nutriworld

Subscribe to nutriworld feed
Updated: 1 day 7 min ago

आन्त्रिक ज्वर का कारण

Wed, 04/10/2019 - 08:30

इसे छूत का बुखार कहा जाता है | यह मारक महामारी के रूप में भी फैलता है | इस रोग का जीवाणु मुंह के रास्ते पेट में चला जाता है और छोटी आंत में गुच्छों के रूप में जम जाता है, जिससे लम्बे समय तक ज्चर बना रहता है, इसीलिए इसे मियादी बुखार या मन्थर ज्वर भी कहा गया है |

शरीर के अधिक थकने, अधिक उपवास करने, गन्दे स्थानों में रहने तथा दूषित मल के सम्पर्क में आने और दूषित पदार्थ खाने से भी यह रोग होता है | बड़ी आंत तथा छोटी आंत को हानि पहुंचती है | तिल्ली और जिगर भी प्रभावित होते हैं | रक्त और लसीका ग्रन्थियों तथा मल-मूत्र में भी इस रोग के जीवाणु मिलते हैं | इसके कारण शरीर में दाह होता है, रोगी भ्रम में पड़ा रहता है, वमन होता है और प्यास लगती है | रोगी की नीद उड़ जाती है, मुंह और जीभ सूखती रहती है | गर्दन, पेट, छाती आदि पर दाने निकल आते हैं |

आन्त्रिक ज्वर के लक्षण Typhoid Fever Ke Lakshan

टायफाइड अथवा आन्त्र ज्वर में आंतों में विकार के साथ लगातार बुखार बना रहता है, तिल्ली बढ़ जाती है | शरीर पर पित्ती भी निकल आती है | छोटी आंत की झिल्ली में सूजन हो जाती है, उसमें घाव हो जाते हैं |

आन्त्रिक ज्वर का उपचार

1. जिन ऋतुओं में इसका प्रकोप अधिक होता है उनमें नियमित रूप से भोजन के पूर्व नीबू का सेवन करने से रोग से बचाव हो जाता है | रोगी को पूर्ण विश्राम करना चाहिए | औषधि के साथ-साथ इस रोग में उचित सेवा-परिचर्या भी आवश्यक है |

2. रोगी के कमरे में पूर्ण शान्ति रहनी चाहिए | अधिक तेज प्रकाश से उसे बचाना चाहिए | रोगी का बिस्तर आरामदायक होना आवश्यक है | रोगी को प्रतिदिन स्पंज करना चाहिए तथा उसके भी कपड़े-बदलने चाहिए और ऐसा उपाय करना चाहिए उससे शैयाव्रण (Bed-sores) न होने पाएं | रोगी को थोड़ा-थोड़ा जल अवश्य पिलाते रहना चाहिए |

3. प्यास तथा दाह अधिक होने पर मौसमी का रस पीने के दिन में एक-दो बार देना चाहिए |

4. दुर्बल व्यक्तियों को प्रोटीन तथा विटामिन का पूरक आहार देना चाहिए |

5. ज्वर उतारने के लिए शीघ्रता न करें |

6. हृदय, मस्तिष्क तथा आंतों की सुरक्षा पर ध्यान दें |

7. ज्चर के द्वितीय सप्ताह में मलावरोध की प्रवृत्ति रहती है, अतः ग्लिसरीन द्वारा एनिमा दिया जा सकता है |

8. छेने का पानी पिलाने से भी मल की गांठे साफ हो जाती हैं |

9. रोगी के लिए दूध सर्वोत्तम आहार है | यदि दूध न पच पाए तो फटे दूध का पानी देना चाहिए |

10. रोगी को समय-समय पर उबालकर ठण्डा किया हुआ जल ग्लूकोज में मिलाकर देना चाहिए | चतुर्थ सप्ताह में धीरे-धीरे दूध की मात्रा बढ़ानी चाहिए |

11. साबूदाना आदि का सेवन किया जा सकता है |

12. रोगी के लिए संतरे का सेवन भी लाभकारी है |

13. रोगमुक्त हो जाने के बाद मूंग की दाल का पानी देना चाहिए | साथ में परवल भी दिया जा सकता है |

14. दस्त हो रहें हों तो उसे रोकने के लिए चिकित्सा करें ताकि कमजोरी न हो | यदि मलावरोध हो तो औषधियों का उपयोग किया जा सकता है |

15. जब तक आन्त्र में शोथ और क्षय रहता है तब तक रोगी को मलमूत्र त्याग के लिए उठने नहीं देना चाहिए | लेटे हुए ही मलमूत्र कराना चाहिए | रोग के अन्त में दुर्बलता की ओर विशेष ध्यान रखना चाहिए |

16. जो पौष्टिक आहार सरलता से पच सके वही खाने को दें |

नियमित रूप से प्रातःकाल गुनगुने पानी में कपड़ा भिगोकर रोगी का सारा शरीर धीरे-धीरे पोंछकर साफ करना चाहिए अथवा मुलायम कपड़े से हलके से रगड़ते हुए सफाई करनी चाहिए |

कैसे बनाएं मेथी का पानी

Tue, 04/09/2019 - 08:30

रात को एक बड़ी चम्मच मेथी के दानों को दो गिलास पानी मे भिगोने के लिए रख दें। और सुबह इसे छानकर पीएं।

मेथी के अन्य फायदे

बालों पर मेथी के दानों का बना पेस्ट लगाने से बालों का झड़ना दूर हो जाता है।मेथी से निकले पानी को दांतों पर रगड़ने से दांत पक्के और मजबूत बनते हैं।मधुमेह और दिल की बीमारी से परेशान लोगों को मेथी की सब्जी में प्याज डालकर खाना चाहिए।मेथी खाने से बुखार, कफ और पेट की गैस खत्म होती है।आंवला, रीठा के छिलके, काली मिट्टी, मेथी दाना, शीकाकाई व भांगरे के मिश्रण का बालों पर लेप लगाएं और 2 घंटे के बाद पानी से धो लें। एैसा करने से बाल चिकने, काले और मुलायम बनते हैं।मेथी के पाउडर को दूध के साथ लेने से मधुमेह ठीक होने लगता है।कान दर्द, लकवा और मिर्गी में मेथी काढे का सेवन करने से फायदा मिलता है।एक कप पानी में 2 चम्मच मेथी को उबालकर पीने से पेट के छाले और आंतों की सफाई हो जाती है।

मेथी खून को साफ करती है साथ ही वायुरोग, कमर दर्द आदि में राहत देती है। मेथी बच्चे की मां के दूध को भी बढ़ाती है। मेथी, खाने की अरूचि, खांसी, उल्टी आदि में भी राहत देती है।

सावधानी
मेथी गर्म होती है इसलिए अत्याधिक इसका सेवन न करें। यह पित्त को बढ़ाती है। जो लोग पेशाब में खून, मासिक धर्म और खूनी बवासीर से परेशान हों वे लोग मेथी का सेवन न करें।

आइये जानते हैं तुलसी के फायदे...

