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त्‍वचा की हर समस्‍या का घर पर ही करें उपचार

nutriworld - Thu, 02/21/2019 - 08:30

हार्मोन में बदलाव, सूर्य की रोशनी के कारण, अनियमित दिनचर्या और खाने में पौष्टिकता की कमी के कारण कई प्रकार की त्‍वचा समस्‍यायें होती हैं, घरेलू उपचार से इन्‍हें दूर कर सकते हैं।

  • 1 त्‍वचा की समस्‍यायें

    त्‍वचा की समस्‍या एक सामान्‍य समस्‍या है जो हार्मोन में परिवर्तन के कारण सबसे अधिक होती है, इसके अलावा सूर्य की हानिकारक किरणें, अनियमित दिनचर्या और खान-पान में पौष्टिक तत्‍वों की कमी के कारण भी त्‍वचा की समस्‍यायें होती हैं। घर पर मौजूद वस्‍तुओं का प्रयोग करके आप आसानी से इन समस्‍याओं से निजात पा सकते हैं। तो अगर आपकी त्‍वचा की भी समस्‍या है तो घर की कुछ वस्‍तुयें इन समस्‍याओं को दूर कर त्‍वचा की रंगत निखार सकती हैं।

  • काले धब्‍बों के लिए 
    चेहरे पर पड़े काले धब्‍बों को दूर करने के लिए नींबू और प्‍याज को मिलाकर चेहरे पर लगायें। हालांकि इनकी प्रकृति एसिडिक होती है लेकिन जब इन दोनों को मिलाया जाता है तब यह सॉफ्ट हो जाते हैं। इसलिए इन दोनों का रस निकालर चेहरे की रंजकता और काले धब्‍बों को दूर कीजिए। कैलीफोर्निया की एक डर्मोटोलॉजिस्‍ट बोर्ड ने इसे प्रमाणित किया है। इसके अनुसार एक चौथाई चम्‍मच प्‍याज और उतना ही नींबू का रस मिलकार चेहरे पर लगायें और फिर 10-15 मिनट बाद चेहरे को धोने से धब्‍बे दूर हो जाते हैं।

    3 सूखे हाथों और पैरों के लिए

    बादाम का दूध और कॉफी का आधार (coffee grounds) का पेस्‍ट बनाकर चेहरे पर लगाने से सूखे हाथों और पैरों की समस्‍या दूर होती है। बादाम में एंटीऑक्‍सीडेंट और विटामिन ई होता है जो त्‍वचा को सूखने से बचाता है और काफी का आधार त्‍वचा की नमी बरकरार रखता है। 2 कप बादाम का दूध और उतना ही कॉफी का आधार लेकर पेस्‍ट बनाकर स्‍क्रब तैयार करें, इसे हाथों और पैरों में वृत्‍ताकार लगायें।

  • 4 सुस्‍त त्‍वचा

    सुस्‍त यानी डल त्‍वचा के लिए पुदीने का प्रयोग कीजिए, यह आसानी से मिल जायेगा। पुदीने की चाय पीने से त्‍वचा में निखार आता है और त्‍वचा फिर से दमकने लगती है। पुदीने की चाय रक्‍त का संचार बढ़ाती है, जिससे त्‍वचा की रंगत में निखार आता है।

  • 5 असमान और टैन त्‍वचा

    शहद और स्‍ट्रॉबेरी त्‍वचा की इस समस्‍या को दूर करते हैं। स्‍ट्रॉबेरी में विटामिन सी और प्राकृतिक रूप से सेलीसिलिक एसिड होता है जो एक्‍ने को दूर करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है। इसे जब शहद के साथ मिलाया जाता है तो दोनों में मौजूद एंटीबॉयटिक गुण त्‍वचा की टैनिंग को दूर करते हैं। तीन स्‍ट्रॉबेरी और एक चम्‍मच शहद लेकर इसका पेस्‍ट बना लें, चेहरे पर इसे मॉस्‍क की तरह लगायें। 15 मिनट बाद हल्‍के गरम पानी से चेहरे को धो लें।

  • 6 सूखे और घुंघराले बालों के लिए

    जैसे-जैसे गरमी बढ़ती है बाल सूखे और घुंघराले होते जाते हैं, इसके कारण बालों को संवारना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। इसमें नारियल का तेल आपकी मदद करता है, यह बालों को प्राकृतिक पोषण देता है। एक चम्‍मच नारियल का तेल लेकर बालों में हल्‍के-हल्‍के मसाज कीजिए, फिर 10 मिनट बाद सामान्‍य पानी से बालों को धो लें। इससे बालों की समस्‍या दूर हो जायेगी।

  • 7 डैंड्रफ के लिए

    डैंड्रफ की समस्‍या भी बालों से जुड़ी है, इससे निजात पाने के लिए सेब का सिरका प्रयोग कीजिए। डैंड्रफ दूर करने के लिए सेब का सिरका कंघी के मदद से बालों की जड़ों तक लगायें। 5 मिनट तक लगा रहने के बाद बालों को सामान्‍य पानी से धो लें। इससे डैंड्रफ की समस्‍या दूर होती है।

  • मुहांसों के लिए

    मुंहासे और उनकी वजह से हुए धब्‍बों को हटाने के लिए चेहरे पर टमाटर का गूदा लगाएं। गूदा लगाने के एक घंटे बाद चेहरे को साफ पानी से धो लें। ऐसा प्रतिदिन करने से मुहांसों की समस्‍या से निजात मिलती है। बेकिंग सोडा का पेस्‍ट चेहरे पर लगाने से मुहांसे की समस्‍या दूर होती है।

Tags: हेल्‍द न्यूजहेल्‍दी टिप्‍स

नसें ही दर्द का कारण बनती हैं।

nutriworld - Mon, 02/18/2019 - 08:30

शरीर में कहीं भी, किसी भी माश्पेसी में दर्द (Muscular pain) हो तो उसका इलाज किसी भी थेरेपी में पेन किलर के अलावा और कुछ नही है! यह आप सब अच्छी तरह जानते हैं और आप यह भी जानते हैं कि पेन किलर कोई इलाज नहीं है! यह एक नशे की तरह है जितनी देर इसका असर रहता है उतनी देर ब्रेन को दर्द का एहसास नहीं होता! और आपको पेन किलर के दुष्प्रभाव (साइड एफेक्ट) के बारे मे भी अच्छी तरहं पता है! जिसे आप चाह कर भी नकार नहीं सकते हैं! इन सभी की मुख्य वजेह होती है गलत तरीके से बैठना – उठना, सोफे या बेड पर अर्ध लेटी अवस्था में ज्यादा देर तक रहना, उलटे सोना, दो – दो सिरहाने रख कर सोना, बेड पर बैठ कर ज्यादा देर तक लैपटॉप या मोबाइल का इस्तेमाल करना या ज्यादा सफर करना या जायदा टाइम तक खड़े रहना या जायदा देर तक एक ही अवस्था में बैठे रहना आदि!

नस में दर्द या नस का क्षतिग्रस्त हो जाना क्रोनिक या लंबे समय तक होने वाले दर्द का एक सामान्य कारण है। हमारी नसें या धमनियाँ दर्द के संकेत को दिमाग तक पहुंचाती हैं, लेकिन कई बार ये नसें ही दर्द का कारण बनती हैं। इसके मेडिकल कारण हो सकते हैं जैसे कि चोट, दबाव या नसों में जकड़न। 
ये नसें पूरी तरह या आंशिक रूप से शरीर की कई क्रियाओं को नियंत्रित करती हैं, जैसे कि हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर लेवल, पाचन और तापमान नियंत्रण आदि। ये नसें मांसपेशियों के माध्यम से आपके दिमाग और रीड की हड्डी तक सूचना भेजते हुये आपके मूवमेंट और गतिविधियों पर नियंत्रण रखती हैं। 
ये नसें त्वचा व मांसपेशियों के माध्यम से दिमाग और रीड की हड्डी से वापस सूचना प्राप्त भी करती हैं। चूंकि नसें आपके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं इसलिए नसों में चोट या दर्द आपकी ज़िंदगी को पूरी तरह प्रभावित करता है।

इससे आपके दिमाग और रीड की हड्डी को भी नुकसान हो सकता है। कुछ मामलों में, जिन लोगों में की एक नस में क्षति होती है तो उनमें दो, तीन नसों में नुकसान होने के लक्षण भी दिखाई देते हैं। 
नसें कई तरह से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। पेरिफेरल नर्व उम्र के साथ क्षतिग्रस्त होती है। पेरिफेरल नर्व जिनकी क्षतिग्रस्त होती है उनमें से हर तीसरे व्यक्ति में इसका कारण डायबिटीज़ होता है। अन्य में इसके कारण का पता नहीं चल पाता है। बहुत सी ऑटो-इम्यून डीजीज की कारण नसों में दर्द या नुकसान हो सकता है। 
कैंसर कई तरह से नसों में दर्द या नुकसान पहुंचा सकता है। कई मामलों में, विशेष प्रकार के कैंसर में पोषण की कमी से नसों को नुकसान पहुंचता है। कई लोगों में कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी भी नसों में दर्द पैदा करती है। 
चोट के कारण भी नसों में दर्द, क्षति और गर्दन में सूई जैसी चुभन होती है। कई पदार्थ शरीर अपने आप एडजस्ट करता है और इनसे नसों में दर्द या क्षति नहीं हो सकती है।

