nutriworld

Subscribe to nutriworld feed
Updated: 21 hours 16 min ago

पपीते के बीज के फायदे

Mon, 07/09/2018 - 05:47

1 लीवर को साफ करने में मदद करता है पपीते का बीज
लीवर हमारे शरीर में सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है क्योंकि इसका कार्य कई रोगों को रोकने के लिए विषाक्त पदार्थों को फ़िल्टर करना है। अगर आपका लीवर खराब हो गया, तो आपको कई तरह के बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। पपीपे के बीज आपके लिए एक बेहतर सहयोगी हो सकते हैं, खासकर लीवर सिरोसिस की समस्या में इसे सही माना जाता है।

#2 किडनी की सुरक्षा
पपीते के बीज खाने से किडनी की समस्याओं को रोकने में मदद मिलती है। इसके बीज किडनी के लिए भी बेहद लाभकारी होते हैं। किडनी स्टोन और किडनी के ठीक तरीके से क्रियान्वयन में पपीते के बीज का सेवन बहुत ही गुणकारी माना जाता है। जब आप पहले से ही इस समस्या से पीड़ित हैं तब भी यह उपचार में मदद करता है।

#3 कैंसर बीमारी में करता है रक्षा
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में पपीते का बीज आपको प्रोटेक्ट करता है। पपीते के बीजों में आइसोथायोसायनेट नाम का एक तत्व पाया जाता है जो कैंसर के इलाज और बचाव में बहुत लाभदायक है। कैंसर से बचने के लिए पपीते के सुखाए गए बीजों को पीसकर प्रयोग किया जा सकता है।

#4 आंतों के स्वास्थ्य में सुधार
पपीते के बीज का सेवन करने से आंतों के स्वास्थ्य में सुधार आता है। इसके अलावा पपीते के बीज में एंटी बैक्टीरियल एंटी इफ्लेमेंटरी गुण होते हैं, जो पाचन स्वास्थ्य में सुधार करते हैं। पाचन शक्ति के लिए पपीते के बीज रामबाण इलाज है। इसके सेवन से पाचन तंत्र ठीक रहता है, और पाचन संबंधी सारी समस्याएं खत्म हो जाती है।

#5 वायरल बुखार में कारगर
पपीते के बीज में एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो संक्रामक बीमारियों में आपकी रक्षा करता है। इसके नियमित सेवन से वायरल बुखार होने की आशंका कम हो जाती है।

#6 शरीर की गंदगी निकालें पपीते का बीज
पपीते का बीज के सेवन करने से न केवल शरीर में चर्बी नहीं जमती बल्कि शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। यह शरीर की गंदगी हटाने में आपकी मदद करता है।

#7 शरीर में सूजन को खत्म करे पपीते का बीज
त्वचा में जलन होने पर आप पपीतों के बीज इस्तेमाल कर सकते हैं, यह आपको फायदा देगा। इसके अलावा शरीर के किसी अंग में सूजन होने पर भी पपीते के बीज बहुत ही लाभकारी रहता है।

पपीते के बीज के नुकसान
गर्भवती महिला को पपीते के बीज को नहीं खाना चाहिए। इससे गर्भपात होने का खतरा रहता है। इसके अलावा छोटे बच्चों को पपीते के बीज नहीं खिलाना चाहिए और कोशिश करें कि इसे संतुलित मात्रा में सेवन करें।

सेंधा नमक के फायदे

Sun, 07/08/2018 - 06:00

पाचन समस्याओं के लिए फायदेमंद सेंधा नमक
सेंधा नमक का उपयोग पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए किया जाता है। इसका सेवन करने से आँतों और पेट से गैस बाहर निकलती है। इसके साथ ही इससे भूख संबंधी समस्या भी दूर होती है। सेंधा नमक पेट की गैस के उत्पादन को कम करने में सहायक होता है। इसके साथ ही यह सीने की जलन को भी कम करता है।

वजन कम करे सेंधा नमक
सेंधा नमक वसा को जलाता है यह शरीर के चयापचय को बेहतर बनाता है और खाने की तृष्णा को रोकता है। सेंधा नमक में कुछ ऐसे खनिज लवण मौजूद होते हैं जो वसा को नष्ट करने में सहायक होते हैं। इसलिए वजन कम करने के लिए यह एक कारगर घरेलू उपाय है।

दांतों के लिए कारगर सेंधा नमक
सेंधा नमक दांतों के लिए बहुत उपयोग होता है। इसका इस्तेमाल दांतों पर करने से दांत चमकदार और मजबूत बनते हैं। इसके अलावा इसका इस्तेमाल मुंह की दुर्गन्ध को दूर करने के लिए भी किया जाता है।

गले के लिए उपयोगी है सेंधा नमक
सेंधा नकम ले लाभों में एक लाभ यह है कि यह गले में खराश, गले की सूजन, गले की दर्द, सूखी खांसी और टॉन्सिल में लाभकारी होता है।

रक्तचाप में सेंधा नमक के लाभ
इस बात की सभी जानते हैं कि नमक रक्तचाप को बढाने के काम आता है। ऐसे में आप सेंधा नमक का उपयोग कर सकते हैं। एक गिलास पानी में आधा चम्मच सेंधा नमक मिलाकर पीने से आपको रक्तचाप में फायदा प्राप्त होगा। इसका सेवन आप दिन में दो बार सकते हैं।

त्वचा के लिए स्क्रब काम करे सेंधा नमक
सेंधा नमक त्वचा के लिए स्क्रब का कार्य करता है। इससे आपकी मृत त्वचा में चमक आ जाती है। इसे पैरों और हाथों पर रगड़ने से त्वचा साफ़ हो जाती है।

सेंधा नमक का उपयोग पानी पूरी, मसाला पूरी जैसे स्वादिष्ट व्यंजनों में किया जाता है। कई लोग अपने घरों में साधारण के स्थान पर सेंधा नमक का उपयोग करते हैं।

सेंधा नमक सांस संबंधी बीमारी के लिए
सेंधा नमक सांस संबंधी बिमारी में बहुत ही उपयोगी होता है।

मांसपेशियों के ऐठन में सेंधा नमक के लाभ
सेंधा नमक मांसपेशियों के ऐठन में काबू पा लेता है। मांसपेशियों की ऐंठन से पीड़ित लोगों को एक गिलास पानी में सेंधा नमक मिलाकर देना चाहिए। जब वो इस पानी का सेवन कर लेते हैं तभी कुछ समय के पश्चात उन्हें राहत का एहसास होता है।

नीम का पेड़ अनेक रोगों में फायदेमंद माना गया है।

Sat, 07/07/2018 - 05:47

नीम का पेड़ अनेक रोगों में फायदेमंद माना गया है। नीम में इतने गुण हैं कि ये कई तरह के रोगों के इलाज में काम आता है। यहाँ तक कि इसको भारत में ‘गांव का दवाखाना’ कहा जाता है। यह अपने औषधीय गुणों की वजह से आयुर्वेदिक मेडिसिन में पिछले चार हजार सालों से भी ज्यादा समय से इस्तेमाल हो रहा है। नीम को संस्कृत में ‘अरिष्ट’ भी कहा जाता है, जिसका मतलब होता है, ‘श्रेष्ठ, पूर्ण और कभी खराब न होने वाला।’

 

नीम के अर्क में मधुमेह यानी डायबिटिज, बैक्टिरिया और वायरस से लड़ने के गुण पाए जाते हैं। नीम के तने, जड़, छाल और कच्चे फलों में शक्ति-वर्धक और मियादी रोगों से लड़ने का गुण भी पाया जाता है। इसकी छाल खासतौर पर मलेरिया और त्वचा संबंधी रोगों में बहुत उपयोगी होती है।

 

नीम के पत्ते भारत से बाहर 34 देशों को निर्यात किए जाते हैं। इसके पत्तों में मौजूद बैक्टीरिया से लड़ने वाले गुण मुंहासे, छाले, खाज-खुजली, एक्जिमा वगैरह को दूर करने में मदद करते हैं। इसका अर्क मधुमेह, कैंसर, हृदयरोग, हर्पीस, एलर्जी, अल्सर, हिपेटाइटिस (पीलिया) वगैरह के इलाज में भी मदद करता है।

 

इसकी पत्तियों का सेवन करने से कई रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है।

टमाटर के चमत्कारी लाभ

Fri, 07/06/2018 - 05:46

   टमाटर में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, फास्फोरस व विटामिन सी पाये जाते हैं। एसिडिटी की शिकायत होने पर टमाटरों की खुराक बढ़ाने से यह शिकायत दूर हो जाती है हालाँकि टमाटर का स्वाद खट्टा होता है, लेकिन यह शरीर में क्षारीय (खारी) प्रतिक्रियाओं को जन्म देता है। लाल-लाल टमाटर देखने में सुन्दर और खाने में स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक होते हैं। इसके खट्टे स्वाद का कारण यह है कि इसमें साइट्रिक एसिड और मैलिक एसिड पाया जाता है जिसके कारण यह प्रत्यम्ल (एंटासिड) के रूप में काम करता है। टमाटर में विटामिन 'ए' काफी मात्रा में पाया जाता है। यह आँखों के लिये बहुत लाभकारी है

टमाटर को लाल रंग देने वाला तत्व लाइकोपीन, जो सेहत के लिए फायदों से भरा है, कच्चे टमाटर से अधिक पकने के बाद प्रभावी होता है। यूं तो टमाटर हर मौसम में फायदेमंद है लेकिन टमाटर त्वचा के लिए भी काफी लाभकारी है। यह झुर्रियों को कम करता है और रोम छिद्रों को बड़ा करता है।

