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Updated: 22 hours 44 min ago

एक हफ्ते में वाटर वेट से छुटकारा पाना है तो ये तरीके आजमाएं

Fri, 03/30/2018 - 06:00

अक्सर यह माना जाता है कि पानी पीना सेहत के लिए अच्छा होता है लेकिन कभी कभी ज्यादा पानी पीना भी हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

आप सोंच रहे होंगे भला ये क्‍या बात होती है, पानी से भला कैसे नुकसान हो सकता है। पर क्‍या आपने वॉटर वेट के बारे में सुना है।

क्‍या आपके फेस पर या बॉडी में सूजन दिखती है या फिर क्‍या लाख जिम में वर्कआउट करने के बाद भी वजन कम होने का नाम नहीं लेता। तो इसका साफ मतलब है कि आपका वजन पानी की वजह से बढा हुआ है।

वाटर वेट के कारण ही आपका वजन अचानक से बढ़ने लगता है लेकिन इसके लिए घबराने की जरुरत नहीं है इस समस्या को आप दूर कर सकते हैं और वो भी सिर्फ सात दिनों में।

 

वॉटर वेट को अगर कम करना है तो आपको अपनी दिनचर्या में कुछ बदलाव करना होगा, जिससे आपको इससे छुटकारा मिल सके। लेकन हां, ऐसा ना सोंचे की आप दिनभर में पानी पीना ही कम कर दें, ऐसा तो भूल कर भी ना करें।

इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए हम आपको कुछ उपाय बताने जा रहें हैं।

ज्यादा पानी पियें:

जैसा कि हम जानते हैं की वाटर रिटेंशन से शरीर का वजन बढ़ता है फिर भी आप ज्यादा से ज्यादा पानी पीकर इससे छुटकारा पा सकते हैं। ज्यादातर होता यह है कि डिहाइड्रेशन की वजह से वाटर रिटेंशन की समस्या होती है इसलिए ज्यादा पानी पीने से आप हाइड्रेटेड रहेंगे और अच्छी मात्रा में पानी आपके शरीर से बाहर निकलेगा।

 

कार्डियो एक्सरसाइज करें:

आप प्रतिदिन लगभग 30 मिनट एक्सरसाइज जैसे दौड़ना, कूदना और साइकिलिंग करना आदि करें, इससे आपको ज्यादा से ज्यादा पसीना होगा और ज्यादा से ज्यादा टॉक्सिक पदार्थ आपके शरीर के बाहर निकलेंगे जिससे शरीर में पानी का जमाव यानी वाटर रिटेंशन नहीं होगा।

अच्छी नींद लें:

जब आप अपने रेगुलर सोने के समय से डेढ़ घंटे ज्यादा सोते हैं यानी अगर आप 6 घंटा सोते हैं तो आप 7:30 घंटा सोइए तो इससे आप होने वाले वाटर वेट से छुटकारा पा सकते हैं। क्योंकि इससे आप ज्यादा फ्रेश महसूस करेंगे और आपका दिमाग एक्सरसाइज करने के लिए और हेल्दी चीजें खाने लिए प्रेरित होगा।

 

नमक और कार्बोहाइड्रेट कम इस्तेमाल करें:

आप कोशिश करें की कम से कम नमक का आप इस्तेमाल करें। खासतौर से शाम को आप बिना नमक वाला भोजन ही करें अगर आप जल्दी रिजल्ट चाहते हैं। नमक आपके शरीर में वाटर को रिटेन करता है जो आप नहीं चाहते हैं।

ऐसे ही आप कार्बोहाइड्रेट का भी लिमिट में इस्तेमाल करें क्योंकि इससे बहुत ज्यादा कैलोरी होती है जिससे आपका वजन बढ़ता है। इसका मतलब ये नहीं कि आप हेल्दी कार्बोहाइड्रेट जैसे ओट्स, अनाज आदि खाना ही बंद कर दें, बस आप जंक फूड्स से दूर रहें।

फाइबर युक्त चीजों का इस्तेमाल करें:

आप ज्यादा से ज्यादा फाइबर युक्त चीजें जैसे फल और सब्जियां खाने में लें क्योंकि फाइबर शरीर के वाटर को सोखने का काम करता है जिससे आपको वाटर रिटेंशन की समस्या नहीं होती है और इसकी वजह से आपका वजन भी नहीं बढ़ता है।

 

 

 

सावधान! बाजार में आ गई है जहरीली अदरक... देखने में लगती है साफ और चमकदार

Thu, 03/29/2018 - 06:00

हम सभी जानते हैं कि हमारे खाने में और खासकर हमारी सुबह की चाय में अदरक का कितना ज्‍यादा महत्‍व है। यह ना केवल खाने का स्‍वाद बढ़ाती है बल्‍कि सेहत के लिये भी काफी फायेमंद है।

लेकिन अगर आपको पता चले कि इन दिनों बाजार में हमें जहर से भरी हुई अदरक महंगे दामों में बेची जा रही है तो?? सब्‍जी मंडी या ठेलों पर से जो आप अदरक लेते हैं, वह दिखने मे काफी साफ-सुथरी और चमकदार दिखती है, जिसको देख कर आप उसे खरीदने से खुदको नहीं रोक पाते।

क्‍या आप जानते हैं कि इन अदरकों को साफ और सुंदर बनाने के लिये इन्‍हें तेजाब से धोया जाता है। ऐसा करने का मकसद इन्‍हें चमकाना होता है, ताकि इसके दाम बढाए जा सके।

यह चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब दिल्ली प्रशासन ने देश की सबसे बड़ी मंडी, आजादपुर मंडी के आसपास 6 अदरक गोदामों पर छापे मारकर इस बात का खुलासा किया है। इन गोदामों में सड़ी और पुरानी अदरक को तेजाब से धो कर चमकाने का काम किया जाता था।

चमकदार अदरक देखने में साफ सुथरी लगती है और लोग इसे आराम से खरीद भी लेते हैं। खुलासे में पता चला है कि एक लीटर तेजाब से करीब 400 किलो अदरक धोकर चमका दी जाती है। शायद आपको अंदाजा भी नहीं होगा कि तेजाब हमारे शरीर के लिये कितना जानलेवा हो सकता है।

यदि आप अगली बार अदरक खरीदने जाएं तो हमेशा मिट्टी लगी हुई अदरक ही खरीदें क्‍योंकि वही सेहतभरी है। साफ और चमकदार अदरक देख कर कभी धोखे मे ना रहे।

 

 

 

Tags: जहरीली अदरक

सोने के समय ये करें || ये बिल्कुल न करें

Wed, 03/28/2018 - 06:00

हल्के-फुल्के बदलाव आपको हर रोज़ अच्छी नींद देंगे
* अपनी जीवनशैली के लिए उपयुक्त सोने और उठने का समय निर्धारित करें और हर रोज़ उसी का पालन करें. यहां तक कि सप्ताहांत में भी. आठ घंटे की नींद ज़रूर पूरी करें. 
* दिन में सोए नहीं. अपनी नींद की समय सारणी के अनुसार ही काम करें.
* सोने से 3 से 6 घंटे पहले वर्कआउट करें. दिन में हल्की-फुल्की एक्सरसाइज़ करें.
* सोने से कम से कम दो घंटे पहले डिनर करें. यदि आपको देर रात भूख लगी हो और आपको अपचन की समस्या न हो तो आप कार्बोहाइड्रेट समृद्ध भोजन कर सकती हैं. कम-शुगर वाले सिरीयल्स या केला सबसे बेहतरीन हैं.
* अपने बेडरूम को सुंदर बनाएं. यदि आप अपने कमरे को साफ़, ठंडा और रात में अंधेरा रखेंगी तो अच्छी 
नींद पाएंगी.

