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आन्त्रिक ज्वर का कारण

nutriworld - Wed, 04/10/2019 - 08:30

इसे छूत का बुखार कहा जाता है | यह मारक महामारी के रूप में भी फैलता है | इस रोग का जीवाणु मुंह के रास्ते पेट में चला जाता है और छोटी आंत में गुच्छों के रूप में जम जाता है, जिससे लम्बे समय तक ज्चर बना रहता है, इसीलिए इसे मियादी बुखार या मन्थर ज्वर भी कहा गया है |

शरीर के अधिक थकने, अधिक उपवास करने, गन्दे स्थानों में रहने तथा दूषित मल के सम्पर्क में आने और दूषित पदार्थ खाने से भी यह रोग होता है | बड़ी आंत तथा छोटी आंत को हानि पहुंचती है | तिल्ली और जिगर भी प्रभावित होते हैं | रक्त और लसीका ग्रन्थियों तथा मल-मूत्र में भी इस रोग के जीवाणु मिलते हैं | इसके कारण शरीर में दाह होता है, रोगी भ्रम में पड़ा रहता है, वमन होता है और प्यास लगती है | रोगी की नीद उड़ जाती है, मुंह और जीभ सूखती रहती है | गर्दन, पेट, छाती आदि पर दाने निकल आते हैं |

आन्त्रिक ज्वर के लक्षण Typhoid Fever Ke Lakshan

टायफाइड अथवा आन्त्र ज्वर में आंतों में विकार के साथ लगातार बुखार बना रहता है, तिल्ली बढ़ जाती है | शरीर पर पित्ती भी निकल आती है | छोटी आंत की झिल्ली में सूजन हो जाती है, उसमें घाव हो जाते हैं |

आन्त्रिक ज्वर का उपचार

1. जिन ऋतुओं में इसका प्रकोप अधिक होता है उनमें नियमित रूप से भोजन के पूर्व नीबू का सेवन करने से रोग से बचाव हो जाता है | रोगी को पूर्ण विश्राम करना चाहिए | औषधि के साथ-साथ इस रोग में उचित सेवा-परिचर्या भी आवश्यक है |

2. रोगी के कमरे में पूर्ण शान्ति रहनी चाहिए | अधिक तेज प्रकाश से उसे बचाना चाहिए | रोगी का बिस्तर आरामदायक होना आवश्यक है | रोगी को प्रतिदिन स्पंज करना चाहिए तथा उसके भी कपड़े-बदलने चाहिए और ऐसा उपाय करना चाहिए उससे शैयाव्रण (Bed-sores) न होने पाएं | रोगी को थोड़ा-थोड़ा जल अवश्य पिलाते रहना चाहिए |

3. प्यास तथा दाह अधिक होने पर मौसमी का रस पीने के दिन में एक-दो बार देना चाहिए |

4. दुर्बल व्यक्तियों को प्रोटीन तथा विटामिन का पूरक आहार देना चाहिए |

5. ज्वर उतारने के लिए शीघ्रता न करें |

6. हृदय, मस्तिष्क तथा आंतों की सुरक्षा पर ध्यान दें |

7. ज्चर के द्वितीय सप्ताह में मलावरोध की प्रवृत्ति रहती है, अतः ग्लिसरीन द्वारा एनिमा दिया जा सकता है |

8. छेने का पानी पिलाने से भी मल की गांठे साफ हो जाती हैं |

9. रोगी के लिए दूध सर्वोत्तम आहार है | यदि दूध न पच पाए तो फटे दूध का पानी देना चाहिए |

10. रोगी को समय-समय पर उबालकर ठण्डा किया हुआ जल ग्लूकोज में मिलाकर देना चाहिए | चतुर्थ सप्ताह में धीरे-धीरे दूध की मात्रा बढ़ानी चाहिए |

