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2-7 साल के 92% बच्चों को है मोबाइल एड‍िक्शन

टेक्नोलॉजी की आदी हो रही दुनिया में अब बच्चे भी बहुत तेजी से शामिल हो रहे हैं. ब्रिटेन और अमेरिका हुई एक हालिया रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक 92 फीसदी बच्चे, जिनकी उम्र महज 2 से 7 साल के बीच है, वे मोबाइल और स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं.

 

इस रिपोर्ट के बाद अब पैरेंट्स में यह चिंता है कि क्या बच्चों को इतनी छोटी उम्र में मोबाइल देना सही फैसला है . इस रिसर्च रिपोर्ट में करीब 51 फीसदी पैरेंट्स ऐसे हैं जिनका मानना है कि कम उम्र में बच्चों को स्मार्टफोन और मोबाइल देने में कोई दिक्कत नहीं है.

 

Tags: मोबाइल एड‍िक्शन

लाल लकीर वाली दवाए बिना डॉ की सलाह के कभी न लें

लाल लकीर वाली दवाए बिना डॉ की सलाह के कभी न लें, जिम्मेदार बने और दोस्तों को भी बताइये। जनहित के लिए ज्यादा से ज्यादा शेयर करे।

कुछ दवाएं जैसे की एंटीबायोटिक पर लाल लकीर होती है
इसका अर्थ होता है की ये दवाएं डॉ की सलाह से ही लेनी चाहिए

बड़ी उम्र की महिलाओं से डेटिंग के टिप्स

कुछ लोग समय निकलने के बाद डेटिंग करते हैं। इस वर्ग में शामिल हैं बड़ी उम्र के लोग। डेटिंग करने के मामले में बड़ी उम्र की महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। बड़ी उम्र की महिलाओं से डेटिंग में कुछ बातों का खास ख्याल रखना भी आवश्यक है। महिलाओं को आकर्षित करने के लिए किशोरावस्था की बचकानी हरकतों को भूल जायें। संभव हो तो अपनी उम्र के बराबर के साथी के साथ डेटिंग करें। आइए जानें बड़ी उम्र की महिलाओं से डेटिंग के बारे में।

माँ का दूध बढ़ाने के तरीके

नवजात शिशु को जन्मदेते समय एक माँ को बहुत अधिक ख़ुशी होती है। लेकिन अगर किसी भी कारणवश कोई गर्भवती माँ प्रसव के समय तनाव, डीहाइड्रेशन, अनिद्रा आदि की शिकार हो जाए तो प्रसव के बाद उनके स्तनों में कम दूध बन सकता है। जिससे उनका बच्चा भूखा रह सकता है। जबकि माँ का दूध बच्चे के स्वास्थ्य के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी होता है। अतः ऐसे में माँ को अपने आहार पर उचित ध्यान देना चाहिए और अपने भोजन में उन सभी चीज़ों को शामिल करना चाहिए जो एक माँ का दूध बढ़ाने में सहायक हो। अतः आज हम आपको ऐसे ही कुछ प्राकृतिक चीज़ों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके सेवन से ब्रेस्ट फ़ीडिंग कराने वाली स्त्री का दूध

शहद : स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए शहद

nutriworld - Wed, 02/21/2018 - 20:07

शहद या मधु एक प्राकृतिक मधुर पदार्थ है जो मधुमक्खियों द्वारा फूलों के रस को चूसकर तथा उसमें अतिरिक्त पदार्थों को मिलाने के बाद छत्ते के कोषों में एकत्र करने के फलस्वरूप बनता है। शहद हर किसी के जीवन में महत्व रखता है। फिर चाहे वह खानपान, चिकित्सा से संबंधित हो या फिर सौंदर्य से। इसमें प्रचुर मात्रा में गुण हैं। आज से हजारों वर्ष पहले से ही दुनिया के सभी चिकित्सा शास्त्रों, धर्मशास्त्रों, पदार्थवेत्ता-विद्वानों, वैधों-हकीमों ने शहद की उपयोगिता व महत्व को बताया है। आयुर्वेद के ऋषियों ने भी माना है कि तुलसी व मधुमय पंचामृत का सेवन करने से संक्रमण नहीं होता और इसका विधिवत ढंग से सेवन कर अनेक रोगों पर विजय पाई जा सकती है। इसे पंजाबी भाषा मे माख्यों भी कहा जाता है। शहद तो देवताओं का भी आहार माना जाता रहा है। कहते हैं कि महापराक्रमी दैत्य महिषासुर के साथ युद्ध करते समय जगन्माता चंडिका ने बार-बार शहद का पान करके दैत्य का वध किया था।

स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए शहद के इतने सारे लाभ होने के कारण हर सौंदर्य प्रसाधन कंपनी इसे अपने सौंदर्य प्रसाधनों में प्रयोग करती है। इसे त्वचा पर लगाकर त्वचा की कई समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है।

बड़े काम का है शहद

एंटीएजिंग गुण
शहद में एन्टीबैक्टीरियल और एन्टीमाइक्रोबियल तत्व पाये जाते हैं। ये स्किन से डेड सेल्स निकाल कर झुर्रियों को आने से रोकता है। शहद ह्युमेंक्टेंट यौगिक से भरपूर होता है जो त्वचा में नमी बरकरार रखते हैं ताकि त्वचा की कोमलता बनी रहे। अगर इसे रोज त्वचा पर लगाया जाए तो आपकी त्वचा चमकदार और कोमल हो जाती है।

बेहतर सनस्क्रीन
शहद एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है और अल्ट्रावायलेट किरणों से होने वाले नुकसान से बचाता हैं। शहद में ऐसी खूबी है कि यह त्वचा को सूर्य की तेज किरणों से बचाता है और त्वचा को ताजगी प्रदान करता है। यह त्वचा को देर तक धूप में रखने पर भी उसमें पानी की कमी नहीं होने देता और त्वचा को सूखेपन से बचाता है। इसका उपयोग सनस्क्रीन के तौर पर भी किया जाता है।

गहराई से करे सफाई
ये त्वचा के ऊपरी परत में गहराई तक जाके पोर्स को बंद करता है और स्किन में गंदगी को आने से रोकता है, इसलिए ये मुहांसों से लडऩे में भी असरदार होता है। शहद त्वचा के लिए एक अच्छा क्लींजर और माइश्चराइजर भी है जो स्किन को टोन करता है और उसे टाइट भी बनाता है।