 

 

पेट कम करना सबसे चुनौतीपूर्ण है इसलिए

Tue, 03/27/2018 - 06:00

शरीर का वज़न घटाना एक बार के लिए आसान भी हो सकता है, लेकिन पेट कम करना सबसे चुनौतीपूर्ण है इसलिए ही हम आपको पेट कम करने के 5 आसान से टिप्स दे रहे हैं.

प्रोटीन का सेवन करें: हम सभी को शाम 4 बजे के आसपास तेज़ भूख लगती है. उस समय भूख मिटाने के लिए आलू के चिप्स खाने से परहेज़ करें. इसके बजाय प्रोटीन बार, लो फ़ैट चीज़ या थोड़े-से बादाम का सेवन करें. ऐसे खाद्य पदार्थ मेटाबॉलिज़्म बढ़ाने में मदद करते हैं.

शक्कर छोड़ें: यदि आप दीपिका पादुकोन जैसा सपाट पेट चाहती हैं तो मीठा खाने से बचें. ऐसा करने से आपके शरीर में इन्सुलिन का स्तर नीचे व ग्लूकागॉन (एक प्रकार का हार्मोन) का स्तर ऊपर रहेगा. ग्लूकागॉन पेट की चर्बी को घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

दिल खोलकर हंसें: ज़ोर से हंसने से पेट की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं इसलिए आप जितना ज़्यादा हंसेंगी, आपके पेट की मांसपेशियां उतनी अधिक टोन्ड होंगी.

सही क्रम का पालन करें: पेट की चर्बी को कम करने के लिए संतुलित भोजन लेने के साथ-साथ सही क्रम में वर्कआउट करना भी ज़रूरी है. इसके लिए कार्डियो, फिर मसल्स बिल्डिंग एक्सरसाइज़ेस व अंत में क्रंचेज़ करें.

खाना चबाकर खाएं: जब डायनिंग टेबल पर मम्मी खाना चबाकर खाने के लिए कहती हैं तो अक्सर हमें ग़ुस्सा आ जाता है, जबकि सच्चाई यह है मां आपके भले के लिए ऐसा कहती हैं. भोजन चबाकर खाने से पाचन की प्रक्रिया बेहतर होती है, जिससे पेट फूलता नहीं है.

 

 

पहचानें डिप्रेशन के लक्षण

Mon, 03/26/2018 - 06:00

आइए हमारे व्यवहार में आनेवाले उन बदलावों पर नज़र डालते हैं, जो बताते हैं कि हम डिप्रेशन यानी अवसाद का शिकार बनते जा रहे हैं. डिप्रेशन से उबरने के लिए इसके लक्षणों और संकेतों को समझना बहुत ज़रूरी है. क्योंकि हम इस बारे में तभी मदद मांग सकते हैं, यदि हमें सही समय पर पता चल सकेगा कि हमारी ज़िंदगी में सबकुछ सही नहीं चल रहा है. ये हैं डिप्रेशन के कुछ लक्षण: 
 ‌
* ठीक से नींद न आना
* कम भूख लगना
* अपराध बोध होना
* हर समय उदास रहना 
* आत्मविश्वास में कमी
* थकान महसूस होना और सुस्ती 
* उत्तेजना या शारीरिक व्यग्रता
* मादक पदार्थों का सेवन करना
* एकाग्रता में कमी
* ख़ुदकुशी करने का ख़्याल 
* किसी काम में दिलचस्पी न लेना 
 

सेहतमंद बालों के लिए योग

Sun, 03/25/2018 - 06:00

रूखे और बेजान बालों या सिर पर तेज़ी से कम होते बालों को देखकर आप अंदाज़ा लगा सकती हैं कि हमारी दिनचर्या कितनी व्यस्त है. चिंता, ख़राब जीवनशैली का चुनाव, जेनेटिक्स, मेडिकेशन, हार्मोनल असंतुलन और बालों के ट्रीटमेंट के लिए केमिकल्स का अत्यधिक इस्तेमाल बचे-खुचे बालों को भी नष्ट कर देता है. इससे पहले कि आप बालों की रक्षा के लिए किसी प्रॉडक्ट का इस्तेमाल करें, हम आपको योग करने की सलाह देते हैं. दमकती हुई त्वचा देने के साथ पूरी सेहत में सुधार लानेवाला योग बालों के लिए भी उम्दा नतीजे देता है. ‘‘कुछ योग मुद्राएं स्कैल्प, फ़ॉलिकल्स में रक्त प्रवाह को बढ़ाकर बेचैनी और चिंता से राहत प्रदान करती हैं. ये बालों के विकास को भी प्रोत्साहित करती हैं,’’ बताते हैं होलिस्टिक हेल्थ एक्स्पर्ट मिकी मेहता. उन्होंने हमें ऐसी तीन आसान मुद्राओं के बारे में बताया जिन्हें प्रतिदिन करने पर बालों की सेहत को सुधारा जा सकता है.  

उष्ट्रासन
1. ज़मीन पर घुटनों के बल सीधी खड़ी हो जाएं.
2. अब पीछे की ओर झुक जाएं और ऊपर सीलिंग को देखते हुए अपनी एड़ियां पकड़ लें.
3. सामान्य सांस लेते हुए इसी मुद्रा में कुछ सेकेंड्स के लिए बनी रहें.
4. सांस छोड़ते हुए शुरुआती मुद्रा में लौट आएं. 
5. चार से पांच बार दोहराएं और आराम करें.

 

 

उत्तानासन 
1. पैरों को क़रीब रखते हुए सीधी खड़ी हो जाएं. ध्यान रहे कि घुटने, एड़ी, पैरों के अंगूठे आपस में स्पर्श कर रहे हों.
2. सांस लें और सांस छोड़ते समय अपने हाथों को उठाएं और आगे की ओर झुकाएं. हाथों की उंगलियों और हथेली से ज़मीन को स्पर्श करें. सामान्य रूप से सांस लें और कुछ सेकेंड्स तक इसी मुद्रा में रहें. सांस अंदर लेते हुए और वापस शुरुआती मुद्रा में लौट आएं. 
3. इस प्रक्रिया को पांच बार दोहराएं.

 

 

अधोमुख श्वानासन 
1. घुटने और हथेली के बल पर खड़ी हो जाएं. हाथों को कंधे की सीध में रखें. 
2. पैरों को सीधा रखते हुए कूल्हों को ऊपर की ओर धकेलें. ध्यान रहे कि एड़ी ज़मीन पर टिकी रहे.
3. पीठ सीधी करने के लिए हथेली को ज़मीन के विपरीत दबाएं. पांच सेकेंड्स तक इसी मुद्रा में बनी रहें.
4. कूल्हों को धीरे-से नीचे लाएं और शुरुआती मुद्रा में लौटें. इसे दोहराएं.

 

    Source: https://www.femina.in/hindi/health/fitne...