डायबिटीज़ वाले लोगों में यदि नसों में दर्द होता है, तो यह एक बीमारी के रूप में विकसित होता चला जाता है। इसलिए यदि आपके डायबिटीज़ है और नसों में दर्द भी रहता है तो आपको जितना जल्दी हो सके अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

Source: hindi.boldsky.com

Rafting adventure

nutriworld - Sun, 02/17/2019 - 18:48
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Satwant singh

nutriworld - Sun, 02/17/2019 - 18:47
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अच्छे स्वास्थ्य के 6 लक्षण, जानिए कितने स्वस्थ हैं आप?

nutriworld - Sun, 02/17/2019 - 08:30

हर इंसान स्वयं को पूरी तरह से स्वस्थ व हेल्दी महसूस करता है, जब तक कि उसे अचानक कोई रोग नहीं घेरता। रोग होने पर उसे पता चलता है कि वह किस भ्रम में जी रहा था। एक सामान्य मनुष्य को देखकर यह पता लगाना मुश्किल है कि वह वास्तव में पूरी तरह से स्वस्थ है या नहीं। कुछ लोग स्वयं को फिट दिखाने की कोशिश जरूर करते हैं, लेकिन वास्तविकता में ऐसा होता नहीं है। अच्छे स्वास्थ्य के कुछ खास मापदंड हैं। आज हम आपको इन्हीं मापदंडों के बारे में बता रहे हैं। आप इन मापदंडों पर कितने खरे उतरते हैं, इसके आधार पर आप स्वयं के स्वास्थ्य के बारे में अनुमान लगा सकते हैं- 1. एक स्वस्थ इंसान को सुबह और शाम को खुलकर भूख लगती है। उम्र के अनुरूप वह अपना संपूर्ण आहार ग्रहण करता है। यदि ऐसा नहीं है तो समझ लीजिए आप स्वस्थ नहीं हैं। 2. गहरी नींद अच्छे स्वास्थ्य की निशानी मानी जाती है। कुछ लोगों को बिस्तर पर सोते ही गहरी नींद आ जाती है। यह एक अच्छा संकेत है, लेकिन यदि ऐसा नहीं है तो आपको समझ जाना चाहिए कि आपके स्वास्थ्य में कुछ गड़बड़ है। 3. रात भर सोने के बाद स्वस्थ व्यक्ति सुबह जागने पर भरपूर ताजगी और स्फूर्ति का अनुभव करता है। यदि सोने के बाद भी किसी व्यक्ति को थकान महसूस होती है तो उसे चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। 4. एक स्वस्थ व्यक्ति में गर्मी और ठंड सहने की पर्याप्त क्षमता होती है। 5. स्वस्थ मनुष्य को प्रतिदिन सुबह बिना किसी प्रयास के खुलकर शौच होता है। ये भी अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है। 6. शारीरिक श्रम करने पर एक स्वस्थ व्यक्ति को अत्यधिक थकान महसूस नहीं होती है। सामान्य थकान के बाद उसमें पुन: चुस्ती आ जाती है। स्वस्थ इंसान की पहचान की इन कसौटियों पर यदि आप खरे नहीं उतरते हैं, तो आपको किसी चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।

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आंखों की प्रॉब्लम्स को दूर करने का रामबाण तरीका

nutriworld - Fri, 02/15/2019 - 08:30

आज के समय में अधिकतर लोगों को आंखों से जुड़ी कोई न कोई समस्या होती है। यही कारण है कि कम उम्र में ही कई लोगों को आंखों की कमजोरी के कारण चश्मा लग जाता है। यदि समय-समय पर आंखों की भी देखभाल की जाए तो काफी हद तक इसमें पैदा होने वाली समस्याओं पर रोक लगाई जा सकती है। एक्युप्रेशर भी एक ऐसा ही नेचुरल तरीका है। जिसका उपयोग करके आप आंखों को चश्में से दूर व स्वस्थ रखा जा सकता है। 

1.आंखों से संबंधित प्रमुख केंद्र दोनों पैरों और दोनों हाथों में अंगूठों के साथ वाली दो उंगलियों के उस भाग में होते हैं, जहां उंगलियां तलवों तथा हथेलियों से मिलती है, वहां पहली उंगली(अंगूठे के पास) से दूसरी उंगली तक प्रेशर देंगे।

2. हाथों के अंगूठों के साथ वाली दो उंगलियो पर प्रेशर देने से आंख पर दबाव कम होकर बीमारी दूर होती है। आंखों और दिमाग में गहरा संबंध है, इसलिए दिमाग से संबंधित प्रेशर पॉइंट जो हाथों और पैरों की उंगलियो के टिप्स पर स्थित होते है, इन पर प्रेशर दें।

3. गर्दन के पीछे जहां पर खोपड़ी गर्दन से मिलती है, वहां हाथ पीछे करके अंगूठे से सीधा प्रेशर दे सकते हैं। हाथों पर आंखों संबंधी अन्य केंद्र अंगूठे और पहली उंगली के तिकोने भाग में स्थित होता है। अंगूठे और पहली उंगली के मिलाने पर जो जगह उभरती है, उसी के नीचे यह प्रतिबिंब केंद्र होता है। इस जगह पर प्रेशर देने से शीघ्र आराम मिलेगा।

4. आंखों संबंधी पैर पर दो अन्य प्रतिबिंब केंद्र है। पहला केंद्र प्रत्येक पैर के ऊपर पहले चैनल में उंगलियों की तरफ से दो अंगूठों के अंतर पर स्थित होता है, जबकि दूसरा केंद्र उस मध्य भाग में होता है,जहां पर पैर और टांग आपस में मिलते हैं। इन पर प्रेशर दें।

5. भौहों को अंगूठों तथा उंगलियो से पकड़ कर धीरे-धीरे पांच-सात बार हल्का-हल्का दबाव दें। इसी प्रकार आंखों को बंद करके पुतलियों के ऊपर नाक की तरफ से कान की तरफ उंगलियों से हल्का-हल्का पांच-सात बार दबाव दें। यह क्रिया दूसरे से भी करा सकते हैं। आंखों के अग्रभाग पर भी प्रेशर देने से नेत्रों की ज्योति ठीक होती है।

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क्षमता बढ़ाने मे मददगार होते हैं ये आहार

nutriworld - Thu, 02/14/2019 - 08:30

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी जिसमें लोगों के पास समय का आभाव हैं वह न केवल अपने पर बल्कि अपने खान-पान पर सही तरह से ध्यान नहीं दे पाते, जिसका नतीजा यह होता है कि वे कई बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में लोगों की सेक्स क्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सेक्स के मामले में लोगो को उचित आहार लेना जरूरी हैं। विटामिन ई की कमी से भी सेक्स क्षमता कम होने की संभावनाएं बढ जाती हैं। सेक्स क्षमता बढाने के लिए उचित आहार की बहुत अवश्यकता है। आइए जानें सेक्स क्षमता के बारे में।

शरीर को शक्तिशाली बनाने और सेक्स ऊर्जा प्राप्त करने के लिए उत्तम एवं पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए।

सेक्स क्षमता बढाने में शहद तथा भीगे हए बादाम या किशमिश को दूध में मिला कर प्रतिदिन पीने से बहुत लाभ होता है।

बदाम, किशमिश और मनुक्का को भिगोकर नाश्ते में लेने से भी लाभ होता है।

हरी सब्जी और छिलकों वाली दाल का सेवन चपाती के साथ करें। चपाती मक्खन या मलाई के साथ लें।

भोजन में सलाद का भरपूर उपयोग और प्याज, लहसुन तथा अदरक का संतुलित करें।

सेक्स पॅावर को बढाने या बरकरार रखने के लिए प्राकृतिक भोजन का सेवन करना चाहिए। जैसे- अन्न, ताजी हरी सब्जियां, सलाद, बिना पॅालिश किया चावल, ताजे फल, सूखे मेवे, चोकरयुक्त आटे की रोटिया, अंकूरित खाद्यान्न, दूध, दही, घी, अंडा तथा समुद्र से प्राप्त होने वाला भोजन इत्यादि।

शाकाहार का सेवन करने से सेक्स क्षमता बढाने मदद मिलती है। इसमे आप दाल, अनाज, दूध तथा दूध से बने पदार्थ ले सकते हैं।

तमाम शोधों में भी साबित हो चुका है कि मांसाहारी व्यक्ति और अधिक प्रभावशाली ढ़ंग से सेक्स करने में सक्षम होता है।

आपको सेक्स क्षमता बढ़ाने के लिए मांसाहारी के बजीय शाकाहारी भोजन लेना चाहिए और उसमें भी नियमित रूप से हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

सेक्स क्षमता में वृध्दि करने के लिए प्रोटीन और विटामिन बहुत मददगार साबित होते हैं। इसलिए आपको अपने भोजन में प्रोटीन लेना चाहिए जिससे आपके शरीर में फुर्ती भी आएगी।

आप प्रचूर मात्रा में प्रोटीन लेने के लिए अंडा या मछली का सेवन कर सकते हैं।

फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, चॅाकलेट, पिज्जा, बर्गर एवं चाऊमीन आदि का सेवन नियमित रूप से करने से ऊर्जा में कमी आने लगती है। ऐसे में इन चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए।

सेक्स क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक और संतुलित आहार लेना आवश्यक होता है। लिहाजा आपको तैलीय, मसालेदार और वसायूक्त भोजन को लेने से बचना चाहिए। इससे आपकी सेक्स लाइफ तो स्वस्थ रहेगी ही आप अतिरिक्त कॅालेस्ट्रॅाल को बढने से भी रोक पाएंगे, जो कि कई बीमारियों की जड़ है।