घाव करे ठीक
शहद में ग्लूकोज, एमिनो एसिड और विटामिन पाए जाते हैं जिससे हमें कई पौष्टिक तत्व मिलते हैं जो सभी तरह के घावों को ठीक करने में सहायक होते हैं। क्योंकि ये एन्टीबैक्टीरियल होता है इसलिए ये घाव से तरल पदार्थ निकाल कर शीघ्र ही इसे हील करना भी शुरू कर देता है। अगर आपका हाथ कोई घरेलू काम करते समय जल गया है तो आप जली हुई जगह पर शहद लगा सकते हैं।

त्वचा रोगों में उपयोगी

इसका उपयोग दर्द को कम करने और तेजी से उपचार के लिए भी किया जाता है। यह एग्जिमा, त्वचा की सूजन और अन्य त्वचा विकारों को सही करने में भी इस्तेमाल किया जाता है। शहद में मौजूद एंटी फंगल गुण के कारण इसका उपयोग एथलीट फुट और खुजली जैसे संक्रमणों में भी किया जाता है। 

 

  1.  एक चुटकी मोती के पाउडर को शहद में मिलाकर चेहरे पर लगाएं। इस पाउडर से सूजन कम होगी और धब्बे भी फीके पडऩे लगेंगे।
  2.  जिन महिलाओं की त्वचा तैलीय होती है, उन्हें शहद और दूध का घोल नियमित अपने चेहरे पर लगाने की सलाह दी जाती है।
  3.  तरोताजा स्नान के लिए एक कप गर्म पानी में दो चम्मच शहद मिलाएं, फिर 2-3 बूंद लेवेंडर तेल की मिलाकर इसे नहाने के पानी में डालें और स्नान करें।
  4. मुहांसों पर रात में सोते समय दालचीनी चूर्ण और शहद मिलाकर लगाएं और सुबह धो लें, मुहांसे ठीक होंगे और दाग भी नहीं रहेंगे। शहद न सिर्फ सेहत बल्कि आपकी सूरत के लिए भी बेहद उपयोगी है। शहद के उपयोग से त्वचा की कई तरह से देखभाल की जा सकती है। इसे सीधे त्वचा पर लगाकर त्वचा की कई समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है
Source: http://www.grehlakshmi.com/grehlakshmi/%...

लाख दुखों की एक दवा : नीम

nutriworld - Wed, 02/21/2018 - 20:06

नीम में इतने गुण हैं कि ये कई तरह के रोगों के इलाज में काम आता है। यहाँ तक कि इसको भारत में ‘गांव का दवाखाना’ कहा जाता है। यह अपने औषधीय गुणों की वजह से आयुर्वेदिक मेडिसिन में पिछले चार हजार सालों से भी ज्यादा समय से इस्तेमाल हो रहा है। नीम को संस्कृत में ‘अरिष्ट’ भी कहा जाता है, जिसका मतलब होता है, ‘श्रेष्ठ, पूर्ण और कभी खराब न होने वाला।’

नीम के अर्क में मधुमेह यानी डायबिटिज, बैक्टिरिया और वायरस से लड़ने के गुण पाए जाते हैं। नीम के तने, जड़, छाल और कच्चे फलों में शक्ति-वर्धक और मियादी रोगों से लड़ने का गुण भी पाया जाता है। इसकी छाल खासतौर पर मलेरिया और त्वचा संबंधी रोगों में बहुत उपयोगी होती है।

नीम के पत्ते भारत से बाहर 34 देशों को निर्यात किए जाते हैं। इसके पत्तों में मौजूद बैक्टीरिया से लड़ने वाले गुण मुंहासे, छाले, खाज-खुजली, एक्जिमा वगैरह को दूर करने में मदद करते हैं। इसका अर्क मधुमेह, कैंसर, हृदयरोग, हर्पीस, एलर्जी, अल्सर, हिपेटाइटिस (पीलिया) वगैरह के इलाज में भी मदद करता है।

नीम के बारे में उपलब्ध प्राचीन ग्रंथों में इसके फल, बीज, तेल, पत्तों, जड़ और छिलके में बीमारियों से लड़ने के कई फायदेमंद गुण बताए गए हैं। प्राकृतिक चिकित्सा की भारतीय प्रणाली ‘आयुर्वेद’ के आधार-स्तंभ माने जाने वाले दो प्राचीन ग्रंथों ‘चरक संहिता’ और ‘सुश्रुत संहिता’ में इसके लाभकारी गुणों की चर्चा की गई है। इस पेड़ का हर भाग इतना लाभकारी है कि संस्कृत में इसको एक यथायोग्य नाम दिया गया है – “सर्व-रोग-निवारिणी” यानी ‘सभी बीमारियों की दवा।’ लाख दुखों की एक दवा!

  सद्‌गुरु: “इस धरती की तमाम वनस्पतियों में से नीम ही ऐसी वनस्पति है, जो सूर्य के प्रतिबिम्ब की तरह है।”

इस पृथ्वी पर जीवन सूर्य की शक्ति से ही चलता है…..सूर्य की ऊर्जा से जन्मे तमाम जीवों में नीम ने ही उस ऊर्जा को सबसे ज्यादा ग्रहण किया है। इसीलिए इसे रोग-निवारक समझा जाता है – किसी भी बीमारी के लिए नीम रामबाण दवा है। नीम के एक पत्ते में 150 से ज्यादा रासयानिक रूप या प्रबंध होते हैं। इस धरती पर मिलने वाले पत्तों में सबसे जटिल नीम का पत्ता ही है। नीम की केमिस्ट्री सूर्य से उसके लगाव का ही नतीजा है।

इस धरती पर मिलने वाले पत्तों में सबसे जटिल नीम का पत्ता ही है। नीम की केमिस्ट्री सूर्य से उसके लगाव का ही नतीजा है।

नीम के पत्तों में जबरदस्त औषधीय गुण तो है ही, साथ ही इसमें प्राणिक शक्ति भी बहुत अधिक है। अमेरिका में आजकल नीम को चमत्कारी वृक्ष कहा जाता है। दुर्भाग्य से भारत में अभी लोग इसकी ओर ध्यान नहीं दे हैं। अब वे नीम उगाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि नीम को अनगिनत तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आपको  मानसिक बिमारी है, तो भारत में उसको दूर करने के लिए नीम के पत्तों से झाड़ा जाता है। अगर आपको दांत का दर्द है, तो इसकी दातून का इस्तेमाल किया जाता है। अगर आपको कोई छूत की बीमारी है, तो नीम के पत्तों पर लिटाया जाता है, क्योंकि यह आपके सिस्टम को साफ कर के उसको ऊर्जा से भर देता है। अगर आपके घर के पास, खास तौर पर आपकी बेडरूम की खिड़की के करीब अगर कोई नीम का पेड़ है, तो इसका आपके ऊपर कई तरह से अच्छा प्रभाव पड़ता है।