11. साबूदाना आदि का सेवन किया जा सकता है |

12. रोगी के लिए संतरे का सेवन भी लाभकारी है |

13. रोगमुक्त हो जाने के बाद मूंग की दाल का पानी देना चाहिए | साथ में परवल भी दिया जा सकता है |

14. दस्त हो रहें हों तो उसे रोकने के लिए चिकित्सा करें ताकि कमजोरी न हो | यदि मलावरोध हो तो औषधियों का उपयोग किया जा सकता है |

15. जब तक आन्त्र में शोथ और क्षय रहता है तब तक रोगी को मलमूत्र त्याग के लिए उठने नहीं देना चाहिए | लेटे हुए ही मलमूत्र कराना चाहिए | रोग के अन्त में दुर्बलता की ओर विशेष ध्यान रखना चाहिए |

16. जो पौष्टिक आहार सरलता से पच सके वही खाने को दें |

नियमित रूप से प्रातःकाल गुनगुने पानी में कपड़ा भिगोकर रोगी का सारा शरीर धीरे-धीरे पोंछकर साफ करना चाहिए अथवा मुलायम कपड़े से हलके से रगड़ते हुए सफाई करनी चाहिए |

कैसे बनाएं मेथी का पानी

nutriworld - Tue, 04/09/2019 - 08:30

रात को एक बड़ी चम्मच मेथी के दानों को दो गिलास पानी मे भिगोने के लिए रख दें। और सुबह इसे छानकर पीएं।

मेथी के अन्य फायदे

बालों पर मेथी के दानों का बना पेस्ट लगाने से बालों का झड़ना दूर हो जाता है।मेथी से निकले पानी को दांतों पर रगड़ने से दांत पक्के और मजबूत बनते हैं।मधुमेह और दिल की बीमारी से परेशान लोगों को मेथी की सब्जी में प्याज डालकर खाना चाहिए।मेथी खाने से बुखार, कफ और पेट की गैस खत्म होती है।आंवला, रीठा के छिलके, काली मिट्टी, मेथी दाना, शीकाकाई व भांगरे के मिश्रण का बालों पर लेप लगाएं और 2 घंटे के बाद पानी से धो लें। एैसा करने से बाल चिकने, काले और मुलायम बनते हैं।मेथी के पाउडर को दूध के साथ लेने से मधुमेह ठीक होने लगता है।कान दर्द, लकवा और मिर्गी में मेथी काढे का सेवन करने से फायदा मिलता है।एक कप पानी में 2 चम्मच मेथी को उबालकर पीने से पेट के छाले और आंतों की सफाई हो जाती है।

मेथी खून को साफ करती है साथ ही वायुरोग, कमर दर्द आदि में राहत देती है। मेथी बच्चे की मां के दूध को भी बढ़ाती है। मेथी, खाने की अरूचि, खांसी, उल्टी आदि में भी राहत देती है।

सावधानी
मेथी गर्म होती है इसलिए अत्याधिक इसका सेवन न करें। यह पित्त को बढ़ाती है। जो लोग पेशाब में खून, मासिक धर्म और खूनी बवासीर से परेशान हों वे लोग मेथी का सेवन न करें।

आइये जानते हैं तुलसी के फायदे...

nutriworld - Mon, 04/08/2019 - 08:30

1. तुलसी रस से बुखार उतर जाता है। इसे पानी में मिलाकर हर दो-
तीन घंटे में पीने से बुखार कम हो जाता है।

2. कई आयुर्वेदिक कफ सिरप में तुलसी का इस्तेमाल अनिवार्य है।
यह टी.बी,ब्रोंकाइटिस और दमा जैसे रोंगो के लिए भी फायदेमंद
है।

3. जुकाम में इसके सादे पत्ते खाने से भी फायदा होता है।

4. सांप या बिच्छु के काटने पर इसकी पत्तियों का रस,फूल और
जडे विष नाशक का काम करती हैं।

5. तुलसी के तेल में विटामिन सी,कै5रोटीन,कैल्शियम और
फोस्फोरस प्रचुर मात्रा में होते हैं।