कोलेस्ट्रोल के नाम पर महाधोखा

Sat, 03/24/2018 - 06:00

चालीस साल से कोलेस्ट्रोल के नाम पर दुनिया को धोखा दिया जा रहा था। 
अमेरिकी डाक्टरों, वैज्ञानिकों और ड्रग कंपनियों के गठजोड़ ने 1970 से अब तक कोलेस्ट्रोल कम करने की दवाएं बेच-बेच कर 1.5 खरब डालर डकार लिए। 
बेहिचक इसे कोलेस्ट्रोल महाघोटाला कहा जाए तो कोई हर्ज नहीं। पेथलेबों में इसकी जांच का धंधा भी खूब चमका। डाक्टरों और ड्रगिस्ट की भी चांदी हुई। पता नहीं अनेक लोगों ने कोलेस्ट्रोल फोबिया के कारण ही दम तोड़ दिया होगा। कोलेस्ट्रोल घटाने वाली दवाओं के दुष्प्रभाव से ना मालूम कितने लोगों के शरीर में नई-नई विकृतियों ने जन्म लिया होगा। 
बहरहाल अब अमेरिकी चिकित्सा विभाग ने पलटी मार ली है। कोलेस्ट्रोल के कारण जिन खाद्य वस्तुओं को निषेध सूची में डाला गया था, उन्हें हटा लिया है। अब कहा जा रहा है कि कोलेस्ट्रोल सिर्फ कोलेस्ट्रोल है और यह अच्छा या बुरा नहीं होता। यह मानव शरीर के लिए आवश्यक है।
नर्व सेल की कार्यप्रणाली और स्टेराइड हार्मोन के निर्माण जैसी गतिविधियों में इसकी जरूरत होती है। 
हम जो भोजन लेते हैं उससे मात्र 15-20 फीसद कोलेस्ट्रोल की आपूर्ति होती है, जबकि हमें प्रतिदिन 950 मिलीग्राम की जरूरत होती है। शेष कोलेस्ट्रोल हमारे लिवर को बनाना पड़ता है।
अगर हम कोलेस्ट्रोल वाला खाना नहीं खाएंगे, तो जाहिर है लिवर को ज्यादा मशक्कत करना पड़ेगी। 
जिनके शरीर में कोलेस्ट्रोल ज्यादा होता है, तो यह समझिए कि उनका लिवर ठीक ठाक काम कर रहा है।
कोलेस्ट्रोल के नाम पर डाक्टर लोगों को नट्स, घी, मक्खन, तेल, मांस, अंडे आदि न खाने या कम खाने की सलाह देते रहे। असली घी को दुश्मन और घानी के तेलों को महादुश्मन बता कर, रिफाइंड तेलों का कारोबार चमकाते रहे अब तो रिफाइंड तेलों की पोल भी खुल चुकी है, जबकि ये सब हमारे लिए आवश्यक हैं। यह थ्योरी भी दम तोड़ चूकी है कि कोलेस्ट्रोल धमनियों में जम जाता है, जिसके कारण ब्लाकेज होते हैं और दिल का दौरा पड़ता है। असल में ब्लाकेज का कारण केल्सीफिकेशन है। यही केल्सीफिकेशन गुर्दों और गाल ब्लडर में पथरी का कारण भी बनता है। 
अमेरिकी हार्ट स्पेशलिस्ट डा. स्टीवन निसेन के अनुसार चार दशकों से हम गलत मार्ग पर चल रहे थे। डा. चेरिस मास्टरजान के अनुसार अगर हम कोलेस्ट्रोल वाला आहार नहीं लेते तो शरीर को इसका निर्माण करना पड़ता है। 
एलोपैथी में थ्योरियां बार-बार बदलती हैं जबकि हमारा आयुर्वेद हजारों साल से वात, पित्त और कफ के संतुलन को निरोगी काया का परिचायक मानता आ रहा है। इनका शरीर में असंतुलन ही रोगों को जन्म देता है। 
आयुर्वैद सिर्फ चिकित्सा प्रणाली नहीं सम्पूर्ण जीवनशैली सिखाता है। होमियोपैथी भी 
लाइक क्योर लाइक के सिद्धांत पर टिकी है। आज अधिकांश बीमारियों का कारण है गलत जीवनशैली और फास्टफुड जैसा आहार।
अगर जीवनशैली में सुधार कर लिया जाए, प्रकृति से vनजदीकियां कायम रखी जाएं और योग प्राणायाम का सहारा लिया जाए तो रोगों के लिए कोई स्थान नहीं है।

 

क्या आप इन रोगो से परेशान है ?

Fri, 03/23/2018 - 06:00

ब्रेन मलेरिया, टाइफाईड, चिकुनगुनिया,
डेंगू, स्वाइन फ्लू,
इन्सेफेलाइटिस, माता व अन्य प्रकार के बुखार का इलाज ...................¥

1. 20 पत्ते तुलसी, नीम पर चढ़ी हुई गिलोय (गुडूचि ,गिरुच ,अमृता) का सत् 5gm, सोंठ (सुखी अदरक) 10gm,
10 छोटी पीपर के टुकड़े, सब आपके घर मे आसानी से
उपलब्ध हो जाती है। सब एक जगह पर कूटने के बाद एक गिलास पानी में
उबालकर काढ़ा बनाना है ठन्डा होने के बाद दिन में सुबह, दोपहर और श्याम
तीन बार पीना चाहिए।

2. नीम गिलोय (नीम पर चड़ी गिलोय) - इसका जूस डेंगू रोग में श्वेत रक्त कणिकाए, प्लेटलेट्स कम होने पर तुरंत बढ़ाने में
बहुत ज्यादा काम आता है। प्लेट्लेस को बढ़ाने में पपीते के पत्ते व एलोवेरा भी  रामबाण की तरह काम करता है

3. एक और अच्छी दवा है, एक पेड़ होता है उसे हिंदी में हारसिंगार कहते है,
संस्कृत पे पारिजात कहते है, बंगला में शिउली कहते
है, उस पेड़ पर छोटे छोटे सफ़ेद फूल आते है, और फुल की
डंडी नारंगी रंग की
होती है, और उसमे खुश्ब बहुत आती है, रात को फूल खिलते है और सुबह जमीन में
गिर जाते है । इस पेड़ के पांच पत्ते तोड़ के पत्थर में पिस के चटनी बनाइये और
एक ग्लास पानी में इतना गरम करो के पानी आधा हो जाये फिर इसको ठंडा
करके रोज सुबह खाली पेट पियो तो बीस बीस साल
पुराना गठिया का दर्द
इससे ठीक हो जाता है । और यही पत्ते को पीस के गरम पानी में डाल के पियो तो बुखार ठीक कर
देता है और जो बुखार
किसी दवा से ठीक नही होता वो इससे ठीक होता है जैसे चिकनगुनिया
का बुखार, डेंगू फीवर,
Encephalitis , ब्रेन
मलेरिया, ये सभी ठीक होते है ।
इनके प्रयोग से आप रोगी की जान बचा सकते हैं। मात्र इसकी 3 खुराक से लाखों लोगो को बुखार से
मरने से बचाया जा सकता है  

पानी हमेशा घूँट-घूँट और बैठ कर पिएं !

Thu, 03/22/2018 - 06:00

पानी हमेशा घूँट-घूँट और बैठ कर पिएं !
पानी सदैव धीरे-धीरे पीना चाहिये अर्थात घूँट-घूँट
कर पीना चाहिये, यदि हम धीरे-धीरे पानी पीते हैं
तो उसका एक लाभ यह है कि हमारे हर घूँट में मुँह की
लार पानी के साथ मिलकर पेट में जायेगी और पेट में
बनने वाले अम्ल को शान्त करेगी क्योंकि हमारी
लार क्षारीय होती है और बहुत मूल्यवान होती है।
हमारे पित्त को संतुलित करने में इस क्षारीय लार
का बहुत योगदान होता है। जब हम भोजन चबाते हैं
तो वह लार में ही लुगदी बनकर आहार नली द्वारा
अमाशय में जाता है और अमाशय में जाकर वह पित्त
के साथ मिलकर पाचन क्रिया को पूरा करता है।
इसलिये मुँह की लार अधिक से अधिक पेट में जाये
इसके लिये पानी घूँट-घूँट पीना चाहिये और बैठकर
पीना चाहिए।
कभी भी खड़े होकर पानी नहीं पीना चाहिए
( घुटनों के दर्द से बचने के लिए ) ! कभी भी बाहर से
आने पर जब शरीर गर्म हो या श्वाँस तेज चल रही हो
तब थोड़ा रुककर, शरीर का ताप सामान्य होने पर
ही पानी पीना चाहिए। भोजन करने से डेढ़ घंटा
पहले पानी अवश्य पियें इससे भोजन के समय प्यास
नहीं लगेगी।
प्रातः काल उठते ही सर्वप्रथम बिना मुँह
धोए, बिना ब्रश किये कम से कम एक गिलास पानी
अवश्य पियें क्योंकि रात भर में हमारे मुँह में
Lysozyme नामक जीवाणुनाशक तैयार होता है जो
पानी के साथ पेट मे जाकर पाचन संस्थान को
रोगमुक्त करता है।
सुबह उठकर मुँह की लार आँखों में भी लगार्इ जा
सकती है चूंकि यह काफी क्षारीय होती है इसलिए
आँखों की ज्योति और काले सर्किल के लिए काफी
लाभकारी होती है। दिन भर में कम से कम 4 लीटर
पानी अवश्य पियें, किडनी में स्टोन ना बने इसके
लिये यह अति आवश्यक है कि अधिक मात्रा में
पानी पियें और अधिक बार मूत्र त्याग करें।
पानी कितना पियें ?
आयुर्वेद के अनुसार सूत्र - शरीर के भार के 10 वें भाग
से 2 को घटाने पर प्राप्त मात्रा जितना पानी
पियें ।
उदाहरण: अगर भार 60 किलो है तो उसका 10 वां
भाग 6 होगा और उसमें से 2 घटाने पर प्राप्त मात्रा
4 लीटर होगी ।
लाभ - कब्ज, अपच आदि रोगों में रामबाण पद्धति है
मोटापा कम करने में भी सहायता होगी, जिनको
पित्त अधिक बनता है उनको भी लाभ होगा।