डायटिेंग करने, उपवास रखने से आप जरूरी कैलोरी नहीं ले पाते जिससे आपमें कमजोरी आ जाती है। जिससे सेक्स के दौरान आपमें ऊर्जा की कमी के हो जाती है और आप बीमार भी पड़ सकते हैं। एसे में आप दिनभर में 2000 कैलोरीयुक्त भोजन अवश्यक लें। इससे आपमें आप स्वस्थ भी रहेंगे।

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हाय, हाय मिर्ची .. खाना तो दूर छूने पर जला देगी हाथ

nutriworld - Thu, 02/14/2019 - 03:34

मिर्च के तीखेपन से तो हर कोई वाकिफ है यह तीखी मिर्च अगर जबान पर लग जाये तो सर्दी में भी आप पसीने से लथपथ हो जाओगे। लेकिन क्या आपने कभी ऐसी कोई मिर्च देखी है जो हाथ ही जला दे क्यों सोच में पड़ गये ना।

ट्री ऑप फायर से मशहूर ये मिर्च का पौधा कोई आम पौधा नहीं, बल्कि बेहद अनूठा है। इस पौधे पर 1000 से ज्यादा मिर्र्चें आती हैं, लेकिन खास बात यह है कि इस मिर्च को नंगे हाथ नहीं पकड़ा जा सकता क्योंकि नंगे हाथ इन्हें पकडऩे पर हाथों में असहनीय जलन शुरू हो जाती है। ये मिर्च इतनी तीखी है कि इन्हें दस्ताने पहनकर ही तोड़ा जाता है। ये मिर्च जालापेनो मिर्च की तुलना में 120 गुना ज्यादा तीखी होती है। हालांकि इसकी खेती शुरू हुए बहुत कम समय हुआ है। किसानों ने साल 2005 में इसकी खेती शुरू की थी।

डोरसेट नगा नाम की इस मिर्च को गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड का हिस्सा बनाने के लिए भी प्रस्तावित किया गया है। इन मिर्र्चों को उगाने वाली जॉय मिचुएड बताते हैं कि इन्हें हाथ से पकडऩा तो संभव नहीं है लेकिन इन्हें उठाने के दौरान आंखों में भी पानी भर जाता है। खुद को जलन से सुरक्षित रखने के लिए वो हाथों में हर हाथ में दो-दो दस्ताने पहनती हैं और आंखों पर चश्मा। उनका कहना है कि जहां मिर्च के पौधे पर आम तौर पर अधिकतम 700 मिर्च उगती हैं, वहीं इस पर 1000 से ज्यादा मिर्र्चें आती हैं।

 

Get The Glow : Product Launch in GOA

nutriworld - Wed, 02/13/2019 - 15:44
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GOA experience

nutriworld - Wed, 02/13/2019 - 15:41
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शाकाहार करे और रोगों से दूर रहें

nutriworld - Wed, 02/13/2019 - 08:30

केलिफोर्निया के हृदयरोग विशेषज्ञ डा. डीन ओरनिश के अनुसार केवल शाकाहार अपनाकर हृदय और कैंसर रोग को आसानी से ठीक किया जा सकता है।उनका कहना है की दवाईयां तो लेनी होगी लेकिन उनका असर सत्तर प्रतिशत तेजी से होगा। डा. डीन पहले ऐसे चिकित्सा विज्ञानी हैं जो रोगियों को बिना चीर फाड़ किए ठीक करने में यकीन करते हैं। उन्होंने इलाज के लिए आए मरीजों की खानपान की आदतें बदल कर उन्हें ठीक किया है।
ब्रिटेन में हुए एक ताजा अध्ययन के मुताबिक शाकाहारी लोगों में कैंसर और हृदय रोगों का जोखिम मांसाहारी लोगों की तुलना में 40 प्रतिशत और असमय मृत्यु का खतरा 20 प्रतिशत कम होता है।इस अध्ययन के मुताबिक मांसाहार के पक्ष में पर्यावरण, प्रकृति संतुलन और आसानी से पौष्टिक भोजन मिल जाने की जो दलीलें दी जाती हैं वे सब गलत साबित हुई हैं। अध्ययन के अनुसार मनुष्य की आंतों से लेकर पाचन संस्थान के तमाम अंग अवयव जिनमें जीभ, दांत, ओठ, हाथ पैर की अंगुलियां भी शामिल हैं, मांसाहार के लिए कतई उपयुक्त नहीं है।
शरीर स्वयं विकसित हुआ हो या प्रकृति ने बनाया हो वह अनाज और शाकपात से ही पोषक रस खींच सकता है। हजम करने के लिए मांस को जिस हद तक पकाया जाता है, वह गए गुजरे किस्म के अनाज से भी गया बीता हो जाता है। मनुष्य को स्वस्थ और पुष्ट रखने के लिए शाकाहार ही उपयुक्त है।

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ऐसे व्‍यायाम जो चेहरा बनाए टाइट और चमकदार

nutriworld - Tue, 02/12/2019 - 08:30

● क्‍या आप कभी कभी ऐसा नहीं सोचती कि काश कोई ऐसी एक्‍सरसाज होती जो आपके चेहरे को एक बार में ही निखार सकती? रोज जिम जा कर घंटो पसीना बहा कर भी शरीर पर उतना फरक नहीं दिखता जितना कि आप इन वर्कआउट से खुद को निखार सकती हैं। अगर आपको चमकदार और झर्रियों रहित चेहरा चाहिये तो अपनाएं हमारे दिये हुए व्‍यायाम। ये व्‍यायाम करने मे बिल्‍कुल भी कठिन नहीं हैं।

आपका चेहर तभी खूबसूरत और स्‍वस्‍थ दिख सकता है जब उसमें ब्‍लड का सर्कुलेशन अच्‍छा हो। क्‍योंकि ब्‍लड सर्कुलेशन से चेहरे पर ग्‍लो आता है। तो देर किस बात की है अब ब्‍यूटी पार्लर पर पैसे खर्च करना बंद करिये और अपनाइये इन व्‍यायामों को।

》 ऐसे व्‍यायाम जो चेहरा बनाए टाइट और चमकदार

2) हेडस्‍टैंड :-
यह एक सिंपल सा वर्कआउट है जो दिखने में थोड़ा कठिन लगता है मगर एक-दो बार के अभ्‍यास से इसे आसानी से किया जा सकता है। आप एक दीवार का सहारा ले कर इसे कर सकते हैं। इसे कभी भी अकेले ना करें, कोशिश करें कि आपके साथ एक दोस्‍त या घर का कोई सदस्‍य हो। यह वर्कआउट शरीर में खून के बहाव को तेज करेगा जिससे चेहरा निखरेगा। यह त्‍वचा से झुर्रियों को मिटाने में मददगार है।

3) पसीना बहाने वाला वर्कआउट :-
ऐसा कोई व्‍यायाम करें जिसमें शरीर से खूब पसीना निकले। आप के लिये एरोबिक्‍स या फिर स्‍विमिंग अच्‍छी रहेगी क्‍योंकि इससे पसीना निकलता है। इन व्‍यायामों से शरीर लचीला और त्‍वचा चमकदार बनती है।

4) योगा :-
योगा में ऐसे कई आसन हैं जो चेहरे के लिये काफी अच्‍छे माने जाते हैं। इन आसनों को योग टीचर से सीखें और अपने चेहरे को चमकदार और सुंदर बनाने में मदद करें।

5) पुश अप :-
तुरंत वॉर्मअप होने के लिये आप 25 पुश अप्‍स एक साथ कर सकते हैं। अपने शरीर को पुश अप पोजीशन में 30 सेकेंड के लिये होल्‍ड कर के रिलीज़ करें। ऐसा व्‍यायाम रोजाना करने से चेहरे की त्‍वचा अच्‍छी तहती है।

6) मुस्‍कुराना :-
मुस्‍कुराने से तनाव झट से दूर होता है और मूड भी अच्‍छा हो जाता है। साथ ही इससे आपके चेहरे की मासपेशियां खिंचती हैं। रोजाना कुछ सेकेंड की मुस्‍कान से आप और भी ज्‍यादा सुंदर दिख सकती हैं।

फल और सब्जियों के 'रंगों' में छिपा है हमारे स्‍वास्‍थ्‍य का राज!

nutriworld - Sun, 02/10/2019 - 08:30

शशिरंजन वर्मा। हमारे  जीवन में रंगों का प्रभाव शुरू से ही रहा है चाहे वह मनुष्य का रंग-रूप, रक्त, बाल या भी फिर पहनावा, सभी में रंगों का अपना प्रभाव है। अगर यह कहा जाय कि रंगों के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। इस बात का प्रमाण अब तक हुए कई शोधों से भी होता है। अब कई शोधें ने यह भी साबित कर दिया है कि फलों और सब्जियों में मौजूद रंग हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद और लाभकारी हैं। हम इस आलेख के जरिए आपको बताएंगे कि कैसे छिपा है रंगों में सेहत का राज।

शरीर पर हानिकारक दुष्प्रभाव को कम करना
खाद्य पदार्थ में में पाए जाने वाले बहुरंगी कुदरती रंगों की उपयोगिता पर अब तक देश-विदेश में कई शोध हो चुके हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने गए। यहां तक की लगभग सभी डायटीशियंस इस बात पर एकमत दिखे कि खानपान में अधिक से अधिक कुदरती बहुरंगी खाद्य पदार्थों को शामिल करने से स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधर होता है। आहार विशेषज्ञों का कहना है कि प्रत्येक रंग के खाद्य पदार्थ में अलग-अलग  प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं।