6. साथ ही इसमें एंटीबैक्टेरियल,एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण
भी होते हैं।

7. यह मधुमेह के रोगियों के लिए भी फायदेमंद है।साथ ही यह
पाचन क्रिया को भी मज़बूत करती हैं।

8. तुलसी का तेल एंटी मलेरियल दवाई के तौर पर इस्तेमाल
किया जा सकता है। एंटीबॉडी होने की वजह से यह
हमारी इम्यूनिटी भी बढा देती है।

9. तुलसी के प्रयोग से हम स्वास्थय और
सुंदरता दोनों को ही ठीक रख सकते हैं।

सावधानी :

फायदे जानने के बाद तुलसी के सेवन में अति कर देना नुकसानदायक
साबित होगा। क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है इसलिए दिन
भर में 10-12 पत्तों का ही सेवन करना चाहिए। खासतौर पर
महिलाओं के लिए भले ही तुलसी एक वरदान की तरह है लेकिन
फिर भी एक दिन में पांच तुलसी के पत्ते पर्याप्त हैं। हां,
इसका सेवन छाछ या दही के साथ करने से इसका प्रभाव संतुलित
हो जाता है। हालांकि यह आर्थराइटिस, एलर्जी, मैलिग्नोमा,
मधुमेह, वायरल आदि रोगों में फायदा पहुंचाती है। लेकिन
गर्भावस्था के दौरान इसके सेवन का ध्यान रखना जरूरी है।
गर्भावस्था के दौरान अगर दर्द ज्यादा होता है तब तुलसी के
काढे से फायदा पहुंच सकता है। इसमे तुलसी के पत्तो को रात भर
पानी मे भिगो दें और सुबह उसे क्रश करके चीनी के साथ खाएं
ब्रेस्ट- फीडिंग के दौरान भी तुलसी का काढा फायदेमंद
होता है। इसके लिए बीस ग्राम तुलसी का रस और मकई के
पत्तों रस मिलाएं, इसमें दस ग्राम अश्वगंधा रस और दस ग्राम शहद
मिला कर खाएं।

खाइये ये फूड और कीजिये अपने लिवर को साफ

nutriworld - Sun, 04/07/2019 - 08:30

लीवर शरीर के महत्वपूर्ण अंगो में से एक है जिसका स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक है। लिवर के स्वस्थ रहने से इम्यून सिस्टम अच्छे से काम करता है, किसी भी तरह की एलर्जी से बचाता है साथ ही वजन पर भी नियंत्रण रखता है। अपने लिवर को स्वस्थ रखने के लिए आप वही आहार लें जो उसकी सफाई करे। 
लिवर की सफाई करने के लिए आपको एक दो दिन पहले से हल्का उपवास रखना पड़ता है जिससे शरीर से मौजूदा विषाक्त पदार्थ बाहर निकल सके।

इस उपवास के दौरान आपको खूब पानी पीना होता है साथ ही सब्जियों का रस पीना चाहिए और फल खाने चाहिए। सभी विषाक्त पदार्थ के शरीर से निकल जाने के बाद आप अपना भोजन पहले की तरह खा सकते हैं। 
यह लिस्ट है उन खाद्य पदार्थों की जो आपके लिवर को क्लेनज़ करेंगी। लिवर क्लेनज़ डाइट में ताज़ा भोजन है साथ ही खूब सारा पानी पीने की सलाह दी जाती है। ब्राउन राइस और ओटमील से पाचन अच्छा होता है जबकि सेम में फाइबर पता जाता है।
कच्ची सब्जियों और फलों में काफी अच्छी मात्रा में फाइबर, विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं। जितना हो सके आर्गेनिक और ताजा सब्जियों और फलों का सेवन करें।
आप अपनी पसन्द की सब्जियों और फलों का रस भी निकाल कर पी सकते हैं। लिवर क्लेनज़िंग के लिए ओमेगा -3 बहुत फायदेमंद होता है यह अलसी, अखरोट और मछली के तेल में पाया जाता है।
चूंकि सारा ध्यान स्वस्थ आहार पर है इसलिए आपको किसी भी तरह का अन्हेल्थी फ़ूड जो पैकेजिंग में आता है जैसे बॉक्सेस, बैग और कैन्स में नहीं खाना है। ज्यादा फैटी मीट जैसे पोर्क और तली चीज़ें बिल्कुल नहीं खानी है। खाद्य पदार्थ जिसमें ऐडिटिव, कीटाणुनाशक और प्रीज़र्वटिव मिला हो बिल्कुल नहीं खाना है।
शराब लिवर के लिए ज़हर की तरह होती है इसलिए इसे किसी भी हालत में नहीं पीना है। ज्यादा खाने से बचें और जितना हो सके पूरे दिन में थोड़ा थोड़ा खाएं। सुबह के वक़्त भर पेट नाश्ता करें और रात में हल्का खाना खाएं साथ ही कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लें। 
Source: hindi.boldsky.com