Mon, 04/08/2019 - 08:30

1. तुलसी रस से बुखार उतर जाता है। इसे पानी में मिलाकर हर दो-
तीन घंटे में पीने से बुखार कम हो जाता है।

2. कई आयुर्वेदिक कफ सिरप में तुलसी का इस्तेमाल अनिवार्य है।
यह टी.बी,ब्रोंकाइटिस और दमा जैसे रोंगो के लिए भी फायदेमंद
है।

3. जुकाम में इसके सादे पत्ते खाने से भी फायदा होता है।

4. सांप या बिच्छु के काटने पर इसकी पत्तियों का रस,फूल और
जडे विष नाशक का काम करती हैं।

5. तुलसी के तेल में विटामिन सी,कै5रोटीन,कैल्शियम और
फोस्फोरस प्रचुर मात्रा में होते हैं।

6. साथ ही इसमें एंटीबैक्टेरियल,एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण
भी होते हैं।

7. यह मधुमेह के रोगियों के लिए भी फायदेमंद है।साथ ही यह
पाचन क्रिया को भी मज़बूत करती हैं।

8. तुलसी का तेल एंटी मलेरियल दवाई के तौर पर इस्तेमाल
किया जा सकता है। एंटीबॉडी होने की वजह से यह
हमारी इम्यूनिटी भी बढा देती है।

9. तुलसी के प्रयोग से हम स्वास्थय और
सुंदरता दोनों को ही ठीक रख सकते हैं।

सावधानी :

फायदे जानने के बाद तुलसी के सेवन में अति कर देना नुकसानदायक
साबित होगा। क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है इसलिए दिन
भर में 10-12 पत्तों का ही सेवन करना चाहिए। खासतौर पर
महिलाओं के लिए भले ही तुलसी एक वरदान की तरह है लेकिन
फिर भी एक दिन में पांच तुलसी के पत्ते पर्याप्त हैं। हां,
इसका सेवन छाछ या दही के साथ करने से इसका प्रभाव संतुलित
हो जाता है। हालांकि यह आर्थराइटिस, एलर्जी, मैलिग्नोमा,
मधुमेह, वायरल आदि रोगों में फायदा पहुंचाती है। लेकिन
गर्भावस्था के दौरान इसके सेवन का ध्यान रखना जरूरी है।
गर्भावस्था के दौरान अगर दर्द ज्यादा होता है तब तुलसी के
काढे से फायदा पहुंच सकता है। इसमे तुलसी के पत्तो को रात भर
पानी मे भिगो दें और सुबह उसे क्रश करके चीनी के साथ खाएं
ब्रेस्ट- फीडिंग के दौरान भी तुलसी का काढा फायदेमंद
होता है। इसके लिए बीस ग्राम तुलसी का रस और मकई के
पत्तों रस मिलाएं, इसमें दस ग्राम अश्वगंधा रस और दस ग्राम शहद
मिला कर खाएं।

खाइये ये फूड और कीजिये अपने लिवर को साफ

Sun, 04/07/2019 - 08:30

लीवर शरीर के महत्वपूर्ण अंगो में से एक है जिसका स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक है। लिवर के स्वस्थ रहने से इम्यून सिस्टम अच्छे से काम करता है, किसी भी तरह की एलर्जी से बचाता है साथ ही वजन पर भी नियंत्रण रखता है। अपने लिवर को स्वस्थ रखने के लिए आप वही आहार लें जो उसकी सफाई करे। 
लिवर की सफाई करने के लिए आपको एक दो दिन पहले से हल्का उपवास रखना पड़ता है जिससे शरीर से मौजूदा विषाक्त पदार्थ बाहर निकल सके।

इस उपवास के दौरान आपको खूब पानी पीना होता है साथ ही सब्जियों का रस पीना चाहिए और फल खाने चाहिए। सभी विषाक्त पदार्थ के शरीर से निकल जाने के बाद आप अपना भोजन पहले की तरह खा सकते हैं। 
यह लिस्ट है उन खाद्य पदार्थों की जो आपके लिवर को क्लेनज़ करेंगी। लिवर क्लेनज़ डाइट में ताज़ा भोजन है साथ ही खूब सारा पानी पीने की सलाह दी जाती है। ब्राउन राइस और ओटमील से पाचन अच्छा होता है जबकि सेम में फाइबर पता जाता है।
कच्ची सब्जियों और फलों में काफी अच्छी मात्रा में फाइबर, विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं। जितना हो सके आर्गेनिक और ताजा सब्जियों और फलों का सेवन करें।
आप अपनी पसन्द की सब्जियों और फलों का रस भी निकाल कर पी सकते हैं। लिवर क्लेनज़िंग के लिए ओमेगा -3 बहुत फायदेमंद होता है यह अलसी, अखरोट और मछली के तेल में पाया जाता है।
चूंकि सारा ध्यान स्वस्थ आहार पर है इसलिए आपको किसी भी तरह का अन्हेल्थी फ़ूड जो पैकेजिंग में आता है जैसे बॉक्सेस, बैग और कैन्स में नहीं खाना है। ज्यादा फैटी मीट जैसे पोर्क और तली चीज़ें बिल्कुल नहीं खानी है। खाद्य पदार्थ जिसमें ऐडिटिव, कीटाणुनाशक और प्रीज़र्वटिव मिला हो बिल्कुल नहीं खाना है।
शराब लिवर के लिए ज़हर की तरह होती है इसलिए इसे किसी भी हालत में नहीं पीना है। ज्यादा खाने से बचें और जितना हो सके पूरे दिन में थोड़ा थोड़ा खाएं। सुबह के वक़्त भर पेट नाश्ता करें और रात में हल्का खाना खाएं साथ ही कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लें। 
Source: hindi.boldsky.com

 

 