हिस्टीरिया : मनोरोग का प्रकोप

Wed, 03/21/2018 - 06:00

सर्वप्रथम एरंड तेल में भुनी हुई छोटी काली हरड़ का चूर्ण ५ ग्राम प्रतिदिन लगातार दे कर उसका उदर शोधन तथा वायु का शमन करें।

सरसों, हींग, बालवच, करजबीज, देवदाख मंजीज, त्रिफला, श्वेत अपराजिता मालकंगुनी, दालचीनी, त्रिकटु, प्रियंगु शिरीष के बीज, हल्दी और दारु हल्दी को बराबर-बराबर ले कर, गाय या बकरी के मूत्र में पीस कर, गोलियां बना कर, छाया में सुखा लें। इसका उपयोग पीने, खाने, या लेप में किया जाता है। इसके सेवन से हिस्टीरिया रोग शांत होता है।

लहसुन को छील कर, चार गुना पानी और चार गुना दूध में मिला कर, धीमी आग पर पकाएं। आधा दूध रह जाने पर छान कर रोगी को थोड़ा-थोड़ा पिलाते रहें।

ब्रह्मी, जटामांसी शंखपुष्पी, असगंध और बच को समान मात्रा में पीस कर, चूर्ण बना कर, एक छोटा चम्मच दिन में दो बार दूध के साथ सेवन करें। इसके साथ ही सारिस्वतारिष्ट दो चम्मच, दिन में दो बार, पानी मिला कर सेवन करें।

ब्राह्मी वटी और अमर सुंदरी वटी की एक-एक गोली मिला कर सुबह तथा रात में सोते समय दूध के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है।

जो रोगी बालवच चूर्ण को शहद मिला कर लगातार सवा माह तक खाएं और भोजन में केवल दूध एवं शाश का सेवन करे, उसका हिस्टीरिया शांत हो जाता है।

 

आयर्वेद में बुखार और दर्द का क्या इलाज है?

Tue, 03/20/2018 - 06:00

आयर्वेद में चिकनगुनिया फीवर का जिक्र नहीं है, लेकिन इसी से मिलते-जुलते संधि ज्वर का जिक्र है, जिसके लक्षण बुखार, जोड़ों में दर्द और सूजन आदि हैं।
- गिलोय (गुडुची या अमृता) का सेवन करें। बेल से रस निकालकर दिन में 2 बार (5-10 ML) करीब एक-एक टी-स्पून लें। इसके कैप्सूल भी आते हैं। 500 Mg का एक-एक दिन में दो बार कैप्सूल ले सकते हैं।
- तुलसी के 7-8 पत्तों को गर्म पानी, चाय या दूध में उबालकर दिन में दो-तीन बार लें। तुलसी कैप्सूल लेना है तो 500 Mg का दिन में दो बार लें।
- सौंठ शहद में मिलाकर ले सकते हैं, 5-5 ग्राम सुबह और शाम।
- हल्दी वाला दूध सुबह-शाम लें। हल्दी को दूध के साथ उबालें, फिर पिएं।
- अश्वगंधा, आंवला या मुलहठी को किसी भी रूप में खाएं। तीनों में से एक कोई लें।
- दशमूल क्वाथ, रासनादि क्लाथ, पंचतिक्त क्वाथ में से कोई एक 12-15 ML सुबह-शाम, खाली पेट लें।
- सुदर्शन घनवटि, योगराज गुग्गुल या आयोग्यवर्धिनी वटी में से कोई 500 Mg से 1 ग्राम तक रोजाना दिन में दो बार लें।
- गुनगुना पानी लें तो बेहतर है।

नोटः ये सारी चीजें दर्द से तो राहत दिलाती ही हैं, बुखार भी ठीक करती हैं। जब तक तबियत ठीक न हों, नियमित रूप से लेते रहें।

थायराइड के लक्षण और घरेलू उपचार

Mon, 03/19/2018 - 06:00

थायराइड की समस्या आजकल एक गंभीर समस्या बनी हुई है। थाइराइड गर्दन के सामने और स्वर तंत्र के दोनों तरफ होती है। ये तितली के आकार की होती है। थायराइड दो तरह का होता है। हाइपरथायराइडिज्म और हाइपोथायराइड। पुरूषों में आजकल थायराइड की दिक्कत बढ़ती जा रही है। थायराइड में वजन अचानक से बढ़ जाता है या कभी अचानक से कम हो जाता है। इस रोग में काफी दिक्कत होती है। आयुर्वेद में थायराइड को बढ़ने से रोकने के बेहद सफल प्रयोग बताएं गए हैं।

 

पुरूषों में थायराइड के लक्षण ( Thyriod Symptoms for men ) :

सामान्यत पुरूषों में थायराइड की समस्या के कुछ लक्षणों में सबसे पहला लक्षण है अचानक से वजन का बढ़ना या फिर अचानक से वजन का कम होना।
दूसरा मुख्य लक्षण है जल्दी ही थकान का लगना।
तीसरा लक्षण गर्दन में दर्द या सूजन का होना।
चौथा लक्षण है भूख न लगना और पसीना अधिक आना आदि।
थायराइड के मुख्य कारण

थाइराइड कई कारणों से हो सकता है। जिसके मुख्य कारण हैं।

बेवजह की दवाओं का सेवन करना और उनका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने से थाइराइड हो सकता है।
टोंसिल्स, सिर और थाइमस ग्रंथि की परेशानी में एक्स रे कराना भी थाइराइड का कारण बन सकता है।
अधिक तनाव या टेंशन लेने का असर थायराइड ग्रंथि पर पड़ता है। जिस वजह से हार्मोन निकलने लगता है।
परिवार में किसी को पहले से ही थायराइड की समस्या हो तो यह भी एक मुख्य कारण बन सकता है।
अन्य लक्षण जैसे नींद अधिक आना, आंखों में सूजन होना, जोड़ों में दर्द बने रहना, आवाज का भारी होना और लगातार कब्ज बने रहना आदि।
थायराइड की वजह से हड्डियां सिकुडने लगती हैं और मांसपेशियां भी कमजोर होने लगती हैं। ऐसे में खून की नियमित जांच करवानी चाहिए। अपने खाने में जितना हो सके हरी सब्जियों का सेवन करें।
क्या आप जानते हैं हाइपरथायराइडिज्म और हाइपोथायराडिज्म में अंतर वैसे तो हाइपर थायराइडिज्म और हाइपो थायराडिज्म  दोनों ही थायराइड के प्रकार हैं। लेकिन दोनों के लक्षण एक दूसरे से बेहद अलग होते हैं। 