 

 

फूड सप्लीमेंट्स क्या होते हैं इनकी क्यों जरूरत होती है

nutriworld - Sat, 04/06/2019 - 14:37

दोस्तों आज हम आपको बताएंगे कि फूड सप्लीमेंट्स क्या होते हैं इनकी क्यों जरूरत होती है इनके बारे में बहुत सी भ्रांतियां भी हैं जिनको आज हम दूर करेंगे कुछ लोगों का मानना है कि यह सेहत के लिए बहुत अच्छे होते हैं और कुछ लोगों का यह विचार है कि यह सेहत के लिए अच्छे नहीं होते हैं इन पर पैसा खर्च करना फ़िज़ूल खर्ची है आज हम यही जानेंगे । कि आखिर सच्चाई क्या है । फूड सप्लीमेंट्स को हिंदी में भोज्य पूरक कहते हैं जिसको आम बोलचाल में कहेंगे जो भोजन की पूर्ति करें अर्थात यह भोजन नहीं है किंतु भोजन की पूर्ति करते हैं हमें जानेंगे कि आखिर भोजन में कमी किस चीज की है जिसकी यह पूर्ति करते हैं मैं आज आपको यह बताना चाहूंगा जो हम भोजन ग्रहण कर रहे हैं वह हमारे शरीर में तीन काम करता है इसका पहला कार्य है शरीर का निर्माण करना और दूसरा कार्य है शरीर को ऊर्जा देना और तीसरा कार्य है शरीर की क्रिया विधि को सुचारु रुप से चलाना प्रोटीन व खनिज जैसे कैल्शियम मैग्नीशियम शरीर का निर्माण करते हैं शरीर को ऊर्जा देने का कार्य कार्बोहाइड्रेट और वसा करते हैं शरीर की क्रिया विधि को सुचारु रुप से चलाने के लिए विटामिन और मिनरल्स की आवश्यकता होती है इसके अतिरिक्त कुछ अमीनो एसिड व फैटी एसिड्स भी शरीर की क्रिया विधि को सुचारु रुप से चलाने के लिए आवश्यक होते हैं। किंतु आज के हमारे भोजन की समस्या यह है कि इसमें शरीर को ऊर्जा देने वाले तत्व तो बहुतायत में हैं किंतु शरीर का निर्माण करने वाले तत्व कम हो गए हैं और शरीर की क्रिया प्रणाली को सुचारु रुप से चलाने वाले सूक्ष्म तत्व तो खतरनाक स्तर तक कम हो चुके हैं। जिसके कारण ही आज हम अनेकों स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं आज हमारा देश डायबिटीज में विश्व की राजधानी बन चुका है यानी कि यानि की की विश्व में सबसे अधिक डायबिटीज के रोगी हमारे देश में हैं हर दूसरा भारतीय पेट के रोगों से ग्रसित है। अब ऐसी ऐसी सी बीमारियां हो रही हैं जो डॉक्टर तक की समझ में नहीं आ रही हैं लोग एलोपैथिक दवाइयों के चंगुल में फंसे हुए हैं। और अपने जीवन को ठीक से जी नहीं पा रहे हैं। परमात्मा ने हमारा शरीर इस प्रकार बनाया है कि यह बीमार पड़ने पर अपने आप को स्वयं ही ठीक कर लें लेकिन इसके लिए शरीर को उचित वातावरण चाहिए होता है यदि हम पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करें और उचित दिनचर्या का पालन करें और प्रदूषण मुक्त वातावरण में में रहे तब हम बीमार ही नहीं पड़ेंगे और यदि पड़ भी जाएंगे तो शरीर उसे अपने आप ही ठीक कर लेगा। लेकिन आज की हमारी समस्या यह है कि हमारे भोजन से सूक्ष्म पोषक तत्व जो हमारे शरीर के लिए अति आवश्यक हैं गायब हो चुके हैं वह हमारा पर्यावरण प्रदूषित हो चुका है। आज हम यह जानेंगे कि आखिर हमारे भोजन में यह इतने कम क्यों हो गए हैं साथियों इसका कारण है हमारे भोजन उगाने के तरीके से पकाने के तरीके सही ना होना ।