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Updated: 14 hours 39 min ago

रेडवाइन और किचेन सामग्री के साथ बनाएं फेस मास्‍क

Sat, 12/15/2018 - 08:30

रेडवाइन फेस मास्‍क, त्‍वचा के लिए काफी अच्‍छा होता है और इसके रिजल्‍ट काफी अच्‍छे होते हैं।

कई लोगों को रेडवाइन फेसमास्‍क के बारे में पता होता है लेकिन इसे कैसे बनाया और इस्‍तेमाल किया जाता है, इस बारे में उन्‍हें पता नहीं होता है।

जानिए रेडवाइन फेसमास्‍क को कैसे बनाएं और इसे इस्‍तेमाल कैसे करें:

रेडवाइन मास्‍क बनाने के लिए आपको सिर्फ तीन किचेन सामग्रियां चाहिए होगी - रेड वाइन, शहद और दही। ये तीनों ही सामग्रियां बहुत आसानी से उपलब्‍ध हो जाती हैं।

रेडवाइन फेसमास्‍क को किसी भी मौसम में इस्‍तेमाल किया जा सकता है और आप इसे दिन के किसी भी समय लगा सकते हैं।

जैसाकि हम सभी जानते हैं कि रेड वाइन में एंटीऑक्‍सीडेंट होते हैं जो त्‍वचा को स्‍वस्‍थ बना देते हैं और डल स्‍कीन को जवां कर देता है साथ ही बढ़ती उम्र के प्रभावों को कम कर देते हैं। यदि आप अपनी स्‍कीन पर तुंरत ही इफेक्‍ट देखना चाहते हैं तो रेडवाइन पैक सबसे अच्‍छा रहता है।

इसे आप हफ्ते में तीन से चार बार तक इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यदि आप किसी फंक्‍शन में जाने वाले हैं तो उससे एक दिन पहले इसे एप्‍लाई कर सकती हैं। अगर आप चाहें तो पूरी बॉडी पर भी इसे एप्‍लाई कर सकती हैं। इससे त्‍वचा निखर जाती है और आपको तरो-ताजा महसूस होता है।

रेडवाइन फेसपैक, चेहरे के पोर्स को खोल देता है, काले धब्‍बे दूर कर देता है और दानों व मुँहासों को दूर कर देता है।

रेडवाइन फेसमास्‍क को बनाने की विधि निम्‍न प्रकार है:

सामग्री और प्रक्रिया -

  • 1 छोटा कप ऑर्गेनिक रेड वाइन
  •  
  • 2 चम्‍मच ऑर्गेनिक शहद
  •  
  • 1/2 चम्‍मच दही
  •  
  • 1 कटोरी
  •  
  • 1 एग बीटर

बनाने की विधि:

कटोरी में दही को डालें और अच्‍छे से फेंट लें। इसके सॉफ्ट हो जाने पर इसमें शहद मिला लें और फिर इसमें एक ढक्‍कन रेड वाइन मिला दें। बाद में एग बीटर से फेंट दें। इसका कलर पिंक होने तक ऐसा करें।

इस्‍तेमाल कैसे करें:

इसे इस्‍तेमाल करने से पहले चेहरे को अच्छे से धोकर पोंछ लें। इसके बाद, इस पैक को ब्रश की मदद से चेहरे पर लगाएं। इसे हाथों से भी लगा सकती हैं।

पैक लगाने के बाद 20 मिनट तक बिना बोले इसे लगाये रखें। बाद में आप ठंडे पानी से चेहरे को धो लें और किसी टोनर या मॉश्‍चराइजर को लगा लें।

इसे लगाने के बाद, आपको अपने चेहरे पर मुलायमपन महसूस होगा।

छुहारा और खजूर एक ही पेड़ की देन है।

Fri, 12/14/2018 - 20:38

छुहारा और खजूर एक ही पेड़ की देन है। इन दोनों की तासीर गर्म होती है और ये दोनों शरीर को स्वस्थ रखने, मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गर्म तासीर होने के कारण सर्दियों में तो इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है।
खजूर में छुहारे से ज्यादा पौष्टिकता होती है। खजूर मिलता भी सर्दी में ही है।
अगर पाचन शक्ति अच्छी हो तो खजूर खाना ज्यादा फायदेमंद है।
छुहारे का सेवन तो सालभर किया जा सकता है, क्योंकि यह सूखा फल बाजार में सालभर मिलता है।
छुहारा यानी सूखा हुआ खजूर आमाशय को बल प्रदान करता है।
छुहारे की तासीर गर्म होने से ठंड के दिनों में इसका सेवन नाड़ी के दर्द में भी आराम देता है।
छुहारा खुश्क फलों में गिना जाता है, जिसके प्रयोग से शरीर हृष्ट-पुष्ट बनता है। शरीर को शक्ति देने के लिए मेवों के साथ छुहारे का प्रयोग खासतौर पर किया जाता है।
छुहारे व खजूर दिल को शक्ति प्रदान करते हैं। यह शरीर में रक्त वृद्धि करते हैं।
साइटिका रोग से पीड़ित लोगों को इससे विशेष लाभ होता है।
खजूर के सेवन से दमे के रोगियों के फेफड़ों से बलगम आसानी से निकल जाता है।
लकवा और सीने के दर्द की शिकायत को दूर करने में भी खजूर सहायता करता है।
भूख बढ़ाने के लिए छुहारे का गूदा निकाल कर दूध में पकाएं। उसे थोड़ी देर पकने के बाद ठंडा करके पीस लें। यह दूध बहुत पौष्टिक होता है। इससे भूख बढ़ती है और खाना भी पच जाता है।
प्रदर रोग स्त्रियों की बड़ी बीमारी है। छुआरे की गुठलियों को कूट कर घी में तल कर, गोपी चन्दन के साथ खाने से प्रदर रोग दूर हो जाता है।
छुहारे को पानी में भिगो दें। गल जाने पर इन्हें हाथ से मसल दें। इस पानी का कुछ दिन प्रयोग करें, शारीरिक जलन दूर होगी।
अगर आप पतले हैं और थोड़ा मोटा होना चाहते हैं तो छुहारा आपके लिए वरदान साबित हो सकता है, लेकिन अगर मोटे हैं तो इसका सेवन सावधानीपूर्वक करें।
जुकाम से परेशान रहते हैं तो एक गिलास दूध में पांच दाने खजूर डालें। पांच दाने काली मिर्च, एक दाना इलायची और उसे अच्छी तरह उबाल कर उसमें एक चम्मच घी डाल कर रात में पी लें। सर्दी-जुकाम बिल्कुल ठीक हो जाएगा।
दमा की शिकायत है तो दो-दो छुहारे सुबह-शाम चबा-चबा कर खाएं। इससे कफ व सर्दी से मुक्ति मिलती है।
घाव है तो छुहारे की गुठली को पानी के साथ पत्थर पर घिस कर उसका लेप घाव पर लगाएं, घाव तुरंत भर जाएगा।

