से ही मुलेठी की चाय पीना शुरू कर दे। मुलेठी की चाय के औषधिक गुणों का जिक्र हमारे आर्युवेद में भी किया गया हैं। इसका नियमित रूप से सेवन करने से लिवर मजबूत बनता हैं। मुलेठी की चाय बनाने के लिए यह विधि अपनाए-
1-एक चुटकी मुलेठी के पाउडर को उबलते हुए पानी में डालें। इसके बाद उसमे थोड़ी सी चायपत्ती भी डालें। इस चाय को दस मिनट तक उबाल कर छान लें । जहाँ तक हो सके इसे सुबह गरमागरम ही पियें।
2-दूसरा तरीका यह हैं कि मुलेठी की जड़ का पाउडर बनाकर इसे उबलते पानी में डालें। जब यह ठंड़ा हो जाए तो इसे छान लें। इस चाय रुपी पानी को दिन में एक या दो बार पिएं। पानी में घुली हुई मुलेठी कार्बन टेट्राक्लोराइड से उत्पन्न टॉक्सिक के खिलाफ काफी असरदार है।
3-कीमोथेरेपी से लीवर को जो नुकसान पहुंचती है उसमें भी मुलेठी का सेवन लिवर को बचाने का काम करती है। यह लीवर के अंदर होने वाली फ्री रेडिकल डैमेज को कम करती है। यही कारण है कि डॉक्टर हेपाटाइटिस बी की बीमारी में मुलेठी खाने की सलाह देते हैं।
जो लोग नॉन एल्कोहालिक फैटी लिवर रोगों (जब लिवर में फैट की मात्रा बढ़ जाती है) से पीड़ित होते हैं, उनके लीवर में ट्रांसएमाइनेज एंजाइम्स ALT और AST की मात्रा बढ़ जाती है। स्टडी के मुताबिक मुलेठी का सत्व इन एंजाइम्स की मात्रा को लिवर से कम करता है। इसलिए मुलेठी लिवर के लिए लाभप्रद है। लिवर से निकलने वाले बाइल जूस के स्राव में भी मुलेठी काफी असरदार होती है।
4-ग्लिसराइजिक एसिड के होने के कारण इसका स्वाद साधारण शक्कर से पचास गुना अधिक मीठा होता है। मुलेठी को इसके मीठे स्वाद और एंटी अल्सर एक्शन के लिए जाना जाता  है। यह इंटरफेरॉन के बनने में भी मदद करती है जो कि एक प्रकार की इम्यून कोशिका होती है जो लीवर को बैक्टीरिया से बचाती है।

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