फूड सप्लीमेंट्स क्या होते हैं इनकी क्यों जरूरत होती है

Sat, 04/06/2019 - 14:37

दोस्तों आज हम आपको बताएंगे कि फूड सप्लीमेंट्स क्या होते हैं इनकी क्यों जरूरत होती है इनके बारे में बहुत सी भ्रांतियां भी हैं जिनको आज हम दूर करेंगे कुछ लोगों का मानना है कि यह सेहत के लिए बहुत अच्छे होते हैं और कुछ लोगों का यह विचार है कि यह सेहत के लिए अच्छे नहीं होते हैं इन पर पैसा खर्च करना फ़िज़ूल खर्ची है आज हम यही जानेंगे । कि आखिर सच्चाई क्या है । फूड सप्लीमेंट्स को हिंदी में भोज्य पूरक कहते हैं जिसको आम बोलचाल में कहेंगे जो भोजन की पूर्ति करें अर्थात यह भोजन नहीं है किंतु भोजन की पूर्ति करते हैं हमें जानेंगे कि आखिर भोजन में कमी किस चीज की है जिसकी यह पूर्ति करते हैं मैं आज आपको यह बताना चाहूंगा जो हम भोजन ग्रहण कर रहे हैं वह हमारे शरीर में तीन काम करता है इसका पहला कार्य है शरीर का निर्माण करना और दूसरा कार्य है शरीर को ऊर्जा देना और तीसरा कार्य है शरीर की क्रिया विधि को सुचारु रुप से चलाना प्रोटीन व खनिज जैसे कैल्शियम मैग्नीशियम शरीर का निर्माण करते हैं शरीर को ऊर्जा देने का कार्य कार्बोहाइड्रेट और वसा करते हैं शरीर की क्रिया विधि को सुचारु रुप से चलाने के लिए विटामिन और मिनरल्स की आवश्यकता होती है इसके अतिरिक्त कुछ अमीनो एसिड व फैटी एसिड्स भी शरीर की क्रिया विधि को सुचारु रुप से चलाने के लिए आवश्यक होते हैं। किंतु आज के हमारे भोजन की समस्या यह है कि इसमें शरीर को ऊर्जा देने वाले तत्व तो बहुतायत में हैं किंतु शरीर का निर्माण करने वाले तत्व कम हो गए हैं और शरीर की क्रिया प्रणाली को सुचारु रुप से चलाने वाले सूक्ष्म तत्व तो खतरनाक स्तर तक कम हो चुके हैं। जिसके कारण ही आज हम अनेकों स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं आज हमारा देश डायबिटीज में विश्व की राजधानी बन चुका है यानी कि यानि की की विश्व में सबसे अधिक डायबिटीज के रोगी हमारे देश में हैं हर दूसरा भारतीय पेट के रोगों से ग्रसित है। अब ऐसी ऐसी सी बीमारियां हो रही हैं जो डॉक्टर तक की समझ में नहीं आ रही हैं लोग एलोपैथिक दवाइयों के चंगुल में फंसे हुए हैं। और अपने जीवन को ठीक से जी नहीं पा रहे हैं। परमात्मा ने हमारा शरीर इस प्रकार बनाया है कि यह बीमार पड़ने पर अपने आप को स्वयं ही ठीक कर लें लेकिन इसके लिए शरीर को उचित वातावरण चाहिए होता है यदि हम पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करें और उचित दिनचर्या का पालन करें और प्रदूषण मुक्त वातावरण में में रहे तब हम बीमार ही नहीं पड़ेंगे और यदि पड़ भी जाएंगे तो शरीर उसे अपने आप ही ठीक कर लेगा। लेकिन आज की हमारी समस्या यह है कि हमारे भोजन से सूक्ष्म पोषक तत्व जो हमारे शरीर के लिए अति आवश्यक हैं गायब हो चुके हैं वह हमारा पर्यावरण प्रदूषित हो चुका है। आज हम यह जानेंगे कि आखिर हमारे भोजन में यह इतने कम क्यों हो गए हैं साथियों इसका कारण है हमारे भोजन उगाने के तरीके से पकाने के तरीके सही ना होना ।साथियों जो सूक्ष्म पोषक तत्व हमें हमारे भोजन से हमें मिलते हैं वे हमारे भोजन में उस जमीन से आते हैं जिस पर उगते हैं। आजकल हमारे खेतों में से यूरिया डीएपी आर एंड पी के का प्रयोग किया जा रहा है जिससे पौधों को सिर्फ 3 पोषक तत्व ही प्राप्त होते हैं जबकि एक पौधे को स्वस्थ रहने के लिए 16 अन्य प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी आवश्यकता होती है और आज की खेती करने के तौर-तरीकों के कारण जमीन में उन सूक्ष्म तत्वों की कमी हो गई है। जिस कारण वह तत्व उस पर उगने वाले फल सब्जियों में नहीं पहुंच पाते हैं। हमारे भोजन के पकाने का तरीका भी ऐसा है जिस से बहुत सी विटामिन नष्ट हो जाते हैं और जिसका परिणाम यह होता है कि उनकी कमी हमारे शरीर में भी हो जाती है। तो साथियों इसका समाधान क्या है या तो हम वह फल और सब्जियां खाएं जो ऑर्गेनिक तरीके से उगाई गई हो यानि कि उस जमीन में कोई रासायनिक खाद ना डाली गई हो सिर्फ कूड़े-कचरे से बनी या किसी अन्य तरीके से बनी जैविक खाद ही डाली गई हो किंतु यह सब आज की परिस्थितियों में हर किसी के लिए संभव नहीं है हमारे यहां बाजार में ऑर्गेनिक तरीके से उगाये गए फल और सब्जी हर जगह उपलब्ध भी नहीं हैं और जहां यह उपलब्ध हैं वहां यह बहुत अधिक महंगे हैं अतः यह सामान्य जनमानस की पहुंच से दूर है ऐसे में आम लोग क्या करें। इसका दूसरा उपाय है फूड सप्लीमेंट्स का सेवन करें फूड सप्लीमेंट्स में वही सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं जो हमें भोजन से मिलने चाहिए थे किंतु पूरी मात्रा में नहीं मिल पाए थे आधुनिक विज्ञान में पोषक तत्वों को गोली में या कैप्सूल्स में उपलब्ध करवा दिया है जिससे यह बहुत ही सस्ते दामों में हर किसी के लिए उपलब्ध हो गए हैं इनको लेना बहुत ही आसान है इनको किसी भी समय खाने के नाश्ते के साथ ले सकते हैं उनको खाने या नाश्ते के साथ लेना ही ज्यादा अच्छा रहता है क्योंकि यह भोजन के ही तत्व है जिससे यह भोजन में अच्छी प्रकार से मिल जाते हैं और आसानी से शरीर को उपलब्ध हो जाते हैं इनका भोजन के साथ लिए जाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि कुछ पोषक तत्व दूसरे पोषक तत्वों के अवशोषण में व निर्माण में सहायक होते हैं जिससे भोजन में पहले से उपलब्ध पोषक तत्व हमें आसानी से प्राप्त हो जाते हैं । हमारी आज की अनेकों स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं पोषक तत्वों की कमी के कारण ही है और यदि पोषक तत्वों को फूड सप्लीमेंट के माध्यम से लिया जाए तो वे समस्याएं आसानी से ठीक हो सकती हैं जैसे पेट संबंधित समस्याएं कब्ज गैस एसिडिटी आंतों की सूजन अपच बदहजमी आदि समस्याएं पोषक तत्वों के माध्यम से आसानी से ठीक हो जाती हैं और ऐसा हमारा अनुभव है आजकल न्यूरो संबंधित समस्याएं भी बहुत तेजी से बढ़ती जा रही हैं जैसे डिप्रेशन माइग्रेन सिर में दर्द तनाव अनिद्रा इत्यादि और इन समस्याओं के लिए लोग न्यूरो डॉक्टर की दवाइयां खाते रहते हैं और उनका स्वास्थ्य पहले से और अधिक खराब हो जाता है क्योंकि इन दवाओं के बहुत अधिक साइड एफ्फेक्ट होते हैं। मेरा यह स्वयं का अनुभव है।

 

 

 

वीडियो 1, क्या आपका डॉक्टर पोषक तत्वों के बारे में जनता है ?