विभिन्न रंगों के फलों व सब्जियों में जो विटामिन्स, मिनरल्स और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, वे शरीर के अन्दर पैदा होने वाले नुकसानदेह तत्वों के दुष्प्रभावों को कम करते हैं। इसका कारण यह है कि बहुरंगी खाद्य पदार्थों में एंटीऑक्सीडेंट्स पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।

खानपान में दें रंगीन खाद्य पदार्थों को वरीयता
अगर आपने पिछले कुछ दिनों से अपने खानपान में रंगों वाले खाद्य पदार्थों को स्थान नहीं दिया तो आपको चाहिए कि प्राथमिकता के तौर पर आप उनको जगह दें। अगर आपने कुछ दिनों से पीले रंग के खाद्य पदार्थ नहीं खाएं तो उसका सेवन करें, उसी तरह समय-समय पर सभी रंगों के खाद्य पदार्थों को लेते रहें, जिससे आप अपने को हमेशा तरोताजा महसूस कर सकें, नीरोग रह सकें।
 
हरा रंग आयरन की प्रचूरता की निशानी हैं
सब्जियों व फलों में पाए जाने वाले हरे रंग इस बात की सूचना देतें है कि इस खाद्य पदार्थ में प्रचुर मात्रा में आयरन मौजूद है, जैसे खीरा, अंगूर, पालक, बन्दगोभी, मटर, सेम, हरी मिर्च, बथुआ, बीन्स, सरसों का साग, चने का साग, मूली के हरे पत्ते आदि।
हरे रंग की खाद्य वस्तुओं में ल्यूटीन, जियोजेन्थन, क्लोरोपिफल, पफाइबर, कैल्शयम, पफोलेट और बीटा केरोटिन नामक तत्व पाए जाते हैं, जो नेत्रों को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। इनमें उपस्थित पोषक पदार्थ पाचन शक्ति बढ़ाने के साथ ही कैंसर और निम्न रक्तचाप के खतरों को भी कम करते हैं। इसके अलावा यह रंग रोग प्रतिरोध्क क्षमता में बढ़ाने में भी मदद करती है।
 
खाने में लाल रंग की प्रचूरता हृदय रोग के खतरे से बचाता है
लाल रंग के फल एवं सब्जियों वाले कुदतरी खाद्य पदार्थों में लाइकोपिन, इलेगिक एसिड, क्वेरसिटीन  और हेस्पिरीडिन नामक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट्स रक्त में थक्कों को नहीं बनने देते। इस कारण हृदय रोग होने का जोखिम काफी कम हो जाता है। यहीं नहीं इन रंगों के फलों में कैंसर से लड़ने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं। इसके अलावा ट्यूमर बनने और कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने की आशंका भी कम हो जाती है। ये उतकों को जोड़ने में भी मददगार होते हैं। पर्पल रंग के अंगूर भी कैंसररोधी तत्वों से भरपूर होते हैं। लाल और पर्पल रंग के जो खाद्य पदार्थ हैं वह टमाटर, गाजर, सेब, तरबूज, स्ट्राबेरी, प्याज आदि हैं।
 
नारंगी आपकी त्‍वचा को चमकदार रखता है
नारंगी रंग के कुदरती खाद्य पदार्थों में आम, सन्तरा, मौसमी, पपीता, आडू में विटामिन ए और सी, बीटा कैरोटिन, जिआजेन्थिन, फ्रलेवोनायड, लाइकोपिन और पोटेशियम की भरपूर मात्रा होती है, जो आंखों एवं त्वचा को स्वस्थ रखने में सहायक है। साथ ही मैगनीशियम और कैल्शियम एक-दूसरे के साथ मिलकर हडि्डयों को मजबूती प्रदान करते हैं।
 
पीला रंग आपकी आंखों की दृष्टि बढ़ाता है
पीले रंग के खाद्य पदार्थ जैसे चने की दाल, अरहर की दाल, मकई एवं सभी पीले रंगों वाले फलों, सब्जियों एवं खाद्य पदार्थों में रोग प्रतिरोधक विटामिन सी पाया जाता है इसके अलावा बीटा क्राईपटॉक्सैनिथ्न नाम एंटी ऑक्सीडेंट्स पाया जाता है, जो कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाने में सहायक है। यह एंटीऑक्सीडेंट आंखों की सेहत को भी बरकरार रखने में मददगार है।
 
नीला आपकी यादाश्‍त को बरकरार रखता है
काले नीले अंगूर, ब्लैक बेरी, ब्लूबेरी, बैंगनी बन्दगोभी में पोषक तत्व ल्यूटिन, जिआजेंथ्न, रेसवराट्रोल विटामिन सी, फाइबर, फ्रलेवोनायड, इलेगिक एसिड और क्वेरसिटीन होते हैं। शरीर को मजबूती देने के साथ ही याददाश्त को बढ़ाता है। पदार्थों की अवशोषण क्षमता व कैल्शयम को बढ़ाता है। पाचन तन्त्र सुदृढ़ करने के अलावा कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकता है।

सफेद रंग स्‍तन कैंसर से तो बचाता ही है, हार्मोन का संतुलन भी बनाए रखता है
सफेद रंग का लहसुन, केला, अदरक, मशरूम, शलजम, आलू और प्याज जैसे विभिन्न सब्जियों व व्यंजनों को  लजीज बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लहसुन और प्याज में एलीसिन नामक तत्व पाया जाता है, जो शरीर में ट्यूमर नहीं बनने देते। इसी तरह सफेद रंग के मशरूम में रोगों से लड़ने वाले रसायन पाए जाते हैं। मशरूम में भरपूर मात्रा में फ्रलैवोनॉइड् पाए जाते हैं, जो कोशिकाओं को नष्ट होने बचाने में सहायक होते हैं। यह स्तन कैंसर के खतरों को रोकने के अलावा हार्मोन में भी सन्तुलन बनाए रखता है।

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गर्मी के दिनों में क्या खाएं क्या न खाएं?

nutriworld - Sat, 02/09/2019 - 08:30

बदलती ऋतुओं के अनुसार शरीर में स्वाभाविक  रासायनिक परिवर्तन होते हैं और इस परिवर्तन में  ऋतूचर्यानुसार  खाध्य  पदार्थों  का सेवन किया जाए तो वात-पित्त-कफ के उभार से होने वाले रोगों से बचा जा सकता है| यहाँ मैं  गर्मी की ऋतू  में अच्छी सेहत के लिए  सेहतमंद दिन चर्या  की बात करूँगा-

     अल सुबह उठते ही २-३ गिलास पानी पीना चाहिए|  इसके बाद  शौच,दन्त सफाई,आसान और प्राणायाम नियमित रूप से करें| अब रात को पानी भिगोये हुए ११ बादाम  को  छिलके उतारकर  पीसकर एक गिलास दूध   के साथ पीएं|  इसके नियमित प्रयोग से  शारीरिक  तंदुरुस्ती  मिलती है और आंतरिक उष्मा शांत होती है| गर्मी के मौसम में तले भुने,गरिष्ठ और ज्यादा मसालेदार  पदार्थों की बजाय  फल फ्रूट ,हरी सब्जियों  के सलाद और  जूस का ज्यादा इस्तेमाल  करना  बेहद फायदेमंद रहता है|  इससे गर्मी की वजह से  पसीना होने से  होने वाली  पानी कमी  का पुनर्भरण  भी होता रहता है|

    ग्रीष्म ऋतू में बाजारू  चीजें खाने से  बचने  की सलाह  दी जाती है|  इस मौसम में शारीरिक कमजोरी ,अपच,दाद,पेचिश,सीने में जलन.खूनी बवासीर  ,मुहं की बदबू आदि रोगों से बचने  का सरल उपचार  भी लिख देता हूँ|  खाली पेट,नींबू का रस आंवले का रस  और हरे धनिये का रस  मिश्री  मिलाकर  पीने से  कई रोगों से बचाव हो सकता है|  दोपहर और सांयकालीन  भोजन  में चावल के साथ अरहर,मूंग,उडद  की दाल और हरी  पत्तीदार सब्जियों  का समावेश करें|  छाछ  व्  दही का सेवन करना हितकारी है|  रात का भोजन  ना करें तो ज्यादा अच्छा|

    गर्मी में घर से बाहर निकलने  के पाहिले २ गिलास पानी जरूर पी लेना चाहिए|  टमाटर,तरबूज,खरबूज,खीरा ककड़ी,गन्ने का रस और प्याज  का उपयोग  करते रहना चाहिए|  इन चीजों से पेट की सफाई होती है और अंदरूनी  गर्मी  शांत होती है|

     गर्मी दूर भगाने के कारगर तरीके-

१)  नींबू पानी- यह गर्मी के मौसन का देसी  टानिक है| शरीर  में विटामिन सी की मात्रा कम हो जाने पर एनीमिया,जोड़ों का दर्द,दांतों के रोग,पायरिया,kहंसी और दमा जैसी दिक्कते हो सकती हैं|  नींबू में भरपूर  विटामिन सी होता है|  अत; इन बीमारियों से दूरी  बनाए रखने में यह उपाय सफल रहता है| पेट में खराबी होना,कब्ज,दस्त होना में नींबू के रस में  थौड़ी सी हींग,काली मिर्च,अजवाइन ,नमक ,जीरा मिलाकर पीने से काफी राहत  मिलती है|