डायबिटीज रोगियों के लिए टमाटर खाना बहुत फायदेमंद होता है। हर रोज एक खीरा और एक टमाटर खाने से डायबिटीज रोगी को लाभ मिलता है। टमाटर आंखों व पेशाब संबंधी रोगों के लिए भी फायदेमंद है। टमाटर खाने से लीवर और किडनी की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। हर रोज टमाटर का सूप पीने से लीवर और किडनी को फायदा होता है।

 

बालों और त्वचा के लिए जरूरी विटामिन

Thu, 07/05/2018 - 11:46

 ● विटामिन हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी हैं। ये न केवल हमारी सेहत के लिए जरूरी हैं, बल्कि ये हमारी खूबसूरती बनाए रखने में भी काफी मददगार होते हैं। आइये जानें कौन से विटामिन हमारी त्‍वचा और बालों की सुंदरता को बनाये रखने में अहम होते हैं।
● खूबसूरत, कोमल त्वचा और लंबे, घने बालों की चाहत किसे नहीं होती। और इसके लिए आप कई प्रकार के उपाय भी करते हैं। परन्‍तु इसके लिए आपको ऊपरी खूबसूरती के साथ-साथ अंदर से भी खूबसूरत होना होगा। आपका स्वास्‍थ्‍य अच्छा होगा तभी आप खूबसूरत दिखेंगी। और यह तभी संभव है जब आप पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करेंगी। इन पोषक तत्‍वों में विटामिन भी शामिल है।
● त्‍वचा को खूबसूरत, जवां और बालों को चमकदार और लंबा बनाने के लिए विटामिनों की भी जरूरत होती हैं। विटामिन की कमी के कारण बाल शुष्क और कमजोर हो जाते हैं। और त्‍वचा अपनी नमी खो देती है। नतीजा होता है, बालों और त्‍वचा की समस्याएं जैसे- रूखी, बेजान, खुरदरी और झुरियां वाली त्‍वचा साथ ही बाल झड़ना, शुष्क होना, डैंड्रफ, होना इत्यादि।
किसी भी आयु वर्ग के लोग विटामिनों का प्रयोग कर सकते हैं। सही तरीके से विटामिनों के इस्तेमाल से त्वचा की झुर्रियों, पिंपल्स, एक्ने और दाग-धब्बों के साथ-साथ बालों की समस्याओं से भी छुटकारा पा सकते हैं।
कई शोध ये साबित कर चुके हैं कि बालों और त्‍वचा के स्‍वास्‍थ्‍य व सुंदरता के लिए विटामिन- ए, बी, बी-कॉम्‍पलेक्‍स, सी, डी, ई की आवश्यकता पड़ती है। आइए हम आपको बताते है कि कौन-कौन से ऐसे विटामिंस हैं जिनका उपयोग कर आप अपनी त्‍वचा और बालों को सुधार सकते हैं।
》 बालों और त्वचा के लिए जरूरी विटामिन
1) विटामिन 'ए' :- 
विटामिन 'ए' बालों के लिए महत्वपूर्ण है। बालों को घना, लंबा और मुलायम बनाने के लिए भी विटामिन 'ए' खास है। इसके नियमित इस्‍तेमाल से बालों की चम‍क भी बढ़ती है। विटामिन-'ए' हमारी अच्छी त्वचा के लिए भी जरूरी है। विटामिन ‘ए’ त्वचा में आए ढीलेपन में कसाव लाता है। त्वचा को टूटने से बचाता है और झुर्रियों को दूर रखता है। विटामिन ‘ए’ के सेवन से त्वचा कोमल बनी रहती है। विटामिन-ए सबसे अधिक गाजर और दूध में मिलता है। परन्‍तु एक चीज ध्‍यान रखने योग्‍य है कि विटामिन 'ए' का जरूरत से ज्यादा मात्रा में सेवन गंजापन लाता है।
2) विटामिन 'ई' :- 
विटामिन 'ई' एक घुलनशील विटामिन है। इसमें पर्याप्‍त मात्रा में नमी होती है। यह नमी त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद होती है। विटामिन 'ई' एक एंटी-ऑक्सीडेंट है, जो शरीर की मूलभूल जरूरतों को पूरा करता है। विटामिन 'ई' की मदद से आप त्वचा पर पड़ने वाली झुर्रियों से काफी हद तक छुटकारा पा सकते हैं। यानी आपकी बढ़ती उम्र को पीछे धकेलने में भी विटामिन 'ई' मददगार साबित होता है। विटामिन 'ई' रूखी, बेजान और खूरदूरी त्‍वचा को स्‍मूद बनाता है। त्‍वचा के अंदर रिपे‍यरिंग करने की इसमें अद्भुत क्षमता होती है। विटामिन 'ई' से बाल तेजी से बढ़ते हैं। यह विटामिन शरीर के सेक्स हार्मोन एंड्रोजन को उत्प्रेरित करता है, जो बालों को सुंदर, घना, चमकदार बनाने में मदद करता है। विटामिन 'ई' सी फूड, शाक-सब्जियों, अं‍कुरित अनाज, बिनोले, एवोकैडो, मेवे व राजमा, फ्लेक्‍स सीड (अलसी), सोयाबीन और लो‍बिया में पाया जाता है।
3) विटामिन 'बी' :- 
बी कॉम्पलेक्स की कमी के कारण बाल झड़ने और कमजोर होने लगते हैं। इसलिए विटामिन-बी लेना जरूरी होता है। बालों की चमक को बनाए रखने और सफेद होने से बचाने के लिए विटामिन बी कॉम्पलेक्स अच्छा रहता है। विटामिन-बी12 और बायोटिन भी बालों की सेहत के लिए बेहद जरूरी हैं, लेकिन इसे शरीर खुद नहीं बना सकता। इसके लिए उसे भोजन पर निर्भर रहना पड़ता है। विटामिन बी त्‍वचा में चमक बनाने में मदद करता हैं। इससे त्‍वचा में नमी बनी रहती है। अंडे और चिकन से विटामिन-बी12 की भरपूर मात्रा में होता है। बादाम, टमाटर, प्याज और ओट्स खाने से बायोटिन का संतुलन बना रहता है।
4) विटामिन 'सी' :- 
विटामिन 'सी' त्वचा में कोलेजन बनाने में मदद करता है। ये आपकी त्वचा को लचीला बनाए रखने में मदद करता है। विटामिन-सी की कमी से त्‍वचा समय से पहले लटकने लगती है। बालों को शुष्क होने से बचाने के लिए विटामिन 'सी' अच्छा रहता है। यानी विटामिन 'सी' बालों के रूखेपन को दूर करता है। शरीर में विटामिन 'सी' की कमी हो जाने से बालों में रूखापन आ जाता है। सिर की त्वचा पर सूखी पपड़ी जम जाती है, जिससे बालों की जड़ें कमजोर होती हैं और बाल गिरने लगते हैं। इस विटामिन से सिर में रक्त-संचार बढ़ता है। विटामिन 'सी' अमरूद, टमाटर, सिट्रस फ्रुट्स, पपिता, लाल और पीली मिर्च भरपूर पर्याप्त मात्रा में होता है।
5) विटामिन 'डी' :- 
बालों को स्वस्थ, हेल्दी, घना और लंबा बने रहने के लिए विटामिन 'डी' की भी आवश्‍यकता होती है। ये बालों को गिरने से रोकता है। असल में विटामिन 'डी' बालों को बढ़ने में काफी मददगार साबित होता है। यह अपने आप में आयरन और कैल्शियम को अवशोषित लेता है। आयरन की कमी भी बालों के गिरने की वजह होती है। विटामिन डी के लिए रोजाना कुछ देर के लिए सुबह-सुबह की हल्की धूप में घूमें। विटामिन डी की पूर्ति के लिए अंडे, अंडे का पीला भाग, मछली और दूध का सेवन करें।
6) विटामिन 'के' :- 
विटामिन 'के' का उपयोग त्‍वचा के लिए कई प्रकार से लाभकारी हैं। विटामिन 'के' त्‍वचा के काले धब्‍बे और आंखों के आस पास के काले घेरे को दूर करता है। साथ ही यह त्‍वचा की इलास्टिसिटी में सुधार कर सकता हैं। इसके अलावा, यह विटामिन त्वचा के घाव और चोट के निशान दूर करने में मदद करता हैं। विटामिन बालों को भी स्वस्थ रखता है। गाजर, पालक, हरी पत्तेदार सब्जियों में यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
इस प्रकार से हम कह सकते है कि विटामिन सिर्फ सेहत के लिए ही नहीं बल्कि त्वचा और और बालों के लिए भी लाभदायक हैं। इसलिए विटामिन युक्त खाद्य पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करें।
 

Tags: हेल्‍द न्यूजहेल्‍दी टिप्‍स

अजवाइन खाने से दूर होती है किडनी की स्‍टोन

Wed, 07/04/2018 - 06:00

  आपने अपने घरों की रसोईं में अनेकों प्रकार के मसाले देखे होगें। उन्‍हीं में से एक है अजवाइन जिसका नाम हर किसी ने सुना और देखा होगा। क्‍या आपको पता है यह केवल एक किस्‍म का मसाला ही नहीं बल्कि एक ऐसी औषधि भी है जिसके प्रयोग से आपके स्‍वास्‍थ्‍य पर अच्‍छे प्रभाव पड सकते हैं। क्‍या आपको पता है कि इसके नियमित सेवन से किडनी में स्‍टोन की बीमारी भी ठीक हो सकती है। इसलिए आज हम आपको बताएगें की कसके खाने से आपको क्‍या फायदा हो सकता है। क्‍या हैं इसके फायदे-
1. पाचन से संबधित कोई भी समस्‍या क्‍यों ना हो अजवाइन इसको ठीक करने में बहुत मददगार होता है। यह एक प्रकार का एंटी एसिड है जो आपको बदहज़मी से बचाएगा। इसको मठ्ठे या छाछ के साथ मिला कर पीने से राहत मिलेगी।