हाइपो थायरायडिज्म के प्रमुख लक्षण

चेहरे का फूल जाना।
त्वचा का शुष्क होना।
डिप्रेशन।
वजन का अचानक बढ़ना।
थकान का आना।
शरीर में पसीने की कमी।
दिल की गति का कम होना।
अनियमित या अधिक माहवारी का होना।
कब्ज का बनना आदि।
 

हाइपर थायराइडिज्म के लक्षण

बालों का झड़ना।
हाथ में कंपन होना।
अधिक गर्मी व पसीना आना।
वजन का घटना।
खुजली व त्वचा का लाल होना।
दिल का धड़कनों का बढ़ना।
 कमजोरी महसूस होना। आदि।
थाइराइड की जांच कैसे की जाती है इसके बारे में भी आपको पता होना चाहिए।

पथरी का आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक इलाज

Sun, 03/18/2018 - 06:00

पथरी का आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक इलाज 
सबसे पहले कुछ परहेज !
मित्रो जिसको भी शरीर मे पथरी है वो चुना कभी ना खाएं ! (काफी लोग पान मे डाल कर खा जाते हैं )
क्योंकि पथरी होने का मुख्य कारण आपके शरीर मे अधिक मात्रा मे कैलशियम का होना है | मतलब जिनके शरीर मे पथरी हुई है उनके शरीर मे जरुरत से अधिक मात्रा मे कैलशियम है लेकिन वो शरीर मे पच नहीं रहा है वो अलग बात हे| इसलिए आप चुना खाना बंद कर दीजिए|
आयुर्वेदिक इलाज !
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पखानबेद नाम का एक पौधा होता है ! उसे पथरचट भी कुछ लोग बोलते है ! उसके 10 पत्तों को 1 से डेड गिलास पानी मे उबाल कर काढ़ा बना ले ! मात्र 7 से 15 दिन मे पूरी पथरी खत्म !! और कई बार तो इससे भी जल्दी खत्म हो जाती !!! आप दिन मे 3 बार पत्ते 3 पत्ते सीधे भी खा सकते हैं !
होमियोपेथी इलाज !
अब होमियोपेथी मे एक दवा है ! वो आपको किसी भी होमियोपेथी के दुकान पर मिलेगी उसका नाम हे BERBERIS VULGARIS ये दवा के आगे लिखना है MOTHER TINCHER ! ये उसकी पोटेंसी हे|
वो दुकान वाला समझ जायेगा| यह दवा होमियोपेथी की दुकान से ले आइये| (स्वदेशी कंपनी SBL की बढ़िया असर करती है )
(ये BERBERIS VULGARIS दवा भी पथरचट नाम के पोधे से बनी है बस फर्क इतना है ये dilutions form मे हैं पथरचट पोधे का botanical name BERBERIS VULGARIS ही है )
अब इस दवा की 10-15 बूंदों को एक चौथाई (1/ 4) कप गुण गुने पानी मे मिलाकर दिन मे चार बार (सुबह,दोपहर,शाम और रात) लेना है | चार बार अधिक से अधिक और कमसे कम तीन बार|इसको लगातार एक से डेढ़ महीने तक लेना है कभी कभी दो महीने भी लग जाते है |
इससे जीतने भी stone है ,कही भी हो गोलब्लेडर gall bladder )मे हो या फिर किडनी मे हो,या युनिद्रा के आसपास हो,या फिर मुत्रपिंड मे हो| वो सभी स्टोन को पिगलाकर ये निकाल देता हे|
99% केस मे डेढ़ से दो महीने मे ही सब टूट कर निकाल देता हे कभी कभी हो सकता हे तीन महीने भी हो सकता हे लेना पड़े|तो आप दो महीने बाद सोनोग्राफी करवा लीजिए आपको पता चल जायेगा कितना टूट गया है कितना रह गया है | अगर रह गया हहै तो थोड़े दिन और ले लीजिए|यह दवा का साइड इफेक्ट नहीं है |
और यही दवा से पित की पथरी (gallbladder stones ) भी ठीक हो जाती है ! जिसे आधुनिक डाक्टर पित का कैंसर बोल देते हैं !
ये तो हुआ जब stone टूट के निकल गया अब दोबारा भविष्य मे यह ना बने उसके लिए क्या??? क्योंकि कई लोगो को बार बार पथरी होती है |एक बार stone टूट के निकल गया अब कभी दोबारा नहीं आना चाहिए इसके लिए क्या ???
इसके लिए एक और होमियोपेथी मे दवा है CHINA 1000|
प्रवाही स्वरुप की इस दवा के एक ही दिन सुबह-दोपहर-शाम मे दो-दो बूंद सीधे जीभ पर डाल दीजिए|सिर्फ एक ही दिन मे तीन बार ले लीजिए फिर भविष्य मे कभी भी स्टोन नहीं बनेगा|

 

वेरीकोज नसों का कारण क्या हैं?

Sat, 03/17/2018 - 06:00

घरेलू उपचार स्पाइडर नस या वेरिकोस वेंस के इलाज के लिए...
वेरीकोज वेन्स/मकड़ी नस वे नसें होती हैं जो त्वचा की ऊपरी सतह से उभरी हुयी दिखाई देती हैं। 
अधिक दबाव पड़ने के कारण नसों के वाल्व (द्वार) खराब हो जाते हैं जिसकी वजह से ऐसा होता है।
सूजीं, मुड़ीं हुईं और उभरी हुयी ये नसें लाल या नीले रंग की होती हैं जो मुख्य रूप से जाँघों या पिंडलियों में दिखाई देती हैं।

मकड़ी नसों / वेरीकोज वेन के कारण
* ख़राब दिनचर्या और व्यायाम तथा अच्छे खानपान की कमी से भी ये समस्या होती है। 
* घंटो तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, अधिक जंक फ़ूड खाना, गर्भावस्था, लम्बे समय तक कब्ज आदि के कारण भी नसों में उभार आ सकता है। 
* भारी वजन उठाने या कठिन अभ्यास करने से भी ये समस्या हो सकती है।
* विटामिन-सी की कमी से आने वाली कमजोरी से भी ऐसा हो सकता है।
* किसी किसी में लीवर की खराबी, ह्रदय रोग और गठिया की वजह से भी ये होता है।
* कई बार ज़्यादा वज़न उठाने और काफी कठोर व्यायाम करने से पैरों पर अत्याधिक दबाव पड़ता है, जिसकी वजह से इन नसों की उत्पत्ति होती हुई देखी जा सकती है।
* आनुवांशिकता भी एक ऐसा कारण है, जिसकी वजह से वेरिकोज़ नसों की समस्या पैदा हो सकती है।
* ऐसा भी कई बार पाया गया है कि दिल के दौरे, गुर्दे की किसी बीमारी और ट्यूमर (tumour) की वजह से भी शरीर में वेरिकोज़ नसें उत्पन्न हो जाती हैं।
* ज्यादातर लोग इसके बारे में जागरूक न होने के कारण इस पर ध्यान नहीं देते जबकि आज के समय में 10% लोग वेरीकोज वेन्स से पीड़ित हैं।
* महिलाओं में यह संख्या पुरुषों की अपेक्षा और भी अधिक है, यदि मकड़ी नसों समस्या का इलाज न किया जाये इससे बेचैनी, खिंचाव, पैरों में सूजन, खुजली जैसी परेशानियाँ उत्पन्न होती हैं।