२) तरबूज का रस-  तरबूज के रस से एसीडीटी  का निवारण होता है|  यह दिल के रोगों डायबीटीज  व् केंसर रोग से शरीर की रक्षा करता है|

३) पुदीने का शरबत-  गर्मी में पुदीना बेहद फायदेमंद रहता है| पुदीने को पीसकर स्वाद अनुसार नमक,चीनी जीरा मिलाएं| इस तरह  पुदीने का शरबत बनाकर पीने से लू.जलन,बुखार ,उल्टी व  गैस  जैसी समस्याओं में काफी लाभ होता है|

४)  ठंडाई- गर्मी में ठंडाई  काफी लाभ दायक होती है| इसे बनाने के लिये खस खस और बादाम  रात को भिगो दें|सुबह इन्हें मिक्सर  में पीसकर ठन्डे दूध में मिलाएं| स्वाद अनुसार  शकर मिलाकर पीएं|  गर्मी से मुक्ति मिलेगी|

५) गन्ने का रस-  गर्मी में गन्ने का रस सेहत के लिये बहुत अच्छा होता है| इसमें विटामिन्स  और मिनरल्स  होते हैं| इसे पीने से ताजगी बनी रहती है| लू नहीं लगती है| बुखार होने पर गन्ने का रस पीने से बुखार जल्दी उतर जाता है| एसीडीटी की वजह  से होने वाली जलन  में गन्ने का रस राहत पहुंचाता है| गन्ने के रस में नीम्बू मिलाकर पीने से पीलिया जल्दी ठीक होता है|  गन्ने के रस में बर्फ  मिलाना  ठीक नहीं है|

६) छाछ - गर्मी के दिनों में छाछ का प्रयोग  हितकारी है| आयुर्वेद शास्त्र में  छाछ  के  लाभ बताए गए  हैं|    भोजन के  बाद आधा गिलास छाछ  पीने से फायदा होता है| छाछ में पुदीना ,काला नमक,जीरा  मिलाकर पीने से एसीडीटी की समस्या से निजात मिलती है|

७) खस का शरबत - गर्मी में खस का शरबत बहुत ठंडक  देने वाला होता है| इसके शरबत से दिमाग को ठंडक मिलती है| इसका शरबत बनाने के लिये खस    को धोकर  सुखालें| इसके बाद इसे पानी में उबालें|  और स्वाद  अनुसार शकर मिलाएं| ठंडा होने पर छानकर  बोतल में भर लें| 

८)  सत्तू - यह एक प्रकार का व्यंजन है| इसे भुने हुए चने , जोऊं और गेहूं पीसकर बनाया जाता है|  बिहार में यह काफी लोकप्रिय है| सत्तू पेट की गर्मी शांत  करता है|  कुछ लोग इसमें शकर  मिलाकर तो कुछ लोग  नमक और मसाले मिलाकर  खाते हैं|

९)  आम पन्ना - कच्चे आम को पानी में उबालकर  उसका गूदा  निकाल  लें| इसमें शकर,भुना जीरा,धनिया,पुदीना,नमक  मिलाकर पीयें| गर्मी  की बीमारियाँ दूर होंगी|

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गर्मियों में हृदय को दे सुरक्षा

nutriworld - Fri, 02/08/2019 - 08:30

र्मी के मौसम  मे बुुजुर्ग और अस्वस्थ व्यक्ति  और खासतौर से हृदय रोग से पीडि़त व्यक्ति को  खास ध्यान देने की जरूरत होती है। वे जिन्हें पहले से ही हृदय की समस्या है उन्हें ब्लड प्रेशर और हृदय गति को नियंत्रित रखने के लिए कुछ प्रकार की दवाओं का प्रयोग करना चाहिए। अत्यधिक गर्मी और उमस शरीर के संतुलन को बिगाडऩे का काम करती है। 

खासतौर पर लो ब्लड प्रेशर और हार्ट फेलियर वालों के लिए पानी की कमी और पसीने के कारण इलेक्ट्रोलेट असंतुलन के कारण ब्लड प्रेशर को मेंटेन रखना कठिन होता है साथ ही जो डाइयुरेटिक्स (मूत्र बनाने वाली दवा) लेते हैं उन्हें डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) और सॉल्ट डिप्लेशन (नमक की कमी) हो जाता है। हमारा शरीर 98.40 फा. (370से)  तक के सामान्य बॉडी टेम्प्रेचर कोबनाए  रखने के  लिये  सेट होता है जिससे यह अत्यधिक गर्मी में हार्ड वर्क (कूलिंग इफेक्ट) कर सकता है। जैसा कि हम सभी गर्मियों में सन स्ट्रोक या हीट स्ट्रोक के प्रभाव के बारे में जानते हैं,  लेकिन कुछ मामलों में इसके सामान्य लक्षणों में गर्मी से थकान, (हीट एग्जर्शन), सिर दर्द, बेचैनी, चिढ़चिड़ापन और प्यास का बढऩा नजर  आता है।

    दिल शरीर का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जो असंतुलन को ठीक करने के लिए कड़ी मेहनत करता है। जैसे-जैसे टेम्प्रेचर बढ़ता है शरीर वासोडिलेटेशन (त्वचा के ब्लड वेसेल्स को ठंडक पहुंचाने वाला) के द्वारा गर्मी को नष्ट करता है जिसकी वजह से पसीना त्वचा के तापमान को ठंडा करता है लेकिन इस वासोडिलेटेशन का असर ब्लड प्रेशर पर पड़ता है जिससे ब्लड प्रेशर को बनाए रखने के लिए हृदय के पम्प करने की गति (हार्ट रेट) बढ़ जाती है। ऐसे रोगी जो हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त हैं उन्हें ब्लड प्रेशर कम करने और हार्ट रेट को नियंत्रित रखने की दवाएं दी जाती हैं। इसलिए इस तरह के परिवर्तन कभी-कभी मुश्किल से दिखते हैं।

   इसके लिए सामान्य तौर पर बीटा ब्लॉकस, कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, एसीई इनहैबिटर्स आदि दवाएं हैं।
समस्त गंभीर बीमारियों से संबंधित हार्ट स्ट्रोक तब होता है जब टेम्प्रेचर 1050 फा. से ऊपर चला जाता है यह प्राणघातक भी होता है। नीचे दी गई परिस्थिति में फिजिशियन को दिखाना जरूरी है--शरीर का तापमान अत्यधिक (1030फा.) बढ़ जाना, गर्म और रुखी त्वचा (बिना पसीने के),धमक के साथ सिरदर्द,चक्कर आना व भ्रम/बेचैनी।

       इस तरह की परिस्थिति में तरल चीजें पर्याप्त नहीं होती, सबसे पहले बॉडी टेम्प्रेचर को ठंडा इलेक्ट्रोलेट के असंतुलन को ठीक करना जरूरी होता है। इससे भी ज्यादा प्रत्येक हृदय रोगी को बदलते मौसम के दौरान अपने दवा को रिएडजेस्ट कराने के लिए नियमित रूप से डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

 गर्मियों में हृदय को स्वस्थ रखने के लिए खास उपाय-

      दोपहर में 2 से 3 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें, क्योंकि इस दौरान गर्मी चरम पर होती है।
बुजुर्ग अपने दोस्तों, रिश्तेदारों या किसी जानकार के साथ अपना नियमित व्यायाम जरूर करें, जिससे किसी इमरर्जेंसी में वे आपकी सहायता कर सकें।

      व्यायाम के दौरान कई बार ब्रेक लें या फिर किसी शेड या ठंडी जगह पर सुस्ता लें।

व्यायाम के दौरान अच्छी तरह के  हवादार जूते और मोजे पहनें जिससे पसीना कम निकलेगा।

     अगर आप हेल्दी भोजन करेंगे तो गर्मी का सामना भी आसानी से कर सकेंगे और आपका हृदय भी स्वस्थ रहेगा। बॉडी टेम्प्रेचर, भूख और प्यास  को संतुलित रखने में मस्तिष्क का एक भाग हाइपोथैल्मस मदद करता है। इसलिए हीट स्ट्रोक से बचे रहने के लिए सबसे जरूरी है हाइपोथैल्मस जो एंड्रोसाइन का हिस्सा होता है उसकी कार्य प्रणाली ठीक प्रकार से होती रहे। पत्तेदार हरी सब्जियां, ऑलिव आईल , बादाम और काजू आदि फैटी एसिड्स और मिनरल से भरपूर खाद्य पदार्थ लें, ये खतरनाक गर्मी से बचने में सहायता करेंगे।
तरबूज, नाशपाती और पाईनेपल  पानी से भरपूर होते हैं। इन्हें खाने से  खेलते वक्त, व्यायाम करते वक्त या गर्मियों के प्रतिदिन के काम करते वक्त डिहाइड्रेशन से बच सकते हैं।

    ब्रॉथ, सूप और नट मिल्क के साथ अनाज आदि लेने से शरीर की नमी बनी रहती है। इस तरह के खाद्य पदार्थ आपके जलीयांश  के स्तर को बढ़ाते हैं जिससे आपके शरीर को पोषण मिलता है और हाइड्रेट भी रहता है। 

    कॉफी से बचने का प्रयास करें क्योंकि यह मूत्र वर्धक का काम करता है, जिससे आपको बार-बार पेशाब  की आवश्यकता हो सकती है जिससे शरीर का मूल्यवान पानी निकल जाता है।
अगर आप इन सावधानियों का अनुसरण करें तो हीट स्ट्रोक से बच सकते हैं। 