2. ठंडी में नज़ले से परेशान लोग आजवाइन को अच्‍छी तरह से चबा कर गरम पानी के साथ निगल लें। अगर इसको गुण के साथ दो चम्‍मच सुबह और शाम मिक्‍स कर के खाया जाए तो यह दमा और ब्रोंकाइटिस के मरीज़ों के लिए भी फायदेमंद होगा।

3. किसी प्रकार का दर्द चाहे वह दिल, सिर या फिर कान का ही क्‍यों न हो अजवाईन के प्रयोग से काफी कम हो जाता है। कान में दर्द से राहत पाने के लिए इसके तेल का प्रयोग करें वही दिल और सिर दर्द के लिए इसको गरम पानी के साथ खाएं।
4. गठिया और जोड़ों के रोगियों के लिए अजवाईन के तेल से मालिश करनी चाहिए।
5. अधिक शराब पी लेने से अगर व्‍यक्ति को उल्‍टियां आ रहीं हो तो उसे अजवाईन खिलाना बेहतर होगा। इससे उसको आराम मिलेगा और भूंख भी अच्‍छी तरह से लगेगी।

6. मुंह से दुर्गंध आना और मुंह में छाले होना या फिर दांत में दर्द होना यह सभी रोगों से आपको मुक्‍ती मिल जाएगी अगर आप हर रात खाना खाने के बाद इसका सेवन माउथ फ्रेशनर के रुप में करते हैं तो। दांत दर्द के लिए इसको अच्‍छी तरह पानी में उबाल कर फिर इसी के पानी से गरारे या कुल्ला करें।
7. यह ऐसिडिटी की समस्‍या से भी राहत दिलाने में कारगर है। थोडा सा जीरा और अजवाईन एक साथ भून लीजिए और फिर मिश्रण को पानी में उबाल कर छान लीजिए उसके बाद इसमें चीनी मिला कर खाएं। इससे आपके ऐसिडिटी की समस्‍या में राहत मिलेगी।
8. गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अजवाइन जरुर खानी चाहिए क्‍योंकि इससे ना सिर्फ खून साफ रहता है बल्कि यह पूरे शरीर में रक्त के प्रवाह को संचालित भी करता है।
 

Tags: हेल्‍द न्यूजहेल्‍दी टिप्‍स

घर में ही हो जाता है पथरी का इलाज

Tue, 07/03/2018 - 06:00

किडनी में स्‍टोन यूरीन सिस्टम का एक रोग है जिसमें किडनी के अन्दर छोटे-छोटे पत्थर जैसी कठोर वस्तुएं बन जाती हैं. आमतौर पर यह ये पथरियां यूरीन के रास्ते शरीर से बाहर निकल जाती है. बहुत से ऐसे घरेलू उपाय है जिनको अपनाकर इनसे निजात पाई जा सकती है. आइए जाने ऐसे ही कुछ उपायों के बारे में.

पानी : ज्यादा पानी पीएं. एक दिन में कम से कम दो से तीन लीटर पानी पीएं. शरीर में पानी की कमी होने से गुर्दे में पानी कम छनता है. पानी कम छनने से शरीर में मौजूद कैल्शियम, यूरिक एसिड और दूसरे पथरी बनाने वाले तत्व गुर्दे में फंस जाते हैं जो बाद में धीरे-धीरे पथरी बन जाते हैं. जीरे और चीनी को समान मात्रा में पीसकर एक-एक चम्मच ठंडे पानी से रोज तीन बार लेने से लाभ होता है.

करेला: करेला वैसे तो बहुत कड़वा होता है और आमतौर पर लोग इसे कम पसंद करते है. परन्‍तु पथरी में यह रामबाण की तरह काम करता है. करेले में मैग्‍नीशियम और फॉस्‍फोरस नामक तत्‍व होते हैं, जो पथरी को बनने से रोकते हैं.

अंगूर: अंगूर में एल्ब्यूमिन और सोडियम क्लोराइड बहुत ही कम मात्रा में होता हैं, इसलिए किडनी में स्‍टोन के उपचार के लिए बहुत ही उत्तम माना जाता है. साथ ही अंगूर प्राकृतिक मूत्रवर्धक के रूप में उत्कृष्ट रूप में कार्य करता है क्योंकि इनमें पोटेशियम नमक और पानी भरपूर मात्रा में होते हैं.

केला: पथरी की समस्‍या से निपटने के लिए केला खाना चाहिए क्‍योंकि इसमें विटामिन बी 6 होता है. विटामिन बी 6 ऑक्जेलेट क्रिस्टल को बनने से रोकता और तोड़ता है. साथ ही विटामिन बी-6, विटामिन बी के अन्य विटामिन के साथ सेवन करना किडनी में स्‍टोन के इलाज में काफी मददगार होता है. एक शोध के मुताबिक विटामिन-बी की 100 से 150 मिलीग्राम दैनिक खुराक गुर्दे की पथरी की चिकित्सीय उपचार में बहुत फायदेमंद हो सकता है.

नींबू का रस और जैतून का तेल: नींबू का रस और जैतून के तेल का मिश्रण, गुर्दे की पथरी के लिए सबसे प्रभावी प्राकृतिक उपचार में से एक है. पत्‍थरी का पहला लक्षण होता है दर्द का होना. दर्द होने पर 60 मिली लीटर नींबू के रस में उतनी ही मात्रा में आर्गेनिक जैतून का तेल मिला कर सेवन करने से आराम मिलता है. नींबू का रस और जैतून का तेल पूरे स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहता है और आसानी से उपलब्ध भी हो जाता हैं.

बथुए का साग: किडनी में स्‍टोन को निकालने में बथुए का साग बहुत ही कारगर होता है. इसके लिए आप आधा किलो बथुए के साग को उबाल कर छान लें. अब इस पानी में जरा सी काली मिर्च, जीरा और हल्‍का सा सेंधा नमक मिलाकर, दिन में चार बार पीने से बहुत ही फायदा होता है.

प्‍याज: प्‍याज में पथरी नाशक तत्‍व होते है इसका प्रयोग कर आप किडनी में स्‍टोन से निजात पा सकते है. लगभग 70 ग्राम प्‍याज को पीसकर और उसका रस निकाल कर पियें. सुबह खाली पेट प्‍याज के रस का नियमित सेवन करने से पथरी छोटे-छोटे टुकडे होकर निकल जाती है.

अजवाइन: अजवाइन एक महान यूरीन ऐक्ट्यूऐटर है और किडनी के लिए टॉनिक के रूप में काम करता है. किडनी में स्‍टोन के गठन को रोकने के लिए अजवाइन का इस्‍तेमाल मसाले के रूप में या चाय में नियमित रूप से किया जा सकता है.

गाजर: गाजर में पायरोफॉस्फेट अम्ल पाया जाता हैं जो किडनी में स्‍टोन बनने की प्रक्रिया को रोकता है. साथ ही गाजर में पाया जाने वाला केरोटिन यूरीन की आंतरिक दीवारों को टूटने-फूटने से भी बचाता है.

तुलसी: तुलसी की चाय समग्र किडनी स्वास्थ्य के लिए बहुत ही सफल प्राकृतिक उपचार है. यह किडनी में स्‍टोन के उपचार के लिए एक आदर्श समाधान है. शुद्ध तुलसी का रस लेने से पथरी को यूरीन के रास्‍ते निकलने में मदद मिलती है. कम से कम एक म‍हीना तुलसी के पतों के रस के साथ शहद लेने से आप प्रभाव महसूस कर सकते है. साथ ही आप तुलसी के कुछ ताजे पत्तों को रोजाना चबा भी सकते हैं.

अनार का रस: अनार का रस किडनी में स्‍टोन के खिलाफ एक बहुत ही अद्भुत और सरल घरेलू उपाय है. अनार के कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के अलावा इसके बीज और रस में खट्टेपन और कसैले गुण के कारण इसे किडनी में स्‍टोन के लिए एक और प्राकृतिक उपाय के रूप में माना जाता है.