साथियों जो सूक्ष्म पोषक तत्व हमें हमारे भोजन से हमें मिलते हैं वे हमारे भोजन में उस जमीन से आते हैं जिस पर उगते हैं। आजकल हमारे खेतों में से यूरिया डीएपी आर एंड पी के का प्रयोग किया जा रहा है जिससे पौधों को सिर्फ 3 पोषक तत्व ही प्राप्त होते हैं जबकि एक पौधे को स्वस्थ रहने के लिए 16 अन्य प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी आवश्यकता होती है और आज की खेती करने के तौर-तरीकों के कारण जमीन में उन सूक्ष्म तत्वों की कमी हो गई है। जिस कारण वह तत्व उस पर उगने वाले फल सब्जियों में नहीं पहुंच पाते हैं। हमारे भोजन के पकाने का तरीका भी ऐसा है जिस से बहुत सी विटामिन नष्ट हो जाते हैं और जिसका परिणाम यह होता है कि उनकी कमी हमारे शरीर में भी हो जाती है। तो साथियों इसका समाधान क्या है या तो हम वह फल और सब्जियां खाएं जो ऑर्गेनिक तरीके से उगाई गई हो यानि कि उस जमीन में कोई रासायनिक खाद ना डाली गई हो सिर्फ कूड़े-कचरे से बनी या किसी अन्य तरीके से बनी जैविक खाद ही डाली गई हो किंतु यह सब आज की परिस्थितियों में हर किसी के लिए संभव नहीं है हमारे यहां बाजार में ऑर्गेनिक तरीके से उगाये गए फल और सब्जी हर जगह उपलब्ध भी नहीं हैं और जहां यह उपलब्ध हैं वहां यह बहुत अधिक महंगे हैं अतः यह सामान्य जनमानस की पहुंच से दूर है ऐसे में आम लोग क्या करें। इसका दूसरा उपाय है फूड सप्लीमेंट्स का सेवन करें फूड सप्लीमेंट्स में वही सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं जो हमें भोजन से मिलने चाहिए थे किंतु पूरी मात्रा में नहीं मिल पाए थे आधुनिक विज्ञान में पोषक तत्वों को गोली में या कैप्सूल्स में उपलब्ध करवा दिया है जिससे यह बहुत ही सस्ते दामों में हर किसी के लिए उपलब्ध हो गए हैं इनको लेना बहुत ही आसान है इनको किसी भी समय खाने के नाश्ते के साथ ले सकते हैं उनको खाने या नाश्ते के साथ लेना ही ज्यादा अच्छा रहता है क्योंकि यह भोजन के ही तत्व है जिससे यह भोजन में अच्छी प्रकार से मिल जाते हैं और आसानी से शरीर को उपलब्ध हो जाते हैं इनका भोजन के साथ लिए जाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि कुछ पोषक तत्व दूसरे पोषक तत्वों के अवशोषण में व निर्माण में सहायक होते हैं जिससे भोजन में पहले से उपलब्ध पोषक तत्व हमें आसानी से प्राप्त हो जाते हैं । हमारी आज की अनेकों स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं पोषक तत्वों की कमी के कारण ही है और यदि पोषक तत्वों को फूड सप्लीमेंट के माध्यम से लिया जाए तो वे समस्याएं आसानी से ठीक हो सकती हैं जैसे पेट संबंधित समस्याएं कब्ज गैस एसिडिटी आंतों की सूजन अपच बदहजमी आदि समस्याएं पोषक तत्वों के माध्यम से आसानी से ठीक हो जाती हैं और ऐसा हमारा अनुभव है आजकल न्यूरो संबंधित समस्याएं भी बहुत तेजी से बढ़ती जा रही हैं जैसे डिप्रेशन माइग्रेन सिर में दर्द तनाव अनिद्रा इत्यादि और इन समस्याओं के लिए लोग न्यूरो डॉक्टर की दवाइयां खाते रहते हैं और उनका स्वास्थ्य पहले से और अधिक खराब हो जाता है क्योंकि इन दवाओं के बहुत अधिक साइड एफ्फेक्ट होते हैं। मेरा यह स्वयं का अनुभव है।