 

बैक्टीरिया से लड़ता है नीम

दुनिया बैक्टीरिया से भरी पड़ी है। हमारा शरीर बैक्टीरिया से भरा हुआ है। एक सामान्य आकार के शरीर में लगभग दस खरब कोशिकाएँ होती हैं और सौ खरब से भी ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं। आप एक हैं, तो वे दस हैं। आपके भीतर इतने सारे जीव हैं कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते। इनमें से ज्यादातर बैक्टीरिया हमारे लिए फायदेमंद होते हैं। इनके बिना हम जिंदा नहीं रह सकते, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जो हमारे लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। अगर आप नीम का सेवन करते हैं, तो वह हानिकारक बैक्टीरिया को आपकी आंतों में ही नष्ट कर देता है।

आपके शरीर के भीतर जरूरत से ज्यादा बैक्टीरिया नहीं होने चाहिए। अगर हानिकारक बैक्टीरिया की तादाद ज्यादा हो गई तो आप बुझे-बुझे से रहेंगे, क्योंकि आपकी बहुत-सी ऊर्जा उनसे निपटने में नष्ट हो जाएगी। नीम का तरह-तरह से इस्तेमाल करने से बैक्टीरिया के साथ निपटने में आपके शरीर की ऊर्जा खर्च नहीं होती।

आप नहाने से पहले अपने बदन पर नीम का लेप लगा कर कुछ वक्त तक सूखने दें, फिर उसको पानी से धो डालें। सिर्फ इतने से ही आपका बदन अच्छी तरह से साफ हो सकता है – आपके बदन पर के सारे बैक्टीरिया नष्ट हो जाएंगे। या फिर नीम के कुछ पत्तों को पानी में डाल कर रात भर छोड़ दें और फिर सुबह उस पानी से नहा लें ।

                        एलर्जी के लिए नीम

नीम के पत्तों को पीस कर पेस्ट बना लें, उसकी छोटी-सी गोली बना कर सुबह-सुबह खाली पेट शहद में डुबा कर निगल लें। उसके एक घंटे बाद तक कुछ भी न खाएं, जिससे नीम ठीक तरह से आपके सिस्टम से गुजर सके। यह हर प्रकार की एलर्जी – त्वचा की, किसी भोजन से होनेवाली, या किसी और तरह की – में फायदा करता है। आप सारी जिंदगी यह ले सकते हैं, इससे कोई नुकसान नहीं होगा। नीम के छोटे-छोटे कोमल पत्ते थोड़े कम कड़वे होते हैं, वैसे किसी भी तरह के ताजा, हरे पत्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

नीम के बहुत-से अविश्वसनीय लाभ हैं, उनमें से सबसे खास है – यह कैंसर-कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। बीमारियों के लिए नीम

नीम के बहुत-से अविश्वसनीय लाभ हैं, उनमें से सबसे खास है – यह कैंसर-कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। हर किसी के शरीर में कैंसर वाली कोशिकाएं होती हैं, लेकिन वे एक जगह नहीं होतीं, हर जगह बिखरी होती हैं। किसी वजह से अगर आपके शरीर में कुछ खास हालात बन जाते हैं, तो ये कोशिकाएं एकजुट हो जाती हैं। छोटे-मोटे जुर्म की तुलना में संगठित अपराध गंभीर समस्या है, है कि नहीं? हर कस्बे-शहर में हर कहीं छोटे-मोटे मुजरिम होते ही हैं। यहां-वहां वे जेब काटने जैसे छोटे-मोटे जुर्म करते हैं, यह कोई बड़ी समस्या नहीं है। लेकिन किसी शहर में अगर ऐसे पचास जेबकतरे एकजुट हो कर जुर्म करने लगें, तो अचानक उस शहर का पूरा माहौल ही बदल जाएगा। फिर हालत ये हो जाएगी कि आपका बाहर सड़क पर निकलना खतरे से खाली नहीं होगा। शरीर में बस ऐसा ही हो रहा है। कैंसर वाली कोशिकाएं शरीर में इधर-उधर घूम रही हैं। अगर वे अकेले ही मस्ती में घूम रही हैं, तो कोई दिक्कत नहीं। पर वे सब एक जगह इकट्ठा हो कर उधम मचाने लगें, तो समस्या खड़ी हो जाएगी। हमें बस इनको तोड़ना होगा और इससे पहले कि वे एकजुट हो सकें, यहां-वहां इनमें से कुछ को मारना होगा। अगर आप हर दिन नीम का सेवन करें तो ऐसा हो सकता है; इससे कैंसर वाली कोशिकाओं की तादाद एक सीमा के अंदर रहती है, ताकि वे हमारी प्रणाली पर हल्ला बोलने के लिए एकजुट न हो सकें। इसलिए नीम का सेवन बहुत लाभदायक है।

नीम में ऐसी भी क्षमता है कि अगर आपकी रक्त धमनियों(आर्टरी) में कहीं कुछ जमना शुरु हो गया हो तो ये उसको साफ कर सकती है। मधुमेह(डायबिटीज) के रोगियों के लिए भी हर दिन नीम की एक छोटी-सी गोली खाना बहुत फायदेमंद होता है। यह उनके अंदर इंसुलिन पैदा होने की क्रिया में तेजी लाता है।

साधना के लिए नीम

नीम आपके सिस्टम को साफ रखने के साथ उसको खोलने में भी खास तौर से लाभकारी होता है। इन सबसे बढ़ कर यह शरीर में गर्मी पैदा करता है। शरीर में इस तरह की गर्मी हमारे अंदर साधना के द्वारा तीव्र और प्रचंड ऊर्जापैदा करने में बहुत मदद करती है।

    Source: http://www.ishafoundation.org/blog/hi/je...