Tags: हेल्‍द न्यूजहेल्‍दी टिप्‍स

दमा व श्वास का घरेलू उपचार

Mon, 07/02/2018 - 06:00

एक पका केला छिला लेकर चाकू से लम्बाई में चीरा लगाकर उसमें एक छोटा चम्मच दो ग्राम कपड़छान की हुई काली मिर्च भर दें । फिर उसे बगैर छीलेही, केले के वृक्ष के पत्ते में अच्छी तरह लपेट कर डोरे से बांध कर 2-3 घंटे रख दें । बाद में केले के पत्ते सहित उसे आग में इस प्रकार भूने की उपर का पत्ता जले । ठंडा होने पर केले का छिलका निकालकर केला खा लें ।प्रतिदिन सुबह में केले में काली मिर्च का चूर्ण भरें। और शाम को पकावें । 15-20 दिन में खूब लाभ होगा ।

 

केला के पत्तों को सुखाकर किसी बड़े बर्तन में जला लेवें।  फिर कपड़छान कर लें और इस केले के पत्ते की भरम को एक कांच की साफ शीशी या डिब्बे में रख लें । बस, दवा तैयार है ।

सेवन विधि – एक साल पुराना गुड़ 3 ग्राम चिकनी सुपारी का आधा से थोड़ा कम वनज को2-3 चम्मच पानी में भिगों दें । उसमें 1-4 चौथाई दवा केले के पत्ते की राख डाल दें और पांच-दस मिनट बाद ले लें । दिनभर में सिर्फ एक बार ही दवा लेनी है, कभी भी ले लेवें ।

बच्चे का असाध्य दमा – अमलतास का गूदा 15 ग्राम दो कप पानी में डालकर उबालें चौथाई भाग बचने पर छान लें और सोते समय रोगी को गरम-गरम पिला दें । फेफड़ों में जमा हुआ बलगम शौच मार्ग से निकल जाता है । लगातार तीन दिन लेने से जमा हुआ कफ निकल कर फेफड़े साफ हो जाते है । महीने भर लेने से फेफड़े कर तपेदिक ठीक हो सकती है ।

Tags: हेल्‍द न्यूजहेल्‍दी टिप्‍स

जौ का पानी पीने के फायदे

Sun, 07/01/2018 - 05:45

#1 कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करे
शरीर के सुचारु रूप से कार्य करने के लिए कोलेस्ट्रॉल का होना बहुत ही जरूरी है। इससे शरीर की प्रत्येक कोशिका जीवित रहती हैं। कोलेस्ट्रॉल के सामन्य स्तर बनाए रखने के लिए जौ का पानी बहुत ही फायदेमंद है। इसमें फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है और आपके दिल स्वस्थ रखने में भी मददगार साबित होता है।

#2 किडनी की पथरी
अगर देखा जाए तो बदलती खान-पान की आदतों और भाग-दौड़ की जिंदगी, बाहर का खाना, प्रदूषित पानी और प्रदूषण की वजह से किडनी की बीमारियां बढ़ रही है। किडनी की पथरी भी एक बीमारी है जिससे अधिकतर लोग परेशान रहते हैं। इसके पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जौ का पानी किडनी की पथरी में एक औषधि के रूप में काम करता है। यदि आप नियमित रूप से एक गिलास जौ का पानी पीते हैं तो किडनी की पथरी की समस्या बाहर निकल जाती है और आपकी किडनी स्वस्थ रहती है।

गुर्दे की पथरी का घरेलू उपचार

#3 फाइबर की करे पूर्ति
शरीर की पाचन शक्ति को मजबूत रखने के लिए फाइबर की ज्यादा से ज्यादा आवश्यकता होती है। अपनी आहार में भारी मात्रा में फाइबर लेना मतलब शरीर को पोषक तत्व देना है। जौ का पानी आपके फाइबर की आवश्यकता को पूरा करेगा। इस पानी का एक गिलास नियमित सेवन फाइबर की आवश्यकता की पूर्ति होती है। आपको बता दें कि फाइबर कुदरती तरीके से शरीर की सफाई करने में सहायता करता है।

#4 मधुमेह में फायदेमंद
आज मधुमेह के मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। डायबिटीज के रोगियों के लिए जौ का पानी बहुत ही फायदेमंद है। नियमित रूप से जौ का पानी पीने से आपका शुगर लेवल नियंत्रण में रह सकता है।

#5 वजन को घटाए
वजन घटाने के लिए जौ का पानी बहुत ही फायदेमंद रहता है। मोटापे को कम करने के लिए जौ का पानी आपके लिए न केवल रामबाण साबित हो सकता है बल्कि इसका नियमित सेवन रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को भी बेहतर बनाए रखता है।

#6 पेट में जलन को खत्म करे
गर्मियों के मौसम में जौ का पानी पीना चाहिए। इससे शरीर की गर्मी को कम करता है और ठंडक की अनुभूति देता है। यह न केवल गर्मी में आपको राहत देगा बल्कि तेज मसालेदार खाने से आपके पेट में जलन हो रही है तो उसे भी आराम देगा।

#7 जोड़ों के दर्द के लिए
जोड़ों के दर्द की समस्या एक सामान्य रोग है जिससे अधिकतर लोग परेशान रहते हैं। जौ में एक एंटी-इंफ़्लामेंट्री है जो गठिया और जोड़ों के दर्द से पीड़ित लोगों के लिए बहुत ही गुणकारी माना जाता है।

#8 विषाक्त पदार्थों को निकाले बाहर
यदि शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालना है तो नियमित रूप से जौ का पानी पीजिए। यह मूत्रवर्धक के रूप में काम करता है। इसका पानी न केवल विषाक्त पदार्थों को मूत्र द्वारा शरीर से बाहर निकाल देता है बल्कि चेहरे पर निखार भी लाता है।

गुलाबी गाल पाने के घरेलू उपाय

Sat, 06/30/2018 - 06:10

#1 गुलाबी गाल के लिए बादाम
पौष्टिक तत्वों से भरपूर बादाम कैल्शि‍यम, विटामिन, जिंक, मैग्नीशि‍यम और ओमेगा 3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत है। बादाम त्वचा के रोमछिद्रों को खोल देता है और चेहरे पर चमक लाता है। इसके लिए आप पीसे हुए बादाम में पांच-पांच चम्मच पुदीना का रस और शहद मिलाएं। फिर इसमें गुलाब की पंखुड़ी भी पीस लें। रात को सेते समय लगाएं। चेहरे पर ग्लो और गुलाबी चमक आएगी।

#2 गुलाबी गाल के लिए चुकंदर
गुलाबी गाल पाने के लिए चुकंदर का सेवन बहुत अच्छा माना जाता है। इसका रस भी बहुत फायदेमंद है। दरअसल चुकंदर की तासीर ठंडी होती है इसलिए इसका रस त्वचा के कील मुंहासे और फोड़े फुंसी से मुक्ति दिलाने में मदद करता है।
गुलाबी गाल पाने के लिए आप 2 चुकंदर को उबालकर मैश कर लें, फिर उसमें 3 चम्मच केओलिन पाउडर मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं और कुछ मिनट बाद धो लें।

#3 दूध की क्रीम, बेसन, और दही
दो-तीन चम्मच बेसन के साथ एक चम्मच दूध की क्रीम और एक-एक चम्मच गेहूं की भूसी और दही मिलाकर फेसपैक बना लें और इसे अपने चेहरे पर 15 मिनट लगाकर छोड़ दें। इससे आपके गाल मुलायम और चमकने लगेंगे।

#4 केला और क्रीम
कुछ केले के गूदे लेकर दूध क्रीम के साथ मिलाकर इसे अपने चेहरे पर लगाएं और इसे 20 मिनट के लिए छोड़ दें। धोने के बाद आपके गाल गुलाब की तरह चमकने लगेंग।

#5 नींबू और दूध
चेहरे पर चमक लाने के लिए 1/4 कप नींबू के रस में दूध मिला दें। फिर इससे चहरे पर मालिश करें। इससे आपके चहरे का रक्तकसंचार भी अच्छा होगा।

#6 गुलाब की पंखुड़ी
आप सूखे गुलाब की पंखुड़ी का एक पेस्ट भी बना सकते हैं और अपने चेहरे पर लगाएं। इससे गालों पर एक प्राकृतिक ब्लश मिलता है।

#7 खीरा भी है जरूरी
खीरे में पानी मात्रा 95 फीसदी रहती है जिससे त्वचा अच्छी तरह से मॉइश्चाराइज रहती है। खीरे त्वचा में होने वाली जलन को दूर करके ठंडक प्रदान करता हैं। खीरे के गूदे को चहरे पर लगाएं, इससे आपकी त्वचा का रंग हल्का होगा साथी ही डार्क सर्किल भी कम हो जाएगे।

#8 ककड़ी और टमाटर
प्राकृतिक रूप से गुलाबी चेहरा पाने के लिए आप ककड़ी और टमाटर के गूदे को गालों पर लगाएं। गुलाबी गालों को प्राप्त करने में सहायक साबित होता है।

#9 दूध और मसूर की दाल
मसूर की दाल को 30 मिनट के लिए दूध में भिगो दें, फिर इसे अच्छी तरह से पीस लें। इसके बाद इसमें नरम सफेद कॉस्मेटिक मिट्टी (केओलिन पाउडर) मिलाएं और 20 मिनट के लिए छोड़ दें। आप देखेंगे कि आपके चेहरे पर चमक आ रही है।

पीपल के पेड़ और पत्तों के फायदे

Fri, 06/29/2018 - 05:09

1 अस्थमा में बहुत ही फायदेमंद
अस्थमा फेफड़ों से संबंधित बीमारी है जिससे ज्यादातर बूढ़े और बच्चे प्रभावित होते हैं। अस्थमा या सांस की बीमारी में पीपल के पेड़ की छाल बहुत ही गुणकारी है। इसके लिए छाल का अंदरूनी हिस्सा निकालर उसका चूर्ण बना लें। इसे खाने से सांस संबंधित समस्याएं दूर हो सकती है।

#2 पीलिया रोग में दे लाभ
पीलिया में आपकी त्वचा और आपकी आंखें पीले हो जाते हैं। यह रोग कुछ दिनों के लिए रहता है। यदि आप इससे छुटकारा पाना चाहते हैं तो नियमित रूप से पीपल के पत्तों का शरबत बनाकर और मिश्री मिलाकर पीने से लाभ मिलता है।

#3 स्किन के रोग में बहुत ही उपयोगी
दाग, खाज, खूजली ये समस्याएं गर्मी के मौसम में बढ़ जाती है। अगर आप भी इस समस्या से ग्रसित हैं तो पीपल के पत्तों का काढ़ा पीने से बहुत ही लाभ मिलता है। पीपल न केवल खाज-खूजली में फायदेमंद है बल्कि फोड़े-फुंसी वाली जगह पर इसके छाल को घिसकर लगाने से समस्या दूर होती है। इसके अलावा यदि आप चेहरे पर पीपल की छाल का लेप लगाएंगे तो झुर्रियां कम पड़ती है।