खुशखबरी! लंबे समय तक जीते हैं कॉफी पीने वाले लोग

Fri, 12/14/2018 - 08:30

कॉफी पीने से आप लंबे समय तक जी सकते हैं। इस बात का खुलासा दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (यूएससी) में अमेरिकी शोधकर्ताओं ने किया है।

180,000 से अधिक प्रतिभागियों के एक अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने पाया कि रेगुलर या डिकैफ़िनेटेड कॉफी पीने वाले लोग स्वस्थ रहते हैं और उनकी उम्र बढ़ती है।

शोधकर्ताओं ने जर्नल ऐनलल्स ऑफ़ इंटरनल मेडिसिन में रिपोर्ट दी है कि जो लोग दिन में एक कप कॉफी का सेवन करते हैं, उनके उन लोगों की तुलना में मरने की संभावना 12 फीसदी कम होती है, जो कॉफ़ी नहीं पीते हैं।

इसके अलावा जो दिन में दो से तीन कप कॉफ़ी पीते हैं उनके मरने की संभावना 18 फीसदी कम होती है।

वास्तव में कॉफ़ी पीने से हार्ट डिजीज, कैंसर, स्ट्रोक, डायबिटीज और सांस व किडनी से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है जिस वजह से मौत का खतरा कम होता है।

इस शोध में अफ्रीकी-अमेरिकी, जापानी-अमेरिकी, लैटिनो और गोरे शामिल थे। ऐसी जांच महत्वपूर्ण होती है क्योंकि जीवन शैली के पैटर्न और बीमारी के जोखिम नस्लीय और जातीय पृष्ठभूमि में काफी भिन्न हो सकते हैं। सबसे बड़ी बात किसी एक समूह का निष्कर्ष जरूरी नहीं है कि अन्य लोगों पर लागू हो।

लेखकों के मुताबिक, हालांकि यह अध्ययन नहीं दिखाता है कि कॉफी में कौन से रसायन के फायदेमंद प्रभाव पड़ सकते हैं. लेकिन यह स्पष्ट है कि कॉफी एक स्वस्थ चीज है और इसे जीवन शैली में शामिल किया जा सकता है।

 

 

 

लहसुन : हानिकारक प्रभाव भी दे सकती हैं।

Thu, 12/13/2018 - 20:38
  1. लहसुन सांस में बदबू, मुंह, पेट या सीने में जलन, गैस, मतली, उल्टी, शरीर में गंध और दस्त का कारण बन सकता है।
  2. लहसुन के गाढ़े पेस्ट का त्‍वचा पर उपयोग त्‍वचा को जलने की तरह नुकसान पहुंचा सकता है।
  3. गर्भावस्था एवं स्तनपान करानेवाली स्त्रियों को वैद्यराज की देखरेख में लेवे |
  4. लहसुन के सेवन से खून का बहाव ज्‍यादा होता है। इसलिए अनुसूचित सर्जरी से कम से कम दो सप्ताह पहले लहसुन का सेवन करना बंद कर दें।
  5. लहसुन गैस्ट्रोइंटेस्टिनल ट्रैक्ट में जलन पैदा कर सकता है। इसलिए अगर आपको पाचन संबंधी समस्‍या हो तो लहसुन का प्रयोग सावधानी से करे|
  6. अधिक कच्चा लहसुन लेने के बाद एक स्वस्थ आदमी में दिल का दौरा पड़ने की संभावना हो जाती है|

गर्भावस्था के दौरान क्या फ्लू की दवाईयां लेना सुरक्षित है?

Thu, 12/13/2018 - 08:30

यदि आप गर्भवती महिला हैं तो आपके मन में यह विचार अवश्य आता होगा कि कहीं किसी बीमारी से मैं और मेरा बच्चा प्रभवित न हों, है न? गर्भावस्था वह समय होता है जब महिलाओं को अपने स्वास्थ्य की अतिरिक्त देखभाल करने की आवश्यकता होती है क्योंकि उसे अपने साथ साथ अपने अन्दर पल रहे बच्चे की सुरक्षा का ध्यान भी रखना होता है।

यही कारण है कि जब आप गर्भवती होती हैं तब आपको अपने स्वास्थ्य की अतिरिक्त देखभाल करने की आवश्यकता होती है और विशेष रूप से आपको संक्रामक बीमारियों से बचना होता है।

मनुष्य होने के नाते हम सभी को कभी न कभी कोई बीमारी हो सकती है जिसमें गर्भवती महिलायें भी कोई अपवाद नहीं हैं। ऐसा विश्वास है कि हार्मोन्स में होने वाले उतार चढ़ाव के कारण कई गर्भवती महिलाओं को अक्सर बीमारियों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि इस अवस्था में उनकी प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम हो जाती है।

जब कोई गर्भवती महिला फ्लू जैसी संक्रामक बीमारी का शिकार होती है तो उसे इसके उपचार के लिए कुछ कठोर दवाईयां लेनी पड़ती हैं और इन दवाईयों का अजन्मे बच्चे के स्वास्थ्य पर ब्नाकरात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