एप्पल और हरे टमाटर से रहेंगी मांसपेशियां मजबूत

nutriworld - Wed, 02/21/2018 - 20:06

न्यूयॉर्क। बढ़ती उम्र के साथ मांसपेशियों में कमजोरी और क्षरण के कारक प्रोटीन का पता लगाने के दौरान यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा के वैज्ञानिकों ने दो ऐसे प्राकृतिक यौगिकों का भी पता लगाया है जो बूढ़ी होती मांसपेशियों में इस प्रोटीन की सक्रियता को कम कर देते हैं, जिसके कारण मांसपेशियों के क्षरण और कमजोरी को कम किया जा सकता है। एटीएफ4 नामक यह प्रोटीन मांसपेशियों के जीन की अभिव्यक्ति में बदलाव लाता है, जिसके कारण मांसपेशियों के प्रोटीन संश्लेषण, ताकत और घनत्व में कमी आ जाती है।

शोध दल ने सेब में पाए जाने वाले अर्सोलिक एसिड और हरे टमाटरों में पाए जाने वाले टोमेटिडाइन की ऐसे सूक्ष्म अणुओं के रूप में पहचान की है जो भूख और असक्रियता के कारण मांसपेशियों को होने वाले नुकसान को रोक सकता है।

इंटरनल मेडिसिन के प्रध्यापक और अध्ययन के वरिष्ठ लेखक क्रिस्टोफर एडम्स ने कहा कि हम अर्सोलिक एसिड और टोमेटिडाइन को बढ़ती उम्र के दौरान होने वाली मांसपेशियों की कमजोरी और क्षरण के उपचार के तौर पर इस्तेमाल कर पाएंगे। खोज के परिणामों की मदद से उम्र के कारण मांसपेशियों की कमजोरी और क्षरण के लिए नए उपचार खोजने में सहायता मिलेगी। नवीनतम अध्ययन में चूहों पर किए गए इस प्रयोग से उनकी मांसपेशियों में कमजोरी और क्षरण में कमी पाई गई है।

वैज्ञानिकों ने जांच में पाया कि दोनों यौगिकों ने मांसपेशी के घनत्व को 10 फीसदी बढ़ा दिया। खास बात यह भी सामने आई कि इनसे मांसपेशियों की गुणवत्ता और ताकत में 30 फीसदी का इजाफा हुआ। यह अध्ययन 'जर्नल ऑफ बायोलोजिकल केमिस्ट्री' में प्रकाशित हुआ है।

Source: http://sanjeevnitoday.com/newsdetail/App...

अब ऑनलाइन अंगदान करना हुआ आसान

nutriworld - Wed, 02/21/2018 - 20:06

अंगदान और अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम को व्यवस्थित करने के लिए सफदरजंग अस्पताल में बनाए जा रहे राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) की वेबसाइट की अधिकारिक रूप से शुरुआत कर दी गई। लोग नोटो की वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन अंगदान के लिए पंजीकरण करा सकते हैं। इसके जरिए अंगदान करना आसान हो जाएगा। अंगदान को बढ़ावा देने के लिए सफदरजंग अस्पताल में राष्ट्रीय अंगदान दिवस मनाया गया। सम्मेलन में छत्तीसगढ़, हरियाणा, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, असम, महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित कई राज्यों के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पहुंचकर अंगदान और अंग प्रत्यारोपण पर चर्चा की। इसका मकसद देशभर के अस्पतालों के बीच नेटवर्किंग विकसित करना है। नोटो के अधीन पांच क्षेत्रीय केंद्र और छह राज्यस्तरीय केंद्र विकसित किए जाने हैं। यह सभी केंद्र नोटो से जोड़े जाएंगे। इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव बीपी शर्मा ने अंगदान को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता पर जोर दिया। नोटो की वेबसाइट शुरू करने के बाद स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. जगदीश प्रसाद ने कहा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) जैसे संगठन अंगदान के लिए लोगों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऑनलाइन जारी होगा डोनर कार्ड अंगदान के लिए किसी अस्पताल या शिविर में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यदि अंगदान करने की इच्छा हो तो नोटो की वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण के लिए फार्म भरा जा सकता है। ऐसा करने पर ऑनलाइन ही डोनर कार्ड जारी हो जाता है। अंगदान के लिए दो गवाहों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में गवाही के लिए ऑनलाइन फार्म डाउनलोड कर उसे भरने के बाद दो गवाहों का हस्ताक्षर कराकर डाक के जरिए नोटो कार्यालय भेजा जा सकता है। कॉल सेंटर भी शुरू नोटो में कॉल सेंटर ने काम करना शुरू कर दिया है। कॉल सेंटर में फोन कर अंगदान की प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं। इसके अलवा लोग कॉल सेंटर के जरिए दिल्ली में अंग प्रत्यारोपण करने वाले केंद्रों की जानकारी भी हासिल कर सकते हैं। रोटो और सोटो के विकास पर चर्चा राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम के प्रोग्राम अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि सम्मेलन में दूसरे राज्यों से आए अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (रोटो) और अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (सोटो) के विकास पर चर्चा की गई। ताकि उनका विकास हो सके।

विटामिन सी के सेवन से खत्म होगी मार्निंग वॉक

nutriworld - Wed, 02/21/2018 - 20:06

न्यूयॉर्क। शोधकर्ताओं ने अपने इस नए शोध को अमेरिका में जार्जिया के सेवन्नाह में एंडोथलीन पर आयोजित 14वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया है। अगर आप सुबह की सैर के लिए उठ नहीं पाते हैं तो चिंता की बात नहीं। शोधकर्ताओं ने आपकी इस परेशानी का हल ढूंढ लिया है। एक शोध में यह पाया गया है कि रोजाना विटामिन सी के सेवन से मोटापे से ग्रस्त लोगों को वही फायदा प्राप्त हो सकता है जो आपको रोजाना सुबह की सैर और व्यायाम से प्राप्त होता है।

अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त वयस्कों की रक्त वाहिकाओं में सूक्ष्म वाहिकाएं प्रोटीन को संकुचित कर देती हैं जिसे एंडोथलीन (ईटी)-1 कहा जाता है। ईटी-1 के अधिक सक्रिय होने से वाहिकाओं में रक्त प्रवाह कम हो जाता है, जिसके कारण नाड़ी संबंधी रोग होने का खतरा बढ़ता है। रोजाना व्यायाम के कारण ईटी-1 की गतिविधि कम होती है लेकिन दिनचर्या में व्यायाम को शामिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

अमेरिका की कोलोराडो यूनिवर्सिटी में किए गए शोध में विटामिन सी की खुराक की जांच की गई। जिससे पता चला कि यह वाहिकाओं की प्रक्रिया में सुधार करता है और ईटी-1 के स्तर को कम करता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि विटामिन सी की खुराक से उसी तरह से ईटी-1 के स्तर में कमी आती है जितनी रोजाना के व्यायाम से होती है। शोधकर्ताओं ने लिखा, विटामिन सी मोटापे से ग्रस्त लोगों में ईटी-1 की मात्रा को कम करने में एक प्रभावी जीवनशैली रणनीति के रूप में काम करता है।

Tags: हेल्‍दी टिप्‍सSource: http://sanjeevnitoday.com/newsdetail/Vit...