#4 फटी एडियों को करे ठीक
पीपल के पत्तों का रस लगाने से न केवल पैरों की फटी एडियां ठीक हो जाती है बल्कि पीपल के पत्तों का गर्म लेप से शरीर के घाव को दूर किया जा सकता है। इसमें जल्द घाव भरने की क्षमता मौजूद है।

#5 नकसीर फूटने और हकलाने में फायदेमंद
पीपल के ताजे पत्तों को तोड़कर उसकर रस निकालकर नाक में डालने से नकसीर फूटने की समस्या में आराम मिलता है। इसके अलावा पीपल के पके हुए फलों को सुखाकर बनाए गए चूर्ण को शहद के साथ खाने हकलाने की समस्या कम होती है।

#6 दांतों को दे आराम
पीपल के पेड़ और पत्तों के आयुर्वेदिक फायदे

बिना दर्द आपके दांत चमकते रहे और आपकी दातों में कोई समस्या न हो इसके लिए इसके लिए आप पीपल के दातुन का इस्तेमाल कीजिए। इसके अलावा आप पीपल की छाल को पीसकर उसमें काली मिर्च और कत्था मिलाकर खाने से आप इसका मंचन भी बना सकते हैं।

#7 सर्दी-जुकाम से राहत दे
सर्दी-जुकाम एक सामान्य समस्या है जिसे हर किसी को गुजरना पड़ता है। ऐसी स्थिति में पीपल का पत्ता बहुत ही फायदेमंद रहता है। आप सुबह-शाम पीपल के पत्तों को छांव में सुखाकर मिश्री के साथ इसका काढ़ा बनाकर पीये बहुत ही आराम मिलेगा।

#8 गैस और कब्ज
गैस और कब्ज की समस्या एक आम समस्या है जिससे बहुत से लोग प्रभावित रहते हैं। अगर आपको भी यह समस्या है तो इसके लिए पीपल के ताजे पत्तों के रस निकालकर सुबह और शाम के वक्त एक-एक चम्मसच पीने से कब्ज में राहत मिलता है।

#9 तनाव को करे कम
एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर पीपल का पत्ता आपके तनाव को दूर कर सकता है। इसके लिए आप नियमित रूप से इसके पत्ते को चबाएं। तनाव से राहत मिलेगी।

#10 विष के प्रभाव को कम करे
ऐसा माना जाता है कि पीपल में ऐसी क्षमता है कि वह जहरीले जीव-जंतु के विष के असर को भी कम कर सकता है। ऐसी स्थिति में दिन में 3 से 4 बार दो-दो चम्मच आपको पीपल के पत्ते का रस पीना चाहिए।

रिफाईनड तेल बनता कैसे हैं

Thu, 06/28/2018 - 05:09

आप की हत्या की साजिश
रची गई है! 
और आप स्वयं ही आत्म हत्या के पक्ष में हैं! 
वो भी परिवार सहित.? 

आप का और आप के परिवार का जीवन बचाना चाहते हैं तो यह पोस्ट जरूर पढे!

सबसे ज्यादा मौतें देने वाला भारत में कोई है तो वह है... रिफाईनड तेल

 केरल आयुर्वेदिक युनिवर्सिटी आंफ रिसर्च केन्द्र के अनुसार, हर वर्ष 20 लाख लोगों की मौतों का कारण बन गया है... रिफाईनड तेल

आखिर भाई राजीव दीक्षित जी के कहें हुए कथन सत्य हो ही गये! 

रिफाईनड तेल से DNA डैमेज, RNA नष्ट, , हार्ट अटैक, हार्ट ब्लॉकेज, ब्रेन डैमेज, लकवा शुगर(डाईबिटीज), bp नपुंसकता *कैंसर हड्डियों का कमजोर हो जाना, जोड़ों में दर्द,कमर दर्द, किडनी डैमेज, लिवर खराब, कोलेस्ट्रोल, आंखों रोशनी कम होना, प्रदर रोग, बांझपन, पाईलस, स्केन त्वचा रोग आदि!. एक हजार रोगों का प्रमुख कारण है। 

रिफाईनड तेल बनता कैसे हैं।

बीजों का छिलके सहित तेल निकाला जाता है, इस विधि में जो भी Impurities तेल में आती है, उन्हें साफ करने वह तेल को स्वाद गंध व कलर रहित करने के लिए रिफाइंड किया जाता है
वाशिंग-- वाशिंग करने के लिए पानी, नमक, कास्टिक सोडा, गंधक, पोटेशियम, तेजाब व अन्य खतरनाक एसिड इस्तेमाल किए जाते हैं, ताकि Impurities इस बाहर हो जाएं |इस प्रक्रिया मैं तारकोल की तरह गाडा वेस्टेज (Wastage} निकलता है जो कि टायर बनाने में काम आता है। यह तेल ऐसिड के कारण जहर बन गया है। 

Neutralisation--तेल के साथ कास्टिक या साबुन को मिक्स करके 180°F पर गर्म किया जाता है। जिससे इस तेल के सभी पोस्टीक तत्व नष्ट हो जाते हैं।

Bleaching--इस विधी में P. O. P{प्लास्टर ऑफ पेरिस} /पी. ओ. पी. यह मकान बनाने मे काम ली जाती है/ का उपयोग करके तेल का कलर और मिलाये गये कैमिकल को 130 °F पर गर्म करके साफ किया जाता है! 

Hydrogenation-- एक टैंक में तेल के साथ निकोल और हाइड्रोजन को मिक्स करके हिलाया जाता है। इन सारी प्रक्रियाओं में तेल को 7-8 बार गर्म व ठंडा किया जाता है, जिससे तेल में पांलीमर्स बन जाते हैं, उससे पाचन प्रणाली को खतरा होता है और भोजन न पचने से सारी बिमारियां होती हैं। 
निकेलएक प्रकार का Catalyst metal (लोहा) होता है जो हमारे शरीर के Respiratory system,  Liver,  skin,  Metabolism,  DNA,  RNA को भंयकर नुकसान पहुंचाता है। 

रिफाईनड तेल के सभी तत्व नष्ट हो जाते हैं और ऐसिड (कैमिकल) मिल जाने से यह भीतरी अंगों को नुकसान पहुंचाता है। 

जयपुर के प्रोफेसर श्री राजेश जी गोयल ने बताया कि, गंदी नाली का पानी पी लें, उससे कुछ भी नहीं होगा क्योंकि हमारे शरीर में प्रति रोधक क्षमता उन बैक्टीरिया को लडकर नष्ट कर देता है, लेकिन रिफाईनड तेल खाने वाला व्यक्ति की अकाल मृत्यु होना निश्चित है! 

दिलथाम के अब पढे

हमारा शरीर करोड़ों Cells (कोशिकाओं) से मिलकर बना है, शरीर को जीवित रखने के लिए पुराने Cells नऐ Cells से Replace होते रहते हैं नये Cells (कोशिकाओं) बनाने के लिए शरीर खुन का उपयोग करता है, यदि हम रिफाईनड तेल का उपयोग करते हैं तो खुन मे Toxins की मात्रा बढ़ जाती है व शरीर को नए सेल बनाने में अवरोध आता है, तो कई प्रकार की बीमारियां जैसे -— कैंसर Cancer,  Diabetes मधुमेह, Heart Attack हार्ट अटैक, Kidney Problems किडनी खराब, 
Allergies,  Stomach Ulcer,  Premature Aging,  Impotence,  Arthritis,  Depression,  Blood pressure आदि हजारों बिमारियां होगी।

 रिफाईनड तेल बनाने की प्रक्रिया से तेल बहुत ही मंहगा हो जाता है, तो इसमे पांम आंयल मिक्स किया जाता है! (पांम आंयल सवमं एक धीमी मौत है) 

सरकार का आदेश--हमारे देश की पॉलिसी अमरिकी सरकार के इशारे पर चलती है। अमरीका का पांम खपाने के लिए,INDIA सरकार ने एक अध्यादेश लागू किया कि, 
प्रत्येक तेल कंपनियों को 40 %
खाद्य तेलों में पांम आंयल मिलाना अनिवार्य है, अन्यथा लाईसेंस रद्द कर दिया जाएगा! 
इससे अमेरिका को बहुत फायदा हुआ, पांम के कारण लोग अधिक बिमार पडने लगे, हार्ट अटैक की संभावना 99 %बढ गई, तो दवाईयां भी अमेरिका की आने लगी, हार्ट मे लगने वाली  स्प्रिंग(पेन की स्प्रिंग से भी छोटा सा छल्ला) , दो लाख रुपये की बिकती हैं, 
यानी कि अमेरिका के दोनो हाथों में लड्डू, पांम भी उनका और दवाईयां भी उनकी! 

अब तो कई नामी कंपनियों ने पांम से भी सस्ता,, गाड़ी में से निकाला काला आंयल (जिसे आप गाडी सर्विस करने वाले के छोड आते हैं) 
वह भी रिफाईनड कर के खाद्य तेल में मिलाया जाता है, अनेक बार अखबारों में पकड़े जाने की खबरे आती है।

सोयाबीन एक दलहन हैं, तिलहन नही... 
दलहन में... मुंग, मोठ, चना, सोयाबीन, व सभी प्रकार की दालें आदि होती है। 
तिलहन में... तिल, सरसों, मुमफली, नारियल, बादाम आदि आती है। 
अतः सोयाबीन तेल ,  पेवर पांम आंयल ही होता है। पांम आंयल को रिफाईनड बनाने के लिए सोयाबीन का उपयोग किया जाता है। 
सोयाबीन की एक खासियत होती है कि यह, 
प्रत्येक तरल पदार्थों को सोख लेता है, 
पांम आंयल एक दम काला और गाढ़ा होता है, 
उसमे साबुत सोयाबीन डाल दिया जाता है जिससे सोयाबीन बीज उस पांम आंयल की चिकनाई को सोख लेता है और फिर सोयाबीन की पिसाई होती है, जिससे चिकना पदार्थ तेल तथा आटा अलग अलग हो जाता है, आटा से सोया मंगोडी बनाई जाती है! 
आप चाहें तो किसी भी तेल निकालने वाले के सोयाबीन ले जा कर, उससे तेल निकालने के लिए कहे!महनताना वह एक लाख रुपये  भी देने पर तेल नही निकालेगा, क्योंकि. सोयाबीन का आटा बनता है, तेल नही! 