तो क्या गर्भावस्था के दौरान फ्लू की दवाईयां लेना सुरक्षित है? आइये देखें।

गर्भावस्था के दौरान फ्लू
इन्फ्लूएंजा जिसे फ्लू के नाम से भी जाना जाता है, एक आम बीमारी है जो किसी भी उम्र या किसी भी लिंग के व्यक्ति को हो सकती है तथा गर्भवती महिलायें भी इसका अपवाद नहीं है। फ्लू एक वायरल बीमारी है जो खाद्य पदार्थों, पानी और हवा के कारण फैलती है। इससे प्रभावित व्यक्ति का प्रतिरक्षा तंत्र प्रभावित होता है जिसके कारण कई अनैच्छिक लक्षण उत्पन्न होते हैं।

फ्लू के कुछ सामान्य लक्षणों में बुखार, सर्दी, शरीर में दर्द, कफ़ आदि शामिल है। अत: जब गर्भवती महिला इससे प्रभावित होती है तो इससे उसका अजन्मा बच्चा भी प्रभावित होता है! हालाँकि वे फ्लू के लिए दवाईयों का सेवन करने से डरती हैं क्योंकि इन दवाईयों में स्ट्रांग केमिकल्स पाए जाते हैं जो बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं। एक अच्छी खबर यह है कि नई खोज से यह पता चला है कि गर्भवती महिलाओं के लिए फ्लू की दवाईयां लेना सुरक्षित है।

शोधकर्ताओं द्वारा स्केंडेनेविया और फ़्रांस में 6000 से अधिक गर्भवती महिलाओं पर सर्वेक्षण किया जिनमें फ्लू के लक्षण दिखाई दिए और उनहिलाओं को हल्की दवाईयां दी गयी। इस प्रक्रिया के दौरान इस बात का पता चला कि फ्लू की दवाईयों से गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता। अत: यह निष्कर्ष निकलता है कि गर्भवती महिला फ्लू के लिए डॉक्टर के द्वारा बताई गयी दवाईयों का सेवन कर सकती है यदि दवा की मात्रा डॉक्टर के द्वारा ही बताई गयी हो।

Source: hindi.boldsky.com

 

 

सावन व् भादो मास में खान पान का विशेष् ध्यान रखे।

Wed, 12/12/2018 - 20:38

सावन व् भादो मास में खान पान का विशेष् ध्यान रखे। इस मौसम में जठराग्नि (पाचन शक्ति) कमजोर व् मंद हो जाती है।इसलिए वात् पित्त व् कफ रोग बढ़ जाते है।वर्षा ऋतू में जलवायु में विषाक्त कीटाणु पैदा हो जाते है।जो बीमारियां फैलाते है।
क्या न खाए ---
1. दूध,दही, लस्सी न पिए।
2. हरी पते वाली सब्ज़िया न खाएं।
3. रसदार फल न खाएं। 
4. बैंगन न खाएं इनमे कीड़े हो जाते है   और गैस भी बनाते है।
5. चकुंदर,खीरा, ककड़ी न खाए।
6. फ़ास्ट फूड न खाएं।
7. ज्यादा मिठाई न खाएं।
8. मास मदिरा न ले।
9.ठंडी व् बासी चीज न खाय।
10. आइस क्रीम व् कोल्ड ड्रिंक्स न पियें।

 

क्या खाएं ----
आयुर्वेद के अनुसार इस महीने में जल्दी पचने वाले ताज़ा व् गर्म खाना चाहिए।
1. सेब,केला,अनार,नासपाती आदि मौसमी फल खाये।
2. टमाटर का सुप ले सकते है।
3. अदरक,प्याज, लहसन खाएं।
4. बेसन की चीजें व् हलवा खाये।
5. पानी उबाल कर पिए।
6. हल्दी वाला  दूध पिए।
7. देसी चाय पिए।
8. पुराना चावल, गेहूं,मक्का, सरसों,मुंग, अरहर की दाल खाएं।
9.छोटी हरड खाएं पेट साफ़ रहेगा व् पेट की बीमारियो से बचाव रहेगा।

सर्दियों में तिल से लगाएं दिल...दूर होगी स्वास्थ्य सबंधी मुश्किल

Wed, 12/12/2018 - 08:30

सर्दिया आते ही हमारे पास खाने के ढेरों ऑप्शन मिल जाते हैं इन्ही ऑप्शन में एक है तिल। सर्दियों में तिल का इस्तेमाल करने के बहुत फायदे हैं। इसमें कैल्शियम, आयरन, जिंक और फाइबर मैग्नीशियम, कॉपर, भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बहतरीन है।  आइए आपको बताते हैं

हड्डियां मजबूत करे

 

इससे हड्डियां मजबूत रहती हैं। ये गठिया की बीमारी में  बहुत फायदा करता है इसमें कॉपर पाया जाता है जो दर्द और सूजन को ठीक रखता है।

 

त्वचा को सही रहे

 

तिल में भरपूर मात्रा में जिंक  पाया जाता है जो स्किन के लिए एक जरूरी मिनरल माना जाता है। यह त्वचा से संबंधी बीमारियों में बहुत फायदा करता है।

 

मूड ठीक रखे

 

सर्दियों में अगर आपके मूड स्विंग या तनाव रहता है तो आपके लिए तिल बेहतरीन है। आप इसे किसी भी रुप में खा सकते हैं। ज्यादातर लड्डू को पसंद किया जाता है।

 

पाचन सही रखे

 

पाचन संबंधी समस्याओं में तिल बहुत फायदेमंद माना जाता है। तिल में भरपूर मात्रा में फाइबर पाए जाते हैं जो पाचन सही रखने में मददगार है। ये कब्ज को दूर करता है।

 

वजन घटाए

जहां एक तरफ तिल के सेवन के बहुत से फायदे होते हैं वहीं तिल का सेवन से मोटापा घटाने में मददगार है। तिल के तेल की रोजाना मालिश करने से वजन कम होता है।