Sat, 04/06/2019 - 14:36

This video is based on book " what your doctor don't know about nutritional medicine may be killing you" हिंदी में इस पुस्तक का अनुवाद " पुस्तक क्या आपका डॉक्टर पोषक तत्वों के बारे में जानता है "

 

 

 

फ्री रेडिकल्स क्या होते हैं ? जानिए इनके बारे में।

Sat, 04/06/2019 - 14:35

फ्री रेडिकल्स क्या होते हैं और यह किस प्रकार हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। क्या आपका डॉक्टर पोषक तत्वों के बारे में जनता है।

 

 

 

वीडियो 3 क्या आपका डॉक्टर पोषक तत्वों के बारे में जानता है ?

Sat, 04/06/2019 - 14:34

शरीर की मैश यूनिट अर्थात मरम्मत की इकाई, what your doctor doesn't know about nutritional medicine may be killing you. क्या आपका डॉक्टर पोषक तत्वों के बारे में जनता है।

 

 

 

वीडियो 4 अगर आपको दिल की बीमारी है तो जरूर देखें ये वीडियो

Sat, 04/06/2019 - 14:32

क्या आपका डॉ पोषक तत्वों के बारे में जनता है, इस वीडियो में बताया गया है कि कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना ह्रदय रोग होने का कारण नही है बल्की उसका ऑक्सीडेशन ही कारण है, अगर ह्रदय रोग से बचना है तो एंटीऑक्सीडेंट का सेवन अवश्य करना चाहिए

 

 

 

वीडियो 5 हार्ट का नया दुश्मन अगर हार्ट की बीमारी से बचना है तो जरूर जान लीजिए।

Sat, 04/06/2019 - 14:28

होमोसिस्टाइन हार्ट की बीमारी का नया दुश्मन अगर आपके शरीर में होमोसिस्टाइन की मात्रा देखें तो आप को हार्टअटैक होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है अगर आप हार्टअटैक से बचे रहना चाहते हैं तो होमोसिस्टाइन का चेकअप अवश्य कराएं अभी तक कोलेस्ट्रॉल को ही दोषी माना जाता था लेकिन अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने कोलेस्ट्रॉल को दोष मुक्त कर दिया है

 

 

 

हृदय की मांशपेशियों की कमजोरी का न्युट्रिशन द्वारा समाधान

Sat, 04/06/2019 - 14:27

कार्डियोमायोपैथी में ह्रदय की मांशपेशियां कमजोर हो जाती हैं।हृदय का आकार बढ़ जाता है और ह्रदय के खून को पंप करने के शक्ति घट जाती है कोएंजाइम q10 काफी इफेक्टिव है,

 

 

 

क्या आपका डॉक्टर पोषक तत्वों के बारे में जानता है? चैप्टर 8 कैंसर और कीमोंप्रीवेंशन।

Sat, 04/06/2019 - 14:26

आगे उन्होंने मिशेल की कहानी शेयर की है मिशेल 4 साल की एक सुंदर बच्ची थी उसको पीठ और पेट की तकलीफ रहती थी जब डॉक्टरों ने उसका परीक्षण किया तो पाया कि उसको न्यूरोब्लास्टोमा नामक कैंसर है। पूरा परिवार गहरे सदमे में डूब गया बीमारी का पता लगने के बाद मिशेल को सर्जरी के लिए ले जाया गया सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने देखा कि मिशेल खटीमा फैल चुका है अब इसे हटाने का कोई रास्ता नहीं था साथियों जब मैं बता दूं आपको कि कैंसर की सर्जरी प्रथम चरण में ही हो सकती है जब कैंसर जहां पर हुआ है वहीं पर स्थित होता है तब सर्जरी द्वारा ट्यूमर को हटाया जा सकता है लेकिन जब कैंसर पूरे शरीर में फैल जाता है तो सर्जरी से कोई मदद नहीं मिलती तो सिर्फ कीमोथेरेपी ही एक रास्ता बचता है थोड़ा तो साथियों डॉ मिशेल के बचने के बारे में आशावादी नहीं थे मिशेल की मानें डॉक्टर रेंड स्टैंड से संपर्क किया और उन्होंने कहा की बच्ची को नुकसान ना हो उसके लिए वह कुछ भी करने को तैयार है उसको अतिरिक्त पोषक तत्व देना शुरू किया लेकिन उस के कैंसर के चिकित्सक इस पक्ष में नहीं थे कि उसको कुछ अलग से दिया जाए कीमोथेरेपी में पूरे शरीर में बहुत अधिक कमजोरी आ जाती है ऐसे में मिशेल की हालत बिगड़ने लगी सभी को यह चिंता लगी हुई थी कि वह जिंदा रह नहीं पाएगी या नहीं लेकिन मिशेल बड़ी साहसी बच्ची थी और उसने सब कुछ सहन किया उसका टयूमर सिकुड़ने लगा इस बात ने डॉक्टरों का हौसला बढ़ा दिया अब डॉक्टरों को लगने लगा कि ट्यूमर का ऑपरेशन करके निकाला जा सकता है। डॉक्टरों ने ऑपरेशन करके उसके टयूमर निकाल दिए और उन्होंने ऑपरेशन थिएटर से निकलने के बाद मिशेल की मां को बताया कि कीमोथेरेपी के प्रति इससे अच्छी प्रतिक्रिया कोई नहीं हो सकती थी लेकिन मिशेल का इलाज ही पर खत्म नहीं हो रहा था अब उसे बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन की जरूरत थी मिशेल के फादर भी डॉक्टर थे उन्होंने कहा कि ब्राउन बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन तभी करवाएंगे जबकि उस को अतिरिक्त पोषक तत्व दिए जाते रहे हैं लेकिन कैंसर विशेषज्ञ कुछ भी दिए जाने के पक्ष में नहीं थे लेकिन उसके पिता के तर्कों के आगे उनकी एक न चली और उसका बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया उसके और उसको पोषक तत्व भी जारी रहे साथियों आपने देखा कि किस प्रकार उपरोक्त दोनों मामलों में एंटीऑक्सीडेंट्स ने रोगियों की मदद की किस प्रकार उन्हें कीमोथेरेपी और रेडियो थेरेपी को और प्रभावी बनाया इनको लेना ज्यादा महंगा भी नहीं है इन से कैंसर का खतरा भी कम होता है कुछ लोगों को इलाज के बाद दोबारा कैंसर हो जाता है इनको लेते रहने से उसकी भी संभावना बहुत कम हो जाती है कैंसर की दवाइयों की बहुत अधिक साइड इफेक्ट्स होते हैं जिनको जीवन भर नहीं लिया जा सकता लेकिन एंटीऑक्सीडेंट्स को पूरे जीवन भर लिया जा सकता है उन्होंने कहा है कि डॉक्टर स्कोर इन के प्रयोग के मामले में अधिक उदार होने की जरूरत है

 

 

 

इस वीडियो को देखने के बाद आप संतरे के छिलके कभी नहीं फेंकेंगे

Sat, 04/06/2019 - 09:47

संतरे के छिलके संतरे से 4 गुना ज्यादा फायदेमंद होते हैं इसमें विटामिन सी विटामिन ए पर्याप्त मात्रा में होता है कैल्शियम मैग्नीशियम जैसे खनिज लवण भी होते हैं यह सुखा कर फेस पैक के लिए उपयोग किया जा सकता है इसको कच्चा भी खाया जा सकता है इसको केक में भी प्रयोग कर सकते हैं और उसको उबालकर चाय की तरह पी भी सकते हैं