सूरजमुखी, चावल की भूसी (चारा) आदि के तेल रिफाईनड के बिना नहीं निकाला जा सकता है, अतः ये जहरीले ही है! 

फॉर्च्यून.. अर्थात.. आप के और आप के परिवार के फ्यूचर का अंत करने वाला. 

सफोला... अर्थात.. सांप के बच्चे को सफोला कहते हैं! 
5 वर्ष खाने के बाद शरीर जहरीला 
10 वर्ष के बाद.. सफोला (सांप का बच्चा अब सांप बन गया है. 
15 साल बाद.. मृत्यु... यानी कि सफोला अब अजगर बन गया है और वह अब आप को निगल जायगा.! 

पहले के व्यक्ति 90.. 100 वर्ष की उम्र में मरते थे तो उनको मोक्ष की प्राप्ति होती थी, क्योंकि.उनकी सभी इच्छाए पूर्ण हो जाती थी।

और आज... अचानक हार्ट अटैक आया और कुछ ही देर में मर गया....? 
उसने तो कल के लिए बहुत से सपने देखें है, और अचानक मृत्यु..? 
अधुरी इच्छाओं से मरने के कारण.. प्रेत योनी मे भटकता है। 

राम नही किसी को मारता.... न ही यह राम का काम!
अपने आप ही मर जाते हैं.... कर कर खोटे काम!!
गलत खान पान के कारण, अकाल मृत्यु हो जाती है! 

सकल पदार्थ है जग माही..!
कर्म हीन नर पावत नाही..!! 
अच्छी वस्तुओं का भोग,.. कर्म हीन, व आलसी व्यक्ति संसार की श्रेष्ठ वस्तुओं का सेवन नहीं कर सकता! 

तन मन धन और आत्मा की तृप्ति के लिए सिर्फ कच्ची घाणी का तेल, तिल सरसों, मुमफली, नारियल, बादाम आदि का तेल ही इस्तेमाल करना चाहिए! पोस्टीक वर्धक और शरीर को निरोग रखने वाला सिर्फ कच्ची घाणी का निकाला हुआ तेल ही इस्तेमाल करना चाहिए! 
आज कल सभी कम्पनी.. अपने प्रोडक्ट पर कच्ची घाणी का तेल ही लिखती हैं! 
वह बिल्कुल झूठ है.. सरासर धोखा है! 
कच्ची घाणी का मतलब है कि,, लकड़ी की बनी हुई, औखली और लकडी का ही मुसल होना चाहिए! लोहे का घर्षण नहीं होना चाहिए. इसे कहते हैं.. कच्ची घाणी. 
जिसको बैल के द्वारा चलाया जाता हो! 
आजकल बैल की जगह मोटर लगा दी गई है! 
लेकिन मोटर भी बैल की गती जितनी ही चले! 
लोहे की बड़ी बड़ी सपेलर (मशिने) उनका बेलन लाखों की गती से चलता है जिससे तेल के सभी पोस्टीक तत्व नष्ट हो जाते हैं और वे लिखते हैं.. कच्ची घाणी...

दूध पीने के कुछ नियम

Wed, 06/27/2018 - 06:00

दूध जहाँ पौष्टिक मन जाता है वहीं कुछ लोग दूध पीने से परहेज करते है बचपन में माँ बार बार दूध पिलाने का प्रयास करती थी लेकिन हम लोग बच कर भागते थे आज हम अपने बच्चों को दूध पिलाने का प्रयास करतें है 

 

आयुर्वेद के अनुसार दूध पीने के कुछ नियम

कुछ लोगों को दूध पीने के बाद हजम नहीं हो पाता। उन्‍हें पेट फूलने या फिर बार खराब होने की समस्‍या से जूझना पड़ता है। आयुर्वेद के अनुसार दूध पीने के कुछ नियम हैं, जिनका पालन करने से आपको दूध हजम हो जाएगा।

आयुर्वेद में हैं दूध पीने के कुछ नियम

दूध हमारे खान-पान का बहुत अहम हिस्सा है। यह हमारे शरीर और दिमाग को जरुरी पोषण प्रदान करता है। यह ठंडा, वात और पित्‍त दोष को बैलेंस करने का काम करता है। आयुर्वेद के अनुसार गाय का दूध सबसे ज्‍यादा पौष्टिक होता है। दूध भूख को शांत करता है और मोटापे से भी छुटकारा दिलाने में मददगार है। लेकिन कुछ लोगों को दूध पीने के बाद हजम नहीं हो पाता। उन्‍हें पेट फूलने या फिर बार खराब होने की समस्‍या से जूझना पड़ता है। पहले ज़माने के मुकाबले आज कल दूध की क्‍वालिटी में गिरावट आने की वजह से ऐसा होता है। यदि आपका पाचन तंत्र मजबूत नहीं है तो भी आपको दूध ठीक से हजम नहीं हो पाएगा। आयुर्वेद के अनुसार दूध पीने के कुछ नियम हैं, जिनका पालन करने से आपको दूध हजम हो जाएगा।

बिना शक्कर मिला दूध

आमतौर पर लोगों की आदत होती है कि दूध में शक्कर मिलाकर पीते हैं। आयुर्वेद का मानना है कि यदि रात में बिना शक्कर मिला दूध पियेंगे तो वह अधिक फायदेमंद होगा। अगर हो सके तो दूध में गाय का एक या दो चम्मच घी भी मिला लेना चाहिए।

ताजा व जैविक दूध

इन दिनों हमारी जीवनशैली ऐसी है कि हम हर चीज पैकेट वाली इस्तेमाल करने लगे हैं। दूध भी अधिकतर लोग पैकेट वाला ही लेते हैं। पैकेट वाला दूध न ताज़ा होता है और न ही जैविक। आयुर्वेद के अनुसार, ताजा, जैविक और बिना हार्मोन की मिलावट वाला दूध सबसे अच्‍छा होता है। पैकेट में मिलने वाला दूध नहीं पीना चाहिये।

उबला दूध

कुछ लोगों को कच्चा दूध अच्छा लगता है। फ्रिज से दूध निकालकर बिना उबाले सीधे ही पी जाना सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता। आयुर्वेद मानता है कि दूध को उबालकर, गर्म अवस्था में पीना चाहिए। अगर दूध पीने में भारी लग रहा हो तो उसमें थोड़ा पानी मिलाया जा सकता है। ऐसा दूध आसानी से पच भी जाता है।

देसी गाय का दूध

आयुर्वेद देसी गाय के दूध के सेवन पर अधिक जोर देता है। आयुर्वेद के अनुसार, देसी गाय का दूध ही सबसे अधिक फायदा देता है। शहरों में इस तरह का दूध ढूंढ पाना थोड़ा मुश्किल तो होता है लेकिन अगर संभव हो तो यही दूध पीना चाहिए।

दूध में लौंग व इलायची

जिन लोगों को दूध हजम नहीं होता उनके लिए दूध पीने का एक और तरीका है। दूध में एक चुटकी अदरक, लौंग, इलायची, केसर, दालचीनी और जायफल आदि की मिलाएं। इससे आपके पेट में अतिरिक्त गर्मी बढ़ेगी जिसकी मदद से दूध हजम होने में आसानी मिलेगी।

दूध और केसर

अक्सर किसी न किसी वजह से हम रात का खाना नहीं खा पाते। आयुर्वेद के अनुसार, ऐसी स्थिति में एक चुटकी जायफल और केसर डाल कर दूध पी लें। इससे नींद भी अच्‍छी आती है और साथ ही शरीर को ऊर्जा भी प्राप्त हो जाती है। अगली बार से जब रात का खाना न खाएं, इस तरह का दूध पी लें।

नमकीन चीज़ व मछली के साथ दूध का सेवन नहीं

आयुर्वेद का कहना है कि किसी भी नमकीन चीज़ के साथ दूध का सेवन ना करें। क्रीम सूप या फिर चीज़ को नमक के साथ ना खाएं। दूध के साथ खट्टे फल भी नहीं खाने चाहिये। आमतौर पर, दूध इन चीज़ों के साथ मिलकर रिऐक्शन कर जाता है। ये बात आपने कई बार सुनी होगी, कि दूध के साथ मछली का सेवन नहीं करना चाहिए। आयुर्वेद का मानना है कि यदि दूध और मछली का सेवन एक वक्त पर किया जाए तो इससे त्वचा खराब हो जाती है। त्वचा पर सफेद व भूरे धब्बे उबरने लगते हैं।

Tags: दूध

मुहांसों के लिए मेथी है बहुत उपयोगी

Tue, 06/26/2018 - 06:00

अगर आपके चेहरे में बहुत से मुहांसों के दाग व धब्बे हैं तो मेथी काफी सहायता कर सकती है। जी हां, मेथी के पत्तों का फेस-पैक बना सकते है आप या चाहे तो आप मेथी के बीजों को उबालकर उनका पेस्ट भी बना सकते हैं। इसे चेहरे के दाग धब्बो पर लगाए और लगभग 15-20 मिनट के लिए छोड़ दे। बाद में ठंडे पानी से धो डाले।