तिल के टॉप -5 फायदे।

वायु प्रदूषण के चलते शरीर पर बेअसर हो रही दवाइयां

Tue, 12/11/2018 - 20:38

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण से हम सभी लोग बेहाल हैं। लोग कई बीमारियों से घिर चुके हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वायु प्रदूषण से जीवाणुओं की क्षमता में वृद्धि होने जाने से सांस संबंधी संक्रमण के इलाज में दी जाने वाली एंटीबॉयोटिक दवाएं बेअसर हो जाती हैं। यह बात एक शोध में सामने आई।

हम कई बार छोटी-छोटी बीमारियों के लिए दवाई खा लेते हैं कि लेकिन उनका कितना असर हमारे शरीर पर होता है, वह नहीं जान पाते। वायु प्रदूषण की वजह से अब ये सभी दवाइयां बेअसर होने लगी हैं। ब्रिटेन में लीसेस्टर विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर जूली मोरीसे ने कहा, शोध से हमें यह समझने में मदद मिली है कि किस तरह वायु प्रदूषण मानव जीवन को प्रभावित करता है। मोरीसे ने कहा, इससे पता चलता है कि संक्रमण पैदा करने वाले जीवाणुओं पर वायु प्रदूषण का काफी प्रभाव पड़ता है। वायु प्रदूषण से संक्रमण का प्रभाव बढ़ जाता है।

इस शोध का प्रकाशन पत्रिका 'एन्वायरमेंटल माइक्रोबायोलॉजी' में हुआ है। इसमें बताया गया है कि वायु प्रदूषण कैसे हमारे शरीर के श्वसन तंत्र (नाक, गले और फेफड़े) को प्रभावित करता है। वायु प्रदूषण का प्रमुख घटक कार्बन है। यह डीजल, जैव ईंधन व बायोमास के जलने से पैदा होता है। शोध से पता चलता है कि यह प्रदूषक जीवाणु के उत्पन्न होने और उसके समूह बनाने की प्रक्रिया को बदल देता है। इससे उनके श्वसन मार्ग में वृद्धि व छिपने और हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली से लड़ने में सक्षम हो जाता है।

यह शोध दो मानव रोगाणुओं स्टेफाइलोकोकस अयूरियस और स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया पर किया गया। यह दोनों प्रमुख श्वसन संबंधी रोगकारक हैं जो एंटीबॉयोटिक के प्रति उच्च स्तर का प्रतिरोध दिखाते हैं। शोध दल ने पाया कि कार्बन स्टेफाइलोकोकस अयूरियस के एंटीबॉयोटिक बर्दाश्त करने की क्षमता को बदल देता है। यह स्टेफालोकोकस निमोनिया के समुदाय की पेनिसिलीन के प्रति प्रतिरोधकता को भी बढ़ा देता है। इसके अलावा पाया गया कि कार्बन स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया को नाक से निचले श्वसन तंत्र में फैलाता है, जिससे बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।संकलित

डॉ अमित अग्रवाल

दालचीनी रोक सकती है फूड प्वॉइजनिंग

Tue, 12/11/2018 - 20:38

एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि मसाले के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली दालचीनी न सिर्फ स्वाद बढ़ाती है, बल्कि यह एक प्रभावी एंटिबायोटिक भी है, जो गंभीर फूड प्वॉइजनिंग को रोकने में सहायक है. निष्कर्ष के मुताबिक, खाद्य उद्योग में दालचीनी का उपयोग एक प्राकृतिक एंटिबायोटिक के तौर पर किया जाता है.
अमेरिका के वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी की लीना शेंग ने कहा, 'मांस और अन्य खाने वाले सामानों को ताजा रखने के लिए उसकी पैकिंग के डिब्बों में दालचीनी के तेल का इस्तेमाल किया जाता है.'

शेंग कहती हैं, 'मांस, फलों और सब्जियों से सूक्ष्म जीवों के खात्मे के लिए भी दालचीनी के तेल का उपयोग किया जाता है, ताकि इसे लंबे समय तक संरक्षित किया जा सके.'

अध्ययन में यह बात सामने आई कि यह तेल 'शिगा' नामक जहर उत्पन्न करने वाले बैक्टीरिया एस्चिरीसिया कोलाई (ई कोलाई) की प्रजातियों को खत्म कर देती है. अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र की ओर से ऐसे बैक्टीरिया को 'नॉन-ओ157' नाम दिया गया है.

शेंग ने कहा कि दालचीनी का तेल तभी प्रभावी है, जब इसकी सांद्रता बेहद कम हो. एक लीटर पानी में लगभग 10 बूंदें बैक्टीरिया को 24 घंटे में मार डालती है.

 

वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर मीजून झू ने कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता बढ़ने के कारण रासायनिक की जगह प्राकृतिक चीजों की मांग तेजी से बढ़ी है.

वह कहती हैं, 'खाद्य जनित रोगाणुओं के नियंत्रण के लिए हमारा ध्यान प्रकृति प्रदत्त चीजों पर है, ताकि खाने वाले सामानों की ताजगी को लंबे समय तक रखा जा सके.'

दालचीनी मूल रूप से इंडोनेशिया में उपजाई जाती है, जिसमें अन्य देशों की दालचीनी की अपेक्षा ज्यादा तीव्र गंध होती है. यह अध्ययन पत्रिका 'फूड कंट्रोल' में प्रकाशित हुआ है.