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मेंटल स्ट्रैस से फ्री होने के पांच लेटेस्ट तरीके

nutriworld - Thu, 02/07/2019 - 08:30

अधिकांश लोगों में धर्म के अलावा लाइफ को लेकर भी कई गलत धारणाएं बनी रहती है। जरूरत से ज्यादा एबिशियस होना, हर पल बढ़ता कॉम्पिटिशन, एक्ट्रा वर्क लोड और पर्सनल रिलेशनशिप के प्रॉब्लंस ये सभी कारण है जिसकी वजह से आजकल मेंटल स्ट्रैस का लेवल बहुत बढ गया है।

यही सब कारण जन्म देते हैं मेंटल स्ट्रैस को। मेंटल स्ट्रैस दूर करने के लिए सबसे पहले अपने अंदर पॉजीटिविटी लाने की आवश्यकता है। आने वाले स्ट्रैस की चींता को छोड़ कर प्रेजेंट में जीना चाहिए।

साइकोलोजिस्ट की माने तो लाइफ मे किसी चीज की कमी के कारण मनुष्य मेंटल स्ट्रैस उत्पन्न हो सकता है। मनुष्य को चिंता कम, चिंतन अधिक करना चाहिए। रोज सुबह फैश एनवारयमेंट में योग व प्राणायाम करने से मेंटल स्ट्रैस से परी तरह से छुटकारा पाया जा सकता है।

वैसे तो मेंटल स्ट्रैस से फ्री होने का सबसे अच्छा उपाय है प्राणायाम। लेकिन कुछ घरेलू नस्खों की सहायता से भी आप मेंटल स्ट्रैस से छुटकारा पा सकते हैं। आज हम आपसे मेंटल स्ट्रैस दूर करने के कुछ आसान टिप्स शेयर कर रहे हैं, जिनकी मदद से आप रहेंगे हमेशा मेंटल स्ट्रैस फ्री।

1-दालचीनी को पानी के साथ पीसकर माथे पर लेप करने से सिरदर्द और मेंटल स्ट्रैस दूर होता है।
2-एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल डाल कर सोते समय पीने से मेंटल स्ट्रैस दूर होता है।
3-प्रतिदिन चुकंदर का रस पीने और सलाद खाने से मेटल वीकनैस दूर होती है और स्मरण शक्ति बढ़ती है।
4-लगभग 250 ग्राम गाजर का रस प्रतिदिन पीने से मेंटल स्ट्रैस दूर होता है।
5- प्रतिदिन आंवले का मुरब्बा खाने से मेंटल स्ट्रैस या उदासी दूर हो जाती है। 

 

क्यों रहते हैं हाथ-पैर ठंडे?

nutriworld - Wed, 02/06/2019 - 08:30

सर्दियों के मौसम में हाथ-पैरों का ठंडा होना सामान्य है। यूं भी ठंड का सामना करने की क्षमता हर व्यक्ति की अलग होती है। पर कुछ लोग हल्की-सी ठंड भी बर्दाश्त नहीं कर पाते। उनकी उंगलियां हर समय ठंडी रहती हैं। ऐसा होना कुछ और बातों की ओर भी इशारा करता है, जन्हिें  समझना जरूरी है। इस बारे में बता रही हैं अमृता प्रकाश 

सर्दियों की शुरुआत हो चुकी है। यूं तो इस मौसम में हाथ व पैर ठंडे होना सामान्य बात है, पर कुछ लोग ठंड के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। ऐसे लोगों में ठंड ही नहीं, गर्मियों में भी तापमान में आयी थोड़ी सी कमी उंगलियों के ठंडे पड़ने का कारण बन जाती है। खासतौर पर महिलाएं इसकी अधिक शिकार होती हैं। 

नोएडा स्थित मेट्रो हॉस्पिटल के वरष्ठि फिजिशियन डॉ. संजय सनाध्या के अनुसार 'हाथ व पैर ठंडे पड़ने या अधिक ठंड लगने के कई कारण हो सकते हैं। कई लोगों में इसके कारण बेहद सामान्य होते हैं, मसलन ठंड सहने की उनकी क्षमता, पानी कम पीना या बीपी कम होना। इसके अलावा यदि लंबाई के अनुपात में वजन काफी कम है तो भी संभव है कि आपको ठंड अधिक लगती हो। वजन अधिक कम होने का मतलब शरीर में वसा की कमी है, जिससे शरीर गर्म नहीं रह पाता। यह इस बात का भी संकेत है कि आप पर्याप्त मात्रा में नहीं खा रहे हैं। ऐसे लोग खान-पान में सुधार करके राहत पा सकते हैं।'

डॉ. संजय के अनुसार, 'इसके कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं। रक्त की आपूर्ति बाधित होने के कारण भी हाथ-पैर ठंडे पड़ने लगते हैं। हाथों का रंग सफेद, बैंगनी, संतरी व नीला पड़ने लगता है। कुछ देर उन्हें गर्माहट देने पर वे फिर से ठीक हो जाते हैं। अधिक ठंडे इलाकों में रहने वालों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। अधिक तनाव की स्थिति में भी ऐसा होता है।  

 'हृदय रोगों से जूझ रहे लोगों को भी ठंड अधिक लगती है। धमनियां संकुचित होने के कारण हाथ व पैर की उंगलियों तक रक्त का प्रवाह ढंग से नहीं हो पाता। इसके अलावा गठिया के रोग से परेशान लोगों को भी सामान्य से अधिक ठंड लगती है।' 

 मूलचंद मेडसिटी में आयुर्वेद विभाग प्रमुख डॉ. शशि बाला कहती हैं, ' बाहर की ठंडी हवा हमारे फ्लूड सकुर्लेशन को प्रभावित करती है, जिससे हाथ व पैर ठंडे होना सामान्य है। जिन लोगों को ये समस्या अधिक रहती है, उन्हें शुरुआत से खान-पान का ध्यान रखना चाहिए। आयुर्वेद में त्रिकुटि, पिपली चूर्ण और अश्वगंधा के सेवन से अधिक ठंड लगने की परेशानी में राहत मिलती है। खान-पान में गर्म तासीर वाली चीजों का सेवन करना चाहिए, पर इसका मतलब यह नहीं कि आप अधिक मात्रा में चाय व कॉफी पिएं।' 
डॉ. शशिबाला के अनुसार, 'मात्र दस्ताने व जुराबें पहन कर बैठे रहना सही नहीं है। अपनी जीवनशैली को सुधारना भी जरूरी है।  धूम्रपान का सेवन न करें। कैफीनयुक्त चीजों से परहेज करें। अधिक तंग कपड़े व जूते न पहनें। नियमित व्यायाम से भी रक्तसंचार सही रहता है। खासतौर पर प्राणायाम व गहरे श्वास का अभ्यास करना शरीर में ऊर्जा भरता है।'

डॉ. संजय के अनुसार, 'अमूमन लोग हाथ-पैर के ठंडे होने को सामान्य मान कर इसके उपचार पर ध्यान नहीं देते, जबकि ये कुछ अन्य बातों का संकेत भी हो सकता है। '

खान-पान में इन्हें करें शामिल 
आयुर्वेद के अनुसार, सर्दी खान-पान की दृष्टि से सबसे अच्छा मौसम है। कई तरह के मसाले, जड़ी-बूटियां व मौसमी फल-सब्जियां हैं, जन्हिें डाइट में शामिल करना ठंड में राहत देता है।  
लहसुन
एंटीवायरल गुणों से भरपूर लहसुन की कली को कच्चा चबाना फायदेमंद है। 

आंवला
इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में  होते हंै, जो कोशिकाओं को क्षतग्रिस्त होने से बचाते हैं। पाचन में लाभकारी होने के साथ-साथ  यह शरीर को सभी तरह के पोषण को ग्रहण करने में सक्षम बनाता है।  

शहद
एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर है। मौसमी बुखार व संक्रमण को दूर रखने में सहायता मिलती है। शरीर को ऊर्जा देता है। 

ये भी हैं ठंड का कारण 

शरीर में आयरन की कमी 
लाल रक्त कोशिकाओं को पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने के अलावा शरीर के विभन्नि हस्सिों से ऊष्मा और पोषक तत्वों को लाने-पहुंचाने में आयरन की अहम भूमिका होती है। आयरन की कमी का सीधा मतलब यह है कि शरीर अपने ये सभी काम सुचारू रूप से कर पाने में सफल नहीं हो पाएगा। आयरन की इस कमी के कारण कंपकंपी भी आती है। इसके अलावा आयरन की कमी से थाइरॉएड ग्लैंड का स्राव भी प्रभावित होता है, जो ठंड लगने का एक और कारण है।

शरीर में आयरन की इस कमी को दूर करने में आयरन सप्लीमेंट के साथ डाइट पर ध्यान देना जरूरी है। मीट, अंडा, हरी पत्तेदार सब्जियां और सी-फूड आदि  पदार्थों को डाइट में शामिल करें। 

दवाओं का असर 
कई दवाएं हैं, जिनका लंबे समय तक सेवन धमनियों को संकुचित कर सकता है। इससे रक्त संचार में समस्या आती है और हाथ-पैर ठंडे होने लगते हैं। खासतौर पर केमस्टि की दुकान से बिना डॉक्टरी सलाह के दवा लेते समय इसका ध्यान रखें। 