वरदान है तुलसी

Mon, 06/25/2018 - 06:00

ज्यादातर हिंदू परिवारों में तुलसी की पूजा की जाती है. इसे सुख और कल्याण के तौर पर देखा जाता है लेकिन पौराणिक महत्व से अलग तुलसी एक जानी-मानी औषधि भी है, जिसका इस्तेमाल कई बीमारियों में किया जाता है. सर्दी-खांसी से लेकर कई बड़ी और भयंकर बीमारियों में भी एक कारगर औषधि है. भारतीय संस्कृति में तुलसी के पौधे का बहुत महत्व है और इस पौधे को बहुत पवित्र माना जाता है। ऎसा माना जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा नहीं होता उस घर में भगवान भी रहना पसंद नहीं करते। माना जाता है कि घर के आंगन में तुलसी का पौधा लगा कलह और दरिद्रता दूर करता है। इसे घर के आंगन में स्थापित कर सारा परिवार सुबह-सवेरे इसकी पूजा-अर्चना करता है। यह मन और तन दोनों को स्वच्छ करती है। इसके गुणों के कारण इसे पूजनीय मानकर उसे देवी का दर्जा दिया जाता है। तुलसी केवल हमारी आस्था का प्रतीक भर नहीं है। इस पौधे में पाए जाने वाले औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में भी तुलसी को महत्वपूर्ण माना गया है। भारत में सदियों से तुलसी का इस्तेमाल होता चला आ रहा है।

* लिवर (यकृत) संबंधी समस्या: तुलसी की 10-12 पत्तियों को गर्म पानी से धोकर रोज सुबह खाएं। लिवर की समस्याओं में यह बहुत फायदेमंद है।

* पेटदर्द होना: एक चम्मच तुलसी की पिसी हुई पत्तियों को पानी के साथ मिलाकर गाढा पेस्ट बना लें। पेटदर्द होने पर इस लेप को नाभि और पेट के आस-पास लगाने से आराम मिलता है।

* पाचन संबंधी समस्या : पाचन संबंधी समस्याओं जैसे दस्त लगना, पेट में गैस बनना आदि होने पर एक ग्लास पानी में 10-15 तुलसी की पत्तियां डालकर उबालें और काढा बना लें। इसमें चुटकी भर सेंधा नमक डालकर पीएं।

* बुखार आने पर : दो कप पानी में एक चम्मच तुलसी की पत्तियों का पाउडर और एक चम्मच इलायची पाउडर मिलाकर उबालें और काढा बना लें। दिन में दो से तीन बार यह काढा पीएं। स्वाद के लिए चाहें तो इसमें दूध और चीनी भी मिला सकते हैं।

* खांसी-जुकाम : करीब सभी कफ सीरप को बनाने में तुलसी का इस्तेमाल किया जाता है। तुलसी की पत्तियां कफ साफ करने में मदद करती हैं। तुलसी की कोमल पत्तियों को थोडी- थोडी देर पर अदरक के साथ चबाने से खांसी-जुकाम से राहत मिलती है। चाय की पत्तियों को उबालकर पीने से गले की खराश दूर हो जाती है। इस पानी को आप गरारा करने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

* सर्दी से बचाव : बारिश या ठंड के मौसम में सर्दी से बचाव के लिए तुलसी की लगभग 10-12 पत्तियों को एक कप दूध में उबालकर पीएं। सर्दी की दवा के साथ-साथ यह एक न्यूट्रिटिव ड्रिंक के रूप में भी काम करता है। सर्दी जुकाम होने पर तुलसी की पत्तियों को चाय में उबालकर पीने से राहत मिलती है। तुलसी का अर्क तेज बुखार को कम करने में भी कारगर साबित होता है।

* श्वास की समस्या : श्वास संबंधी समस्याओं का उपचार करने में तुलसी खासी उपयोगी साबित होती है। शहद, अदरक और तुलसी को मिलाकर बनाया गया काढ़ा पीने से ब्रोंकाइटिस, दमा, कफ और सर्दी में राहत मिलती है। नमक, लौंग और तुलसी के पत्तों से बनाया गया काढ़ा इंफ्लुएंजा (एक तरह का बुखार) में फौरन राहत देता है।

* गुर्दे की पथरी : तुलसी गुर्दे को मजबूत बनाती है। यदि किसी के गुर्दे में पथरी हो गई हो तो उसे शहद में मिलाकर तुलसी के अर्क का नियमित सेवन करना चाहिए। छह महीने में फर्क दिखेगा।

* हृदय रोग : तुलसी खून में कोलेस्ट्राल के स्तर को घटाती है। ऐसे में हृदय रोगियों के लिए यह खासी कारगर साबित होती है।

* तनाव : तुलसी की पत्तियों में तनाव रोधीगुण भी पाए जाते हैं। तनाव को खुद से दूर रखने के लिए कोई भी व्यक्ति तुलसी के 12 पत्तों का रोज दो बार सेवन कर सकता है।

* मुंह का संक्रमण : अल्सर और मुंह के अन्य संक्रमण में तुलसी की पत्तियां फायदेमंद साबित होती हैं। रोजाना तुलसी की कुछ पत्तियों को चबाने से मुंह का संक्रमण दूर हो जाता है।

* त्वचा रोग : दाद, खुजली और त्वचा की अन्य समस्याओं में तुलसी के अर्क को प्रभावित जगह पर लगाने से कुछ ही दिनों में रोग दूर हो जाता है। नैचुरोपैथों द्वारा ल्यूकोडर्मा का इलाज करने में तुलसी के पत्तों को सफलता पूर्वक इस्तेमाल किया गया है। तुलसी की ताजा पत्तियों को संक्रमित त्वचा पर रगडे। इससे इंफेक्शन ज्यादा नहीं फैल पाता।

* सांसों की दुर्गध : तुलसी की सूखी पत्तियों को सरसों के तेल में मिलाकर दांत साफ करने से सांसों की दुर्गध चली जाती है। पायरिया जैसी समस्या में भी यह खासा कारगर साबित होती है।

* सिर का दर्द : सिर के दर्द में तुलसी एक बढि़या दवा के तौर पर काम करती है। तुलसी का काढ़ा पीने से सिर के दर्द में आराम मिलता है।

* आंखों की समस्या : आंखों की जलन में तुलसी का अर्क बहुत कारगर साबित होता है। रात में रोजाना श्यामा तुलसी के अर्क को दो बूंद आंखों में डालना चाहिए।

* कान में दर्द : तुलसी के पत्तों को सरसों के तेल में भून लें और लहसुन का रस मिलाकर कान में डाल लें। दर्द में आराम मिलेगा।

नीम की पत्तियों से होने वाले स्वास्थ्य लाभ

Sun, 06/24/2018 - 06:00

नीम की पत्तियों से होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में तो अाप जानते ही होगें लेकिन क्या अाप नीम के बीज के गुणों के बारे में जानते है । अगर नहीं तो अाइए जानते है इससे होने वाले लाभ... 
 
 
1.मलेरिया की रोकथाम
 
नाम के बीज मलेरिया के प्रभावी उपचार के लिए उपयोग किया जाता है अौर नीम के पीसे हुए बीजों की दुर्गन्‍ध से मच्‍छरों को दूर रखने में मदद मिलती है। 
 
2.त्वचा संबंधी रोग
 
नीम के बीज का तेल का इस्तेमाल हर्बल उत्‍पादों के रूप में किया जाता है।इससे त्वचा  नर्म, बेदाग और चमकदार बनती है। नीम के बीज से बने तेल में मौजूद प्राकृतिक एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक गुण त्‍वचा संबंधी कई समस्‍याओं जैसे सोरेसिस, एक्जिमा, मुहांसों आदि को दबर करते है। 
 
3. कीटाणुओं से रखें दूर 
 
पालतू जानवर के कीटाणुओं से संक्रमित होने पर नीम के बीज असरदायक है। उनके बालों में नीम के बीज से बना तेल लगाएं। इससे उनके बालों में मौजूद कीटाणु दूर हो जाएंगे।
 
4.बालों को स्‍वस्‍थ और सुंदर बनाए
 
अगर अाप बालों के झड़ने अौर डैंड्रफ जैसी समस्याओं से परेशान हैं तो नीम के बीज से बने तेल के इस्तेमाल से आपको फायदा मिल सकता है।
 
5.किडनी और प्रोस्‍टेट 
 
नीम के बीजों और पत्तों से बनी चाय सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक होती हैं। यह किडनी, मूत्राशय और प्रोस्टेट से संबंधित बीमारियों के उपचार में बहुत उपयोगी है।
 
6.आंखों और कान
 
नीम के बीज में मौजूद एंटीबैक्टीरियल आंखों और कानों में संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया से लड़ने में सहायक होता है।
 
7.एथलीट्स के पैरों के लिए फायदेमंद
 
आमतौर पर एथलीट्स के पैरों में फंगल इंफेक्शन बहुत अधिक होता हैं। इसलिए फंगस ट्रीटमेंट के लिए थोड़े से नीम के तेल में थोड़ा-सा नारियल का तेल मिलाकर उसे प्रभावित हिस्से पर लगाएं। एेसा करने से जल्द ही फायदा मिलेगा।
 
8.बढ़ती उम्र की रोकथाम
 
नीम में पाये जाने वाले ऑक्सीकरण तत्व चेहरे में होने वाले परिवर्तनों को रोक देते हैं अौर इसके तेल के इस्तेमाल से चेहरे की झुर्रियां कम होती है। 
 