 

काली मिर्च के फायदे सुनकर आप भी करेंगे इसका इस्तेमाल

Tue, 12/11/2018 - 08:30

हमारे किचन का एक बेहद खास मसाला है काली मिर्च। जो आपके खाने का स्वाद बढाने के साथ साथ आपके हेल्थ के लिए बेहतरीन है। आइए जानते हैं काली

सर्दी जुकाम से बचाए

सर्दी जुकाम से निजात पाने के लिए पानी में तुलसी, काली मिर्च, अदरक लौंग और इलाइची के साथ उबाल कर इसकी चाय बना कर पिएं।

मांसपेशियों के दर्द से निजात

तेल को हल्का गर्म कर के उसमें काली मिर्च मिलाकर इससे पीठ और कंधों की मालिश करें।  गठिया रोग में भी काली मिर्च काफी फायदेमंद साबित होती है।

रखे हमेशा फिट

अगर आप खुद को फिट रखना चाहते हैं तो अपने खाने में काली मिर्च का प्रयोग ज़रुर करें। फ्रूट सलाद,सूप या चाय में इसका इस्तेमाल करके आप हमेशा फिट रहेंगे।

मूड ठीक करे

काली मिर्च के प्रयोग से शरीर में सेरोटोनिन हार्मोन बनता है, जो अच्छे मूड के लिए जिम्मेदार होता है. इसलिए रोजमर्रा के खाने में काली मिर्च का इस्तेमाल करें और खुश रहें.

स्वाद बढ़ाए

आप अपने खाने में ज़ायका लाने के लिए काली मिर्च का इस्तेमाल ज़रुर करें। ये आपके फीके खाने को बहुत टेस्टी बना देता है और वो भी हैल्दी।

ब्यूटी बढ़ाए

ये एंटीएजिंग में भी मददगार है। साथ ही इसका इस्तेमाल आप स्क्रब की तरह भी कर सकते हैं। थोड़ी दरदरी काली मिर्च,चीनी और तेल को मिलाकर चेहर पर लगाएं। इससे आपकी त्वचा निखर उठेगी।

लो ब्ल़ड प्रेशर में फायदेमंद

अगर आपको लो ब्लड प्रेशर की शिकायत है तो काली मिर्च का सेवन शुरु करें। जल्द ही फायदा होगा। इसे आप किशमिश के साथ खाएं।   

दांतो के रोग से बचाए

अगर आप दांतों में होने वाले रोग पायरिया से परेशान हैं या दांत कमजोर हैं तो काली मिर्च को नमक के साथ मिलाकर दांतों पर रगड़ें।

मिर्च के फायदे।

पाचन में सहायक मां का दूध

Mon, 12/10/2018 - 08:30

 का दूध शिशुओं के लिए अमृत माना जाता है। इससे अच्छे जीवाणु भी मिलते हैं जो आगे चलकर ठोस भोजन पचाने के लिए उन्हें ज्यादा तैयार करते हैं, जबकि मां के दूध से वंचित बच्चों को पेट दर्द जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ नार्थ कैरोलिना के शोधकर्ताओं ने पाया कि शुरुआती महीनों में एक शिशु का आहार पेट के जीवाणुओं की संरचना, विविधता और स्थिरता पर खासा असर डालता है। शोध से संबद्ध एसोसिएट प्रोफेसर एंडिया पेरिल ने बताया, ‘सिर्फ मां के दूध से पोषित शिशु में सूक्ष्म जीवाणु पाए जाते हैं।

ये जीवाणु आगे चलकर ठोस भोजन को पचाने के लिए शिशु को तैयार करते हैं।’शोध का प्रकाशन फ्रंटियर्स इन सेलुलर एंड इंफेक्शन माइक्रोबॉलोजी जर्नल में किया गया है

 

योगा के फायदे

Mon, 12/10/2018 - 07:24

योगा : योग एक प्राचीन भारतीय जीवन-पद्धति है। जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने (योग) का काम होता है। योग के माध्यम से शरीर, मन और मस्तिष्क को पूर्ण रूप से स्वस्थ किया जा सकता है। तीनों के स्वस्थ रहने से आप स्‍वयं को स्वस्थ महसूस करते हैं। योग के जरिए न सिर्फ बीमारियों का निदान किया जाता है, बल्कि इसे अपनाकर कई शारीरिक और मानसिक तकलीफों को भी दूर किया जा सकता है। योग प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाकर जीवन में नव-ऊर्जा का संचार करता है। 
दिन भर में कुछ मिनट का योग दिन भर की चिंताओं से मुक्ति दिलाता हैं।न केवल शारीरिक अपितु मानसिक चिंताओं से भी।योगासन,प्राणायाम और ध्यान तनाव दूर करने का कारगर उपाय हैं।आप श्री श्री योग लेवल2 प्रोग्राम में इस बात को अनुभव कर सकते हैं कि कैसे योग शरीर को तनाव और हानिकारक पदार्थो से मुक्त करता हैं।

सभी रोगों की एक दवा है एलोवेरा

Sun, 12/09/2018 - 08:30

एलोवेरा का पौधा घर में आसानी से लगाया जा सकता है। एलोवेरा के पौधे का रंग हरा होता है, इसमें से जो जेल निकलता है वो सब के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। इसको चमत्कारी पौधे के नाम से भी जाना चाहता है। एलोवेरा औषधीय गुणों का भंडार है। एलोवेरा में कई पोषक तत्‍व,विटामिन और मिनरल्‍स होते है जो सब के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी सिद्ध हुए है। एलोवेरा जैल,एलोवेरा का जूस हमें जितना अंदर से सेहतमंद रखता है उतना ही बाहर से हमें जवान बनायें रखने में मदद करता है। एलोवेरा का जूस उसकी कांटेदार पत्तियों को अच्छी तरह छीलकर निकालना चाहिए।

1 एलोवेरा जूस का सेवन हर दिन करना चाहिए ,इससे शरीर को एनर्जी मिलती  है।शरीर में जल्दी थकावट महसूस  नहीं होती।

2 एलोवेरा का जूस मोटापा कम करने में हमारी मदद करता है।

3 एलोवेरा जैल को चेहरे पर लगाने से चेहरे का रूखापन,मुंहासे दूर हो जाते है और चमक आ जाती है।