रक्तसंचार है कमजोर
सामान्य तापमान पर भी हाथ व पैर का बहुत ठंडा रहना रक्त संचार में समस्या का संकेत हो सकता है, जिससे खून सही ढंग से हाथ व पैरों तक नहीं पहुंच पाता। ऐसा धमनियों में किसी तरह की ब्लॉकेज के कारण हो सकता है या फिर जब दिल खून को ठीक तरीके से पंप न कर पा रहा हो। अगर आप धूम्रपान करते हैं तो भी रक्तसंचार से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। रेनॉड्स बीमारी की वजह से भी ज्यादा ठंड लगती है। इस बीमारी में तापमान में जरा-सी गिरावट पर हाथ और पैर की रक्त वाहिनियां कुछ देर के लिए अपने-आप सिकुड़ जाती हैं। उनके रंग में भी अंतर दिखता है। 
लंबे समय तक हाथ-पैर ठंडे होने की परेशानी को अनदेखा न करें।

रक्तचाप कम होने पर भी हाथ और पैर ठंडे रहते हैं। शरीर में पानी व खून की कमी, पेट की अनियमितता व कुछ दवाओं का असर इसका कारण हो सकता है। 

विटामिन बी12 की कमी
विटामिन बी12 शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने के लिए महत्वपूर्ण है। हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने का काम विटामिन बी12 ही करता है। इसकी कमी होने पर पूरे शरीर में ऑक्सीजन की पूर्ति नहीं हो पाती। परिणामस्वरूप अधिक ठंड लगती रहती है। 

शरीर में विटामिन बी12 की कमी का मुख्य कारण संतुलित आहार की कमी है। आमतौर पर यह जानवरों से प्राप्त होने वाले खाद्य पदार्थों में अधिक होता है। इसकी कमी को दूर करने के लिए डाइट में मीट, मछली और दूध से बने प्रोडक्ट्स शामिल करें। एक टेस्ट के जरिए शरीर में इसकी कमी को जांचा जा सकता है। 

थाइरॉएड का असर 
जब थाइरॉएड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में थाइरॉएड  हार्मोन का स्राव नहीं करती तो शरीर का मेटाबॉलज्मि धीमा पड़ने लगता है, जिससे शरीर पर्याप्त मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न नहीं करता। थाइरॉएड हार्मोन का स्राव कम होने को हाइपोथाइरॉएडज्मि कहते हैं। बालों का तेजी से गिरना, रूखी त्वचा, तेजी से वजन बढ़ना और ज्यादा थकान इसके लक्षण हैं। 

तनाव और बेचैनी 
तनाव की अधिकता पूरे शरीर पर असर डालती है। हाथ और पैर भी इसके असर से बच नहीं पाते। कई बार हाथ-पैर बहुत ठंडे रहते हैं तो कई बार हाथों से अधिक पसीना आता है। लंबे समय तक नींद की कमी के कारण भी पूरा शरीर सामान्य तरीके से काम करना बंद कर देता है। विभन्नि अध्ययनों के मुताबिक नींद की कमी के कारण हमारे मस्तष्कि के उस हस्सिे की कार्यक्षमता कमजोर हो जाती है, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। अपनी नींद के साथ किसी भी तरह का समझौता न करें। सात से आठ घंटे की नींद अवश्य लें।

Source: http://www.livehindustan.com/news/tarakk...

हल्दी के प्रयोग से रहें निरोग

nutriworld - Tue, 02/05/2019 - 08:30

हमारे किचन में एक मसाले के रूप में व्यवहृत हल्दी  अपने भीतर सैंकडों  आरोग्यकारी गुण समाविष्ट किये हुए है | नीचे  पूरा वर्णन  दिया जा रहा है-- 
सौन्दर्यवर्धक

हल्दी केवल सब्जी या दाल को ही स्वादिष्ट नहीं बनाती, यह खाने वाले शरीर को भी सुन्दर बनाती है। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि व्यवसायी लोग, जो शरीर को सुन्दर बनाने की क्रीम बनाते हैं, उसमें हल्दी का प्रयोग करते हैं ताकि बिक्री अच्छी हो सके। लेकिन ये लोग हल्दी का सीधा प्रयोग नहीं करते, उसमें रंग और सुगंध का प्रयोग करते हैं। इसी कारण यह क्रीम इतनी असरदार नहीं होती, जितनी चने के आटे में हल्दी और सरसों का तेल मिलाकर बनी क्रीम जिसे ‘उबटन’ के नाम से जाना जाता है। मध्यकालीन युग में राजकुमारियां और रानियां इसी उबटन को लगाया करती थीं।
हल्दी में पौष्टिक तेल की भी मात्रा होती है जो दिखाई नहीं देती। यह हल्दी सूखी त्वचा को चिकनी और मुलायम बनाती है। इसमें तेल की मात्रा होने पर भी इसका तेल चेहरे अथवा शरीर पर दिखाई नहीं देता। इसका तेल त्वचा के अन्दर जाकर उसे प्राकृतिक रूप देता है।

कीटनाशक-

हल्दी का प्रयोग साफ, स्वच्छ तरीके से ही किया जाना चाहिए। क्योंकि यह कीटनाशक है और इसके प्रयोग से गलाव-सड़ाव नहीं होता इसलिए यह पवित्र है। पवित्र वस्तु का इस्तेमाल भी पूरी पवित्रता के साथ ही करना चाहिए। संस्कृत में हल्दी को कृमिघ्ना भी कहते हैं जिसका हिन्दी में अर्थ होता है कीटाणुनाशक। यदि शरीर के किसी भाग में पस हो जाए अथवा टी-बी. हो जाए तो हल्दी इन सभी रोगों के कीटाणुओं को नष्ट करने में समर्थ है।

रक्तशोधक

हल्दी की एक और विशेषता यह है कि यह रक्तशोधक है। यह रक्त के दोषों को मूत्र द्वारा अथवा दस्त द्वारा निकालकर दूर कर देती है। यह शरीर में चूने के पदार्थ के साथ मिलकर रक्त को शुद्ध लाल रंग का बनाती है। रक्त के रंग को लाल रंग का बनाने का प्रमाण यह है कि ‘‘यद्यपि हल्दी का रंग पीला होता है फिर भी पीलिया के रोगियों की चिकित्सा हकीम हल्दी द्वारा करते हैं।’’ इसलिए यह बाहर से पीले रंग की दिखाई देने वाली हल्दी अन्दर शरीर में जाकर रक्त को शुद्ध एवं लाल रंग का बनाती है। साथ ही हम जो खाना खाते हैं उसे हजम भी करती है। यूनानी चिकित्सकों का कहना है कि रक्त यदि बिगड़ जाए तो इसे शुद्ध करने के लिए हल्दी का प्रयोग करना चाहिए।

उबटन

विवाह जैसे मांगलिक अवसर पर महिलाएं विशेष रूप से हल्दी का उबटन तैयार करती हैं जो दुल्हन के तन-बदन को कंचन की तरह निखार देता है। यह उबटन त्वचा को और भी मोहक बनाता है और कंचन सी काया को कुन्दन की तरह चमका देता है। हल्दी के उबटन के बाद दुल्हन पर कैसा रूप चढ़ता है, यह हर गृहिणी जानती है।

 

हल्दी की प्रजातियां व उनके प्रयोग

रसोई में जिस हल्दी का प्रयोग किया जाता है, उसके अलावा भी इसकी कुछ अन्य विशिष्ट प्रजातियां हैं, जिनका औषधीय गुणों के कारण विभिन्न रोगों में प्रयोग किया जाता है। प्रस्तुत है उन्हीं की संक्षिप्त लेकिन सटीक जानकारी।

आमा हल्दी

आमा हल्दी का वानस्पतिक नाम क्यूरकुमा अमाडा है। इसमें कच्चे आम की सी गन्ध आती है। इसीलिए इसे आमा हल्दी या आम्रगन्धि हरिद्रा कहा जाता है। इस प्रकार की हल्दी भारत के प्रायः सभी प्रान्तों में विशेष रूप से बंगाल, कोंकण तथा तमिलनाडु में उत्पन्न होती है। इसकी गांठें बड़ी-बड़ी अदरक के समान, पीले रंग की तथा आम की सी गन्ध से युक्त होती हैं।

गुण—

आमा हल्दी शीतल, मधुर, पित्तशामक, आम की सी गन्ध वाली, पेट से वायु निकालने वाली, भोजन का पाचन कराने वाली, भूख बढ़ाने वाली एवं मल बांध कर लाने वाली होती है। सुगन्धित होने के कारण इसे चटनी आदि बनाने में उपयोग में लाते हैं। मिठाइयों आदि में भी आम की गन्ध लाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

दारु हल्दी

दारु हल्दी के वृक्ष जो हिमालय पर्वत पर तथा आसाम में पाए जाते हैं। जिनमें चार जातियों के वृक्ष मध्य भारत एवं दक्षिण भारत के नीलगिरी पर्वत पर पाए जाते हैं। इनका भूमिगत तना ही हल्दी होता है। बर्बेरिस अरिस्टेटा हल्दी का चिकित्सा में उपयोग किया जाता है। इस प्रकार की हल्दी पीले रंग की होती है, जिसमें हल्की-सी गंध आती है और स्वाद कड़ुवा होता है।
गुण—

दारु हल्दी उष्ण होती है। इसके गुण अन्य प्रकार की हल्दियों के गुणों के समान होते हैं। दारु हल्दी के सत्व को रसौत कहा जाता है।