लक्षण (Symptoms)
ऐसी समस्या पुरुषों से अधिक महिलाओं में पाई जाती है। 
इसकी वजह से जरुरी नहीं कि सबको परेशानी हो पर कुछ लोगों में पैरों में सूजन, खून का जमना, त्वचा का रंग बदलना जैसी गंभीर समस्याएं देखने को मिलती हैं। 
इसके साथ ही त्वचा का सूखना, खुजली होना और त्वचा का फटना जैसी परेशानियाँ भी हो सकती हैं।

कुछ अन्य कारण (Causes)
1. नसों के वाल्व (द्वार) का ठीक से काम न करना।
2. उम्र के कारण वाल्व (द्वार) का ठीक से काम न करना और साथ ही नसों में खून के भरने से सूजन आ जाना।
3. महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के कारण।
4. मोटापे के कारण भी नसें सूज जाती हैं।
5. आनुवांशिकता भी एक कारण हो सकती है।
6. जब वाल्व्स (valves) ठीक से कार्य नहीं करते तो रक्त धमनियों में ही रहता है, जिसकी वजह से इसमें सूजन आ जाती है और वेरिकोज़ नसों की समस्या उत्पन्न हो जाती है। 
त्वचा की सतह पर दिखने वाली छोटी नसों को स्पाइडर नसें (spider veins) कहा जाता है।
7. उम्र का कारक भी वेरिकोज़ नसों की बढ़त में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 
उम्र के साथ नसें अपनी लचक खोती रहती हैं। 
इन नसों के वाल्व्स कमज़ोर हो जाते हैं और दिल में रक्त जाने में समस्या उत्पन्न हो जाती है। 
ये धमनियां नीली इसलिए दिखती हैं, क्योंकि इनमें ऑक्सीजन (oxygen) से रहित खून होता है जो फेफड़ों से सारे शरीर में जाने की प्रक्रिया में होता है।
8. जवानी के फूटने, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति (menopause) की अवस्था में महिलाओं के शरीर में हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, जिसकी वजह से वेरिकोज़ नसें दिखने लगती हैं। 
कई बार हार्मोनल पूरक उत्पाद और गर्भनिरोधक गोलियों की वजह से भी ये धमनियां वेरिकोज़ नसों में बदल जाती हैं।

ज़ुकाम होने पर क्या सावधानी बरतें ?

Fri, 03/16/2018 - 06:00

अब आप लोग समझ ही गए होंगे की कफ हमारे शरीर में कब कहाँ और क्यों बनता है अब हम आपको बताते हैं की यदि आप ज़ुकाम से पीड़ित हैं तो आपको क्या करना चाहिये

आपको यह भी जानना चाहिये की शरीर में पानी की मात्रा कम कैसे होती है इसके कुछ मुख्य कारण निम्न है

दिन भर में पानी कम पीना।
जल्दी जल्दी पानी पीना जिस कारण हमारे मुह की लार पानी में नहीं मिल पाती और पानी सीधा हारे पेट में चला जाता है
ठन्डे पेय पदार्थ , चाय, कॉफ़ी पीना जिस कारण शरीर में से पानी जरुरत से जयादा निकल जाता है और जब पेशाब बनता है तो पानी कम पड़ जाता है जिस कारण कफ की निकासी ठीक से नहीं हो पाती
मीठा जयादा खाना :- यदि हम लोग मीठा जयादा खाते हैं तो मीठा हमारे शरीर का पानी सोख लेता है जिस कारण शरीर को निकासी के लिए पूरा पानी नहीं मिल पाता
ज्यादा नमक खाने से भी खून पानी को रोक लेता है और पेशाब के लिए उपलब्ध नही करवाता क्योंकि खून में नमक निश्चित मात्रा से अधिक नही होना चाहिए।
ये सब वो कारण है जिस कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है

मोटापा करे कम घर के नुस्खों में है दम

Thu, 03/15/2018 - 06:00

 ● खाने के बाद गुनगुना पानी ही पीएं।
● सुबह नींबू पानी पीना चाहिए।
● टमाटर और पुदीना की पत्ती युक्त सलाद खाएं।
● हर्बल टी पीने की आदत डालें।

क्या आप जानते हैं मोटापा घटाने के लिए दवाईयां खाने से बेहतर है कुछ घरेलू नुस्खें अपनाने का। इन घरेलू नुस्खों से आप न सिर्फ पूरे शरीर का मोटापा कम कर सकते हैं बल्कि शरीर में उपचय या अपच की समस्या को भी दूर कर सकते हैं। आइए जानें और किन घरेलू नुस्खों में है दम, मोटापा कम करने के लिए।
वजन कम करने की चाह आपको जिम और पार्क तक ले जाती है। आप जी तोड़ मेहनत करते हैं और जमकर पसीना बहाते हैं। लेकिन, इसके बावजूद कई बार आपको पूरा लाभ मिलता नजर नहीं आता। तो, ऐसी परिस्थिति में घबराने की जरूरत नहीं, जरूरत है बस कुछ ऐसे आसान प्राकृतिक और घरेलू उपाय आजमाने की जिनसे आप मोटापे को दूर कर सकते हैं और पा सकते हैं एक फिट बॉडी।
1) सुबह उठते ही यदि आप चाय पीने के आदी हैं तो दूध की चाय के बजाय ग्रीन टी पिएं। इसमें एंटी ऑक्सिडेंट होते हैं, जो दिल के लिए फायदेमंद हैं। यह वजन कम करने में भी मदद करती है। दिन में तीन-चार बार ग्रीन टी ले सकते हैं।
2) गेहूं के आटे की चपाती के बजाय जौ-चने के आटे की चपाती फिट रहने और सेहत के लिए वरदान है।
3) सुबह उठकर नीबू-पानी लेना चाहिए। इससे बॉडी का डिटॉक्सिफिकेशन होता है इसमें आप शहद भी मिला सकते हैं।
4) वजन घटाने के लिए डीप फ्राई और तेल से बने खाने की मात्रा कम कर दें जितना संभव हो, भाप में पका खाना ही खांए।
5) टमाटर और पुदीने की पत्ती युक्त सलाद खाने से शरीर में वसा की मात्रा कम होती है।
6) खूब पानी पीकर मोटापे पर आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है या फिर आप गुनगुना पानी पी सकते हैं इससे पाचन तंत्र ठीक प्रकार से काम करता है और शरीर में मौजूद अतिरिक्त चर्बी कम होती है।
7) फाइबर की अधिक मात्रा वाले मौसमी जूस खाएं इसे वजन कम होता है। इनमें आप संतरा, मौसमी, नीबू और आंवला, सेब, बेरी जैसे फल-सब्जियां ले सकते हैं।
8) ड्राई फ्रूट्स के सेवन से भी वज़न ठीक रहता है। बादाम, अखरोट और सूखे मेवों में होता है ओमेगा थ्री फैटी एसिड। जिससे वजन रहता है काबू में।
10) सुबह एक टमाटर खाने से कॉलेस्ट्रोल का लेवल ठीक रहता है और शरीर में मौजूद वसा भी कम होती है।
11) भरवां पराठे की बजाय भरवां रोटी खाएं। इससे एक्स्ट्रा फैट से बचेंगे और सब्जियां भी पेट में जाएगी।
12) कैलोरी रहित गोभी की सब्जी़ या उसका सूप लें, वजन घटाने में बहुत मदद मिलेगी।
13) जंकफूड बिल्कुल न लें और बाहर के खासकर तले हुए खाने को न खाएं, ये वजन बढ़ाने में मददगार हैं।
14) खाना खाने के तुरंत बाद पानी न पीएं बल्कि आधे से एक घंटे का अंतराल जरूर रखें।
15) सुबह का नाश्ता हैवी करें और दोपहर में कम कैलोरी और रात में बहुत हलका भोजन करें।
16) खाना चबा-चबा की धीरे-धीरे खाएं, इससे आपको कम भूख लगेगी।
इन सब उपायों के साथ ही आपको अपनी जीवनशैली में भी सकारात्‍मक बदलाव लाने होंगे। आपको आहार के साथ-साथ अपना व्‍यवहार भी दुरुस्‍त रखना होगा। आपको चाहिए कि आप नियमित व्‍यायाम करें।