जामुन के गुण

nutriworld - Wed, 02/21/2018 - 14:00

1)  जामुन की गुठली चिकित्सा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी मानी गई है। इसकी गुठली के अंदर की गिरी में 'जंबोलीन' नामक ग्लूकोसाइट पाया जाता है। यह स्टार्च को शर्करा में परिवर्तित होने से रोकता है। इसी से मधुमेह के नियंत्रण में सहायता मिलती है। 

२)जामुन के कच्चे फलों का सिरका बनाकर पीने से पेट के रोग ठीक होते हैं। अगर भूख कम लगती हो और कब्ज की शिकायत रहती हो तो इस सिरके को ताजे पानी के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर सुबह और रात्रि, सोते वक्त एक हफ्ते तक नियमित रूप से सेवन करने से कब्ज दूर होती है और भूख बढ़ती है।

३) इन दिनों कुछ देशों में जामुन के रस से विशेष औषधियों का निर्माण किया जा रहा है, जिनके माध्यम से सिर के सफेद बाल आना बंद हो जाएँगे। 

४) गले के रोगों में जामुन की छाल को बारीक पीसकर सत बना लें। इस सत को पानी में घोलकर 'माउथ वॉश' की तरह गरारा करना चाहिए। इससे गला तो साफ होगा ही, साँस की दुर्गंध भी बंद हो जाएगी और मसूढ़ों की बीमारी भी दूर हो जाएगी। 

५) विषैले जंतुओं के काटने पर जामुन की पत्तियों का रस पिलाना चाहिए। काटे गए स्थान पर इसकी ताजी पत्तियों का पुल्टिस बाँधने से घाव स्वच्छ होकर ठीक होने लगता है क्योंकि, जामुन के चिकने पत्तों में नमी सोखने की अद्भुत क्षमता होती है। 

६) जामुन यकृत को शक्ति प्रदान करता है और मूत्राशय में आई असामान्यता को सामान्य बनाने में सहायक होता है। 

७) जामुन का रस, शहद, आँवले या गुलाब के फूल का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक-दो माह तक प्रतिदिन सुबह के वक्त सेवन करने से रक्त की कमी एवं शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। यौन तथा स्मरण शक्ति भी बढ़ जाती है। 

८) जामुन के एक किलोग्राम ताजे फलों का रस निकालकर ढाई किलोग्राम चीनी मिलाकर शरबत जैसी चाशनी बना लें। इसे एक ढक्कनदार साफ बोतल में भरकर रख लें। जब कभी उल्टी-दस्त या हैजा जैसी बीमारी की शिकायत हो, तब दो चम्मच शरबत और एक चम्मच अमृतधारा मिलाकर पिलाने से तुरंत राहत मिल जाती है। 

९) जामुन और आम का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से मधुमेह के रोगियों को लाभ होता है। 

१०) गठिया के उपचार में भी जामुन बहुत उपयोगी है। इसकी छाल को खूब उबालकर बचे हुए घोल का लेप घुटनों पर लगाने से गठिया में आराम मिलता है।

        जामुन स्वाद में खट्टा-मीठा होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें उत्तम किस्म का शीघ्र अवशोषित होकर रक्त निर्माण में भाग लेने वाला तांबा पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह त्वचा का रंग बनाने वाली रंजक द्रव्य मेलानिन कोशिका को सक्रिय करता है, अतः यह रक्तहीनता तथा ल्यूकोडर्मा की उत्तम औषधि है। इतना ध्यान रहे कि अधिक मात्रा में जामुन खाने से शरीर में जकड़न एवं बुखार होने की सम्भावना भी रहती है। इसे कभी खाली पेट नहीं खाना चाहिए और न ही इसके खाने के बाद दूध पीना चाहिए।

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तिल तथा मस्से हटाने के आसान घरेलू उपचार

मस्से/मस्सा त्वचा पर सूजन की तरह उभरे हुए होते हैं और इनका रंग काला या गहरा भूरा होता है। वैसे तो ये कोई हानि नहीं पहुंचाते परन्तु कभी कभी ये हानिकारक भी हो सकते हैं। अगर ये अचानक उभरकर आते हैं या बड़े होने लगते हैं तो आपको किसी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। मस्से का कारण, मस्से साधारणतः 20 की उम्र के आसपास होते हैं  परन्तु ये 30 से 40 साल की उम्र में भी उभरकर सामने आ सकते हैं। कुछ मस्सों में बाल भी होते हैं पर ज़्यादातर ऐसा नहीं होता। अगर ये मस्से शरीर के किसी ऐसे भाग में होते हैं जो दूसरे लोग देख सकें तो ये काफी शर्मनाक लगता है।ऐसी परिस्थिति में लोग सामाजिक उपस्थिति दर्ज कराने से कतराते हैं। त

Tags: सेब खाने के फायदेमस्से की मेडिसिनमस्से दूर करने के लिए अपनाएं ये खास घरेलू तरीकेमस्से हटाने की क्रीममस्से की दवाचेहरे के मस्सेगर्दन पर मस्सेतिल हटाने की दवाकाला तिल कैसे हटाए

आयुर्वेद में गाय के घी को अमृत समान बताया गया है

आयुर्वेद में गाय के घी को अमृत समान बताया गया है। हमारे घरों में बहुत से ऐसे लोग हैं जो  वीक्यूजेक्यूएन को नियक़्न्तृत रखने के प्रति सतर्कता  बरतते हैं और  घी को हाथ तक नहीं लगाते। पर अगर गाय के घी को नियमित रूप से अपने भोजन में शामिल किया जाए तो इससे वजन भी नियंत्रित रहता है और किसी भी प्रकार की बीमारी भी नहीं लगती। देशी घी का मतलब है गाय के दूध से बना शुद्ध घी, जो कि एक प्रकार की दवा भी माना जाता है। 