 

 

 

माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग होने का कारण-

Sat, 04/06/2019 - 08:30

माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग रोगी व्यक्ति को दूसरे रोगों के फलस्वरूप हो जाता है जैसे- नजला, जुकाम, शरीर के अन्य अंग रोग ग्रस्त होना, पुरानी कब्ज आदि।
2. स्त्रियों को यदि मासिकधर्म में कोई गड़बड़ी हो जाती है तो इसके कारण स्त्रियों को माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।
3. आंखों में दृष्टिदोष तथा अन्य रोग होने के कारण भी माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।
4. यकृत (जिगर) में किसी प्रकार की खराबी तथा शरीर में अधिक कमजोरी आ जाने के कारण व्यक्ति को माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।
5. असंतुलित भोजन का अधिक उपयोग करने के कारण रोगी को माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो सकता है।
6. अधिक श्रम-विश्राम करने, शारीरिक तथा मानसिक तनाव अधिक हो जाने के कारण भी यह रोग व्यक्तियों को हो सकता है।
7. औषधियों का अधिक उपयोग करने के कारण भी माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) हो जाता है।
माइग्रेन रोग से पीड़ित व्यक्ति का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-
1. इस रोग से पीड़ित रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से इलाज करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को रसाहार (चुकन्दर, ककड़ी, पत्तागोभी, गाजर का रस तथा नारियल पानी) आदि का सेवन भोजन में करना चाहिए और इसके साथ-साथ उपवास रखना चाहिए।
माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) से पीड़ित रोगी को अधिक मात्रा में फल, सलाद तथा अंकुरित भोजन करना चाहिए और इसके बाद सामान्य भोजन का सेवन करना चाहिए।
3. रोगी व्यक्ति को अपने भोजन में मेथी, बथुआ, अंजीर, आंवला, नींबू, अनार, अमरूद, सेब, संतरा तथा धनिया अधिक लेना चाहिए। माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) से पीड़ित रोगी को भोजन संबन्धित गलत आदतों जैसे- रात के समय में देर से भोजन करना तथा समय पर भोजन न करना आदि को छोड़ देना चाहिए।
4. रोगी व्यक्ति को मसालेदार भोजन का उपयोग नहीं करना चाहिए तथा इसके अलावा बासी, डिब्बाबंद तथा मिठाइयों आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
5. माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग में रोगी व्यक्ति को कुछ दिनों तक तुलसी के पत्तों का रस शहद के साथ सुबह के समय में चाटना चाहिए तथा इसके अलावा दूब का रस भी सुबह के समय में चाट सकते हैं। जिसके फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
6. माइग्रेन रोग (आधे सिर में दर्द) का इलाज करने के लिए पीपल के कोमल पत्तों का रस रोगी व्यक्ति को सुबह तथा शाम सेवन करने के लिए देने के फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
7. माइग्रेन रोग का इलाज करने के लिए रोगी व्यक्ति के माथे पर पत्ता गोभी का पत्ता प्रतिदिन बांधना चाहिए, जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
8. प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा नाक से भाप देकर रोगी व्यक्ति के माइग्रेन रोग को ठीक किया जा सकता है। नाक से भाप लेने के लिए सबसे पहल एक छोटे से बर्तन में गर्म पानी लेना चाहिए। इसके बाद रोगी को उस बर्तन पर झुककर नाक से भाप लेना चाहिए। इस क्रिया को कुछ दिनों तक करने के फलस्वरूप माइग्रेन रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
9. माइग्रेन रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकर के स्नान भी हैं जिन्हे प्रतिदिन करने से रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है। ये स्नान इस प्रकार हैं-रीढ़स्नान, कुंजल, मेहनस्नान तथा गर्मपाद स्नान।
10. माइग्रेन (आधे सिर में दर्द) रोग का इलाज करने के लिए प्रतिदिन ध्यान, शवासन, योगनिद्रा, प्राणायाम या फिर योगासन क्रिया करनी चाहिए। इसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

 

आयुर्वेद से गोरापन

Fri, 04/05/2019 - 08:30

कुछ दिन पहले हमने पूछा था आपको आयुर्वेद में किस विषय के बारे में जानना चाहेंगे तो बहुत से लोगो ने त्वचा और सुन्दरता के लिए सलाह मांगी थी सही भी है  भारत में गोरेपन को खूबसूरती का पैमाना माना जाता है। इसी खूबसूरती को हासिल करने के लिए तरह-तरह के उपाय भी किए जाते हैं। महंगी से महंगी क्रीम, लोशन आदि सबका उपयोग किया जाता है। लेकिन यह भी सच है कि रंगत केवल एक ही रात में नही बदली जा सकती इसमें समय लगता है। अगर आप भी अपनी रंगत को गोरा करना चाहते है तो घर में उपलब्‍ध चीजों की सहायता से ऐसा किया जा सकता है।

आइए जानें घरेलू उपायों के बारें में एक बाल्टी ठण्डे या गुनगुने पानी में दो नींबू का रस मिलाकर गर्मियों में कुछ महीने तक नहाने से त्वचा का रंग निखरने लगता है।

आंवले का मुरब्बा रोज खाने से दो-तीन महीने में ही रंग निखरने लगता है।

गाजर का जूस आधा गिलास खाली पेट सुबह लेने से एक महीने में रंग निखरने लगता है।

पेट को हमेशा ठीक रखें, कब्ज न रहने दें।

अधिक से अधिक पानी पीएं।

चाय कॉफी का सेवन कम करें।

रोजाना सुबह शाम खाना खाने के बाद थोड़ी मात्रा में सोंफ खाने से खून साफ होने लगता है और त्वचा की रंगत बदलने लगती है।
  
गोरी त्वचा पाने के घरेलू उबटन- इन सब उपायों के अलावा आप विभिन्न प्रकार के घरेलू उबटन लगा कर भी अपनी त्वचा की रंगत निखारी जा सकती है।
 
हल्दी पैक-त्वचा की रंगत को निखारने के लिए हल्दी एक अच्छा तरीका है। पेस्ट बनाने के लिए हल्दी और बेसन या फिर आटे का प्रयोग करें। हल्दी में ताजी मलाई, दूध और आटा मिला कर गाढा पेस्ट बनाएं, इस पेस्ट को अपने चेहरे पर 10 मिनट लगाएं और ठंडे पानी से धो लें।
  
हनी आल्मड स्क्रब-बादाम भी रंगत निखारने का काम करता है। रात को 10 बादाम पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उसे छील कर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट में थोड़ा सा शहद मिलाएं और इस पेस्ट को अपनी त्वचा पर लगाकर स्क्रब करें।
  
चंदन - गोरी रंगत देने के अलावा यह एलर्जी और पिंपल को भी दूर करता है। पेस्ट बनाने के लिए चंदन पाउडर में 1 चम्मच नींबू और टमाटर का रस मिलाएं और पेस्ट को अपने चेहरे और गर्दन में अच्छी तरह से लगाकर थोड़ी देर बाद ठंडे पानी से धो लें।
  