9. दांतों को बनाएं मजबूत
 
नीम के बीज में दांतों को सफेद बनाने व बैक्टीरिया को खत्म करने के गुण पाए जाते हैं। असके अलावा नीम का तेल मसूड़े की सूजन और दांत की सड़न को दूर करने में सहायक होता हैं।

दूध आयुर्वेद में बहुत ही महत्वपूर्ण और कीमती भोजन है।

Thu, 05/31/2018 - 04:24

दूध आयुर्वेद में बहुत ही महत्वपूर्ण और कीमती भोजन है। यह हमारे शरीर और दिमाग को जरुरी पोषण प्रदान करता है।  ठंडा, वात और पित्‍त दोष को बैलेंस करने का काम करता है। आयुर्वेद के अनुसार गाय का दूध सबसे ज्‍यादा पौष्टिक होता है। दूध भूख को शांत करता है और मोटापे से भी छुटकारा दिलाने में मददगार है। गाय का दूध शिशुओं के लिये अच्‍छा है पर अगर आपको नींद नहीं आती तो आपके लिये भैंस का दूध अच्‍छा रहेगा। किसका दूध है सबसे सेहतमंद - गाय का या भैंस का? कई लोगों को दूध पीने के बाद हजम नहीं हो पाता। उन्‍हें पेट फूलने या फिर बार खराब होने की समस्‍या से जूझना पड़ता है। पहले ज़माने के मुकाबले आज कल दूध की क्‍वालिटी में गिरावट आने की वजह से ऐसा होता है। यदि आपका पाचन तंत्र मजबूत नहीं है तो भी आपको दूध ठीक से हजम नहीं हो पाएगा। आयुर्वेद के अनुसार दूध पीने के कुछ नियम हैं, जिन्‍हें पालन करने से आपको दूध अच्‍छी तरह हज़म हो जाएगा।
1. रात में बिना शक्‍कर के दूध पियें अगर हो सके तो उसमें गाय का घी १- २ चम्मच डाल कर लें। 2. ताजा, जैविक और बिना हार्मोन की मिलावट वाला दूध सबसे अच्‍छा होता है। पैकेट में मिलने वाला दूध नहीं पीना चाहिये। 3. दूधक को गरम या उबाल कर पियें। अगर दूध पीने में भारी लगे तो उसे उसमें थोड़ा पानी मिला कर उबालें। 4. दूध में एक चुटकी अदरक, लौंग, इलायची, केसर, दालचीनी और जायफल आदि की मिलाएं। इससे आपके पेट में अतिरिक्त गर्मी बढ़गी जिसकी मदद से दूध हजम होने में आसानी मिलेगी। 5. प्रयत्न करे की देशी गाय का दूध ले। औषधि के समान है गाय का घी 6. अगर आप को डिनर करने का मन नहीं है तो आप रात को एक चुटकी जायफल और केसर डाल कर दूध पियें। इससे नींद भी अच्‍छी आती है। 7. किसी भी नमकीन चीज़ के साथ दूध का सेवन ना करें। क्रीम सूप या फिर चीज़ को नमक के साथ ना खाएं। दूध के साथ खट्टे फल भी नहीं खाने चाहिये। 8. दूध और मछली एक एक साथ सेवन नहीं करना चाहिये, इससे त्‍वचा खराब हो जाती है।

पानी क्यों ना पीये खाना खाने के बाद।

Tue, 05/29/2018 - 04:24

सारे दिन में 8-10 गिलास पानी जरुर पियें 
पानी जब भी पियें बैठ कर और सिप केर केर के पियें ताकि उसमे लार मिल सके
भोजन करने से 30 मिनट पहले और भोजन करने के 1 घंटा 50 मिनट बाद पानी जरुर पीना चाहिये
ठन्डे पेय, चाय, कॉफ़ी जैसे पदार्थ बिल्कुल बंद कर देने चाहिये
अधिक मीठा या अधिक नमकीन नहीं खानी चाहिये
हो सकते तो गरम पानी पीना चाहिये ताकि कफ ढीला हो कर जल्दी बाहर निकल जाये
हमें उम्मीद हैं यदि आप इन सब बत्तों का ध्यान रखे तो आप ज़ुकाम से बचे रह सकते हैं और आपके शरीर में कफ इकठा नहीं हो पायेगा वरना ज़ुकाम में यदि आप कोई दवाई लेते हैं तो आप कफ को अंदर दबा रहे हैं ये बात ध्यान रखें वो अंदर संक्रमित हो कर किसी भी बीमारी के रूप में बाहर निकल सकता है

रोजाना एक इलायची खाने के फायदे

Mon, 05/28/2018 - 04:28

इलायची एक सुगंधित मसाला है। यह मीठे व्यंजन का स्वाद बढ़ाने के लिए उपयोग में लाई जाती है। इसकी गंध तीखी होती है। इसलिए इसका उपयोग माउथ फ्रेशनर के रूप में किया जाता है। इसमें आयरन और राइबोफ्लेविन, विटामिन सी के साथ ही नियासिन भी पाया जाता है। ये रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इलायची खाने के कई फायदे हैं चलिए आज हम जानते हैं इलायची खाने के ऐसे ही कुछ फायदों के बारे में...
1. पाचन को ठीक कर देती है
खाने के बाद कई लोग इलायची का उपयोग माउथ फ्रेशनर के रूप में करते हैं। जानते हैं क्यों? दरअसल इलायची प्राकृतिक रूप से गैस को खत्म करने का काम करती है। यह पाचन को बढ़ाने, पेट की सूजन को कम करने व दिल की जलन को खत्म करने का काम करती है। 
आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार यह खाने के पाचन में मदद करती है। यदि आपको बदहजमी की शिकायत है तो दो से तीन इलायची, अदरक का एक छोटा सा टुकड़ा, थोड़ी सी लौंग और सूखा धनिया पीस लें। इस पाउडर को गर्म पानी के साथ खाएं। पेट से जुड़ी प्रॉब्लम्स खत्म हो जाएंगी।

2. सांस की दुर्गंध दूर करती है
इलायची में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। साथ ही, इसका तेज स्वाद और भीनी-सी महक सांसों की दुर्गंध दूर करती है। यह डायजेस्टिव को मजबूत बनाती है। रोज खाने के बाद एक इलायची खाएं या रोज सुबह इलायची की चाय पी सकते हैं।
 

4. फेफड़ों से जुड़े रोगों का है प्राकृतिक इलाज
इलायची अस्थमा, खांसी, ज़ुकाम और फेफड़ों से जुड़ी दूसरी बीमारियों से राहत दिलाती है। आयुर्वेद में इलायची को एक गर्म मसाला माना गया है। यह शरीर को अंदर से गर्म रखती है।
इसके सेवन से कफ बाहर हो जाता है। सर्दी, खांसी या छाती में जमाव है, तो इन परेशानियों से राहत पाने के लिए इलायची सबसे बेहतर प्राकृतिक उपचार है। यदि आपको ज्यादा सर्दी हो रही हो तो भाप लेते समय गर्म पानी के बर्तन में इलायची के तेल की कुछ बूंदें डालें।
 

5. दिल की गति को नियमित करना
इलायची पोटैशियम, कैल्शियम जैसे खनिजों से भरपूर होती है। इसलिए यह शरीर की इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इलायची दिल की गति को नियमित करने में मदद करती है। साथ ही, यह ब्लडप्रेशर को नियंत्रित करती है। इसीलिए अगर आप अपने हार्ट को हमेशा हेल्दी बनाए रखना चाहते हैं, तो अपने रोजाना के खाने में इलायची को शामिल करें या केवल इलायची वाली चाय पिएं।
3. एसिडिटी से छुटकारा

इलायची में मौजूद तेल इसे एसिडिटी को खत्म करता है। इलायची चबाने पर इसमें से कई तरह के तेल निकलते हैं, जो आपकी लार ग्रंथियों को उत्तेजित करते हैं। इससे आपका पेट ठीक तरह से कार्य करता है। भूख तेज लगती है। इलायची खाने पर इसमें मौजूद तेल ठंडक का अहसास कराता है। इसलिए इसे चबाने से एसिडिटी से होने वाली जलन दूर हो जाती है।

6. एनीमिया से बचाती है
एक गिलास गर्म दूध में एक या दो चुटकी इलायची पाउडर और हल्दी मिलाएं। आप यदि चाहें तो स्वाद के लिए चीनी मिला सकते हैं।एनीमिया के लक्षणों और कमजोरी से राहत पाने के लिए इसे हर रात पिएं। 

7. शरीर को डिटॉक्सिफाई करना
इलायची मैंगनीज का एक प्रमुख स्रोत है। मैंगनीज एंजाइम के स्राव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह फ्री रेडिकल्स को ख्रत्म करता है। इसके अलावा, इलायची में शरीर से जहरीले तत्व बाहर करने का गुण पाया जाता है। यह कैंसररोधी का भी काम करती है।

दर्द की स्थिति में कितना मूवमेंट करें?

Sun, 05/27/2018 - 04:24

जब तक बुखार रहे, पूरी तरह बेड रेस्ट करें। बुखार के दौरान बेड पर ही जोड़ों का हल्का-फुल्का मूवमेंट शुरू करें।  मूवमेंट से ब्लड सप्लाई बढ़ती है और हीलिंग जल्दी होती है। चार-पांच दिन बाद रूटीन काम शुरू करें। हफ्ते भर बाद नॉर्मल लाइफ शुरू कर सकते हैं। बुखार ना हो, पर दर्द हो तो भी आराम ही करें। आराम न करने से दर्द बढ़ता है।

 

Pages