डार्क सर्कल को दूर करने के घरेलू नुस्खों

कहा जाता है कि आंखे वो चीज है जिसे लोगो को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। लेकिन अगर आँखों के नीचे  झुर्रिया या काले घेरे हो तो चेहरे की खूबसूरती फीकी पड जाती है। आंखों के नीचे की त्वचा काफी नाजुक होती है। आंखों के नीचे काले घेरे यानी डार्क सर्कल आजकल आम बात हो गई है। महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों में भी ये समस्या बढ़ती जा रही है और इसकी अहम वजह भागदौड़ की दिनचर्या है, जिसमें आराम नहीं है। ऐसे में आंखों के नीचे होने वाले काले घेरे खूबसूरती और स्मार्टनेस को कम कर सकते हैं। कभी-कभी यह समस्या आनुवांशिकता के कारण भी आती है। यह डार्क सर्कल्स आपके सौन्दर्यता में ग्रहण लगा देते हैं। वैसे तो बहुत सारे क्र

अब घर पर ही पाइये काले घुटनों से निजात

एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए घुटनों का स्वस्थ होना बहुत ज़रूरी है। आपके चलने, दौड़ने, उठने, बैठने और अन्य कई शारीरिक गतिविधियों में घुटनों का प्रयोग होता है। लेकिन इन्हीं घुटनों में जब दर्द होने लगे तो आपकी ज़िंदगी थम जाती है। इसलिए घुटनों के दर्द से बचना बहुत ज़रूरी है। हम आपको ऐसे  टिप्स बता रहे हैं जो आपके घुटनों के दर्द में राहत पहुंचाकर आपको सामान्य जीवन जीने देंगे।

सर्दियों में अपने पैरों को रखें सॉफ्ट

हमारे जीवनकाल के दौरान पैरों के तलवे दौड़ने, चलने और खड़े होने पर पूरे दबाव का सामना करते हैं। पैरों में दर्द से जुड़ी जानकारी के अनुसार, हमारे पैर में 26 हड्डियां और संबद्ध स्‍नायुबंधन होते हैं, जो पैर को एक अवशोषक और लीवर के रूप में काम करने की अनुमति देते हैं। पैरों में दर्द पैर के किसी भी हिस्‍से को प्रभावित कर सकता है सर्दियों में अक्सर पैर रूखे हो जाते हैं। एड़ी फट जाती है और दर्द होता है। हम अपने चेहरे और हाथों पर तो ध्यान दे ही लेते है, लेकिन पैरों में हमारा ध्यान नहीं जाता है जिसके कारण पैरों में फंगस, खुजली, फटी एड़ियों की समस्या उत्पन्न हो जाती है।  जिसके लिए आप पार्लर, डॉक्टर या

चमकती त्वचा चाहिए तो लीजिये सेहतमंद आहार

nutriworld - Wed, 02/21/2018 - 10:43

शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम करें, इसके लिए उन्हें भरपूर पोषण की जरूरत होती है। खूबसूरत त्वचा को भी पर्याप्त आहार चाहिए। आपकी त्वचा की क्या-क्या जरूरतें हैं, बता रही हैं पूनम महाजन

सेहतमंद रहने के लिए जैसे हमें अच्छे खानपान और पोषण की जरूरत होती है, ठीक वैसे ही त्वचा को भी खूबसूरत बने रहने के लिए भरपूर पोषण की जरूरत होती है।

मैक्स हॉस्पिटल में डाइटीशियन व न्यूट्रिशनिस्ट 
डॉ़  रीतिका समंदर बताती हैं कि त्वचा को खूबसूरत बनाए रखने के लिए जितने आपके ड्रेसिंग टेबल पर कॉस्मेटिक प्रोडक्ट की जरूरत है, उससे कहीं ज्यादा जरूरी है स्वस्थ व पोषण युक्त डाइट की। सदाबहार खूबसूरती का एक ही मूलमंत्र है, अच्छी डाइट व सकारात्मक सोच। आजकल की भागदौड़ भरी जीवनशैली में अक्सर हम अन्य जरूरी कामों की तरह खाने का भी शॉर्ट-कट ढूंढ़ते रहते हैं और शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों जैसे कि विटामिन, प्रोटीन व पोषण युक्त डाइट की तरफ ध्यान ही नहीं देते।

एक सामान्य धारणा है कि महीने में एक या दो बार पार्लर में अच्छा फेशियल व अन्य उपचार करवाने से त्वचा जवां रहेगी। पर सच्चाई यह है कि आप तभी खूबसूरत दिख सकती हैं, जब आपकी त्वचा में निखार व चमक होगी। त्वचा में निखार व दमक तभी आएगी, जब त्वचा को जरूरी पोषक तत्व प्राप्त होंगे। खास बात यह है कि त्वचा के लिए जरूरी भोजन किसी क्रीम से नहीं बल्कि फल, सब्जियों व डेयरी प्रोडक्ट से मिलते हैं।

सलाद देंगे एंटी ऑक्सिडेंट्स
महिलाओं को सलाद जरूर खाना चाहिए। हरे सलाद में विटामिन ई व कैरोटिन आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा को तंदुरुस्त बनाने के लिए बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट्स हैं। सलाद में खासतौर पर टमाटर जरूर होना चाहिए। टमाटर में मौजूद लाइकोपीन व करॉटिनाइड में सूर्य की पराबैगनी किरणों से होने वाले नुकसान से लड़ने की शक्ति होती है। टमाटर के अलावा गाजर में भी करॉटिनाइड की भरपूर मात्रा होती है। इसलिए सलाद में गाजर व टमाटर शामिल करने से त्वचा पर प्रदूषण व सनबर्न का कोई असर नहीं होता।

दाल से होगी कोशिकाओं की मरम्मत 
दालों में सभी प्रकार के प्रोटीन होते हैं। प्रोटीन में क्षतिग्रस्त हो चुकी कोशिकाओं को भी दुरुस्त करने की क्षमता होती है। इसलिए दिन में एक बार दाल अवश्य खाएं। दालें न सिर्फ त्वचा, बल्कि हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं।

मछली बचाएगी अल्ट्रावायलेट किरणों से
अगर आप मांसाहारी खाना खाती हैं तो अपनी त्वचा की खूबसूरती को बढ़ाने के लिए अपनी डाइट में मछली को शामिल करना न भूलें। मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो त्वचा को अल्ट्रावायलेट किरणों के दुष्प्रभाव से बचाता है और त्वचा को तंदुरुस्त बनाता है।