केसर पैक - उबटन बनाने के लिए आपको दही और क्रीम में थोड़ा सा केसर मिला लें। इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं। सूखने के बाद इसे धो लें। केसर के इस उबटन से भी कुछ दिन में आपकी त्वचा गोरी होने लगेगी।
  
चिरौंजी का पैक - गोरी रंगत के लिए मजीठ, हल्दी, चिरौंजी का पाउडर लें इसमें थोड़ा सा शहद, नींबू और गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे, गरदन, बांहों पर लगाएं और एक घंटे के बाद चेहरा धो दें। ऐसा सप्ताह में दो बार करने से चेहरे का रंग निखर जाएगा।
  
मसूर दाल पैक - मसूर की दाल का पाउडर लें इसमें अंडे की जर्दी, नीबू का रस व कच्चा दूध मिलाकर पेस्ट बना लें। रोज इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं, सूखने पर ठंडे पानी से धो लें। चेहरे का रंग निखर जाएगा।
  
बेसन का उबटन - बेसन 2 चम्मच, सरसों का तेल 1 चम्मच और थोड़ा सा दूध मिला कर पेस्ट बना लें। पूरे शरीर पर इस उबटन को लगा लें। कुछ देर बाद हाथ से रगड कर छुडाएं और स्नान करें। त्वचा गोरी व मुलायम हो जाएगी।
  
इन सब घरेलू उपायों को अपना कर आप कुछ ही दिनों में स्वस्थ, सुंदर, चमकदार और गोरी त्वचा पा सकती है।

Source: http://health-blogs-in-blog.blogspot.in/...

चर्बी घटाने का सबसे आसान तरीका

Thu, 04/04/2019 - 08:30

बढ़ते वजन से परेशान ज्‍यादातर लोगों के लिए वजन घटाने की कोशिश एक मुद्दे की तरह होती है। इसके लिए वह जिम, योग और विशेष प्रकार की डाइट को भी अपनाते हैं। इन तरीकों में से अधिकांश बहुत प्रभावी होते हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि कुछ खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल कर आप आसानी से फैट कम करने में सफल हो सकते हैं। हालांकि आपको इस बात पर विश्‍वास नहीं हो रहा होगा लेकिन यह सच है ऐसे खाद्य पदार्थ चयापचय को बढ़ाकर, फैट की रिहाई करने वाले हार्मोंन को उत्‍तेजित कर, शरीर के विषैले पदार्थों को बाहर कर फैट घटाने में मदद करते हैं। इसलिए इन खाद्य पदार्थों को अपने स्‍वस्‍थ आहार योजना का हिस्‍सा बनाना बहुत महत्‍वपूर्ण है। यहां जल्‍दी से फैट को कम करने वाले ऐसे ही जादुई आहार के बारे में जानकारी दी गई है। 

केले को हमेशा से ही वजन बढ़ाने वाला खाद्य पदार्थ माना जाता है। लेकिन आपको यह जानकर बहुत आश्‍चर्य होगा कि केला फैट को जलाने वाला फल है। इस फल में मौजूद प्रतिरोधी स्‍टार्च पेट में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया के कारण, पेट में फैटी एसिड में परिवर्तित हो जाती है। यह चयापचय फैट में मदद कर फैट को रोकने में मदद करता है। वजन कम करने के लिए आप इसे स्‍मूदी या फ्रूट सलाद के रूप में ले सकते हैं। 

साबुत अनाज फैट को कम करने का एक स्मार्ट विकल्प है। अनाजों को अपने आहार में शामिल करने से शरीर के विषैले तत्‍व बाहर निकलते हैं और शरीर का फैट कम होता हैं। साबुत अनाज सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते है। इसमें विटामिन ई, विटामिन बी और अन्य तत्व जैसे जिंक, सेलेनियम, कॉपर, आयरन, मैगनीज एवं मैग्नीशियम आदि प्राप्‍त किया जा सकते हैं। साथ ही इनमें फाइबर भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है। 

नारियल का तेल मध्यम श्रृंखला ट्राइग्लिसराइड्स से समृद्ध होता है। यह फैटी एसिड शरीर द्वारा जल्‍दी पच जाता है, इसतरह से यह शरीर में जमा नहीं होता, लेकिन शरीर द्वारा ऊर्जा के उत्पादन के उपयोग कर सकते हैं। वजन घटाने के उद्देश्‍य को पूरा करने के लिए नारियल का तेल खाना पकाने के लिए तेल का एक बेहतरीन विकल्‍प है।

बादाम के फायदे के बारे में भला कौन नहीं जानता। प्रोटीन से भरपूर यह नट्स मांसपेशियों के निर्माण के साथ-साथ शरीर में फैट को भी जमा नहीं होने देते। फैट को जलाने में मदद करने के कारण बादाम को चयापचय को बढ़ावा देने के लिए भी जाना जाता है। पेंसिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के क्लाएर बेरीमैन के अनुसार, कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों के बजाय हर रोज नाश्ते में बादाम का सेवन करने से हृदय संबंधी रोगों का खतरा तो कम होता ही है। साथ ही शरीर में जमने वाली अतिरिक्त वसा को भी नियंत्रण में रखा जा सकता है। बादाम को हर रोज नाश्ते में शामिल कर मेटाबॉलिक और हृदय रोगों के खतरों को आसानी से कम किया जा सकता है। बादाम को आप कच्‍चे या पानी में भिगोकर भी खा सकते हैं।

लाल मिर्च में फैट को जलाने के प्रभाव होते हैं। मिर्च कैप्सेसिन से भरपूर होने के कारण ऑक्सीकरण द्वारा पेट वसा को कम करने में मदद करता है। यह चयापचय को बढ़ाकर शरीर से कैलोरी को जलाने में मदद करती है। ब्रिटेन में हुए एक शोध के अनुसार, लाल मिर्च शरीर में व्याप्त अवांछित कैलोरी जलाने एवं मोटापा घटाने में मददगार साबित होती है। मिर्च में मौजूद कैप्सेसिन तत्व, मिर्च को गर्मी देकर भूख कम करता है और कैलॉरी को जलाते हुए ऊर्जा की खपत बढ़ा सकता है। 

ब्रोकली खाने से न केवल स्‍वास्‍थ्‍य और पोषण मिलता है, बल्कि इस‍में लो कैलोरी होने की वजह से वजन भी कम होता है। ब्रोकोली में मौजूद फिटोनुट्रिएंट एंजाइम को उत्‍तेजित कर, वसा कोशिकाओं में वसा को जलाने के लिए उत्तेजित करता है। अब आप जब भी सब्‍जियां खरीदने जाएं, तो ब्रोकली को कभी नजरअंदाज न करें। आप इसका सेवन सब्‍जी या सलाद के रूप में कर सकते हैं। 