4 एलोवेरा जूस बालों में लगाने से  बाल मुलायम,घने और काले हो जाते है।

5 एलोवेरा के जूस को गर्म पानी के साथ पीने से सर्दी,खांसी से छुटकारा मिलता है।

6 एलोवेरा जूस चेहरे के दाग-धब्‍बों को दूर करने में मदद करते है।

7 एलोवेरा जैल शरीर पर हुए घाव  को  जल्द भरने में मदद करता है।

8 एलोवेरा जूस हमारी पाचन क्रिया को भी ठीक रखता है और कब्ज से छुटकारा दिलवाता है।

9 एलोवेरा जूस मधुमेह के रोगियों के लिए भी लाभदायक है।

10 एलोवेरा जूस जोड़ो के दर्द ,बवासीर जैसे रोगों से भी छुटकारा दिलवाने में मदद करता है।

11 एलोवेरा जेल को आंखो के आसपास हुए काले घेरे पर लगाने से  काले घेरे कम हो जाते है

 

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आज हम बोतलों में पी रहे है जहर हो जाए सावधान

Sun, 12/09/2018 - 06:25

आजकल प्लास्टिक की बोतलों में पानी पीने का प्रचलन अधिक हो गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से हो सकता है जानलेवा खतरा। 
वैज्ञानिकों ने शोध के आधार पर यह बताया है कि यदि आप प्लास्टिक की बोतल में पानी पीते हैं तो इससे  डायबीटीज और कैसंर जैसी कई खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं।।ईडीसी केमिकल जब इंसान के शरीर में प्रवेश करता है तब मोटापा, कैंसर,  दिमागी परेशानी, पुरूषों में बांझपन, महिलाओं में गर्भाश्य में बांझपन का होना आदि की समस्या हो सकती है।
मित्रो भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर ने 5 कम्पनियो के मिनरल वाटर के 18 सैंपल पर अध्यन करके ये बताया है  विज्ञानिको के अनुसार बोतलबंद मिनरल वाटर से कैंसर , गंजापन , आंतो के बीमारी , किडनी पर असर हो सकता है |
मिट्टी में कई प्रकार के रोगों से लड़ने की क्षमता पाई जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार मिट्टी के बर्तनों में पानी रखा जाए, तो उसमें मिट्टी के गुण आ जाते हैं नियमित रूप से घड़े का पानी पीने से प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद मिलती है मिटटी में शुद्धि करने का गुण होता है यह सभी विषैले पदार्थ सोख लेती है तथा पानी में सभी जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाती है। मिट्टी के बने मटके में सूक्ष्म छिद्र होने के कारण पानी ठंडा रहता है।
तांबा यानि कॉपर, सीधे तौर पर आपके शरीर में कॉपर की कमी को पूरा करता है और बीमारी पैदा करने वाले जीवाणुओं से आपकी रक्षा कर आपको पूरी तरह से स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होता है।  यह माना जाता है कि तांबे के बर्तन में रखे पानी में जीवाणुरोधी , एंटीऑक्सीडेट कैंसररोधी और एंटीइन्फ्लेमेटरी गुण आ जाते हैं. आयुर्वेद के अनेक प्राचीन ग्रंथों में अलग-अलग प्रकार के बर्तनों में रखे पानी का उपयोग करने का वर्णन किया गया है तथा तांबे के बर्तन में रखे पानी को शरीर के लिए बहुत गुणकारी बताया गया है.

लौकी के गुण

Sat, 12/08/2018 - 08:30

सब्जी के रुप में खाए जाने वाली लौकी हमारे शरीर के कई रोगों को दूर करने में सहायक होती है। यह बेल पर पैदा होती है और कुछ ही समय में काफी बड़ी हो जाती है। वास्तव  में यह एक औषधि है और इसका उपयोग हजारों रोगियों पर सलाद के रूप में अथवा रस निकालकर या सब्‍जी के रुप में एक लंबे समय से किया जाता रहा है। 

      लौकी को कच्‍चा भी खाया जाता है, यह पेट साफ करने में भी बड़ा लाभदायक साबित होती है और शरीर को स्‍वस्‍य और शुद्ध भी बनाती है। लंबी तथा गोल दोनों प्रकार की लौकी वीर्य वर्धक , पित्‍त तथा कफनाशक और धातु को पुष्ट  करने वाली होती है। आइए इसके औषधीय गुणों पर एक नज़र डालते हैं- 

1. हैजा होने पर 25 एम.एल. लौकी के रस में आधा नींबू का रस मिलाकर धीरे-धीरे पिएं। इससे मूत्र बहुत आता है। 

2.खांसी, टीबी, सीने में जलन आदि में भी लौकी बहुत उपयोगी होती है। 

3.हृदय रोग में, विशेषकर भोजन के पश्चात एक कप लौकी के रस में थोडी सी काली मिर्च और पुदीना डालकर पीने से हृदय रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। 

4.लौकी में श्रेष्‍ठ किस्म का पोटेशियम प्रचुर मात्रा में मिलता है, जिसकी वजह से यह गुर्दे के रोगों में बहुत उपयोगी है और इससे पेशाब खुलकर आता है। 

5.लौकी श्‍लेषमा रहित आहार है। इसमें खनिज लवण अच्‍छी मात्रा में मिलते है। 

6.लौकी के बीज का तेल कोलेस्‍ट्रॉल को कम करता है तथा हृदय को शक्‍ति देता है। यह रक्‍त की नाडि़यों को भी तंदुरस्त  बनाता है। लौकी का उपयोग आंतों की कमजोरी, कब्‍ज, पीलिया, उच्‍च रक्‍तचाप, हृदय रोग, मधुमेह, शरीर में जलन या मानसिक उत्‍तेजना आदि में बहुत उपयोगी है।