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सर्दियों में आंखों में होती है ड्राइ आइज की दिक्कत

Wed, 03/14/2018 - 06:00

ड्राइ आइज आांखों की एक समस्या है, जो समय के साथ अधिक से अधिक लोगों को अपनी गिरफ्त में लेती जा रही है। यह समस्या वैसे तो सामान्य है, लेकिन इसे नजरअंदाज करने पर यह आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है। इस बारे में हमें कुछ जानकारी हो, तो हम इससे अपनी आंखों को बचा सकते हैं। इस बारे में कुछ खास जानकारी :- क्या है ड्राइ आइज : सामान्य शब्दों में अगर हम कहें, तो इसमें आंखों में प्रयाप्त मात्रा में नमी की कमी हो जाती है, जो आंखों के लिए हानिकारक है।

लक्षण : आंखों में खुजली, जलन, संवेदनशीलता, लाली, आंखों की नमी का अचानक कम हो जाना आदि इसके कुछ सामान्य लक्षण हैं।

कारण : इसके कई कारण हैं।

1. स्मॉग - आई टेक विजन सेंटर की नेत्र चिकित्सक डॉ.अंशिमा ने बताया, "आंखों से संबंधित समस्याओं के लिए अगर हम कहें की जाड़ा सबसे बुरा मौसम है, तो यह गलत नहीं होगा, क्योंकि इस दौरान वातावरण मे स्मॉग (फॉग और धुएं का मिश्रण) बहुत बढ़ जाता है, जिसकी वजह से आंखों की ड्राइ आइज जैसी समस्या भी बढ़ जाती हैं। ऐसा नहीं है कि केवल स्मॉग ही ड्राइ आइज का कारण है, लेकिन हम इस बात से भी इनकार नहीं कर सकते कि यह ड्राइ आइज या एलर्जी जैसी समस्याओं को बढ़ाता है।"

2. सर्जरी : कई बार ऐसा भी देखा गया है कि किसी भी प्रकार की आंखों की सर्जरी के बाद कुछ समय तक ड्राइ आइज की समस्या हो जाती है।

3. हॉर्मोन संबंधी कारण : ड्राई आइज की समस्या पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को अधिक होती है, जिसका कारण प्रेग्नेंसी या गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन की वजह से महिलाओं के हार्मोन में आया परिवर्तन हो सकता है।

4. मेकअप : हेवी आई मेकअप से कई बार ऐसा होता है कि आखों के ऑयल ग्लैंड्स में ब्लॉकेज हो जाता है, जिसके कारण भी ड्राइ आइज की समस्या होती है ।

उपचार : -

- आंखों को जितना हो सके मोबाइल और लैपटॉप से दूर रखें।

- फौरन किसी अच्छे नेत्र चिकित्सक से संपर्क करें तथा बिना उनकी सलाह के किसी भी प्रकार की दवा या फिर आइड्रॉप का प्रयोग ना करें।

- आंखों को धुएं से बचाएं।

- अधिक से अधिक पानी पिएं और विटामिन ए, सी, ई और ओमेगा फैटी ऐसिड युक्त खाद्य पदार्थो का सेवन करें।

 

- बिना चिकित्सक की सलाह के कॉन्टैक्ट लेंस का उपयोग न करें।

लंबी उम्र पाने के लिए रोज पीएं 3 कप कॉफी

Tue, 03/13/2018 - 06:00

प्रतिदिन तीन कप कॉफी पीने से कुछ बीमारियों के कारण समयपूर्व मौत का खतरा कम हो सकता है। एक नए शोध में यह बात कही गई है

यॉर्क। प्रतिदिन तीन कप कॉफी पीने से कुछ बीमारियों के कारण समयपूर्व मौत का खतरा कम हो सकता है। एक नए शोध में यह बात कही गई है। हारवर्ड युनिवर्सिटी के 'टी. एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ' के शोधकर्ताओं को अध्ययन में पता चला कि कैफीन युक्त या कैफीन रहित दोनों तरह की कॉफी पीने के कई फायदे हैं। अन्य फायदों के अतिरिक्त इससे दिल के रोगों, मस्तिष्क संबंधी रोगों, टाइप टू डायबिटीज और आत्महत्या का खतरा भी कम हो सकता है।

शोधकर्ता मिंग डिंग के मुताबिक, कॉफी में मौजूद बायोएक्टिव यौगिक इंसुलिन प्रतिरोध और प्रणालीगत सूजन को कम करते हैं। कॉफी पीने के प्रभाव को मान्य भोजन प्रश्रावली के माध्यम से हर चार वर्ष के अंतराल में 30 वर्षों की अवधि तक जांचा गया।

जांच में पाया गया कि संयत कॉफी सेवन से दिल के रोगों, पर्किंसन्स जैसे मस्तिष्क संबंधी रोगों, टाइप टू डायबिटीज और आत्महत्या से मौत का खतरा कम हो सकता है।

पोषण और महामारी विज्ञान के प्राध्यापक वरिष्ठ शोधकर्ता फ्रैंक ह्यु के मुताबिक,यह शोध प्रमाणित करता है कि सीमित कॉफी सेवन कई बीमारियों के कारण होने वाली समयपूर्व मौत के खतरे को कम कर सकता है। यह शोध सर्कुलेशन पत्रिका में ऑनलाइन प्रकशित हुआ है।

सूजन दूर करता है शकरकंद

Mon, 03/12/2018 - 06:00

शकरकंद या स्वीट पोटैटो का सेवन सर्दियों में लाभदायक होता है। सर्दियों में कंद-मूल अधिक फायदेमंद रहते हैं, क्योंकि ये शरीर को गर्म रखते हैं। शकरकंद की गहरे रंग की प्रजाति में कैरोटिनॉयड जैसे, बीटा-कैरोटीन और विटामिन ए अधिक मात्रा में पाया जाता है। 100 ग्राम शकरकंद में 400 फीसदी से अधिक विटामिन ए पाया जाता है। यह उच्च मात्रा वाला स्टार्च फूड है, जिसके 100 ग्राम में 90 कैलोरीज होती हैं। शकरकंद खाने में मीठा होता है। इसके सेवन से मोटापा, मधुमेह, हृदय रोगों और सम्पूर्ण तौर पर मृत्युकारक जोखिम कम होते हैं। यह आरोग्यवर्धक तथा ऊर्जा वर्धक होता है, पर वजन को कम करने में मददगार होता है।

विटामिन ए का सर्वश्रेष्ठ स्रोत

शकरकंद का ट्यूबर फ्लेवनॉइड्स फेनोलिक कंपाउंड्स जैसे बीटा-कैरोटीन तथा विटामिन ए का सबसे बड़ा स्रोत है। 100 ग्राम शकरकंद में 14187 आईयू विटामिन ए पाया जाता है, जो नजर तथा फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए एक आवश्यक तत्व है। विटामिन ए की कमी से ही आंखों के फोटोरिसेप्टर खराब होने लगते हैं और नजर कमजोर हो जाती है। विटामिन ए की कमी को दूर करने के लिए बीटा-कैरोटीन वाले आहार में शकरकंद सर्वश्रेष्ठ है। शकरकंद के पोषक तत्व से उम्र संबंधी मैक्यूलर डिजेनरेशन का जोखिम तथा बढ़ोतरी थम जाती है।