दालें भारतीय भोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्‍सा है और इसके विभिन्‍न प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ होते हैं। यह आयरन का अच्‍छा स्रोत है और इसकी कमी चयापचय को धीमा कर सकती है। अपने आहार में नियमित रूप से दालों को शामिल कर चयापचय दर को बनाये रखने और फैट को प्रभावी रूप से कम करने में मदद मिलती है। अकुरित दालों को आप सलाद के रूप में भी ले सकते हैं।

लौकी के फायदे के

Wed, 04/03/2019 - 08:30

लौकी इंसान की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद सब्जी है।

यह वजन और  आलस को दूर करने का काम करती है। इसके अलावा भी इसमें कई एैसे गुण होते हैं जो इंसान को कई गंभीर रोगों से बचाते है। कुछ लोग लौकी खाने से परहेज करते हैं क्योंकि वे इसके वास्तविक फायदों के बारे में नहीं जानते हैं। लंबी तथा गोल दोनों प्रकार की लौकी वीर्यवर्ध्दक, पित्त तथा कफनाशक और धातु को पुष्ट करने वाली होती है। अगर आए कोई मेहमान आपके घर में, तो आप इसकी सब्जी बनाना न भूलें, बड़ा सरल नाम है ,लौकी। अंग्रेजी में बाटल गार्ड के नाम से प्रचलित इसके बारे में कहा जाता है, कि मनुष्य द्वारा सबसे पहले उगाई गयी सब्जी लौकी ही थी। इसे उबाल कर कम मसालों के साथ सब्जी बनाकर खाने पर यह मूत्रल (डायूरेटीक), तनावमुक्त करनेवाली (सेडेटिव) और पित्त को बाहर निकालनेवाली औषधि है।
लौकी के कुछ आयुवैर्दिक फायदे
डाइबिटीज
-----------
लौकी डाइबिटीज के मरीजों को बेहद फायदा पहुंचाती है। खाली पेट लौकी का जूस का सेवन डाइबिटीज के मरीजों को सुबह-सुबह करना चाहिए।
पेशाब संबंधी दिक्क्त
------------------
पेशाब संबंधी दिक्कतें यानि यूरिन डिसआर्डर को दूर करने में लौकी एक सफल और कारगर उपाय है। लौकी शरीर से सोडियम की अधिक मात्रा को कम करने में सहायक है। और इसे पेशाब के जरिए बाहर निकाल देता है। 1 गिलास जूस मूत्र विसर्जित होने में हो रही जलन की समस्या को दूर करता है।
विटामिन और प्रोटीन
-------------------
लौकी में सभी तरह के प्रोटीन और विटामिन पाए जाते हैं। इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन बी3, बी6, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम और जिंक पाया जाता है। जो शरीर को कई बीमारियों से बचाता है
ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता ह
-----------------------
सिर्फ 1 गिलास लौकी का जूस पीकर हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही खाने में थोड़ा बहुत बदलाव करके भी ब्लड प्रेशर की समस्या को दूर किया जा सकता है
चेहरे में लाए प्राकृतिक निखार
-----------------------
चेहरे को अंदर और बाहर से प्राकृतिक सुंदरता और निखार लाने के लिए प्रतिदिन लौकी का सेवन करना चाहिए। लौकी चेहरे को सुंदर और आकर्षक बनाती है। लौकी का जूस पेट की अंदरूनी सफाई करता है जिससे चेहरे पर धूल, धूप, और प्रदूषण से होने वाले मुहांसों से छुटकारा मिलता है। साथ ही त्वचा खूबसूरत और मुलायम बनी रहती है।
पाचन
--------
जिन लोगों को पाचन संबंधी परेशानियां हों वे लौकी का सेवन करें। लौकी पेट में गैस की समस्या को दूर करती है। इसलिए इसे अपने भोजन में जरूर इस्तेमाल करना चाहिए।
ताजगी के लिए
--------------
लौकी को हल्की सब्जियों में गिना जाता है। इसे खाने से पेट में भारीपन नहीं रहता बल्कि यह शरीर में ताजगी बनाए रखने में सहायक है। प्रतिदिन तरोताजा बने रहने के लिए नमक या मसाले डालकर लौकी का जूस पीना कारगर उपाय है।
कोलेस्ट्राल से बचाए
-----------------
अपने खाने में लौकी का इस्तेमाल करें यह दिल संबंधी बीमारियों से आपको बचाता है। लौकी खाने से हानिकारक कोलेस्ट्राल कम होने लगता है और हार्ट अटैक जैसी बीमारी से इंसान बच जाता है। इसलिए लौकी का जूस बेहद फायदेमंद होता है।

 

 

पेनकिलर स्प्रे या जेल लगाएं या नहीं?

Tue, 04/02/2019 - 08:30

दर्द होने पर पेनकिलर स्प्रे या जेल लगा सकते हैं। ध्यान रखें कि वॉटर बेस्ड स्प्रे जल्दी शरीर में जज्ब होते हैं। ये पेनकिलर हैं और दर्द के अलावा सूजन भी कम करते हैं। आयोडेक्स भी लगा सकते हैं।कुछ एक्सपर्ट मानते हैं कि डिक्लोफिनैक सोडियम (Diclofenac Sodium) वाले जेल उम्रदराज लोगों के लिए सेफ नहीं हैं। ये मार्कट में वोविरॉन (Voveron), डोलो (Dolo), वोलिनी (Volini) आदि नाम से मिलते हैं।बुजुर्गों को पैरासिटामोल (Paracetamol) या ट्रामाडोल (Tramadol) देने की सलाह दी जाती है। ट्रामाडोल अल्ट्रासेट (Ultracet), एक्युपेन (Acupain), डोमाडोल (Domadol) आदि नाम से मिलता है। जेल या स्प्रे दिन में 2-3 बार लगा सकते हैं। हल्के हाथ से लगाएं। तेज मसाज न करें।

साधना के लिए नीम

Mon, 04/01/2019 - 08:30

नीम आपके सिस्टम को साफ रखने के साथ उसको खोलने में भी खास तौर से लाभकारी होता है। इन सबसे बढ़ कर यह शरीर में गर्मी पैदा करता है।   शरीर में इस तरह की गर्मी हमारे अंदर साधना के द्वारा तीव्र और प्रचंड ऊर्जा पैदा करने में बहुत मदद करती है।रोजाना नीम की चार-पांच कोमल पत्तियां चबाकर खाने से खून साफ होता है और कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है।
1. चेचक का इंफेक्शन होने पर नीम के पत्तों को पानी में उबालकर नहाने से लाभ होता है।
2. फोड़े-फुंसियों पर भी नीम के पत्तों का लेप लगाने से फायदा होता है।
3. नीम के पत्तों को पीसकर इसकी गोली सुबह-शाम शहद के साथ लेने से खून साफ होता है।
4. डायबिटीज के रोगी को नीम के पत्तों का रस पीने से लाभ होता है।
5. पेट में कीड़े होने पर नीम की नई व ताजा पत्तियों के रस में शहद मिलाकर चाटें।
6. दमे के मरीज को नीम के तेल की 20-25 बूंदे पान में डालकर खाने से राहत मिलती है।
7. नीम की सूखी पत्तियों का धुआं करने से घर में मौजूद बैक्टीरिया नष्ट होते हैं।
8. शरीर पर होने वाली खुजली, खाज और सोरायसिस में राहत के लिए नीम के पत्तों को उबालकर उससे नहाएं।