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व्रत कैसे करे

Sat, 12/08/2018 - 08:25

व्रत से शरीर के डाइजेशन सिस्टम को आराम मिलता है और मेटाबॉलिक रेट बढ़ जाता है। हालांकि इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, वरना इसका उल्टा प्रभाव भी पड़ सकता है  व्रत के दौरान शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहि इसलिएत 6-8 गिलास पानी जरूर पिएं। डाइट में ऐसे फल शामिल करें, जिसमें पानी की मात्रा अधिक हो। अंगूर, लीची, संतरा, मौसमी ऐसे ही फल हैं। पेट खाली रहने से एसिडिटी बढ़ सकती है। अपने खाने में हाई कार्बोहाइड्रेट डाइट जैसे आलू, साबूदाना आदि को शामिल करें। ड्राई फ्रूट्स लें, इससे जरूरी एनर्जी मिलेगी और कमजोरी नहीं महसूस होगी।
परन्तु  व्रत के दौरान अधिक तला-भुना नहीं खाना चाहिए। इससे कैलोरी की मात्रा बढ़ेगी 
डायबीटीज और हाइपरटेंशन के मरीज, खून की कमी की समस्या से जूझ रहे लोग न करें व्रत

 

एक आंवला दो संतरे के बराबर होता है।

Sat, 12/08/2018 - 06:24

आंवले में सारे रोग दूर करने के गुण व शक्ति होती है। आंवला युवकों को भी यौवन शक्ति प्रदान करता है तथा बूढ़ों को युवा जैसी शक्ति देता है। बशर्ते आंवला किसी न किसी रूप में रोज सेवन करें। आंवले में विटामिन सी भरपूर होता है। हर इंसान को प्रतिदिन 50 मिली ग्राम विटामिन सी की जरूरत होती है। एक आंवला दो संतरे के बराबर होता है। आंवले का मुरब्बा ताकत देने वाला होता है।

1. गर्भवती स्त्रियों को आंवला अवश्य लेना चाहिये। किसी भी रूप में लें।

2. आंवला एक अंण्डे से अधिक बल देता है।

3. आंवला ब्लडप्रेशर वालों के लिये लाभप्रद है।

4. आंवला टूटी हड्डियों को जोड़ने वाला है।

5. जिन्हें नकसीर होता हो (नाक से खून) सूखा आंवला रात में भिगाकर उस पानी से सर धोयें। आंवले का मुरब्बा खायें। आंवले का रस नाक में टपकायें।

6. आंवले का चूर्ण मूली में भरकर खाने से मूत्राशय की पथरी में लाभ होता है।

7. आंवले के रस में शहद मिलाकर खाने से मधुमेह में लाभ होता है।

8. रात के आंवले का चूर्ण भीगो कर पानी पीये सुबह पेट साफ होता है। पाचन शक्ति बढ़ती है।

9. नित्य 1-2 ताजे आंवले का रस पीने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं। पांच दिन तक बराबर पियें।

10. जो लोग स्वस्थ रहना चाहते हैं वो ताजा आंवला का रस शहद में मिलाकर पीने के बाद ऊपर से दूध पियें इससे स्वास्थ अच्छा रहता है। दिन भर प्रसन्नता का अनुभव होता है। नई शक्ति व चेतना देता है। यौवन बहार आयेगा।

11. आंवले का रस पीने से नेत्र ज्योति बढ़ती है।

12. गर्भावस्था में उल्टी हो रही हो, तो आंवले का मुरब्बा खायें।

13. आंवले के चूर्ण का उबटन चेहरे पर लगाये चेहरा साफ होगा दाग धब्बे दूर होंगे।

14. गर्मियों में चक्कर आता हो जी घबराता हो तो आंवले का शर्बत पियें।

15. आवाज बैठ गई हो, तो पिसे आंवले की फंली लें।

16. आंवले में बाल करने के गुण है। आंवला बहुत खट्टा इसलिये सफाई अच्छी करता है बालों की। साथ रोज आंवले का सेवन करें।

17. बुढ़ापा दूर रखता है। सूखे आंवले का चूर्ण 2 चम्मच रोज रोटी में रखकर खायें। बुढ़ापा दूर रहेगा जवानी बनी रहेगी।

 

 

काली मिर्च के औषधीय गुण

Fri, 12/07/2018 - 04:24

जुकाम होने पर काली मिर्च मिलाकर गर्म दूध पीएं। यदि जुकाम बार-बार होता है, अक्सर छीकें आती हैं तो काली मिर्च की संख्या एक से शुरू करके रोज एक बढ़ाते हुए पंद्रह तक ले जाए फिर प्रतिदिन एक घटाते हुए पंद्रह से एक पर आएं। इस तरह जुकाम एक माह में समाप्त हो जाएगा।

खांसी होने पर आधा चम्मच काली मिर्च का चूर्ण और आधा चम्मच शहद मिलाकर दिन में 3-4 बार चाटें। खांसी दूर हो जाएगी।

गैस की शिकायत होने पर एक कप पानी में आधे नीबू का रस डालकर आधा चम्मच काली मिर्च का चूर्ण व आधा चम्मच काला नमक मिलाकर नियमित कुछ दिनों तक सेवन करने से गैस की शिकायत दूर हो जाती है।

काली मिर्च को घी और मिश्री के साथ मिलाकर चाटने से बंद गला खुल जाता है और आवाज़ सुरीली हो जाती है। आठ-दस काली मिर्च पानी में उबालकर इस पानी से गरारे करें, इससे गले का संक्रमण खत्म हो जाएगा।

काली मिर्च को घी में बारीक पीसकर लेप करने से दाद-फोड़ा, फुंसी आदि रोग दूर हो जाते हैं।

काली मिर्च में विटामिन सी, विटामिन ए, फ्लैवोनॉयड्स, कारोटेन्स और अन्य एंटी - ऑक्सीडेंट आदि तत्व भी पाए जाते है। कालीमिर्च ब्रेस्ट कैंसर को रोकने में मददगार होती है। यह त्वचा के कैंसर से भी शरीर की रक्षा करती है।

 

 

 

 

खांसी जुकाम में

काली मिर्च इतना फायदा पहुंचाती है कि खांसी जुकाम से राहत दिलाने वाले कफ सिरप में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। रात को सोने से पहले एक चम्मच शहद और अदरक के रस के साथ चुटकी भर काली मिर्च लेने से कफ कम होता है। चाय में मिला कर पीने से भी फायदा मिलता है।

 

 