शकरकंद सेवन के फायदे-

मधुमेह

शकरकंद का ग्लाइसीमिक इंडेक्स स्केल कम होने की वजह से यह मधुमेह रोगियों के रक्त शर्करा को कम करने तथा इंसुलिन रेजिस्टेंस को नियंत्रित करता है। रक्त शर्करा को कम करने के लिए कम सोडियम इनटेक लेने की सलाह दी जाती है, जबकि शरीर में पोटेशियम इनटेक को नियंत्रित रखना भी जरूरी होता है, जो शकरकंद अच्छी तरह करता है। 200 ग्राम उबले शकरकंद में 27 फीसदी पोटेशियम होता है।

कैंसर

युवकों को बीटा-कैरोटिन की प्रचुरता वाला फूड लेने के लिए कहा जाता है, ताकि प्रोस्टेट कैंसर से बचाव हो सके। शकरकंद में बीटा-कैरोटीन की अच्छी मात्रा होती है, यह कोलोन कैंसर को फैलने से भी बचाता है। शकरकंद रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाता है। यह विटामिन सी और बीटा-कैरोटीन जैसे शक्तिशाली पोषक तत्वों का भंडार है। ये दोनों ही कई प्रकार के रोगों से शरीर की रोकथाम करते हैं।

 

सूजन

शकरकंद में पाए जाने वाले कोलाइन नामक तत्व को शरीर के लिए बहुत अहम माना जाता है। यह तत्व नींद, मांसपेशियों की गतिशीलता, सीखने तथा याद रखने में मदद करता है। ये तत्व कोशिका के आवरण के ढांचे को मेंटेन करने में मदद करता है। नर्व इम्पल्स के ट्रांसमिशन में मदद करता है। वसा के अवशोषण को सहायता प्रदान करता है और असाध्य सूजन को कम करता है। शकरकंद में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व आंतरिक और बाहरी सूजन जैसे हार्टबर्न, एसिडिटी और गठिया के इलाज में सहायक होते हैं।

 

दिल के रोग

शकरकंद में विटामिन बी-6 (पायरीडॉक्सिन) भरपूर मात्रा में होता है जो होमोसिस्टीन केमिकल के स्तर को कम करने में मदद करता है। होमोसिस्टीन एक प्रकार का एमीनो एसिड है जिसकी अधिकता से हृदय रोग हो सकते हैं। पोटेशियम से समृद्ध शकरकंद दिल की धड़कन और तंत्रिका संकेतों को नियंत्रित करने में सहायक होता है। पोटेशियम किडनी के कार्यों को नियंत्रित करने, सूजन को कम करने और मांसपेशियों में अकडऩ को समाप्त करने में भी मदद करता हैं।

 

किडनी रोगी ना खाएं शकरकंद

अगर आपकी किडनी सही तरह से काम नहीं कर पा रही हो, या आप किसी क्रोनिक किडनी के रोग से पीडि़त हैं, तो शकरकंद न खाएं, क्योंकि शकरकंद में पोटेशियम की अच्छी खासी मात्रा होती है। जब किडनी रक्त में मिले पोटेशियम को अलग नहीं कर पाती है, तो यह पोटेशियम शरीर के लिए घातक बन जाता है।

 

सर्दियों में फ्लू और खांसी के संक्रमण से बचने के उपाय

Sun, 03/11/2018 - 06:00

सर्दी-जुकाम से तकलीफ बढ़ जाती है। हालांकि यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है लेकिन यह देखा जाता है कि इस बीमारी में दवाईयों का असर भी कम होता है। इसके लिए सबसे अच्छा होता है घरेलू यानी देसी नुस्खे का इस्तेमाल। घर में बनाए जाने वाले इन देसी नुस्खों से आप आसानी से सर्दी जुकाम को काबू में कर अपना इलाज कर सकते है। पेश है पांच घर में आसानी से बनाए जानेवाले घरेलू उपाय जिनकी मदद से आप सर्दी-जुकाम से चंद घंटों में निजात पा सकते हैं।

सर्दियों के मौसम में आपके द्वारा की गई जरा सी लापरवाही आपके लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इस मौसम में और मौसम में ज्यादा खुद का ख्याल रखना पड़ता है।  इस मौसम को जुकाम और फ्लू का मौसम कहा जाता है।  जुकाम, खांसी और फ्लू के मामले इन दिनों बढ़ने लगते हैं। ये भी पढ़े- जानिए आपके लिए पिज्जा ज्यादा फायदेमंद है या फिर पास्ता पुरुषों को दिखना है आकर्षक, तो अपनाएं ये उपाय हवा में मौजूद नमी के जरिए खांसी का संक्रमण माहौल में आसानी से फैल सकता है और दूसरों को संक्रमित कर सकता है। 80 प्रतिशत संक्रमण सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से फैलते हैं। ऐसा देखा गया है कि अस्पताल में भर्ती होने वाले ज्यादातर लोग खांसी, छाती जमने, गला खराब होने और जुकाम के दूसरे लक्षणों के ही शिकार हो जाते हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) मनोनीत अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल का कहना है, "जब हम खांसते या छींकते हैं तो सांस प्रणाली में मौजूद गंदगी को बाहर निकालते हैं जो बेहद महीन बूंदें भी हो सकती हैं या हवा युक्त नमी के कण हो सकते हैं जो पांच माइक्रोन से भी छोटे होते हैं। दोनों के अपने-अपने प्रभाव होते हैं।" उन्होंने कहा, "नमी के ये कण कुछ ही समय के लिए हवा में रहते हैं और तीन फीट से कम दूरी में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने से सांस प्रणाली द्वारा संक्रमण फैलता है। फ्लू के मामले में यह छह फीट हो सकता है। मेनिन्गितिस, रूबेला आदि नमी युक्त कणों से होने वाले संक्रमण के उदाहरण हैं।" अगली स्लाइड में पढ़े किन बातों का रखना चाहिए ख्याल

 डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, घरेलू स्वच्छता के मद्देनजर जिन घरों मंे खिड़कियां खुली रहती हैं, वहां पर हवा लगातार साफ होती रहती है, जो संक्रमण को फैलने से रोकती है। लेकिन एसी वाले कमरे, जहां शुद्ध हवा नहीं आती, संक्रमण एक से दूसरे व्यक्ति तक फैल सकता है। खासकर सर्दियां अधिक होने पर संक्रमण को रोकने के लिए कार्यस्थल पर स्वच्छता भी अहम होती है। उन्होंने कहा, "कार्यस्थल जहां पर स्प्लिट एसी है तो वहां अगर एक व्यक्ति को संक्रमण है तो यह दूसरों तक भी फैल सकता है। इसलिए टीबी, मीजल्स (खसरा), चिकनपॉक्स और सारस जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को स्प्लिट एसी वाले जगहों पर नहीं बैठना चाहिए।"

डॉ. अग्रवाल का मानना है कि छह से 10 फीट तक दूरी वाले व्यक्ति को किसी सावधानी की जरूरत नहीं है, लेकिन स्वस्थ व्यक्ति जो संक्रमित व्यक्ति के पास तीन से छह फीट के दायरे में है, उसे सामान्य मास्क पहनना चाहिए। टीबी, मीजल्स, चिकनपॉक्स और सारस के पीड़ित इस श्रेणी के संक्रमण में आते हैं और इन्हें आइसोलेशन रूम में रखना चाहिए और जो लोग उनकी देखभाल कर रहे हों, उन्हें एन95 मॉस्क पहनना चाहिए। इन बातों का रखें ध्यान : किसी बीमार व्यक्ति के या आप बीमार हों तो दूसरे के ज्यादा करीब जाने से बचें बीमार होने पर घर पर रह कर आराम करें और दूसरों को संक्रमण से बचाएं अपनी नाक और मुंह को ढककर रखें साबुन या एंटीबायटिक लोशन से अपने हाथ बार-बार धोएं सार्वजनिक स्थानों पर सतहों को छूने से परहेज करें अपने चेहरे को बार-बार हाथ न लगाएं।

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