नीम एक आयुर्वेदिक दवाई है, जिसके कई सारे स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक फायदे हैं। नीम, हमारे शरीर, त्‍वचा और बालों के लिये बहुत फायदेमंद है। इसका कडुआ स्‍वाद बहुत से लोगो को खराब लगता है इसलिये वे इसे चाह कर भी नहीं खा पाते। इसी कारण नीम का रस पीना ज्‍यादा आसान होता है। आइये जानते हैं इस गुणकारी नीम के रस का फायदा। 

कब्ज के लिए आयुर्वेदिक उपचार

Sun, 03/31/2019 - 04:10

कब्ज होने का अर्थ है आपका पेट ठीक तरह से साफ नहीं हुआ है या आपके शरीर में तरल पदार्थ की कमी है। कब्ज के दौरान व्यक्ति तरोजाता महसूस नहीं कर पाता। अगर आपको लंबे समय से कब्ज रहता है और आपने इस बीमारी का इलाज नहीं कराया है तो ये एक भयंकर बीमारी का रूप ले सकती है। कब्ज होने पर व्यक्ति को पेट संबंधी दिक्कते भी होती हैं, जैसे पेट दर्द होना, ठीक से फ्रेश होने में दिक्कत होना, शरीर का मल पूरी तरह से न निकलना इत्यादि । कब्ज के लिए प्रभावी प्राकृतिक उपचार तो मौजूद है ही साथ ही आयुर्वेदिक उपचार के माध्यम से भी कब्ज को दूर किया जा सकता है। आइए जानें कब्ज के लिए कौन-कौन से आयुर्वेदिक उपचार मौजूद हैं।

• कब्ज होने पर अधिक मात्रा में पानी पीने की सलाह दी जाती है, गर्म पानी पीने से फ़ायदा होता हैं। पानी की कमी से आंतों में मल सूख जाता है। और मल निष्कासन में जोर लगाना पडता है। इसलिये कब्ज से परेशान रोगियों के लिये सर्वोत्तम सलाह तो यह है कि मौसम के मुताबिक २४ घंटे में ३ से ५ लिटर पानी पीने की आदत डालना चाहिये। सुबह उठते ही सवा लिटर पानी पीयें। फ़िर ३-४ किलोमिटर तेज चाल से भ्रमण करें। शुरू में कुछ अनिच्छा और असुविधा महसूस होगी लेकिन धीरे-धीरे आदत पड जाने पर कब्ज जड से मिट जाएगी।
• कब्ज के रोगी को तरल पदार्थ व सादा भोजन जैसे दलिया, खिचड़ी इत्यादि खाना चाहिए।
• कब्ज के दौरान कई बार सीने में भी जलन होने लगती हैं। ऐसे में एसीडिटी होने और कब्ज होने पर शक्कर और घी को मिलाकर खाली पेट खाना चाहिए।
• हरी सब्जियों और फलों जैसे पपीता, अंगूर, गन्ना, अमरूद, टमाटर, चुकंदर, अंजीर फल, पालक का रस या कच्चा पालक, किश्मिश को पानी में भिगोकर खाने, रात को मुनक्का खाने से कब्ज दूर करने में मदद मिलती है।
• दरअसल, पानी और तरल पदार्थों की कमी कब्ज का मुख्य कारण है। तरल पदार्थों की कमी से मल आंतों में सूख जाता है और मल निष्कासन में जोर लगाना पडता है। जिससे कब्ज रोगी को खांसी परेशानी होने लगती है।
• इसबगोल की की भूसी कब्ज में परम हितकारी है। दूध या पानी के साथ २-३ चम्मच इसबगोल की भूसी रात को सोते वक्त लेना फ़ायदे मंद है। दस्त खुलासा होने लगता है।यह एक कुदरती रेशा है और आंतों की सक्रियता बढाता है।
• खाने में हरे पत्तेदार सब्जियों के अलावा रेशेदार सब्जियों का सेवन खासतौर पर करना चाहिए। इससे शरीर में तरल पदार्थों में बढ़ोत्तरी होती है।
• चिकनाई वाले पदार्थ भी कब्ज के दौरान लेना अच्छा रहता है।
• गर्म पानी और गर्म दूध कब्ज दूर करते हैं। रात को गर्म दूध में केस्टनर यानी अरंडी का तेल डालकर पीना कब्ज को दूर करने में कारगार है।
• नींबू को पानी में डालकर, दूध में घी डालकर, गर्म पानी में शहद डालकर पीने से कब्ज दूर होती है। सुबह-सुबह गर्म पानी पीने से भी कब्ज को दूर करने में बहुत मदद मिलती है।
• अलसी के बीज का पाउडर पानी के साथ लेने से कब्ज में राहत मिलती है
इस तरह के प्रभावी प्राकृतिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार के माध्यम से कब्ज को स्थायी रूप से आसानी से दूर किया जा सकता है।
• दो सेवफ़ल प्रतिदिन खाने से कब्ज में लाभ होता है।
• अमरूद और पपीता ये दोनो फ़ल कब्ज रोगी के लिये अमॄत समान है। ये फ़ल दिन मे किसी भी समय खाये जा सकते हैं। इन फ़लों में पर्याप्त रेशा होता है और आंतों को शक्ति देते हैं। मल आसानी से विसर्जित होता है।
• अंगूर मे कब्ज निवारण के गुण हैं । सूखे अंगूर याने किश्मिश पानी में ३ घन्टे गलाकर खाने से आंतों को ताकत मिलती है और दस्त आसानी से आती है। जब तक बाजार मे अंगूर मिलें नियमित रूप से उपयोग करते रहें।
• अंजीर कब्ज हरण फ़ल है। ३-४ अंजीर फ़ल रात भर पानी में गलावें। सुबह खाएं। आंतों को गतिमान कर कब्ज का निवारण होता है।
• मुनका में कब्ज नष्ट करने के गुण हैं। ७ नग मुनक्का रोजाना रात को सोते वक्त लेने से कब्ज रोग का स्थाई समाधान हो जाता है।
20 साल पुरानी कब्‍ज की जडें उखाडने वाला ( रामबाण ) नुस्‍खा!

रात्रि में 25 ग्राम सोंफ पानी में भिगोकर रखें –
सुबह उसी पानी में उबालें – उबल जाने पर सोंफ को खूब मसलकर उसका पानी छान लें –
इस पानी में 4 मूँग के वजन बराबर ( 200 – 250 मि.ग्राम ) जितनी फुलायी हुई लाल फिटकरी ( शोधित ) का चूर्ण डालकर सुबह खाली पेट 40 दिन तक पीने से पुराने से पुराना यानि 20 वर्ष पुरानी कब्जियत भी दूर हो जाती है !

 
भोजन करने के तुरन्त बाद वज्रासन में 5-15 मिनट बैठने से पेट की एसिडिटी, अपच और कब्ज से छुटकारा पाया जा सकता है, इस आसन से भोजन जल्दी पचता है ।

Pages