 

त्वचा रोग

काली मिर्च को घी में बारीक पीसकर लेप करने से दाद-फोड़ा, फुंसी आदि रोग दूर हो जाते हैं। आधा चम्मच पिसी काली मिर्च थोड़े- से घी के साथ मिला कर रोजाना सुबह-शाम नियमित खाने से नेत्र ज्योति बढ़ती है।

 

 

 

अपच, दस्त, कब्ज और अम्लता दूर करे

काली मिर्च, पेट की पाचन शक्ति बढ़ा देती है। काली मिर्च, टेस्ट बड्स से पेट को संकेत भेजता है और हाइड्रोक्लोरिक एसिड का उत्पादन करने के लिए प्रेरित करता है। इस एसिड से पेट की पाचन क्रिया सही हो जाती है। यह एसिड पेट की सभी भोजन सामग्री को पचा देती है। इसके सेवन से पेट फूलना, अपच, दस्त, कब्ज और अम्लता आदि भी आसानी से दूर भाग जाते है। पाचन में सहायता के लिए अपने भोजन को बनाते समय काली मिर्च का सेवन अवश्य करें।

 

 

 

वजन घटाने में मदद करता है

काली मिर्च का सेवन करने से वजन काफी कम किया जा सकता है। इसमें शक्तिशाली फाइटोन्यूट्रीसियन होते है जो वसा की बाहरी परत को तोड़ने में सहायक होते है और इससे वसा घटता है। इस प्रक्रिया में पेशाब ज्यादा आती है और पसीना भी काफी निकलता है, इससे शरीर के सभी विषैले तत्व निकल जाते है और शरीर को राहत मिलती है।

 

 

 

भूख नहीं लगती तो ये करें

काली मिर्च, पाचन को स्वस्थ बनाती है। यह खाने के टेस्ट को बढ़ाती हैं। इसी गुण के कारण, यह एक घरेलू नुस्खा है कि जिन लोगों को कम भूख लगती है उन्हें काली मिर्च के पाउडर वाला भोजन खिलाएं, इससे उनकी भूख खुलेगी।

महीने में 6 किलो वजन कम करने के लिए पिएं ये खास जूस

Thu, 12/06/2018 - 22:25

हम आपको एक प्राकृतिक उपाय बता रहे हैं, जिसके जरिए आपको आसानी से वजन कम करने में मदद मिल सकती है। जैसा कि आप जानते हैं, प्राकृतिक उपचार कई बीमारियों का इलाज कर सकते हैं और शरीर के वजन को कम करना भी उन्ही में से एक है।

एक महीने में 6 किलो वजन कम करने के लिए पिएं यह जूस

आवश्यक सामग्री:

ताजा गाजर का रस - आधा गिलास

एप्पल पल्प - आधा गिलास

अदरक का रस - 1 चम्मच

इस प्राकृतिक उपाय को रोजाना इस्तेमाल करने से आपको वजन कम करने में मदद मिलती है।

हालांकि, यदि आप चाहते हैं कि यह घर का बना रस जल्दी से काम करे, तो आपको कुछ स्वस्थ जीवनशैली परिवर्तन भी करना चाहिए, जिससे वजन घटाने में सहायता मिलती है।

रोजाना कम से कम एक घंटा एक्सरसाइ करना और ऑयली फूड्स से तौबा कर लेने से भी यह जूस वजन घटाने में तेजी से मदद करता है।

इसके अलावा, यह जानने के लिए भी अपने डॉक्टर से बात करना महत्वपूर्ण है कि क्या आपको कुछ बीमारियां तो नहीं हैं, जो आपके वजन का मूल कारण हो सकती हैं और उनका इलाज किया जाना चाहिए।

गाजर का रस, सेब और अदरक का यह संयोजन एक उत्कृष्ट औषधि है। यह चीजें विभिन्न यौगिकों से भरी हुई हैं, जो शरीर में फैट को तेजी से बर्न करती हैं।

यह जूस एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर है जो आपके मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है और जल्दी वजन घटाने में मदद करता है।

इसके अलावा इसमें फाइबर भी खूब होते हैं जिससे आपके फैट को शरीर से बाहर करने में मदद मिलती है।

इस जूस को बनाने का तरीका बताई गई सभी चीजों के ब्लेंडर में डालें और थोड़ा पानी डालकर ब्लेंड कर लें।

अच्छी तरह से ब्लेंड कर लें। इस जूस को एक महीने तक रोजाना सुबह नाश्ते से पहले पिएं।

 

 

 

पत्ता गोभी के फायदे

Thu, 12/06/2018 - 22:24

पत्‍ता गोभी कई रंगों और कई किस्‍मों में आती है। लाल और हरे रंग की पत्‍ता गोभी सबसे ज्‍यादा मिलती है। इसे पका कर या कच्‍चा सलाद के रूप में भी खाया जा सकता है। पत्‍ता गोभी का स्‍वाद हल्‍का सा मीठा होता है। इसमें विटामिन, आयरन और पोटेशियम भरपूर मात्रा में होते है। इसे इंडियन और वेस्‍टर्न दोनों तरह के फूड को पकाने में इस्‍तेमाल किया जाता है।

कैंसर को रोकने में मदद करता है

पत्तागोभी में ऐसे तत्‍व होते है जो कैंसर की रोकथाम करने और उसे होने से बचाने में मदद करता है। इसमें डिनडॉलीमेथेन ( डीआईएम ), सिनीग्रिन, ल्‍यूपेल, सल्‍फोरेन और इंडोल - 3 - कार्बीनॉल ( 13 सी) जैसे लाभदायक तत्‍व होते है। ये सभी कैंसर से बचाव करने में सहायक होते है।

पायरिया में असरदार

बंदगोभी का रस निकालकर पीयें तथा इसके मध्य भाग को सलाद बनाकर खाने से पायरिया तथा दांतों के अन्य रोग ठीक होते हैं।

कब्ज करें दूर

पत्तागोभी पेट को साफ रखने में बहुत कारगर है।

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