अंडा देगा त्वचा को चमक
अंडा विटामिन का सबसे अच्छा स्रेत है। साथ ही इसमें बायोटीन भी होता है, जो त्वचा की नमी व चमक को बनाए रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण विटामिन है। अगर आप खूबसूरत त्वचा चाहती हैं तो अंडे जरूर खाएं। उबले अंडे सबसे अधिक फायदेमंद होते हैं।

मेवों से त्वचा बनेगी जवां
प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मेवा जरूर खाएं। मेवों में भरपूर मात्रा में विटामिन, वसा व अन्य आवश्यक पोषक तत्व होते हैं। मेवा खाने से त्वचा युवा व कांतिमय बनी रहती है।

दूध-दही से आएगा निखार
खूबसूरत त्वचा चाहती हैं तो नियमित रूप से दूध-दही का सेवन करें। दूध में त्वचा के लिए आवश्यक सभी विटामिन और प्रोटीन होते हैं, वहीं दही में विटामिन ए भरपूर मात्रा में होता है, जो त्वचा में कॉलेजन के स्तर को बढमता है। दूध-दही के नियमित सेवन से त्वचा हमेशा निखरी रहती है।

फलों से मिलेगा कॉलेजन
फलों में विटामिन सी सबसे अधिक मात्रा में होता है। खासकर, जो फल स्वाद में खट्टे होते हैं, जैसे आम, अनार, स्ट्रॉबेरी, संतरा, पपीता मौसमी, अनन्नास, अमरूद व अन्य फल, उनमें विटामिन सी की भरपूर मात्रा होती है। इन फलों को खाने से त्वचा के लिए आवश्यक विटामिन सी की पूर्ति होती है। विटामिन सी से त्वचा को कॉलेजन मिलता है। कॉलेजन से ही त्वचा तंदुरुस्त रहती है, इसलिए अगर आप फल खाती रहती हैं तो त्वचा को कॉलेजन मिलता रहता है। कॉलेजन त्वचा की खराब कोशिकाओं का फिर से निर्माण करके त्वचा के रूखेपन को दूर करता है और उसकी चमक बनाए रखता है। फल खाने से त्वचा में भीतर से निखार आता है। विटामिन सी झुर्रियों को रोकने में भी काफी फायदेमंद साबित होता है। इसलिए मौसम के अनुसार आने वाले सभी फलों का सेवन करें। इनसे न सिर्फ शरीर को पोषण मिलेगा, बल्कि त्वचा भी नष्ट होने से बचेगी और त्वचा की खूबसूरती भी बरकरार रहेगी।

Tags: हेल्‍द न्यूजहेल्‍दी टिप्‍स

लंच करने के बाद ना करें ये गलतियां

nutriworld - Wed, 02/21/2018 - 10:43

क्या आप एक भारी लंच करने के बाद तुरंत टहलने के लिये निकल जाते हैं? हो सकता है आप ना जाते हों लेकिन आप जैसे बहुत से लोग ऐसा रोज करते हैं। यह एक बहुत ही हानिकारक आदत है जिसे तुरंत रोक देनी चाहिये। एक्सपर्ट के मुताबिक हमारा पाचन तंत्र इतना मजबूत है कि आप लंच में चाहे जो कुछ भी उल्टा सीधा क्यूं ना खा लें, वह सब कुछ हजम कर लेगा।

हमारा पेट खाने को अच्छी तरह से हजम कर के सारे जरुरी पोषण हमें एनर्जी के तौर पर देता है। पर उसी समय हमारे पेट का सिस्टम थोड़ा संवेदनशील भी है और वह उस वक्त ठीक से कार्य नहीं कर पाता जब आप उसे तकलीफ देते हैं। इसलिये दुपहर में लंच करने के बाद 15-20 मिनट तक आराम करना जरुरी बताया गया है। 

आइये जानते हैं कि लंच के बाद कई लोग क्या क्या गलतियां करते हैं , जिससे उनके हाजमें पर बुरा असर पड़ता है।

दांतों को ब्रश करना - लंच करने के बाद ब्रश बिल्कुल नहीं करना चाहिये। अगर आपने कोई सिट्रस वाला आहार खाया है तो दांतों को ब्रश करने से दांतों की परत तुरंत उतर जाएगी, जिसे हम इनेमल कहते हैं।

बहुत ज्यादा पानी पीना - अगर आप खाना खाने के बाद बहुत ज्यादा पानी पीते हैं तो इससे आपका पाचन तंत्र प्रभावित होता है। इससे पेट की कई बीमारियां भी हो सकती हैं।

धूम्रपान करना - लंच करने के बाद शरीर का ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है। पर जब उसके बाद आप धूम्रपान करते हैं उसका धूंआ आराम से आपके शरीर में घुस कर फेफड़ों और किडनियों को नुकसान पहुंचाता है।

वॉक पर जाना - लंच करने के सीधे बाद वॉक पर जाने से खाने का पोषण शरीर में अच्छी तहर से नहीं समा पाता।

ड्राइविंग - खाने को पचाने के लिये बहुत सारे खून की आवश्यकता पड़ती है, जिसमें दिमाग सहायता करता है। पर अगर आप खाने के बाद ड्राइविंग करने पर अपना पूरा ध्यान लगा देगें तो आपके भोजन को पचाने के लिये दिमाग वो काम नहीं कर पाएगा।

सोना - खाने के बाद सोने से कई पाचन संबन्?धित बीमारियां हो सकती हैं। इससे आपको गैस की भी समस्या हो सकती है।

Source: http://sanjeevnitoday.com/detail/10-04-2...

इडली को क्‍यूं माना जाता है वर्ल्‍ड का बेस्‍ट ब्रेकफास्‍ट

nutriworld - Wed, 02/21/2018 - 10:43

साउथ इंडिया का सबसे पॉपुलर ब्रेकफास्‍ट अगर किसी को माना जाता है तो वह है इडली। इडली, सांभर और नारियल की चटनी ना केवल खाने में ही टेस्‍टी होते हैं बल्‍कि नाश्ते के लिए संतुलित पोषण से भी भरी हुई है।

क्‍या आप जानते हैं कि इडली को विश्‍व का बेस्‍ट ब्रेकफास्‍ट माना गया है क्‍योंकि इसमें ढेर सारा प्रोटीन, विटामिन और मिनरल होता है। इडली को उड़द की दाल और उसने चावल से तैयार किया जाता है जो कि अन्‍य चावल के मुकाबले ज्‍यादा अच्‍छा होता है। इसी के साथ उड़द दाल में भी उच्‍च मात्रा में फाइबर, 26% प्रोटीन, विटामिन B1/B2/B6 और कुछ मात्रा में मिनरल्‍स होते हैं।