 

 

 

वीडियो 1, क्या आपका डॉक्टर पोषक तत्वों के बारे में जनता है ?

nutriworld - Sat, 04/06/2019 - 14:36

This video is based on book " what your doctor don't know about nutritional medicine may be killing you" हिंदी में इस पुस्तक का अनुवाद " पुस्तक क्या आपका डॉक्टर पोषक तत्वों के बारे में जानता है "

 

 

 

फ्री रेडिकल्स क्या होते हैं ? जानिए इनके बारे में।

nutriworld - Sat, 04/06/2019 - 14:35

फ्री रेडिकल्स क्या होते हैं और यह किस प्रकार हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। क्या आपका डॉक्टर पोषक तत्वों के बारे में जनता है।

 

 

 

वीडियो 3 क्या आपका डॉक्टर पोषक तत्वों के बारे में जानता है ?

nutriworld - Sat, 04/06/2019 - 14:34

शरीर की मैश यूनिट अर्थात मरम्मत की इकाई, what your doctor doesn't know about nutritional medicine may be killing you. क्या आपका डॉक्टर पोषक तत्वों के बारे में जनता है।

 

 

 

वीडियो 4 अगर आपको दिल की बीमारी है तो जरूर देखें ये वीडियो

nutriworld - Sat, 04/06/2019 - 14:32

क्या आपका डॉ पोषक तत्वों के बारे में जनता है, इस वीडियो में बताया गया है कि कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना ह्रदय रोग होने का कारण नही है बल्की उसका ऑक्सीडेशन ही कारण है, अगर ह्रदय रोग से बचना है तो एंटीऑक्सीडेंट का सेवन अवश्य करना चाहिए

 

 

 

वीडियो 5 हार्ट का नया दुश्मन अगर हार्ट की बीमारी से बचना है तो जरूर जान लीजिए।

nutriworld - Sat, 04/06/2019 - 14:28

होमोसिस्टाइन हार्ट की बीमारी का नया दुश्मन अगर आपके शरीर में होमोसिस्टाइन की मात्रा देखें तो आप को हार्टअटैक होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है अगर आप हार्टअटैक से बचे रहना चाहते हैं तो होमोसिस्टाइन का चेकअप अवश्य कराएं अभी तक कोलेस्ट्रॉल को ही दोषी माना जाता था लेकिन अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने कोलेस्ट्रॉल को दोष मुक्त कर दिया है

 

 

 

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