त्वचा रोग

यह रोग अधिकतर खून की खराबी से उत्पन्न होते हैं। इसके बचाव के लिए स्वच्छ वातावरण में रहना चाहिए ! साथ ही खाद्य—पदार्थों में गरम मसालों, मिर्च-मसालों, खटाई, गुण, चीनी, शक्कर, मांस—मदिरा, धूम्रपान, तम्बाकू, विषम भोजन आदि से बचकर रहना चाहिए। पौष्टिक आहार नियमित व्यायाम, स्नान और स्वच्छ जल का सेवन और उचित उपचार इन रोगों को आपसे दूर भगाने में सहायक होते हैं।

चेहरे की झाइयां

चेहरे पर झाइयां पड़ जाने के अनेक कारण हैं। उम्र के साथ ही बाजारू क्रीम या लोशन चेहरे पर लगाते रहने से उस पर झाइयां पड़ जाती हैं या धब्बे हो जाते हैं। कारण यह है कि मुलायम त्वचा ऐसे लोशन से झुलस जाती है। उसे पुनः सुन्दर और आकर्षित बनाने के लिए प्रथम तो आवश्यक यह है कि लोशनों और क्रीमों का सेवन करना बन्द कर दिया जाए और हल्दी द्वारा तैयार किए गए उबटन का प्रयोग करना आरम्भ कर दें।

उपचार—

हल्दी का उबटन बनाने की विधि यह है कि दारु हल्दी दस ग्राम लेकर पीपल अथवा आक के दूध में डुबो दें और अच्छी तरह दूध को सोख लेने के बाद सायंकाल उसको घिसकर पेस्ट बना लें और किसी बर्तन में पेस्ट को रखकर ढक्कन बन्द कर दें तथा रात्रि को ओस में बाहर खुले में रख दें। अब उबटन पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। सुबह स्नान करने के आधा घण्टा पूर्व इस उबटन को चेहरे पर मलें और आधे घण्टे पश्चात् स्नान करें। एक सप्ताह तक नियमित इस उबटन का प्रयोग करके झाइयां मिट जाएंगी और त्वचा मुलायम होकर चेहरा आकर्षक हो जाएगा। बाद में सप्ताह में सिर्फ एक बार इस उबटन का सेवन करते रहें। किसी अन्य दवा का इस्तेमाल न करें।

गर्मी के दाने

जब तेज गर्मी पड़ती है और पसीना शरीर से निकलता है तो पसीने के साथ ही शरीर के अनेक खनिज भी बाहर निकल जाते हैं।
इन दिनों प्याज का सलाद बनाकर सैंधा नमक और काली मिर्च तथा नीबू डालकर खाना चाहिए। और इस प्रकार की व्यवस्था कीजिए कि पसीना शरीर पर ही सूख जाए, बहने न पाए। इसके लिए सिन्थेटिक्स अथवा सिल्क के कपड़ों को नहीं पहनना चाहिए, बल्कि सूती और मोटे कपड़े ही पहनने चाहिए जिससे कपड़े पसीना सोख लें।

उपचार—

एक किलो कच्ची हल्दी को पानी में डालकर उबाल लें। अच्छी तरह उबालकर पानी को आंच से उतार कर ठण्डा कर लें और छानकर किसी शीशे के ऐसे बर्तन में भरें जिसमें पहले से ही तीन सौ ग्राम शहद भरा हुआ हो। इस शहद युक्त पानी को दो सप्ताह तक रखा रहने दें। अब आपका ठण्डा पेय तैयार हो गया। इसमें चम्मच भर फालसे का जूस या अनार का रस मिला दें और इस शर्बत का सेवन गर्मी दूर करने और दानों को शरीर से हटाने के लिए सेवन करते रहें। शरीर पर गर्मियों में दाने नहीं निकलेंगे।
फोड़ा-फुंसी

शरीर पर छोटे-छोटे लाल दाने निकल आते हैं। कुछ समय बाद उनमें पीब पड़ जाती है और दर्द का अनुभव होता है।
खून की खराबी, दूषित वातावरण में रहन-सहन, दूषित जल व भोजन का प्रयोग। गरम मसाला व मांस-मदिरा, तम्बाकू, चाय—कॉफी, मीठी वस्तुओं का अत्यधिक सेवन।

उपचार

आधा किलो हल्दी पीसकर चार लीटर पानी में घोलकर उबालें और ठण्डा करके इसमें दो सौ ग्राम शहद मिला दें। इस मिश्रण को किसी शीशे के बर्तन में दो सप्ताह तक रखा रहने दें, अब इसको छानकर किसी साफ बोतल में भरकर रख दें। खाना खाने के बाद इस आसव को दस या पन्द्रह ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इस आसव को पीने से रक्त साफ हो जाता है।
•    तुरन्त आराम पाने के लिए हल्दी के तेल में कपड़ा भिगोकर फोड़े-फुंसी पर लगावें।

दाद का इलाज -

 

शरीर पर किसी भी अंग में एक ही स्थान पर खुजली होने और उसे खुजाते रहने से दाद बन जाता है और वह स्थान काला हो जाता है।

उपचार—

शरीर के जिस अंग में भी दाद हो उस धब्बे को अपने ही मूत्र से धोइए, यह बहुत असरदार और दाद के कीटाणुओं को फैलने से रोकने के लिए उपयोगी प्राथमिक चिकित्सा है।
•    शरीर के अन्दर इस रोग की जड़े नष्ट करने के लिए नई-ताजी हल्दी को पीस कर उसमें थोड़ा शहद मिलाकर शरीर के अन्दर के कीटाणुओं को नष्ट करने के लिए सेवन करें। इसी मिश्रण की छोटी-छोटी गोलियां बना लें और सुबह तथा शाम को उन्हें चूसें। नियम से इस चिकित्सा को करने से पन्द्रह दिन में ही दाद का निशान भी मिट जाएगा और स्वच्छ त्वचा आ जाएगी।

झाइयां
          जो लोग महंगी क्रीमों और तरह-तरह की सुगंधियों से मुखड़े को संवारने की कोशिश में रहते हैं, अधिकतर उन्हीं के चेहरे पर झाइयां देखने में आती हैं, क्योंकि सभी सुगन्धियों और क्रीमें तेजाबी (रासायनिक) प्रक्रिया से तैयार की जाती हैं। कुछ दिन उनसे चेहरों पर गौरापन भी आता है, मगर काले को गोरा करने के और गोरे को और निखार देने वाली क्रीमें त्वचा की ऊपरी परत झुलसा डालती हैं, बाद में खुरंट बन जाता है, बिल्कुल उसी तरह चेहरे पर झाइयां पैदा हो जाती हैं।

उपचार—

          अगर चेहरे  पर सच्चा और टिकाऊ निखार चाहते हैं तो हल्दी का उबटन ही सर्वोत्तम है जो राजघरानों और भिखारियों के झोपड़ों दोनों में सदा से ही इस्तेमाल होता रहा है। रूज और क्रीमों से पैदा हुई झाइयां दूर करने के लिए दस ग्राम पिसी हल्दी पीपल या बड़ के दूध से तर कर दें। आस-पास पीपल या बरगद न मिले तो आक का दूध ही टपका लें। शाम को यह उबटन तर करके ढंक दें और सोने से पहले झाइयों पर मल दें। अगर शाम को न कर सकें तो सुबह तैयार कर लें और नहाने से आधा घंटा पहले चेहरे पर मल लें। एक ही सप्ताह में झाइयां विलीन हो जाएंगी। उसके बाद हल्दी के उबटन से ही शरीर में निखार और सुकोमलता लाइए।

खुजली
         खुजली जिस किसी नर-नारी को पकड़ लेती है तो वह खारिश वाले कुत्ते की भांति खुजलाता ही रहता है, कुछ लोग इसके इलाज के बारे में लापरवाह हो जाते हैं, ऐसा तो उन्हें भूलकर भी सोचना नहीं चाहिए।

उपचार—

            हल्दी एक चम्मच, चीनी दो चम्मच, गर्म दूध एक कप, देशी घी चौथाई कप। इन सब चीजों को कूटपीस कर छान कर पी लें, कुछ ही दिनों में आराम आ जाएगा।
•    सरसों का तेल 250 ग्राम, हल्दी 100 ग्राम, पानी 250 ग्राम। इन सब चीजों को लोहे की कड़ाही में डालकर मिला लें। फिर गर्म करने के लिए हल्की आंच पर पकाएं, जब यह उबलने लगे तो नीचे उतारकर ठंडा करके छान लें, छान कर उसे किसी बोतल में भर लें। इसे हर रोज शरीर पर मलने से खुजली दूर हो जाती है।
•    त्वचा की खुश्की और छूत रोग का प्रभाव मिटाने के लिए आप हल्दी-तेल ही मलिए, लेकिन खून की खराबी दूर करने के लिए हल्दी-वटी खाइए। हल्दी पीसकर शहद मिलाकर और बेर (जंगली बेर) के बराबर गोलियां बना लीजिए। हल्दी और शहद मिलकर रक्त की बूंद-बूंद से सारे जहर निकाल देते हैं। एक गोली हल्दी के गुणों को याद करके और दूसरी गोली शहद के गुणों को याद करके सुबह चूस जाइए, इसी तरह दो गोलियां शाम या रात को सेवन कीजिए। अन्दर से रक्त का शोधन हो जाएगा और बाहर की त्वचा में न खाज उठेगी, न खुजली रहेगी।
•    महिलाओं को चाहिए कि सप्ताह में एक नहीं तो महीने में एक बार ही सही, हल्दी और बेसन को सरसों के तेल में गूंधकर उबटन बना लें और सारे बदन पर इसे अच्छी तरह मला करें। इसका प्रभाव महीने भर तक बना रहता है और खाज-खुजली से शरीर बचा रहता है।

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