इडली का घोल तैयार करते वक्‍त बिना छिलके वाली दाल ही प्रयोग करनी चाहिये। इसके अलावा इडली के घोल को खमीर उठा कर बनाया जाता है जिससे कि इसमें विटामिन की मात्रा और अधिक बढ़ जाती है।

इडली का दक्षिण भारतीय खानपान में लंबा इतिहास है। अगर इडली के साथ परोसे जाने वाली नारियल की चटनी की बात करें तो उसमें भारी मात्रा में फाइबर और प्रोटीन होता है।

साथ ही इसमें हरी मिर्च भी पड़ती है जिसमें विटामिन सी, प्रोटीन और मिनरल होते हैं। फिर उपर से कडी पत्‍ते की गार्निशिंग की जाती है जिसमें विटामिन ए की भी कमी पूरी हो जाती है।

अब चलिये बात करते हैं सांभर की, जिसमें ढेर सारी दालों और सब्‍जियों का मिश्रण होता है, जिससे इसको खा कर शरीर को अच्‍छी खासी मात्रा में प्रोटीन मिलता है। तो फिर इतनी सारी जानकारी के बाद क्‍या अब आप इडली को अपनी प्‍लेट में शामिल नहीं करना चाहेंगे?

Source: hindi.boldsky.com

 

 

बाल झड़ने की समस्या से बचने के लिए कुछ टिप्स

nutriworld - Wed, 02/21/2018 - 10:43

बालों का झड़ना और गंजापन आजकल एक आम समस्या है। पहले 40-45 साल की उम्र के बाद ही बालों के झड़ने की समस्या सामने आती थी, लेकिन अब कम उम्र में ही बाल झड़ने लगते हैं।
बालों को पकड़े हुए आदमी
 
बाल झड़ने की एक बड़ी वजह अनियमित जीवनशैली और प्रदूषण है। हालांकि कई बार इसके पीछे अनुवांशिक कारण भी होते हैं। लेकिन समय रहते अगर बालों की सही देखभाल की जाए तो काफी हद तक गंजेपन की समस्या से बचा जा सकता है। अगर आपके बाल बहुत तेजी से झड़ रहे हैं तो आप निम्न कुछ टिप्स आजमा कर देख सकते हैं।
 
 
गंजेपन के कारण
लम्बे रोग जैसे- टायफाइड, जुकाम, साइनस तथा खून की कमी आदि।
बालों के प्रति लापरवाह
तनाव
कब्ज रहना, नींद न आने के कारण
हार्मोंस बदलने के कारण
 
 
गंजेपन की समस्या को दूर करने के टिप्स
 
1. अपने भोजन में सब्जियां, सलाद, मौसमी फल, अंकुरित अन्न का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए। जंक फूड के बजाय घर का पौष्टिक भोजन करें। पानी भरपूर मात्रा में पिएं।
 
2. बालों को जब भी शैंपू करें, उंगलियों के पोरों से हल्के-हल्के मसाज करें। ऐसा करने से आपके सिर का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगा।
 
3. एंटी डैंड्रफ शैंपू का ज्यादा प्रयोग न करें, क्योंकि इससे सिर की नेचुरल नमी खत्म हो जाती है।
 
4. गंदे बालों पर जैल या कोई हेयर स्प्रे न करें। इससे बालों को नुकसान हो सकता है। अगर बाल कमजोर हैं तो उन्हें स्ट्रेट, कर्ली नहीं करवाना चाहिए। उन पर जैल या हेयर कलर भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इन उत्पादों में रसायन मिले होते हैं। ये बालों को धीरे-धीरे खराब कर देते हैं।
 
5. हर समय कैप न पहनें। इससे पसीना, कीटाणु और गंदगी सिर के किनारों पर जम जाती है। बालों की जड़ों को नुकसान होता है और बाल गिरने शुरू हो जाते हैं।
 
6. गीले बालों में कंघा न करें, दिन में तीन-चार बार कंघा करें। ऐसा करने से बालों में जमीं तेल की चिपचिपाहट दूर होंगी और नए बाल उगने में मदद मिलेगी।
 
7. सिर पर तेल से मसाज करें। आप सरसों और जैतून के तेल को बराबर मात्रा में मिला कर बालों में हल्के-हल्के उंगलियों के पोरों से मसाज करें। मसाज करने के बाद तौलिये को गर्म पानी में भिगोएं फिर उसे निचोड़कर सिर को भाप दें। इससे सिर की त्वचा के रोमछिद्र खुल जाते है और तेल बालों की जड़ों के अंदर तक समा जाता है। इससे आपके बाल मजबूत होंगे।
 
8. आपको लगे कि गंजेपन की शुरुआत होने लगी है तो बालों को छोटा करवा लें।
 
 
इसके अलावा बालों के लिए कुछ घरेलू उबटन भी बना कर लगा सकते है। 
1 अंडे की जर्दी को बालों में लगाएं और आधे घंटे बाद शैंपू से बालों को धो लें। ऐसा सप्ताह में एक बार करें, आपके बाल मजबूत होंगे।
अपने सिर को दही से धोएं और थोड़ी देर बाद बथुए के पानी से दोबारा सिर धोएं। ऐसा करने से गंजेपन की समस्या दूर होगी।
रात में मेथी के बीजों को पानी में भिगो दें और सुबह इन्ह पीसकर लेप बनाकर बालों पर लगा लें। ऐसा कुछ दिनों में नए बाल उगने लगेंगे।
 

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मोटापा दूर करने के घरेलु उपाय

 मोटापा, शरीर में अधिक चर्बी जमा हो जाने के कारण होता है। इसे शरीर के बॉडी मास इंडेक्स (BMI) के द्वारा नापा जाता है। आम तौर पर 18.5 से 25 के बीच के BMI को सामान्य माना जाता है और यदि यह 30 से ऊपर हो जाये तो तो शरीर में मोटापे की समस्या हो जाती है।

मोटापे की समस्या ज्यादातर ख़राब जीवनशैली अपनाने की वजह से होती है, जैसे अधिक तले-भुने और वसा युक्त भोजन का सेवन करना, जरुरत से अधिक खाना, अत्यधिक शराब पीना, शारीरिक श्रम कम करना, नींद कम लेना और अन्य बुरी आदतें। जेनेटिक कारकों और हार्मोनल परेशानियों के कारण भी पेट की चर्बी बढ़ सकती है।

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